Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
📚 ALL INDIA TRADE UNION CONGRESS (AITUC)
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स्थापना — 31 अक्टूबर 1920, बंबई
AITUC (All India Trade Union Congress) भारत का पहला अखिल-भारतीय स्तर का प्रमुख ट्रेड यूनियन महासंघ था। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई।
🔹 इसके प्रथम अधिवेशन में 64 ट्रेड यूनियनों के 101 प्रतिनिधि शामिल हुए।
🔹 इन प्रतिनिधियों ने लगभग 1,40,854 मजदूरों का प्रतिनिधित्व किया।
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👤 प्रथम अध्यक्ष — लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय AITUC के प्रथम अध्यक्ष चुने गए।
मजदूर वर्ग की परिस्थितियों और श्रमिक प्रश्नों में उनकी रुचि के कारण उन्हें इस संगठन का नेतृत्व सौंपा गया।
👤 प्रथम महासचिव — दीवान चमन लाल
दीवान चमन लाल को कई मानक इतिहास-स्रोतों में AITUC का प्रथम महासचिव बताया गया है।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: AITUC के कुछ पुराने अभिलेखों में प्रथम अधिवेशन के संदर्भ में V. M. Pawar का नाम General Secretary के रूप में भी मिलता है। इसलिए प्रथम महासचिव के नाम को लेकर स्रोतों में असंगति दिखाई देती है।
https://t.me/historyfact00
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स्थापना — 31 अक्टूबर 1920, बंबई
AITUC (All India Trade Union Congress) भारत का पहला अखिल-भारतीय स्तर का प्रमुख ट्रेड यूनियन महासंघ था। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई।
🔹 इसके प्रथम अधिवेशन में 64 ट्रेड यूनियनों के 101 प्रतिनिधि शामिल हुए।
🔹 इन प्रतिनिधियों ने लगभग 1,40,854 मजदूरों का प्रतिनिधित्व किया।
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👤 प्रथम अध्यक्ष — लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय AITUC के प्रथम अध्यक्ष चुने गए।
मजदूर वर्ग की परिस्थितियों और श्रमिक प्रश्नों में उनकी रुचि के कारण उन्हें इस संगठन का नेतृत्व सौंपा गया।
👤 प्रथम महासचिव — दीवान चमन लाल
दीवान चमन लाल को कई मानक इतिहास-स्रोतों में AITUC का प्रथम महासचिव बताया गया है।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: AITUC के कुछ पुराने अभिलेखों में प्रथम अधिवेशन के संदर्भ में V. M. Pawar का नाम General Secretary के रूप में भी मिलता है। इसलिए प्रथम महासचिव के नाम को लेकर स्रोतों में असंगति दिखाई देती है।
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Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
दक्षिण भारत की महापाषाण (Megalithic) समाधियों के प्रकार
1. सिस्ट समाधियां (Cist Graves):ब्रह्मगिरी
खाई खोदकर पत्थर की शिलाओं से एक आयताकार सन्दूक बनाकर उसमें शव रखा जाता था।
2.पिट सर्किल समाधि : (ब्रह्मगिरी)
पत्थरों की सहायता से एक वृत्त बनाकर उसमें एक दूसरी खाई निर्मित कर उसमें शव को रखा जाता था।
3.कैर्न सर्किल : चिंगलपुट (चेन्नई)
विशाल पत्थरों के टुकड़ों से निर्मित वृत्त में शव अस्थिपात्र रखे जाते थे।
4.डोलमेन : (चिंगलपुट)
यह डोलमेन सिस्ट समाधि के समान ही होता था किन्तु सन्दूक पृथ्वी के अन्दर न होकर ऊपर होता था।
5. अम्ब्रेला स्टोन: कोचीन (केरल)
वर्गाकार भूखण्ड पर चार पत्थर के पाये बनाकर ऊपर एक छतरी बनायी जाती थी।
6.हुड स्टोन (Hood Stone): (कोचीन)
इसमें छत्र के आकार का महापाषाण जमीन पर ही बनाया जाता था।
7.कन्दरा समाधि (Cave Grave) :(कोचीन)
आयताकार खाई में शव को दफनाया जाता था।
8. मेनहिर समाधि : (कोचीन) ग्रेनाइट के एकाश्मक पत्थर (Monolithic) का प्रयोग होता था।
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ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
📚 ALL INDIA TRADE UNION CONGRESS (AITUC) ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ स्थापना — 31 अक्टूबर 1920, बंबई AITUC (All India Trade Union Congress) भारत का पहला अखिल-भारतीय स्तर का प्रमुख ट्रेड यूनियन महासंघ था। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई। 🔹 इसके प्रथम…
Source – indian labour movement
ILO का प्रकाशन चमन लाल को पहला महासचिव बताता है जबकि कुछ अन्य विवरण पवार को प्रारंभिक महासचिव और चमन लाल को उनका उत्तराधिकारी बताते हैं
ILO का प्रकाशन चमन लाल को पहला महासचिव बताता है जबकि कुछ अन्य विवरण पवार को प्रारंभिक महासचिव और चमन लाल को उनका उत्तराधिकारी बताते हैं
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
सर जॉन मैल्कम–
1. सैन्य एवं राजनीतिक भूमिका–
1792— तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान फ़ारसी दुभाषिए के रूप में कार्य किया।
1799— चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में निज़ाम की पैदल सेना की कमान संभाली।
1801— लॉर्ड वेलेजली के निजी सचिव एवं विशेष प्रतिनिधि बने।
2. फ़ारस के तीन मिशन–
प्रथम (1799–1801)— लॉर्ड वेलेजली के समय नियुक्त; 1800 में फ़ारस पहुँचे। उद्देश्य फ्रांसीसी प्रभाव रोकना और ज़मान शाह के ख़तरे का मुकाबला करना था।
द्वितीय (1808)—लॉर्ड मिंटो के समय भेजे गए; तेहरान में प्रवेश की अनुमति न मिलने से मिशन असफल रहा।
तृतीय (1810)—पुनः फ़ारस गए; सर गोर ओस्ली की नियुक्ति के कारण मिशन सफल नहीं हुआ।
3. आंग्ल-मराठा संबंध–1803–1805— द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान राजनीतिक वार्ताओं में भूमिका निभाई।
1804—दौलतराव सिंधिया के साथ सहायक संधि संबंधी वार्ता।
दिसंबर 1805—यशवंतराव होल्कर के साथ सहायक संधि।
4. तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध–लॉर्ड हेस्टिंग्स के अधीन राजनीतिक प्रतिनिधि तथा दक्कन सेना के तृतीय डिवीजन के कमांडर रहे।
दिसंबर 1817—मल्हार राव होल्कर के आत्मसमर्पण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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1. सैन्य एवं राजनीतिक भूमिका–
1792— तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान फ़ारसी दुभाषिए के रूप में कार्य किया।
1799— चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में निज़ाम की पैदल सेना की कमान संभाली।
1801— लॉर्ड वेलेजली के निजी सचिव एवं विशेष प्रतिनिधि बने।
2. फ़ारस के तीन मिशन–
प्रथम (1799–1801)— लॉर्ड वेलेजली के समय नियुक्त; 1800 में फ़ारस पहुँचे। उद्देश्य फ्रांसीसी प्रभाव रोकना और ज़मान शाह के ख़तरे का मुकाबला करना था।
द्वितीय (1808)—लॉर्ड मिंटो के समय भेजे गए; तेहरान में प्रवेश की अनुमति न मिलने से मिशन असफल रहा।
तृतीय (1810)—पुनः फ़ारस गए; सर गोर ओस्ली की नियुक्ति के कारण मिशन सफल नहीं हुआ।
3. आंग्ल-मराठा संबंध–1803–1805— द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान राजनीतिक वार्ताओं में भूमिका निभाई।
1804—दौलतराव सिंधिया के साथ सहायक संधि संबंधी वार्ता।
दिसंबर 1805—यशवंतराव होल्कर के साथ सहायक संधि।
4. तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध–लॉर्ड हेस्टिंग्स के अधीन राजनीतिक प्रतिनिधि तथा दक्कन सेना के तृतीय डिवीजन के कमांडर रहे।
दिसंबर 1817—मल्हार राव होल्कर के आत्मसमर्पण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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Forwarded from 𝗔𝗹𝗹 𝗙𝗿𝗲𝗲 𝗘-𝗕𝗼𝗼𝗸𝘀 ❣️
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राष्ट्रीय_एवं_अंतर्राष्ट्रीय_करेंट_अफेयर्स_2026_National_and_International.pdf
30.6 MB