Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📚सर सैयद अहमद ख़ान : आधुनिक पाठ्यक्रम में सुझाए गए विषय एवं पुस्तकें—
1. इतिहास (History)
• प्राचीन एवं आधुनिक इतिहास।
• प्राचीन राष्ट्रों की सभ्यता, कला एवं विज्ञान का विकास।
• राष्ट्रों की शासन-व्यवस्था, सद्गुण और दुर्गुण।
• प्राचीन राष्ट्रों पर एम. रोलिन (M. Rollin) की पुस्तक को उपयोगी बताया।
2. प्राकृतिक दर्शन (Natural Philosophy)
• प्रकृति एवं पदार्थों के गुणों का अध्ययन।
• वैज्ञानिक सिद्धांतों के व्यावहारिक उपयोग।
• छोटी पुस्तकों का अलग-अलग श्रृंखलाओं में अनुवाद करने का सुझाव।
3. राजनीतिक अर्थशास्त्र (Political Economy)
• शासन एवं राजस्व की व्यवस्था।
• आर्थिक समृद्धि और संपत्ति का प्रबंधन।
• पूँजी का उचित उपयोग एवं निवेश।
• लोगों को यह समझाना कि आर्थिक ज्ञान उनके व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय विकास के लिए क्यों आवश्यक है।
इसके लिए जॉन स्टुअर्ट मिल (John Stuart Mill) की पुस्तक Political Economy का धीरे-धीरे अनुवाद करने की सिफारिश की गई।
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1. इतिहास (History)
• प्राचीन एवं आधुनिक इतिहास।
• प्राचीन राष्ट्रों की सभ्यता, कला एवं विज्ञान का विकास।
• राष्ट्रों की शासन-व्यवस्था, सद्गुण और दुर्गुण।
• प्राचीन राष्ट्रों पर एम. रोलिन (M. Rollin) की पुस्तक को उपयोगी बताया।
2. प्राकृतिक दर्शन (Natural Philosophy)
• प्रकृति एवं पदार्थों के गुणों का अध्ययन।
• वैज्ञानिक सिद्धांतों के व्यावहारिक उपयोग।
• छोटी पुस्तकों का अलग-अलग श्रृंखलाओं में अनुवाद करने का सुझाव।
3. राजनीतिक अर्थशास्त्र (Political Economy)
• शासन एवं राजस्व की व्यवस्था।
• आर्थिक समृद्धि और संपत्ति का प्रबंधन।
• पूँजी का उचित उपयोग एवं निवेश।
• लोगों को यह समझाना कि आर्थिक ज्ञान उनके व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय विकास के लिए क्यों आवश्यक है।
इसके लिए जॉन स्टुअर्ट मिल (John Stuart Mill) की पुस्तक Political Economy का धीरे-धीरे अनुवाद करने की सिफारिश की गई।
🔸 मुहम्मडन सोशल रिफॉर्मर (Muhammadan Social Reformer): इस पत्रिका के माध्यम से प्रगतिशील मुसलमान शिक्षा एवं सामाजिक सुधार पर लेख लिखते थे।
🔸 अलीगढ़ का मुहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (Muhammadan Anglo-Oriental College): संबंधित पाठ में उस समय यहाँ लगभग 225 मुस्लिम विद्यार्थी होने का उल्लेख है। विद्यार्थी यूरोपीय विज्ञान एवं साहित्य के साथ अपने धर्म, भाषाओं और साहित्य का भी अध्ययन कर रहे थे।
🔸 सर चार्ल्स ट्रेवेलियन (Sir Charles Trevelyan): उन्होंने सर्वश्रेष्ठ निबंध के लिए 500 रुपये का पुरस्कार घोषित किया था। विषय था—बगदाद के अब्बासी खलीफाओं और कॉर्डोबा के उमय्यद खलीफाओं के अधीन यूनानी साहित्य का अरबों पर प्रभाव तथा उसके बाद यूरोप पर अरबी साहित्य का प्रभाव।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
कांग्रेस के विदेशी अध्यक्ष–
जॉर्ज यूल — 1888, इलाहाबाद
स्कॉटलैंड के व्यापारी थे।
भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व के पक्ष में थे।
1889 में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को ब्रिटेन में भारतीय राजनीतिक सुधारों के पक्ष में समर्थन दिलाने में भी मदद की।
सर विलियम वेडरबर्न — 1889–बंबई; 1910, इलाहाबाद
स्कॉटिश मूल के ब्रिटिश अधिकारी और बाद में ब्रिटिश सांसद।
कांग्रेस की ब्रिटिश कमेटी के अध्यक्ष भी रहे और ब्रिटेन में भारतीय प्रश्नों को उठाने का काम किया।
अल्फ्रेड वेब — 1894–मद्रास
आयरिश राजनेता और ब्रिटिश संसद से जुड़े व्यक्ति थे।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति सहानुभूति रखते थे और Indian Home Rule के समर्थक थे।
सर हेनरी कॉटन — 1904–बंबई
ब्रिटिश मूल के भारतीय सिविल सेवा अधिकारी और बाद में राजनेता।
भारतीय राजनीतिक अधिकारों तथा स्वशासन के समर्थक थे और बंगाल विभाजन की नीति के आलोचक रहे।
एनी बेसेंट — 1917–कलकत्ता
आयरिश मूल की थीं और भारत में Home Rule की प्रमुख नेता बनीं।
नेली सेनगुप्ता —1933 कलकत्ता
ब्रिटिश मूल की थीं और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
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जॉर्ज यूल — 1888, इलाहाबाद
स्कॉटलैंड के व्यापारी थे।
भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व के पक्ष में थे।
1889 में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को ब्रिटेन में भारतीय राजनीतिक सुधारों के पक्ष में समर्थन दिलाने में भी मदद की।
सर विलियम वेडरबर्न — 1889–बंबई; 1910, इलाहाबाद
स्कॉटिश मूल के ब्रिटिश अधिकारी और बाद में ब्रिटिश सांसद।
कांग्रेस की ब्रिटिश कमेटी के अध्यक्ष भी रहे और ब्रिटेन में भारतीय प्रश्नों को उठाने का काम किया।
अल्फ्रेड वेब — 1894–मद्रास
आयरिश राजनेता और ब्रिटिश संसद से जुड़े व्यक्ति थे।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति सहानुभूति रखते थे और Indian Home Rule के समर्थक थे।
सर हेनरी कॉटन — 1904–बंबई
ब्रिटिश मूल के भारतीय सिविल सेवा अधिकारी और बाद में राजनेता।
भारतीय राजनीतिक अधिकारों तथा स्वशासन के समर्थक थे और बंगाल विभाजन की नीति के आलोचक रहे।
एनी बेसेंट — 1917–कलकत्ता
आयरिश मूल की थीं और भारत में Home Rule की प्रमुख नेता बनीं।
नेली सेनगुप्ता —1933 कलकत्ता
ब्रिटिश मूल की थीं और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
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ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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गांधीजी : 1944–1948 —कालक्रम
1944 का काल क्रम–
22 फरवरी — आगा ख़ान पैलेस में कस्तूरबा गांधी का निधन।
6 मई — स्वास्थ्य कारणों से गांधीजी आगा ख़ान पैलेस से रिहा हुए।
9–27 सितंबर — मुंबई में गांधी-जिन्ना वार्ता; पाकिस्तान के प्रश्न पर समझौता नहीं हुआ।
1945 का काल क्रम–
जून–जुलाई — शिमला सम्मेलन; वेवल योजना के आधार पर राजनीतिक समझौते का प्रयास, लेकिन असफल।
15 जून — अहमदनगर किले में बंद कांग्रेस नेताओं की रिहाई और कांग्रेस पर प्रतिबंध हटाया गया।
1946 का काल क्रम –
मार्च–मई — भारत में कैबिनेट मिशन; गांधीजी ने मिशन से बातचीत की।
16 अगस्त — Direct Action Day के बाद कलकत्ता में भीषण साम्प्रदायिक हिंसा।
अक्टूबर — नोआखाली में साम्प्रदायिक हिंसा।
6 नवंबर — गांधीजी नोआखाली के लिए रवाना।
दिसंबर — श्रीरामपुर को केंद्र बनाकर गाँव-गाँव शांति अभियान शुरू किया।
1947 का काल क्रम–
2 जनवरी — नोआखाली में गांधीजी की पदयात्रा आरंभ।
मार्च–अप्रैल — बिहार में साम्प्रदायिक हिंसा के बीच शांति अभियान।
31 मार्च — गांधीजी की माउंटबेटन से पहली मुलाकात।
3 जून — माउंटबेटन योजना की घोषणा; विभाजन स्वीकार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
13 अगस्त — गांधीजी कलकत्ता पहुँचे, हिंदू-मुस्लिम शांति के प्रयास में।
15 अगस्त — स्वतंत्रता के दिन गांधीजी कलकत्ता में रहे, उत्सव के बजाय प्रार्थना और शांति-कार्य में लगे।
31 अगस्त — कलकत्ता में साम्प्रदायिक शांति के लिए अनिश्चितकालीन उपवास।
4 सितंबर — शांति का आश्वासन मिलने पर उपवास समाप्त।
9 सितंबर — गांधीजी दिल्ली पहुँचे।
1948 का कालक्रम –
13 जनवरी — दिल्ली में आमरण उपवास आरंभ; उद्देश्य साम्प्रदायिक शांति।
18 जनवरी — विभिन्न नेताओं द्वारा शांति का आश्वासन मिलने पर उपवास समाप्त।
20 जनवरी — बिरला हाउस की प्रार्थना सभा में बम विस्फोट का प्रयास।
27 जनवरी — गांधीजी ने कांग्रेस को लोकसेवक संघ में बदलने का विचार रखा।
30 जनवरी — नई दिल्ली के बिरला हाउस में गांधीजी की हत्या।
31 जनवरी — गांधीजी का अंतिम संस्कार।
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1944 का काल क्रम–
22 फरवरी — आगा ख़ान पैलेस में कस्तूरबा गांधी का निधन।
6 मई — स्वास्थ्य कारणों से गांधीजी आगा ख़ान पैलेस से रिहा हुए।
9–27 सितंबर — मुंबई में गांधी-जिन्ना वार्ता; पाकिस्तान के प्रश्न पर समझौता नहीं हुआ।
1945 का काल क्रम–
जून–जुलाई — शिमला सम्मेलन; वेवल योजना के आधार पर राजनीतिक समझौते का प्रयास, लेकिन असफल।
15 जून — अहमदनगर किले में बंद कांग्रेस नेताओं की रिहाई और कांग्रेस पर प्रतिबंध हटाया गया।
1946 का काल क्रम –
मार्च–मई — भारत में कैबिनेट मिशन; गांधीजी ने मिशन से बातचीत की।
16 अगस्त — Direct Action Day के बाद कलकत्ता में भीषण साम्प्रदायिक हिंसा।
अक्टूबर — नोआखाली में साम्प्रदायिक हिंसा।
6 नवंबर — गांधीजी नोआखाली के लिए रवाना।
दिसंबर — श्रीरामपुर को केंद्र बनाकर गाँव-गाँव शांति अभियान शुरू किया।
1947 का काल क्रम–
2 जनवरी — नोआखाली में गांधीजी की पदयात्रा आरंभ।
मार्च–अप्रैल — बिहार में साम्प्रदायिक हिंसा के बीच शांति अभियान।
31 मार्च — गांधीजी की माउंटबेटन से पहली मुलाकात।
3 जून — माउंटबेटन योजना की घोषणा; विभाजन स्वीकार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
13 अगस्त — गांधीजी कलकत्ता पहुँचे, हिंदू-मुस्लिम शांति के प्रयास में।
15 अगस्त — स्वतंत्रता के दिन गांधीजी कलकत्ता में रहे, उत्सव के बजाय प्रार्थना और शांति-कार्य में लगे।
31 अगस्त — कलकत्ता में साम्प्रदायिक शांति के लिए अनिश्चितकालीन उपवास।
4 सितंबर — शांति का आश्वासन मिलने पर उपवास समाप्त।
9 सितंबर — गांधीजी दिल्ली पहुँचे।
1948 का कालक्रम –
13 जनवरी — दिल्ली में आमरण उपवास आरंभ; उद्देश्य साम्प्रदायिक शांति।
18 जनवरी — विभिन्न नेताओं द्वारा शांति का आश्वासन मिलने पर उपवास समाप्त।
20 जनवरी — बिरला हाउस की प्रार्थना सभा में बम विस्फोट का प्रयास।
27 जनवरी — गांधीजी ने कांग्रेस को लोकसेवक संघ में बदलने का विचार रखा।
30 जनवरी — नई दिल्ली के बिरला हाउस में गांधीजी की हत्या।
31 जनवरी — गांधीजी का अंतिम संस्कार।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हुई” — यह निर्विवाद रूप से सिद्ध ऐतिहासिक तथ्य नहीं है, बल्कि भारत सरकार द्वारा स्वीकार किया गया आधिकारिक निष्कर्ष है।
और दूसरी तरफ:
“नेताजी विमान दुर्घटना में नहीं मरे” — यह मुखर्जी आयोग का निष्कर्ष था, लेकिन भारत सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
दोनों के बीच विवाद मौजूद है। इसलिए अगर कोई किताब सीधे लिखती है कि “नेताजी की 18 अगस्त 1945 को मृत्यु हो गई” और यह नहीं बताती कि इस पर बाद में मुखर्जी आयोग ने गंभीर आपत्ति उठाई थी, तो विद्यार्थियों को पूरा ऐतिहासिक विवाद नहीं बताया जा रहा है।
ऐसे में विद्यार्थियों को भ्रमित करने का कार्य बहुत अच्छे से किया जा रहा है ।
अभी तक किताबों में यह बदलाव नहीं मिलता , आज भी किताबों में सुभाष की मृत्यु पर सब चुप्पी साद लेते है जबकि आयोग द्वारा इस घटना को झूठा साबित कर दिया गया है । किताबों में संशोधन करने की भी जरूरत नहीं समझती है सरकार ।
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और दूसरी तरफ:
“नेताजी विमान दुर्घटना में नहीं मरे” — यह मुखर्जी आयोग का निष्कर्ष था, लेकिन भारत सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
दोनों के बीच विवाद मौजूद है। इसलिए अगर कोई किताब सीधे लिखती है कि “नेताजी की 18 अगस्त 1945 को मृत्यु हो गई” और यह नहीं बताती कि इस पर बाद में मुखर्जी आयोग ने गंभीर आपत्ति उठाई थी, तो विद्यार्थियों को पूरा ऐतिहासिक विवाद नहीं बताया जा रहा है।
ऐसे में विद्यार्थियों को भ्रमित करने का कार्य बहुत अच्छे से किया जा रहा है ।
अभी तक किताबों में यह बदलाव नहीं मिलता , आज भी किताबों में सुभाष की मृत्यु पर सब चुप्पी साद लेते है जबकि आयोग द्वारा इस घटना को झूठा साबित कर दिया गया है । किताबों में संशोधन करने की भी जरूरत नहीं समझती है सरकार ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
1859 → Lord Canning ने Portfolio System शुरू किया।
1861 → Indian Councils Act ने Portfolio System को वैधानिक मान्यता दी।
1861 → पाँचवाँ सदस्य वित्तीय विशेषज्ञता के लिए।
1874 → Public Works के लिए सदस्य।
1904 → Public Works वाले पद को Commerce & Industry के सदस्य में बदला गया।
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1861 → Indian Councils Act ने Portfolio System को वैधानिक मान्यता दी।
1861 → पाँचवाँ सदस्य वित्तीय विशेषज्ञता के लिए।
1874 → Public Works के लिए सदस्य।
1904 → Public Works वाले पद को Commerce & Industry के सदस्य में बदला गया।
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