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जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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VedSiddhantNirnay.pdf
31.5 MB
पुस्तक:- वेदसिद्धांतनिर्णय।

प्रथम संस्करण

पृष्ठ:- ७९

विषय:- हृदय में आत्मा का स्थान, यज्ञ, अभाव पदार्थ।

सम्पादक:- केशरीनन्दन

प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।
Did Rishi Yajnavalkya ate beef...pdf
1.6 MB
कुछ मूर्ख लोगों ने महर्षी याज्ञवल्क्य जी पर यह आरोप लगाया था की शतपथ ब्राह्मण में लिखा ही की महर्षी जी गौ मांस खाते थे।

इन गधों के इस निराधार आरोप का खण्डन पर हमारा यह PDF है इसमें हमने आचार्य सायण और अन्य व्याकरण आदि के मत से यह सिद्ध किया है की वहां गौ मांस का कोई वर्णन है ही नहीं।
Guru parampara exposed1.mp4
234 MB
नारी विरोधी परंपरा का जीता जागता सबूत आया सामने ! (vdo में देखे ) 🙏
vedsidhantnirnay 2_.pdf
30.8 MB
पुस्तक:- वेदसिद्धांतनिर्णय।

द्वीतीय संस्करण

पृष्ठ:- १४३

विषय:- सांख्येश्वरनिर्णय, देवतानिर्णय, मोक्षनिर्णय तथा शिवशंकर शर्मा जी रचित बृहदारण्यकोपनिषद् भाष्य।

सम्पादक:- केशरीनन्दन

प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।
Antipode pe Nityanand mishra kutai.mp4
26.2 MB
Antipode विषय पे नित्यानंद मिश्र ने किया presentism fallacy ..... !!! 😇
वैदिकन्यायप्रबोधः.pdf
1.6 MB
वैदिक न्याय प्रबोध ( समाजी निराश book खंडन )

लेखक :- सूरज आर्य
सम्पादक :- संदीपन रॉय

131 पेज HD हिन्दीd
ParaPuja.pdf
20.5 MB
पुस्तक:- परापूजा

लेखक:- आदि शंकराचार्य

पृष्ठ:- २६

विषय:- आदि शंकराचार्य द्वारा मूर्तिपूजा का खण्डन।

प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।
Vedic Philosophy Refutation On The Problem of Evil-5 (1).pdf
763.3 KB
Vedic Philosophy Refutation On The Problem of Evil.pdf
जीव_का_परीमाण_by_स्वामी_आत्मानन्द.pdf
6.2 MB
जीव का परिणाम ( जीवआत्मा /आत्मा अणु या विभु )

स्वामी आत्मानन्द जी

43 पेज हिन्दी पढ़ने योग्य पन्ने

शास्त्रो में ये प्रमाण भी है कि आत्मा/जीवआत्मा विभु है... तो इस लेख में उनका भी समाधान किया गया है ✍
क्या_वेदों_में_मांस_भक्षण_का_विधान_है_शिवपूजनसिंह_कुशवाहा.pdf
19.9 MB
क्या वेदों में मांस भक्षण का विधान है?
( सुरेन्द्र कुमार शर्मा " अज्ञात " खंडन )

शिवपूजनसिंह कुशवाहा

76 पेज HD हिन्दी

रामायण, महाभारत, वेद, ब्राह्मण ग्रंथ, मनुस्मृति आदि के समाधान
vedsidhant nirnay ४.pdf
9.7 MB
पुस्तक:- वेदसिद्धांतनिर्णय।

चतुर्थ संस्करण

लेखक:- केशरीनन्दन

पृष्ठ:- ५५

विषय:- वेदों की उत्पत्ति तथा स्त्री उपनयन पर महर्षि हारीत के वचन की समीक्षा।

सम्पादक:- केशरीनन्दन

प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।

~लेख पढ़ने के उपरान्त सभी अपना रिव्यू आदि अवश्य दें।
वामन_अवतार_और_पौराणिक_विद्वत्ता_का_एक_और_‘निराश’_अध्याय_1.pdf
887.5 KB
वामन अवतार को वेद में सिद्ध करने के लिए मेरे पूर्व लेख का खण्डन करने की नादान कोशिश की गई, परन्तु प्रमाणों की कसौटी पर वह कोशिश भी निष्फल ही सिद्ध हुई। अब उसी तथाकथित- खण्डन में प्रस्तुत तर्कों और प्रमाणों को एक-एक करके परखा गया है—देखना यह है कि वास्तव में वामन अवतार वेद से सिद्ध हुआ है, या केवल शब्दों ने तीन पग चलकर निष्कर्ष तक पहुँचने का काम किया है।

— कार्तिक अय्यर
क्या_अहीर_गुजर_जाट_विदेशी_है.pdf
17 MB
पंडित शिवपूजनसिंह कुशवाहा - इस पुस्तक में ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर यह सिद्ध किया गया है कि अहीर, गूजर (गुर्जर) और जाट विदेशी नहीं हैं, बल्कि वे आर्यों की संतान तथा चन्द्रवंशी/सूर्यवंशी शुद्ध क्षत्रिय हैं।

- कार्तिक Iyar
उत्तर_कांडियों_का_‘मृत्यु_कांड_1.pdf
501.4 KB
Share उत्तर कांडियों का ‘मृत्यु-कांड (1).pdf
मैत्रावरुण_सूक्त_पर_पौराणिक_सड़ांध_का_आर्ष_समाधान_.pdf
605.9 KB
शचीन्द्र शर्मा जैसे लतखोर पौराणिक द्वारा वेदों एवं आर्यसमाज पर मैत्रावरुण तथा उर्वशी से सम्बन्धित जो अश्लील व कल्पित अर्थ थोपा गया था, उसका इस आलेख में सप्रमाण व आर्ष-पद्धति से समुचित उत्तर दिया गया है; यह समस्त सत्य-पिपासु पाठकों की सेवा में सादर समर्पित है।
ved sidhhant nirany5.pdf
9.8 MB
पुस्तक:- वेदसिद्धांतनिर्णय।

पञ्चम् संस्करण

पृष्ठ:- ४८

विषय:- १- ऋषिनिर्णय, २- सांख्य के दस मौलिक अर्थ, ३- वैदिक पर्वतों से मजहबी कीलों तक, ४- बहुपत्नीवादनिर्णय, ५- जाम्बवतीविजय खण्डनम्।

सम्पादक:- केशरीनन्दन

प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।

~लेख पढ़ने के उपरान्त सभी अपना रिव्यू आदि अवश्य दें।
मैत्रावरुण_सूक्त_पर_पौराणिक_सड़ांध_का_आर्ष_समाधान_.pdf
605.9 KB
शचीन्द्र शर्मा जैसे लतखोर पौराणिक द्वारा वेदों एवं आर्यसमाज पर मैत्रावरुण तथा उर्वशी से सम्बन्धित जो अश्लील व कल्पित अर्थ थोपा गया था, उसका इस आलेख में सप्रमाण व आर्ष-पद्धति से समुचित उत्तर दिया गया है;

यह समस्त सत्य-पिपासु पाठकों की सेवा में सादर समर्पित है।
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