Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
कांग्रेस और वंदे मातरम् –
1896 — कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन
• कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।
• इसे रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गाया था।
• उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष रहिमतुल्ला एम. सयानी थे।
1905 — बनारस कांग्रेस अधिवेशन
• बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के दौर में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका था।
• बनारस अधिवेशन में इसे अखिल भारतीय अवसरों पर अपनाने की बात सामने आई।
1906 — कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन
• कांग्रेस अधिवेशन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम्’ के गायन से शुरू हुई।
• इसी दौर में यह गीत स्वदेशी और बंगाल विभाजन-विरोधी आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बन गया।
1937 — कांग्रेस कार्यसमिति, कलकत्ता
• ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरों को लेकर चर्चा हुई।
• कुछ लोगों ने इसके कुछ हिस्सों में धार्मिक संदर्भों पर आपत्ति जताई।
• इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय सभाओं में गाने की सिफारिश की।
1947 — संविधान सभा
• स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर संविधान सभा की विशेष बैठक में सुचेता कृपलानी ने ‘वंदे मातरम्’ गाया।
https://t.me/historyfact00
1896 — कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन
• कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।
• इसे रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गाया था।
• उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष रहिमतुल्ला एम. सयानी थे।
1905 — बनारस कांग्रेस अधिवेशन
• बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के दौर में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका था।
• बनारस अधिवेशन में इसे अखिल भारतीय अवसरों पर अपनाने की बात सामने आई।
1906 — कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन
• कांग्रेस अधिवेशन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम्’ के गायन से शुरू हुई।
• इसी दौर में यह गीत स्वदेशी और बंगाल विभाजन-विरोधी आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बन गया।
1937 — कांग्रेस कार्यसमिति, कलकत्ता
• ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरों को लेकर चर्चा हुई।
• कुछ लोगों ने इसके कुछ हिस्सों में धार्मिक संदर्भों पर आपत्ति जताई।
• इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय सभाओं में गाने की सिफारिश की।
1947 — संविधान सभा
• स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर संविधान सभा की विशेष बैठक में सुचेता कृपलानी ने ‘वंदे मातरम्’ गाया।
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No Document No History
असिस्टेंट_प्रोफेसर_सामान्य_अध्ययन_Study_Material_2026.pdf
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Forwarded from History uncovered 😇 (Dr. jay chavda)
स्थल - उत्खननकर्ता
समनापुर- वी.एन. मिश्रा
बालू- यू.वी. सिंह
नेवासा- एच.डी. सांकलिया
वालकी - एम. के. धवलिकर
बाघोर- जी.आर. शर्मा और जे.डी. क्लार्क
(ब्रह्मगिरी; अरिकामेड- मार्टिमर ह्वीलर
नरहन- पुरुषोत्तम सिंह
स्रोत- प्राचीन भारत का इतिहास - सौरभ चौबे
समनापुर- वी.एन. मिश्रा
बालू- यू.वी. सिंह
नेवासा- एच.डी. सांकलिया
वालकी - एम. के. धवलिकर
बाघोर- जी.आर. शर्मा और जे.डी. क्लार्क
(ब्रह्मगिरी; अरिकामेड- मार्टिमर ह्वीलर
नरहन- पुरुषोत्तम सिंह
स्रोत- प्राचीन भारत का इतिहास - सौरभ चौबे
Forwarded from History uncovered 😇 (Dr. jay chavda)
5 दिसम्बर, 1982 ई. में भूविज्ञान सर्वेक्षक अरुण सोनकिया ने नर्मदा घाटी के हथनौरा से आद्य या प्राचीनतम होमोसेपियन्स (होमोइरेक्टस) की खोपड़ी प्राप्त की जिसे होमो इरेक्टस नर्मदेनसिस की संज्ञा दी गयी। यह भारत में प्राप्त प्राचीनतम मानव जीवाश्म है। यह अवशेष किसी 30 वर्ष की युवती का है जिसकी मस्तिष्क क्षमता 1155-1421 C.C. (Cubic Centimeter) के बीच थी।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
1997 ई. में ए.आर. सांख्यन ने हथनोरा से ही इसी हॉमिनिड युवती के कंधे की एक हड्डी' प्राप्त की थी।
अभी हाल ही (अक्टूबर 2001 ई.) में केरल विश्वविद्यालय के पी. राजेन्द्रन ने विल्लुपुरम जिले (तमिलनाडु) के ओदै (odai) से 'मानव शिशु कपाल' (baby skull) की प्राप्ति की है।
स्रोत - प्राचीन भारत का इतिहास- सौरभ चौबे
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
1997 ई. में ए.आर. सांख्यन ने हथनोरा से ही इसी हॉमिनिड युवती के कंधे की एक हड्डी' प्राप्त की थी।
अभी हाल ही (अक्टूबर 2001 ई.) में केरल विश्वविद्यालय के पी. राजेन्द्रन ने विल्लुपुरम जिले (तमिलनाडु) के ओदै (odai) से 'मानव शिशु कपाल' (baby skull) की प्राप्ति की है।
स्रोत - प्राचीन भारत का इतिहास- सौरभ चौबे
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
पंडित मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में कांग्रेस के अधिवेशन–
1909 लाहौर अधिवेशन–अध्यक्ष पंडित मदन मोहन मालवीय
प्रमुख मुद्दे एवं प्रस्ताव:
मॉर्ले-मिंटो सुधारों तथा मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था से संबंधित मुद्दे उठाए गए।
संयुक्त प्रांत, पंजाब, बंगाल, असम एवं बर्मा में कार्यकारी परिषदों के गठन की माँग की गई।
बढ़ते सैन्य व्यय पर आपत्ति जताई गई।
पंजाब, मध्य प्रांत एवं बरार की संवैधानिक व्यवस्थाओं से संबंधित मुद्दे उठाए गए।
1918 दिल्ली अधिवेशन–अध्यक्ष: पंडित मदन मोहन मालवीय
• प्रमुख मुद्दे एवं प्रस्ताव:
दमनकारी कानूनों को समाप्त करने की माँग की गई।
भारत में आत्मनिर्णय के सिद्धांत को लागू करने की माँग की गई।
रोलेट समिति की सिफारिशों की निंदा की गई।
अली बंधुओं सहित राजनीतिक बंदियों की रिहाई की माँग की गई।
पेरिस शांति सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किए जाने की माँग की गई।
युद्ध के आर्थिक बोझ और भारत पर डाले गए व्यय के संबंध में आपत्ति जताई गई।
अधिवेशन में किसान प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही तथा हिंदुस्तानी भाषा में भी कार्यवाही हुई।
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1909 लाहौर अधिवेशन–अध्यक्ष पंडित मदन मोहन मालवीय
प्रमुख मुद्दे एवं प्रस्ताव:
मॉर्ले-मिंटो सुधारों तथा मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था से संबंधित मुद्दे उठाए गए।
संयुक्त प्रांत, पंजाब, बंगाल, असम एवं बर्मा में कार्यकारी परिषदों के गठन की माँग की गई।
बढ़ते सैन्य व्यय पर आपत्ति जताई गई।
पंजाब, मध्य प्रांत एवं बरार की संवैधानिक व्यवस्थाओं से संबंधित मुद्दे उठाए गए।
1918 दिल्ली अधिवेशन–अध्यक्ष: पंडित मदन मोहन मालवीय
• प्रमुख मुद्दे एवं प्रस्ताव:
दमनकारी कानूनों को समाप्त करने की माँग की गई।
भारत में आत्मनिर्णय के सिद्धांत को लागू करने की माँग की गई।
रोलेट समिति की सिफारिशों की निंदा की गई।
अली बंधुओं सहित राजनीतिक बंदियों की रिहाई की माँग की गई।
पेरिस शांति सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किए जाने की माँग की गई।
युद्ध के आर्थिक बोझ और भारत पर डाले गए व्यय के संबंध में आपत्ति जताई गई।
अधिवेशन में किसान प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही तथा हिंदुस्तानी भाषा में भी कार्यवाही हुई।
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किसी छात्र ने पूछा था..
*तत्वबोधिनी सभा की स्थापना 1839 में* हुई थी। वहीं *तत्वबोधिनी पत्रिका (बांग्ला मासिक) की स्थापना 1843 में हुई थी।*
💐 💐
विशेष आभार - आदरणीय प्रो.सौरभ चौबे सर जी...💐 ❤️
*तत्वबोधिनी सभा की स्थापना 1839 में* हुई थी। वहीं *तत्वबोधिनी पत्रिका (बांग्ला मासिक) की स्थापना 1843 में हुई थी।*
विशेष आभार - आदरणीय प्रो.सौरभ चौबे सर जी...
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
मैंने रवि कुलरिया जी की तीनों पुस्तकों का अध्ययन किया है और इनके अध्ययन से मुझे लगा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले इतिहास के विद्यार्थियों के लिए ये पुस्तकें काफी उपयोगी हैं।
🔹 मध्यकालीन भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण तथ्यों का व्यवस्थित संकलन
🔹 महत्वपूर्ण घटनाओं, शासकों, वंशों, प्रशासन, समाज, संस्कृति एवं कला से जुड़े प्रश्नों पर विशेष ध्यान
🔹 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के साथ व्याख्या, जिससे केवल उत्तर याद करने के बजाय विषय को समझने में मदद मिलती है।
🔹 प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले फैक्ट-बेस्ड प्रश्नों के अभ्यास के लिए उपयोगी।
🔹 NET-JRF, SET, Assistant Professor, PGT, TGT, GIC, RPSC, UPSC एवं State PCS जैसी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक अध्ययन-सामग्री।
🔹 बार-बार Revision और Quick Revision के लिए उपयोगी।
🔹 मध्यकालीन इतिहास के कठिन तथ्यों को परीक्षा-केंद्रित तरीके से दोहराने में मददगार।
अगर आप इतिहास को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि परीक्षा के दृष्टिकोण से पढ़ना और बार-बार रिवाइज करना चाहते हैं, तो ऐसी वस्तुनिष्ठ एवं व्याख्यात्मक पुस्तक आपकी तैयारी में उपयोगी हो सकती है।
मैंने इनकी तीनों किताबें पढ़ी हैं, इसलिए यह पोस्ट केवल किसी पुस्तक का सामान्य प्रचार नहीं, बल्कि अपने अध्ययन-अनुभव के आधार पर साझा कर रहा हूँ।
2nd Edition
[
[
(आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर जी
No Document No History
इतिहास वही, जो दस्तावेज़ों के साथ पढ़ा जाए।
https://t.me/Ramsing2023
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
प्रिय दोस्तों,
किताब ऑर्डर करने के लिए निचे लिंक दी है...🪴 ❤️ ❤️ 📚
आप सभी ऑनलाइन ऑर्डर कर लो,
https://www.mittalbookdepot.in/product/33220874/History-360-Madhayakalin-Medival-Bharat-Vastunisth-2nd-edition-By-Ravi-ji-kuladia
किताब ऑर्डर करने के लिए निचे लिंक दी है...
आप सभी ऑनलाइन ऑर्डर कर लो,
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत)
Assistant Professor HISTORY Solved Papers.pdf
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No Document No History
Assistant Professor HISTORY Solved Papers.pdf
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Forwarded from Narvada Dubey
निम्नलिखित में से किसको मुक्त प्रगति शिक्षा पर आधारित 'मिरम्बका स्कूल विचारधारा' का प्रतिपादक कहा जा सकता है ?
/ Who among the following can be said to be the exponent of 'Mirambaka School Ideology' based on free progress education?"
श्री अरविंदो/Aurobindo
/ Who among the following can be said to be the exponent of 'Mirambaka School Ideology' based on free progress education?"
श्री अरविंदो/Aurobindo