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B.L.Grover ,A.m.,y.part 1.pdf
Save kr lo sabhi,
Baad main delete kar dena,
Ye copy right wali book hain
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प्राचीन भारत के जितने भी क्विज है जो भी एडमिन लोग अपने ग्रुप में क्विज करवाते हैं वो हम पर भेज देंगे तो बहुत बड़ी कृपा होगी
सबको फ्री में pdf देते हैं
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📰बिपिन चंद्र पाल की पत्रिका New India ने लॉर्ड कर्जन और लॉर्ड रिपन की नीतियों की तुलना की थी।
लॉर्ड रिपन: भारतीयों को धीरे-धीरे स्वशासन (Self-government) की ओर ले जाना चाहता था।
लॉर्ड कर्जन: भारत में ऐसी सरकार सुनिश्चित करना चाहता था जो ब्रिटिश सरकार के हितों के अनुसार काम करे।
👉🏻New India ने 15 जुलाई 1905 को कर्जन के उन प्रयासों की आलोचना की जिनका उद्देश्य जनता और शिक्षित मध्यम वर्ग के बीच एक मज़बूत राजनीतिक एकता बनने से रोकना था
📌कर्जन की विदेश नीति
कर्जन का प्रमुख उद्देश्य भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की सुरक्षा और मध्य एशिया में रूसी प्रभाव को सीमित करना था।
1903–1904 का तिब्बत अभियान: फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में ब्रिटिश अभियान ल्हासा पहुँचा।
1904 की ल्हासा संधि: तिब्बत के साथ व्यापार संबंधी समझौता हुआ; ब्रिटेन ने व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त कीं और चुंबी घाटी पर जुर्माने की अदायगी से जुड़ा कब्ज़ा किया।
1907 का एंग्लो-रूसी कन्वेंशन: ब्रिटेन और रूस के बीच फारस, अफगानिस्तान तथा तिब्बत से संबंधित प्रभाव-क्षेत्रों और संबंधों को लेकर समझौता हुआ।
https://t.me/historyfact00
लॉर्ड रिपन: भारतीयों को धीरे-धीरे स्वशासन (Self-government) की ओर ले जाना चाहता था।
लॉर्ड कर्जन: भारत में ऐसी सरकार सुनिश्चित करना चाहता था जो ब्रिटिश सरकार के हितों के अनुसार काम करे।
👉🏻New India ने 15 जुलाई 1905 को कर्जन के उन प्रयासों की आलोचना की जिनका उद्देश्य जनता और शिक्षित मध्यम वर्ग के बीच एक मज़बूत राजनीतिक एकता बनने से रोकना था
📌कर्जन की विदेश नीति
कर्जन का प्रमुख उद्देश्य भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की सुरक्षा और मध्य एशिया में रूसी प्रभाव को सीमित करना था।
1903–1904 का तिब्बत अभियान: फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में ब्रिटिश अभियान ल्हासा पहुँचा।
1904 की ल्हासा संधि: तिब्बत के साथ व्यापार संबंधी समझौता हुआ; ब्रिटेन ने व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त कीं और चुंबी घाटी पर जुर्माने की अदायगी से जुड़ा कब्ज़ा किया।
1907 का एंग्लो-रूसी कन्वेंशन: ब्रिटेन और रूस के बीच फारस, अफगानिस्तान तथा तिब्बत से संबंधित प्रभाव-क्षेत्रों और संबंधों को लेकर समझौता हुआ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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1889 के व्याख्या अधिनियम* के तहत ये सभी संरक्षित राज्य कानूनी रूप से 'भारत' का हिस्सा थे। इनका संचालन भारतीय राजनीतिक सेवा द्वारा किया जाता था, इनकी रक्षा भारतीय सेना करती थी और ये भारत के वायसराय के अधीन थे। रियासतों की मानक सूची भी वर्णानुक्रम में अबू धाबी से शुरू होती थी (परिशिष्ट देखें), और वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने स्वयं तर्क दिया था कि ओमान को 'लुस बेयला या केलात की तरह ही भारतीय साम्राज्य का एक देशी राज्य' माना जाना चाहिए। उस समय ब्रिटिश मानचित्रों से इन राज्यों की अनुपस्थिति पर काफी चर्चा हुई थी, और रॉयल एशियन सोसाइटी के एक व्याख्याता ने तो यहाँ तक मजाक में कहा था कि:
जैसे एक ईर्ष्यालु शेख अपनी पसंदीदा पत्नी को घूंघट में छिपाता है, वैसे ही ब्रिटिश अधिकारी अरब राज्यों की स्थितियों को इतने गहरे रहस्य में छिपा देते हैं कि दुर्भावनापूर्ण प्रचारकों को यह सोचने के लिए लगभग क्षमा कर दिया जा सकता है कि वहाँ कुछ भयानक घट रहा है।
* इस अधिनियम में भारत को 'किसी भी देशी राजकुमार या सरदार के ऐसे क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया था जो महामहिम की संप्रभुता के अधीन हो, जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल या गवर्नर जनरल के अधीनस्थ किसी गवर्नर या अन्य अधिकारी के माध्यम से किया जाता हो'। इस परिभाषा में नेपाल और ओमान भी शामिल थे - ये दोनों अनौपचारिक संरक्षित राज्य थे जिन्हें औपचारिक रूप से कभी भी रियासतों के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी, फिर भी उन्हें रियासतों की सूची में शामिल किया गया था। अधिक जानकारी के लिए, देखें विलिस, जे. एम. 'यमन को भारतीय बनाना: शाही सीमाओं को पुनर्लिखना'
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जैसे एक ईर्ष्यालु शेख अपनी पसंदीदा पत्नी को घूंघट में छिपाता है, वैसे ही ब्रिटिश अधिकारी अरब राज्यों की स्थितियों को इतने गहरे रहस्य में छिपा देते हैं कि दुर्भावनापूर्ण प्रचारकों को यह सोचने के लिए लगभग क्षमा कर दिया जा सकता है कि वहाँ कुछ भयानक घट रहा है।
* इस अधिनियम में भारत को 'किसी भी देशी राजकुमार या सरदार के ऐसे क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया था जो महामहिम की संप्रभुता के अधीन हो, जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल या गवर्नर जनरल के अधीनस्थ किसी गवर्नर या अन्य अधिकारी के माध्यम से किया जाता हो'। इस परिभाषा में नेपाल और ओमान भी शामिल थे - ये दोनों अनौपचारिक संरक्षित राज्य थे जिन्हें औपचारिक रूप से कभी भी रियासतों के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी, फिर भी उन्हें रियासतों की सूची में शामिल किया गया था। अधिक जानकारी के लिए, देखें विलिस, जे. एम. 'यमन को भारतीय बनाना: शाही सीमाओं को पुनर्लिखना'
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
रमेश चंद्र दत्त ने लार्ड कर्जन को खुला पत्र लिखा 📖✍️
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