Forwarded from Saurabh Chaubey
*अमृतबाजार* पत्रिका ने ही धननिकासी को सबसे ज्यादा छापा एवं समझाया था। सरकार की विदेश नीति पर भी प्रेस में पर्याप्त चर्चा होती थी। बर्मा युद को यह कहकर ग्लैडस्टन ने न्यायसंगत ठहराया था कि बर्मा में जो भारतीय थे उनकी रक्षा के लिए यह युद्ध लड़ा गया था। भारतीय प्रेस ने यह जानना चाहा कि वे कौन से 'भाग्यशाली भारतीय थे जिनके लिए यह युद्ध लड़ा गया ? प्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया था कि युद्ध इंग्लैंड के साम्राज्यवादी हितों की रक्षा के लिए लड़ा गया था न कि भारतीयों की सुरक्षा के लिए। प्रेस का क्रांतिकारी विचारों को फैलाने तथा जनमत बनाने में भी महत्वूर्ण योगदान रहा है। *युगान्तर अखबार ने अंग्रेजी दमन को रोकने के लिए भारत की 30 करोड़ जनता को अपने 60 करोड़ हाथ उठाने को कहा था।* गणेश शंकर विद्यर्थीं को क्रांतिकारी लेखनी के कारण ही ब्रिटिश सरकार ने उनको पांच बार कारावास एवं अर्थदंड की सजा दी थी।
इस प्रकार भारतीय प्रेस ने राष्ट्रयता के प्रचार-प्रसार में अभूतपूर्व योगदान दिया। वह जनमत का प्रबल उत्प्रेरक एवं साम्राज्य विरोधी भावना का मुखर वाहक बन गया। कानून के संकुचित दायरे और सरकारी दमन के बावजूद इसने अभिव्यक्ति के नए- नए मार्ग ढूंढ़कर लोगों में राजनीतिक चेतना फैलाई और अन्याय से लड़ने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
आगे फिर कभी..जय जय🙏🙏
इस प्रकार भारतीय प्रेस ने राष्ट्रयता के प्रचार-प्रसार में अभूतपूर्व योगदान दिया। वह जनमत का प्रबल उत्प्रेरक एवं साम्राज्य विरोधी भावना का मुखर वाहक बन गया। कानून के संकुचित दायरे और सरकारी दमन के बावजूद इसने अभिव्यक्ति के नए- नए मार्ग ढूंढ़कर लोगों में राजनीतिक चेतना फैलाई और अन्याय से लड़ने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📌भारत शासन अधिनियम, 1935: संघीय व्यवस्था की विफलता एवं ब्रिटिश नियंत्रण की निरंतरता—
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
“Some books tell us what happened; others make us pause and think about the stories, struggles, and choices that shaped our past.” 📚
📌विभाजन की असली कहानी — नरेंद्र सिंह सरिला की यह पुस्तक भारत के विभाजन के पीछे की राजनीतिक परिस्थितियों, ब्रिटिश नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की पड़ताल करती है। यह समझने में मदद करती है कि 1947 का विभाजन केवल भारत की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों की भी भूमिका थी।
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📌विभाजन की असली कहानी — नरेंद्र सिंह सरिला की यह पुस्तक भारत के विभाजन के पीछे की राजनीतिक परिस्थितियों, ब्रिटिश नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की पड़ताल करती है। यह समझने में मदद करती है कि 1947 का विभाजन केवल भारत की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों की भी भूमिका थी।
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Forwarded from INDIAN HISTORY paid Batch (Owner)
Scholar History Academy - Modern Indian History Notes.pdf
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आधुनिक भारतीय इतिहास के स्त्रोत
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