Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
अंग्रेज़ रणजीत सिंह की सैन्य ताक़त के मुरीद
अपनी किताब 'द सिख्स एंड द सिख वॉर' की प्रस्तावना में सर चार्ल्स गफ़ और आर्थर इनेस ने लिखा था, "भारत की ज़मीन पर वाॉडेवॉश की लड़ाई में फ़्रांसीसियों के बाद सिखों से ज़्यादा कड़े प्रतिद्वंदियों का सामना हमारा नहीं हुआ. 42 साल के रणजीत सिंह के शासन के दौरान उनकी सेना ने बुलंदियों की कई ऊँचाइयों को छूते हुए कई जीत दर्ज की."
BBC NEWS
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
जस्टिस सर एलिजा इंपी :जस्टिस पुलबंदी
अंग्रेज़ी शासन में भ्रष्टाचार का आलम ये था कि महाराजा नंदकुमार ने 11 मार्च, 1775 को गवर्निंग काउंसिल को पत्र लिखकर वॉरेन हैस्टिंग्स पर कुछ नियुक्तियाँ करने के लिए उनसे और मीर जाफ़र की विधवा से 45,000 पाउंड रिश्वत लेने का आरोप लगाया. 19 अप्रैल को सरकार ने नंदकुमार पर षड्यंत्र करने का आरोप लगाया और 6 मई को उन्हें दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया.
हेनरी बस्टीड अपनी किताब 'इकोज़ फ्रॉम ओल्ड कैलकटा: रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ द डेज़ ऑफ़ वॉरेन हैस्टिंग्स' में लिखते हैं, "महाराज नंदकुमार को अंग्रेज़ जूरी ने दोषी पाया. जज एलिजा इंपी ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई. अगस्त, 1776 को जब नंदकुमार को फ़ोर्ट विलियम के पास सुबह 8 बजे फाँसी दी गई, तो पूरा कलकत्ता वहाँ इकट्ठा होकर शोक में रोने लगा. हैस्टिंग्स ने इसका बदला चुकाते हुए इंपी के एक साथी को एक पुल की मरम्मत करने के लिए 4 लाख 20 हज़ार रुपए का ठेका दिया, जबकि पिछले साल इसी काम के लिए 25,000 रुपए का ठेका दिया गया था. तभी से कलकत्ता वासियों ने जस्टिस सर एलिजा इंपी को 'जस्टिस पुलबंदी' कहना शुरू कर दिया."
BBC NEWS
अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार 2026 की घोषणा हुई✍️
■ विजेता- रॉबर्ट ई. हॉल व माइकल वुडफोर्ड
■ कार्य- यह पुरस्कार "मैक्रोइकॉनॉमिक्स स्थिरीकरण की माइक्रोकॉनमिक नींव" के लिए
■ विजेता- रॉबर्ट ई. हॉल व माइकल वुडफोर्ड
■ कार्य- यह पुरस्कार "मैक्रोइकॉनॉमिक्स स्थिरीकरण की माइक्रोकॉनमिक नींव" के लिए
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
कराची अधिवेशन 29–31 मार्च 1931–
अध्यक्ष: सरदार पटेल
गांधी-इरविन समझौता: 5 मार्च 1931 को हुए समझौते को अधिवेशन में स्वीकृति दी गई।
मौलिक अधिकारों: भाषण एवं प्रेस की स्वतंत्रता धार्मिक स्वतंत्रता कानून के समक्ष समानता और अल्पसंख्यकों की संस्कृति भाषा व लिपि की सुरक्षा पर बल दिया गया
राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम: निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा, श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी श्रमिक संघ बनाने का अधिकार तथा प्रमुख उद्योगों और खनिज संसाधनों पर राज्य के नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल थे
भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु: कांग्रेस ने उनके साहस एवं बलिदान की प्रशंसा की और उनकी फाँसी की निंदा की साथ ही राजनीतिक हिंसा से असहमति व्यक्त की।
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन: महात्मा गांधी को कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया गया।
कांग्रेस के अधिवेशन पढ़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आज़ादी के बाद मौलिक अधिकार शिक्षा आर्थिक नीति और सामाजिक न्याय जैसे जिन मुद्दों को हम पढ़ते हैं उनमें से कई पर पहले ही चर्चा हो चुकी थी इन्हें पढ़ने से समझ आता है कि कोई मुद्दा कब और किसने उठाया और आज़ादी के बाद उसका क्या रूप बना।
https://t.me/historyfact00
अध्यक्ष: सरदार पटेल
गांधी-इरविन समझौता: 5 मार्च 1931 को हुए समझौते को अधिवेशन में स्वीकृति दी गई।
मौलिक अधिकारों: भाषण एवं प्रेस की स्वतंत्रता धार्मिक स्वतंत्रता कानून के समक्ष समानता और अल्पसंख्यकों की संस्कृति भाषा व लिपि की सुरक्षा पर बल दिया गया
राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम: निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा, श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी श्रमिक संघ बनाने का अधिकार तथा प्रमुख उद्योगों और खनिज संसाधनों पर राज्य के नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल थे
भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु: कांग्रेस ने उनके साहस एवं बलिदान की प्रशंसा की और उनकी फाँसी की निंदा की साथ ही राजनीतिक हिंसा से असहमति व्यक्त की।
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन: महात्मा गांधी को कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया गया।
कांग्रेस के अधिवेशन पढ़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आज़ादी के बाद मौलिक अधिकार शिक्षा आर्थिक नीति और सामाजिक न्याय जैसे जिन मुद्दों को हम पढ़ते हैं उनमें से कई पर पहले ही चर्चा हो चुकी थी इन्हें पढ़ने से समझ आता है कि कोई मुद्दा कब और किसने उठाया और आज़ादी के बाद उसका क्या रूप बना।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
फैक्ट्स को पढ़ना भी होता है, फॉरवर्ड करने से बस फोन में डाटा ही बढ़ता है और कुछ नहीं 😅
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ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
फैक्ट्स को पढ़ना भी होता है, फॉरवर्ड करने से बस फोन में डाटा ही बढ़ता है और कुछ नहीं 😅
कुछ लोग तो पीडीएफ डाउनलोड कर ओपन करके भी पढ़ते नहीं हैं और pdf मांगते रहते हैं😅😢
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
📚 ALL INDIA TRADE UNION CONGRESS (AITUC)
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स्थापना — 31 अक्टूबर 1920, बंबई
AITUC (All India Trade Union Congress) भारत का पहला अखिल-भारतीय स्तर का प्रमुख ट्रेड यूनियन महासंघ था। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई।
🔹 इसके प्रथम अधिवेशन में 64 ट्रेड यूनियनों के 101 प्रतिनिधि शामिल हुए।
🔹 इन प्रतिनिधियों ने लगभग 1,40,854 मजदूरों का प्रतिनिधित्व किया।
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👤 प्रथम अध्यक्ष — लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय AITUC के प्रथम अध्यक्ष चुने गए।
मजदूर वर्ग की परिस्थितियों और श्रमिक प्रश्नों में उनकी रुचि के कारण उन्हें इस संगठन का नेतृत्व सौंपा गया।
👤 प्रथम महासचिव — दीवान चमन लाल
दीवान चमन लाल को कई मानक इतिहास-स्रोतों में AITUC का प्रथम महासचिव बताया गया है।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: AITUC के कुछ पुराने अभिलेखों में प्रथम अधिवेशन के संदर्भ में V. M. Pawar का नाम General Secretary के रूप में भी मिलता है। इसलिए प्रथम महासचिव के नाम को लेकर स्रोतों में असंगति दिखाई देती है।
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स्थापना — 31 अक्टूबर 1920, बंबई
AITUC (All India Trade Union Congress) भारत का पहला अखिल-भारतीय स्तर का प्रमुख ट्रेड यूनियन महासंघ था। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई।
🔹 इसके प्रथम अधिवेशन में 64 ट्रेड यूनियनों के 101 प्रतिनिधि शामिल हुए।
🔹 इन प्रतिनिधियों ने लगभग 1,40,854 मजदूरों का प्रतिनिधित्व किया।
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👤 प्रथम अध्यक्ष — लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय AITUC के प्रथम अध्यक्ष चुने गए।
मजदूर वर्ग की परिस्थितियों और श्रमिक प्रश्नों में उनकी रुचि के कारण उन्हें इस संगठन का नेतृत्व सौंपा गया।
👤 प्रथम महासचिव — दीवान चमन लाल
दीवान चमन लाल को कई मानक इतिहास-स्रोतों में AITUC का प्रथम महासचिव बताया गया है।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: AITUC के कुछ पुराने अभिलेखों में प्रथम अधिवेशन के संदर्भ में V. M. Pawar का नाम General Secretary के रूप में भी मिलता है। इसलिए प्रथम महासचिव के नाम को लेकर स्रोतों में असंगति दिखाई देती है।
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