Forwarded from INDIAN HISTORY paid Batch (Owner)
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मराठा क्लास नोट्स
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No Document No History
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बृहदारण्यक उपनिष मुख्य कथानक / संवाद :
Up asistent profesar ancient history
एक प्रश्न यहां से फिक्स है
एक नजर देख लेना सभी लोग
प्राचीन भारत के आधुनिक इतिहासकार
*1. अश्वमेध का रूपक*
प्रजापति के शरीर को ही अश्वमेध घोड़े के रूप में बताया गया है।
*2. सृष्टि की कथा*
शुरुआत में कुछ नहीं था, केवल आत्मा थी। उसने "अहम् ब्रह्मास्मि" कहा और उसी से सारी सृष्टि बनी।
*3. देव, मनुष्य, असुर को प्रजापति का उपदेश - द द द*
प्रजापति ने तीनों को 'द' अक्षर से उपदेश दिया -
- देवताओं को - *दाम्यत* (इन्द्रियों का दमन करो)
- मनुष्यों को - *दत्त* (दान करो)
- असुरों को - *दयध्वम्* (दया करो)
*4. मधु-विद्या की कथा*
*5. याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद - सबसे प्रसिद्ध*
-
*6. जनक का ब्रह्मयज्ञ और याज्ञवल्क्य-गार्गी शास्त्रार्थ*
*7. गार्ग्य बालाकि और अजातशत्रु का संवाद*
*8. श्वेतकेतु और प्रवाहण जैवलि - पंचाग्नि विद्या*
*9. उद्दालक और याज्ञवल्क्य का संवाद -
*10. याज्ञवल्क्य-जनक संवाद - ज्योति ब्राह्मण*
Up asistent profesar ancient history
एक प्रश्न यहां से फिक्स है
एक नजर देख लेना सभी लोग
प्राचीन भारत के आधुनिक इतिहासकार
*1. अश्वमेध का रूपक*
प्रजापति के शरीर को ही अश्वमेध घोड़े के रूप में बताया गया है।
*2. सृष्टि की कथा*
शुरुआत में कुछ नहीं था, केवल आत्मा थी। उसने "अहम् ब्रह्मास्मि" कहा और उसी से सारी सृष्टि बनी।
*3. देव, मनुष्य, असुर को प्रजापति का उपदेश - द द द*
प्रजापति ने तीनों को 'द' अक्षर से उपदेश दिया -
- देवताओं को - *दाम्यत* (इन्द्रियों का दमन करो)
- मनुष्यों को - *दत्त* (दान करो)
- असुरों को - *दयध्वम्* (दया करो)
*4. मधु-विद्या की कथा*
*5. याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद - सबसे प्रसिद्ध*
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*6. जनक का ब्रह्मयज्ञ और याज्ञवल्क्य-गार्गी शास्त्रार्थ*
*7. गार्ग्य बालाकि और अजातशत्रु का संवाद*
*8. श्वेतकेतु और प्रवाहण जैवलि - पंचाग्नि विद्या*
*9. उद्दालक और याज्ञवल्क्य का संवाद -
*10. याज्ञवल्क्य-जनक संवाद - ज्योति ब्राह्मण*
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Ans C
इस तरह का कोई भी प्रश्न आए चाहे असिस्टेंट प्रोफेसर में या UGC NET में
हाई चांस होते हैं कि जहां प्लेस का नाम दिया होता है वो ज्यादा तर गलत ही होते हैं बिना कुछ सोचे हम उस लाइन की एलिमिनेट करके सही उत्तर की तरफ बढ़ सकते हैं
Up asistent profesar ancient history अपनी तैयारी को बेहतर बनाने के लिए हमारे सभी ग्रुप से जुड़ जाओ
अभी सर्च करो टेलीग्राम पर No document no history
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
📖 David Lockwood — Calcutta under Fire: The Second World War Years
David Lockwood की यह किताब 1942 के Bengal और Calcutta में जापानी आक्रमण के भय, युद्ध और उसके राजनीतिक प्रभाव को समझाती है। Burma के जापानी कब्ज़े के बाद Calcutta को जापानी invasion का वास्तविक खतरा महसूस होने लगा, क्योंकि Calcutta Allied forces के लिए एक महत्वपूर्ण port, industrial centre और military supply/transit centre था।
1942 की शुरुआत से ही Calcutta में Japanese attack का डर फैल गया था और बड़ी संख्या में लोग शहर छोड़ने लगे। Bengal सरकार के अनुसार लगभग 7 लाख लोग पहले ही Calcutta छोड़ चुके थे, और सरकार और लोगों को निकालने की योजना बना रही थी।
20 Dec 1942 को Japanese aircraft ने Calcutta पर bombing की। इसके बाद शहर में भारी panic फैल गया और लगभग 15 लाख लोगों के पलायन का उल्लेख Lockwood ने किया है।
रेलवे और सड़कें लोगों से भर गईं; Lockwood के अनुसार सरकारी अनुमान में लगभग 2.5 लाख लोग सड़क से और 1 लाख रेल से शहर से निकले। Dock और industrial areas के बहुत से workers भी चले गए, जिससे labour shortage पैदा हुई।
https://t.me/historyfact00
David Lockwood की यह किताब 1942 के Bengal और Calcutta में जापानी आक्रमण के भय, युद्ध और उसके राजनीतिक प्रभाव को समझाती है। Burma के जापानी कब्ज़े के बाद Calcutta को जापानी invasion का वास्तविक खतरा महसूस होने लगा, क्योंकि Calcutta Allied forces के लिए एक महत्वपूर्ण port, industrial centre और military supply/transit centre था।
1942 की शुरुआत से ही Calcutta में Japanese attack का डर फैल गया था और बड़ी संख्या में लोग शहर छोड़ने लगे। Bengal सरकार के अनुसार लगभग 7 लाख लोग पहले ही Calcutta छोड़ चुके थे, और सरकार और लोगों को निकालने की योजना बना रही थी।
20 Dec 1942 को Japanese aircraft ने Calcutta पर bombing की। इसके बाद शहर में भारी panic फैल गया और लगभग 15 लाख लोगों के पलायन का उल्लेख Lockwood ने किया है।
रेलवे और सड़कें लोगों से भर गईं; Lockwood के अनुसार सरकारी अनुमान में लगभग 2.5 लाख लोग सड़क से और 1 लाख रेल से शहर से निकले। Dock और industrial areas के बहुत से workers भी चले गए, जिससे labour shortage पैदा हुई।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
क्या हम किसी इंसान(राजनेता,सामाजिककर्ता) को उसकी अच्छाइयों और गलतियों, उपलब्धियों और सीमाओं, परिस्थितियों और विरोधाभासों—सबके साथ देख सकते हैं?
या हमारी आलोचनात्मकता भी उतनी ही सुविधाजनक है कि जहाँ हमारी आस्था या पसंद शुरू होती है, वहीं हमारे सवाल खत्म हो जाते हैं?
किसी इंसान को भगवान बना देना और किसी इंसान को पूरी तरह खलनायक बना देना—दोनों में एक बात समान है: दोनों ही उसे इंसान मानने से इनकार करते हैं।
ईश्वर के लिए आलोचना स्वीकार्य, लेकिन इंसानों के लिए अंधभक्ति/अंधनिंदा क्यों?
बाक़ी तो क्या ही है—exam पास करने के लिए, degrees लेने के लिए ratne को किताबों की कमी नहीं है क्योंकि हमारे देश में यही तो criteria है, नौकरियाँ हासिल करने का भी।
But you know, think about it.
वरना तो क्या—ये सब हमारे पहले भी चलता आया है, और आगे भी चलता रहेगा।
https://t.me/historyfact00
या हमारी आलोचनात्मकता भी उतनी ही सुविधाजनक है कि जहाँ हमारी आस्था या पसंद शुरू होती है, वहीं हमारे सवाल खत्म हो जाते हैं?
किसी इंसान को भगवान बना देना और किसी इंसान को पूरी तरह खलनायक बना देना—दोनों में एक बात समान है: दोनों ही उसे इंसान मानने से इनकार करते हैं।
ईश्वर के लिए आलोचना स्वीकार्य, लेकिन इंसानों के लिए अंधभक्ति/अंधनिंदा क्यों?
बाक़ी तो क्या ही है—exam पास करने के लिए, degrees लेने के लिए ratne को किताबों की कमी नहीं है क्योंकि हमारे देश में यही तो criteria है, नौकरियाँ हासिल करने का भी।
But you know, think about it.
वरना तो क्या—ये सब हमारे पहले भी चलता आया है, और आगे भी चलता रहेगा।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
1892 में तिलक ने Orion नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि ऋग्वेद में वर्णित परंपराएँ 4000 ईसा पूर्व या उससे भी पहले के काल की ओर संकेत करती हैं, जब वसंत विषुव (Vernal Equinox) ओरायन (मृगशिरा) नक्षत्र में था।
उसी वर्ष उन्होंने Orion का एक सार (Summary) लंदन में आयोजित Oriental Congress को भेजा, जो बाद में उसके Proceedings (कार्यवृत्त) में प्रकाशित हुआ।
इस विषय पर आगे और गहन शोध करने के बाद 1903 में उन्होंने The Arctic Home in the Vedas पुस्तक लिखी। यह पुस्तक Orion में प्रस्तुत उनके शोध का विस्तार मानी जाती है।
लोकमान्य तिलक की प्रमुख पुस्तकें–
1. Orion; or Researches into the Antiquity of the Vedas
शोध: 1892
प्रकाशन: 1893 (पुणे)
विषय: नक्षत्रों के आधार पर वेदों की प्राचीनता का अध्ययन।
2. The Arctic Home in the Vedas
प्रकाशन: 1903 (पुणे)
विषय: आर्यों के मूल निवास पर शोध; Orion के शोध का विस्तार।
3. Srimad Bhagavad Gita Rahasya (गीता रहस्य)
लेखन: 1910–1911 (मांडले जेल, बर्मा)
प्रकाशन: 1915 (पुणे)
मुख्य विचार: गीता का मूल संदेश निष्काम कर्मयोग है।
https://t.me/historyfact00
उसी वर्ष उन्होंने Orion का एक सार (Summary) लंदन में आयोजित Oriental Congress को भेजा, जो बाद में उसके Proceedings (कार्यवृत्त) में प्रकाशित हुआ।
इस विषय पर आगे और गहन शोध करने के बाद 1903 में उन्होंने The Arctic Home in the Vedas पुस्तक लिखी। यह पुस्तक Orion में प्रस्तुत उनके शोध का विस्तार मानी जाती है।
लोकमान्य तिलक की प्रमुख पुस्तकें–
1. Orion; or Researches into the Antiquity of the Vedas
शोध: 1892
प्रकाशन: 1893 (पुणे)
विषय: नक्षत्रों के आधार पर वेदों की प्राचीनता का अध्ययन।
2. The Arctic Home in the Vedas
प्रकाशन: 1903 (पुणे)
विषय: आर्यों के मूल निवास पर शोध; Orion के शोध का विस्तार।
3. Srimad Bhagavad Gita Rahasya (गीता रहस्य)
लेखन: 1910–1911 (मांडले जेल, बर्मा)
प्रकाशन: 1915 (पुणे)
मुख्य विचार: गीता का मूल संदेश निष्काम कर्मयोग है।
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