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कुंभलगढ़ दुर्ग (राजस्थान )- भैरव मुनि नामक संत ने स्वेच्छा से नरबलि दी थी। जहां उनका सिर गिरा .....💐
जहां भैरव मुनि का धड़ गिरा💐
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
प्रभाती दास गुप्ता 1928 में कलकत्ता में मैला ढोने वालों की हड़ताल के एक प्रमुख नेता थे।
वह एक प्रगतिशील राष्ट्रवादी और कम्युनिस्ट थीं, जो सामाजिक न्याय के लिए गहराई से प्रतिबद्ध थीं।
जर्मनी में फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाली वह एक उच्च शिक्षित महिला भी थीं।
कलकत्ता के मैला ढोने वाले सामाजिक सीढ़ी के सबसे निचले पायदान पर थे।
उन्हें अछूत माना जाता था और उनके साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता था।
उन्हें कम वेतन भी मिलता था और उनके पास नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं थी।
1928 में, कलकत्ता के मैला ढोने वाले बेहतर वेतन, काम करने की स्थिति और आवास की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए।
हड़ताल का नेतृत्व प्रभाती दास गुप्ता और अन्य कम्युनिस्ट नेताओं ने किया था।
हड़ताल कई महीनों तक चली और अंततः कर्मचारियों की कुछ मांगों को प्राप्त करने में सफल रही।
हड़ताल का नेतृत्व करने में उनकी भूमिका के लिए, प्रभाती दास गुप्ता को "धंगरमा" (मैला ढोने वालों की माँ) की उपाधि दी गई।
वह मजदूर वर्ग की सच्ची चैंपियन थीं और उनकी विरासत आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
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वह एक प्रगतिशील राष्ट्रवादी और कम्युनिस्ट थीं, जो सामाजिक न्याय के लिए गहराई से प्रतिबद्ध थीं।
जर्मनी में फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाली वह एक उच्च शिक्षित महिला भी थीं।
कलकत्ता के मैला ढोने वाले सामाजिक सीढ़ी के सबसे निचले पायदान पर थे।
उन्हें अछूत माना जाता था और उनके साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता था।
उन्हें कम वेतन भी मिलता था और उनके पास नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं थी।
1928 में, कलकत्ता के मैला ढोने वाले बेहतर वेतन, काम करने की स्थिति और आवास की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए।
हड़ताल का नेतृत्व प्रभाती दास गुप्ता और अन्य कम्युनिस्ट नेताओं ने किया था।
हड़ताल कई महीनों तक चली और अंततः कर्मचारियों की कुछ मांगों को प्राप्त करने में सफल रही।
हड़ताल का नेतृत्व करने में उनकी भूमिका के लिए, प्रभाती दास गुप्ता को "धंगरमा" (मैला ढोने वालों की माँ) की उपाधि दी गई।
वह मजदूर वर्ग की सच्ची चैंपियन थीं और उनकी विरासत आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
इस भजन की पंक्तियों में गांधी जी द्वारा बदलाव किया गया था, इसका मूलरूप 👇
’रघुपति राघव राजाराम |
पतित पावन सीताराम ॥
सुंदर विग्रह मेघश्याम |
गंगा तुलसी शालग्राम ॥
प्राथना सभा में कुरान का भी पाठ होता था लेकिन बाद में इसको पढ़ने से आपत्ति जताई गई📖✍️
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’रघुपति राघव राजाराम |
पतित पावन सीताराम ॥
सुंदर विग्रह मेघश्याम |
गंगा तुलसी शालग्राम ॥
प्राथना सभा में कुरान का भी पाठ होता था लेकिन बाद में इसको पढ़ने से आपत्ति जताई गई📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
भारत के संविधान से जुड़े तथ्य–
1924 →संविधान सभा का विचार पहली बार स्वराज पार्टी द्वारा दिया गया था।
1934 →संविधान सभा के गठन का विचार एम.एन.रॉय द्वारा रखा गया था।
1935 →भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस द्वारा पहली बार भारत के संविधान के निर्माण हेतु आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की माँग की गयी।
1940 →इस माँग को अंततः ब्रिटिश सरकार ने सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार कर लिया। इसे ‘अगस्त प्रस्ताव’ (August Offer)के नाम से जाना जाता है।
1942 →क्रिप्स के संविधान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
1946 → ‘कैबिनेट मिशन योजना’ (Cabinet Mission Plan-CMP) को सभी दलों द्वारा स्वीकार किया गया। इसके सदस्य लॉर्ड पैट्रिक लॉरेंस, सर स्टैफ़ोर्ड क्रिप्स और ए. वी. एलेक्जेंडर थे। कैबिनेट मिशन ने द्वि-राष्ट्र एवं दो संविधान सभा की माँग को अस्वीकार कर दिया।
संविधान सभा का गठन
कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर नवंबर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ।
सीटों का बँटवारा जनसंख्या के आधार पर किया गया।
ब्रिटिश प्रान्तों से संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली एवं एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर हुआ।
संविधान सभा का गठन अंशतः निर्वाचित(ब्रिटिश प्रान्तों) एवं नामित सदस्यों(रियासतों के प्रमुखों द्वारा) द्वारा किया गया था।
ब्रिटिश प्रान्तों से संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन वहाँ की विधायिका से हुआ था।
महात्मा गाँधी संविधान सभा का हिस्सा नहीं थे।
देशी रियासतों को आवंटित 93 सीटें नहीं भर पायीं थीं, क्योंकि उन्होंने संविधान सभा से अलग रहने का फैसला किया था।
संविधान सभा की कार्यवाही
9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक आयोजित हुई (मुस्लिम लीग ने बैठक का बहिष्कार किया) ।
वरिष्ठतम सदस्य डॉ. सचिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। अस्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति फ्रेंच परम्परा के अनुसार की गई थी।
बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया।
उपाध्यक्ष (दो)→ एच.सी. मुखर्जी और वी.टी. कृष्णामाचारी।
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1924 →संविधान सभा का विचार पहली बार स्वराज पार्टी द्वारा दिया गया था।
1934 →संविधान सभा के गठन का विचार एम.एन.रॉय द्वारा रखा गया था।
1935 →भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस द्वारा पहली बार भारत के संविधान के निर्माण हेतु आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की माँग की गयी।
1940 →इस माँग को अंततः ब्रिटिश सरकार ने सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार कर लिया। इसे ‘अगस्त प्रस्ताव’ (August Offer)के नाम से जाना जाता है।
1942 →क्रिप्स के संविधान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
1946 → ‘कैबिनेट मिशन योजना’ (Cabinet Mission Plan-CMP) को सभी दलों द्वारा स्वीकार किया गया। इसके सदस्य लॉर्ड पैट्रिक लॉरेंस, सर स्टैफ़ोर्ड क्रिप्स और ए. वी. एलेक्जेंडर थे। कैबिनेट मिशन ने द्वि-राष्ट्र एवं दो संविधान सभा की माँग को अस्वीकार कर दिया।
संविधान सभा का गठन
कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर नवंबर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ।
सीटों का बँटवारा जनसंख्या के आधार पर किया गया।
ब्रिटिश प्रान्तों से संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली एवं एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर हुआ।
संविधान सभा का गठन अंशतः निर्वाचित(ब्रिटिश प्रान्तों) एवं नामित सदस्यों(रियासतों के प्रमुखों द्वारा) द्वारा किया गया था।
ब्रिटिश प्रान्तों से संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन वहाँ की विधायिका से हुआ था।
महात्मा गाँधी संविधान सभा का हिस्सा नहीं थे।
देशी रियासतों को आवंटित 93 सीटें नहीं भर पायीं थीं, क्योंकि उन्होंने संविधान सभा से अलग रहने का फैसला किया था।
संविधान सभा की कार्यवाही
9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक आयोजित हुई (मुस्लिम लीग ने बैठक का बहिष्कार किया) ।
वरिष्ठतम सदस्य डॉ. सचिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। अस्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति फ्रेंच परम्परा के अनुसार की गई थी।
बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया।
उपाध्यक्ष (दो)→ एच.सी. मुखर्जी और वी.टी. कृष्णामाचारी।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
संविधान निर्माण से जुड़े तथ्य–
उद्देश्य प्रस्ताव
जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा के ऐतिहासिक प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था।
इसमें संवैधानिक संरचना के मूल तत्व और दर्शन निहित थे।
इस प्रस्ताव को 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया था।
वर्तमान में भारतीय संविधान की उद्देशिका(Preamble), इसी उद्देश्य प्रस्ताव का संशोधित रूप है।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार परिवर्तन
देशी रियासतों और बचे हुए मुस्लिम लीग (इंडियन डोमिनियन से) के सदस्य धीरे-धीरे संविधान सभा से जुड़ने लगे।
3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना (Mountbatten plan) को स्वीकृति मिली (यह योजना भारत के विभाजन हेतु थी) ।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने संविधान सभा की स्थिति में दो बदलाव किए –
संविधान सभा एक संप्रभु संस्था बन गयी, जो स्वेच्छा से संविधान का निर्माण कर सकती थी।
संविधान सभा को दो प्रकार का कार्यों सौंपा गया (दोनों कार्यों को अलग-अलग रूप से करना था) → भारत के लिए आम कानून का निर्माण व उन्हें लागू करना (जी.वी. मावलंकर की अध्यक्षता में) और स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण करना (डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में); ये 26 नवंबर, 1949 तक जारी रहे।
संविधान सभा से मुस्लिम लीग के सदस्य अलग हो गए थे। इसलिए संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 रह गयी।
संविधान सभा के अन्य कार्य
मई, 1949 → राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता की पुष्टि।
22 जुलाई, 1947 → राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया।
24 जनवरी, 1950 → राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान को अपनाया गया।
24 जनवरी, 1950 → डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
24 जनवरी, 1950 → संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई। हालांकि इस संविधान सभा ने ही यह 26 जनवरी,1950 से लेकर आम चुनावों के बाद नयी संसद के गठन(मई, 1952) तक अन्तरिम संसद के रूप में कार्य किया।
कुल सत्र – 11
कुल समय – 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन
मुख्य समितियाँ–
संघ शक्ति समिति / संघ संविधान समिति / राज्य समिति (राज्यों से समझौते हेतु) →जवाहरलाल नेहरू
प्रक्रिया नियम समिति / संचालन समिति → डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रांतीय संविधान समिति → सरदार पटेल
प्रारूप समिति → डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
मूल अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातियों और बहिष्कृत क्षेत्रों हेतु परामर्शी समिति → सरदार पटेल
संविधान सभा की सभी समितियों में प्रारूप समिति सबसे महत्वपूर्ण थी। इसका गठन 29 अगस्त, 1947 को किया गया था। इसमें 7 सदस्य शामिल थे।
संविधान का प्रभाव में आना
संविधान के प्रारूप के प्रत्येक प्रावधान(clause by clause) पर चर्चा के बाद इसे 26 नवंबर, 1949 को अपनाया गया। उस समय इसमें उद्देशिका, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां शामिल थीं।
संविधान के पूर्ण रूप से अधिनियमित होने के बाद उसके उद्देशिका को लागू किया गया था।
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उद्देश्य प्रस्ताव
जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा के ऐतिहासिक प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था।
इसमें संवैधानिक संरचना के मूल तत्व और दर्शन निहित थे।
इस प्रस्ताव को 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया था।
वर्तमान में भारतीय संविधान की उद्देशिका(Preamble), इसी उद्देश्य प्रस्ताव का संशोधित रूप है।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार परिवर्तन
देशी रियासतों और बचे हुए मुस्लिम लीग (इंडियन डोमिनियन से) के सदस्य धीरे-धीरे संविधान सभा से जुड़ने लगे।
3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना (Mountbatten plan) को स्वीकृति मिली (यह योजना भारत के विभाजन हेतु थी) ।
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने संविधान सभा की स्थिति में दो बदलाव किए –
संविधान सभा एक संप्रभु संस्था बन गयी, जो स्वेच्छा से संविधान का निर्माण कर सकती थी।
संविधान सभा को दो प्रकार का कार्यों सौंपा गया (दोनों कार्यों को अलग-अलग रूप से करना था) → भारत के लिए आम कानून का निर्माण व उन्हें लागू करना (जी.वी. मावलंकर की अध्यक्षता में) और स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण करना (डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में); ये 26 नवंबर, 1949 तक जारी रहे।
संविधान सभा से मुस्लिम लीग के सदस्य अलग हो गए थे। इसलिए संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 रह गयी।
संविधान सभा के अन्य कार्य
मई, 1949 → राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता की पुष्टि।
22 जुलाई, 1947 → राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया।
24 जनवरी, 1950 → राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान को अपनाया गया।
24 जनवरी, 1950 → डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
24 जनवरी, 1950 → संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई। हालांकि इस संविधान सभा ने ही यह 26 जनवरी,1950 से लेकर आम चुनावों के बाद नयी संसद के गठन(मई, 1952) तक अन्तरिम संसद के रूप में कार्य किया।
कुल सत्र – 11
कुल समय – 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन
मुख्य समितियाँ–
संघ शक्ति समिति / संघ संविधान समिति / राज्य समिति (राज्यों से समझौते हेतु) →जवाहरलाल नेहरू
प्रक्रिया नियम समिति / संचालन समिति → डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रांतीय संविधान समिति → सरदार पटेल
प्रारूप समिति → डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
मूल अधिकारों, अल्पसंख्यकों और जनजातियों और बहिष्कृत क्षेत्रों हेतु परामर्शी समिति → सरदार पटेल
संविधान सभा की सभी समितियों में प्रारूप समिति सबसे महत्वपूर्ण थी। इसका गठन 29 अगस्त, 1947 को किया गया था। इसमें 7 सदस्य शामिल थे।
संविधान का प्रभाव में आना
संविधान के प्रारूप के प्रत्येक प्रावधान(clause by clause) पर चर्चा के बाद इसे 26 नवंबर, 1949 को अपनाया गया। उस समय इसमें उद्देशिका, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां शामिल थीं।
संविधान के पूर्ण रूप से अधिनियमित होने के बाद उसके उद्देशिका को लागू किया गया था।
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संविधान निर्माण का क्रम –
1922 → गांधी का प्रारंभिक constitutional/self-expression विचार
1928 → Nehru Report — Motilal Nehru
1934 → M. N. Roy — Constituent Assembly की मांग
1934 → Congress ने Constituent Assembly की मांग आधिकारिक रूप से अपनाई
1944 → M. N. Roy — Constitution of Free India draft
1946 → Constituent Assembly की स्थापना/पहली बैठक
13 Dec. 1946 → Nehru ने Objectives Resolution पेश किया
22 Jan. 1947 → Objectives Resolution स्वीकार
29 Aug. 1947 → Drafting Committee बनी
B. R. Ambedkar → Chairman
Oct. 1947 → B. N. Rau का Draft Constitution
21 Feb. 1948 → Drafting Committee का Draft Constitution — 315 Articles
4 Nov. 1948 → Ambedkar ने Draft Constitution Assembly में पेश किया
26 Nov. 1949 → Constitution adopted
24 Jan. 1950 → Members ने हस्ताक्षर किए
26 Jan. 1950 → Constitution लागू
25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में Ambedkar ने कहा:
"मुझे जो श्रेय दिया जाता है, वह वास्तव में केवल मेरा नहीं है। संविधान-निर्माण का पूरा श्रेय स्वयं लेने के बजाय B. N. Rau (Constitutional Adviser), Drafting Committee के सदस्यों और Chief Draftsman S. N. Mukherjee के योगदान को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि Rau ने Drafting Committee के विचारार्थ संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया था।
उसी भाषण में अम्बेडकर बताते हैं:
Drafting Committee — 29 अगस्त 1947 को चुनी गई।
उसने 30 अगस्त 1947 को पहली बैठक की।
उसने कुल 141 दिन काम किया।
Constitutional Adviser द्वारा तैयार प्रारंभिक draft में 243 Articles और 13 Schedules थे।
Drafting Committee द्वारा Assembly में प्रस्तुत पहले draft में 315 Articles और 8 Schedules थे।
विचार-विमर्श के बाद Articles की संख्या 386 हुई।
अंतिम रूप में 395 Articles और 8 Schedules हुए।
लगभग 7,635 amendments table कि गए, जिनमें 2,473 वास्तव में move किए गए।
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1922 → गांधी का प्रारंभिक constitutional/self-expression विचार
1928 → Nehru Report — Motilal Nehru
1934 → M. N. Roy — Constituent Assembly की मांग
1934 → Congress ने Constituent Assembly की मांग आधिकारिक रूप से अपनाई
1944 → M. N. Roy — Constitution of Free India draft
1946 → Constituent Assembly की स्थापना/पहली बैठक
13 Dec. 1946 → Nehru ने Objectives Resolution पेश किया
22 Jan. 1947 → Objectives Resolution स्वीकार
29 Aug. 1947 → Drafting Committee बनी
B. R. Ambedkar → Chairman
Oct. 1947 → B. N. Rau का Draft Constitution
21 Feb. 1948 → Drafting Committee का Draft Constitution — 315 Articles
4 Nov. 1948 → Ambedkar ने Draft Constitution Assembly में पेश किया
26 Nov. 1949 → Constitution adopted
24 Jan. 1950 → Members ने हस्ताक्षर किए
26 Jan. 1950 → Constitution लागू
25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में Ambedkar ने कहा:
"मुझे जो श्रेय दिया जाता है, वह वास्तव में केवल मेरा नहीं है। संविधान-निर्माण का पूरा श्रेय स्वयं लेने के बजाय B. N. Rau (Constitutional Adviser), Drafting Committee के सदस्यों और Chief Draftsman S. N. Mukherjee के योगदान को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि Rau ने Drafting Committee के विचारार्थ संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया था।
उसी भाषण में अम्बेडकर बताते हैं:
Drafting Committee — 29 अगस्त 1947 को चुनी गई।
उसने 30 अगस्त 1947 को पहली बैठक की।
उसने कुल 141 दिन काम किया।
Constitutional Adviser द्वारा तैयार प्रारंभिक draft में 243 Articles और 13 Schedules थे।
Drafting Committee द्वारा Assembly में प्रस्तुत पहले draft में 315 Articles और 8 Schedules थे।
विचार-विमर्श के बाद Articles की संख्या 386 हुई।
अंतिम रूप में 395 Articles और 8 Schedules हुए।
लगभग 7,635 amendments table कि गए, जिनमें 2,473 वास्तव में move किए गए।
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🔴 लाला लाजपत राय (1865–1928)
1888—कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में शामिल।
1905—बंगाल विभाजन व स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय।
1907—मांडले निर्वासित।
1920—कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष।
1921—Servants of the People Society की स्थापना।
1928—साइमन कमीशन विरोध; 17 नवंबर को निधन।
📚 Young India, Unhappy India, The Arya Samaj
🟠 बाल गंगाधर तिलक (1856–1920)
1880—Kesari और The Mahratta शुरू किए।
1884—Deccan Education Society की स्थापना में भूमिका।
1893—सार्वजनिक गणपति उत्सव को लोकप्रिय बनाया।
1895—शिवाजी उत्सव को लोकप्रिय बनाया।
1907—सूरत विभाजन।
1908—6 वर्ष का कारावास; मांडले भेजे गए।
1915—गीता रहस्य प्रकाशित।
1916—होमरूल लीग,लखनऊ समझौते में भूमिका।
1920 — 1 अगस्त को निधन।
🟢 बिपिन चंद्र पाल (1858–1932)
1886—कांग्रेस से जुड़े।
1901—न्यू इंडिया शुरू किया।
1905—बंगाल विभाजन विरोधी स्वदेशी आंदोलन के प्रमुख प्रचारक।
1906—वंदे मातरम से जुड़े।
1907—वंदे मातरम मामले में 6 माह का कारावास।
1916—Nationality and Empire।
1917—Responsible Government।
1918—Indian Nationalism।
1932—20 मई को निधन।
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1888—कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में शामिल।
1905—बंगाल विभाजन व स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय।
1907—मांडले निर्वासित।
1920—कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष।
1921—Servants of the People Society की स्थापना।
1928—साइमन कमीशन विरोध; 17 नवंबर को निधन।
📚 Young India, Unhappy India, The Arya Samaj
🟠 बाल गंगाधर तिलक (1856–1920)
1880—Kesari और The Mahratta शुरू किए।
1884—Deccan Education Society की स्थापना में भूमिका।
1893—सार्वजनिक गणपति उत्सव को लोकप्रिय बनाया।
1895—शिवाजी उत्सव को लोकप्रिय बनाया।
1907—सूरत विभाजन।
1908—6 वर्ष का कारावास; मांडले भेजे गए।
1915—गीता रहस्य प्रकाशित।
1916—होमरूल लीग,लखनऊ समझौते में भूमिका।
1920 — 1 अगस्त को निधन।
🟢 बिपिन चंद्र पाल (1858–1932)
1886—कांग्रेस से जुड़े।
1901—न्यू इंडिया शुरू किया।
1905—बंगाल विभाजन विरोधी स्वदेशी आंदोलन के प्रमुख प्रचारक।
1906—वंदे मातरम से जुड़े।
1907—वंदे मातरम मामले में 6 माह का कारावास।
1916—Nationality and Empire।
1917—Responsible Government।
1918—Indian Nationalism।
1932—20 मई को निधन।
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