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Topic--- नीति निर्देशक तत्व
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
खुश रहने के 6 नियम
1. कभी किसी से नफरत ना करें!
2.simple life जियें दिखावा ना करें।!
3. कभी भी किसी चीज की चिंता ना करें शांत रहे!
4. हर काम को उम्मीद के साथ करें!
5. अपना हर काम खूशी के साथ करें!
6. कितनी भी मुश्किल स्थिति क्यों न हो फिर भी हमेशा मुस्कुराते रहो।!
अगर अच्छा लगे तो सब जगह share करे....
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Forwarded from PDF WALLAH
History_Bhartiya_Itihas_Rajan_Sharma 6-12 .pdf
7.4 MB
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
वारेन हेस्टिंग्स ने मई 1772 में बंगाल में पाँच वर्षीय भूमि बंदोबस्त की योजना बनाने और लागू करने हेतु किस समिति का गठन किया?
(A) राजस्व बोर्ड (Board of Revenue)
(B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
(C) सिलेक्ट कमेटी
(D) कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कमेटी
उत्तर: (B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
व्याख्या: मई 1772 में सर्किट कमेटी नियुक्त की गई जिसमें हेस्टिंग्स और उसके चार परिषद सदस्य शामिल थे। इसने 5 वर्षीय नीलामी ठेका बंदोबस्त लागू किया।
(A) राजस्व बोर्ड (Board of Revenue)
(B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
(C) सिलेक्ट कमेटी
(D) कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कमेटी
उत्तर: (B) सर्किट कमेटी (Committee of Circuit)
व्याख्या: मई 1772 में सर्किट कमेटी नियुक्त की गई जिसमें हेस्टिंग्स और उसके चार परिषद सदस्य शामिल थे। इसने 5 वर्षीय नीलामी ठेका बंदोबस्त लागू किया।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
कॉर्नवालिस द्वारा पुनर्गठित सिविल अदालतों के पदानुक्रम में मुंसिफ अदालत के ऊपर कौन-सी अदालतें थीं जो 200 रुपये तक के मामलों की सुनवाई करती थीं?
(A) प्रांतीय अदालतें
(B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
(C) सदर दीवानी अदालत
(D) सर्किट कोर्ट
उत्तर: (B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
व्याख्या: 50 रुपये तक मुंसिफ, 200 रुपये तक रजिस्ट्रार, उसके ऊपर नगर/जिला अदालत, फिर 4 प्रांतीय अदालतें (कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, ढाका, पटना) और शीर्ष पर सदर दीवानी अदालत थी।
(A) प्रांतीय अदालतें
(B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
(C) सदर दीवानी अदालत
(D) सर्किट कोर्ट
उत्तर: (B) रजिस्ट्रार अदालतें (Registrar's Courts)
व्याख्या: 50 रुपये तक मुंसिफ, 200 रुपये तक रजिस्ट्रार, उसके ऊपर नगर/जिला अदालत, फिर 4 प्रांतीय अदालतें (कलकत्ता, मुर्शिदाबाद, ढाका, पटना) और शीर्ष पर सदर दीवानी अदालत थी।
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
First Grade / School Lecturer | UGC-NET/JRF | Assistant Professor
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⚠️ सबसे पहले एक जरूरी बात
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इतनी बड़ी सूची देखकर यह न सोचें कि आपको सारी किताबें पढ़नी या खरीदनी हैं।
हर किताब हर विद्यार्थी के लिए जरूरी नहीं होती। किताब चुनने से पहले अपना Exam Time, Target, तैयारी का Level और Reading Style जरूर देखें।
पर ध्यान दें।
⏳ 1 साल या उससे ज्यादा समय है तो Standard Books के साथ Reference Books से Concept और मजबूत कर सकते हैं।
किसी दूसरे विद्यार्थी के लिए अच्छी किताब जरूरी नहीं कि आपके लिए भी वही सबसे अच्छी हो।
किताबें आपकी तैयारी का साधन हैं, तैयारी का बोझ नहीं।
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🔴 1. PYQ / PRACTICE BOOKS
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• प्राचीन भारत
• मध्यकालीन भारत
• आधुनिक भारत
➜ PYQ + Objective Practice
• आरंभ से आज़ादी तक
➜ Competitive Exams
• प्राचीन भारत
• मध्यकालीन भारत
• आधुनिक भारत
• UGC-NET / History
• Previous Year Questions + Practice
• UGC-NET History
• Unit-wise Preparation + Practice
• UGC-NET History
• PYQ + Practice + Subject Coverage
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🟢 2. प्राचीन भारत
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📕 प्राचीन एवं पूर्व-मध्यकालीन भारत का इतिहास
➜ Detailed + Conceptual Study
📕 प्राचीन भारत का इतिहास / India's Ancient Past
➜ Conceptual Foundation
📕 प्राचीन भारत
➜ Reference + Competitive Preparation
📕 प्राचीन भारत का इतिहास
➜ Hindi Medium + Competitive Exams
📕 प्राचीन भारत
➜ Exam-oriented Preparation
📕 प्राचीन भारत
➜ Competitive Examination
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🔵 3. मध्यकालीन भारत
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📕 मध्यकालीन भारत
➜ Concept + Political/Social/Economic History
📕 मध्यकालीन भारत — भाग 1
📕 मध्यकालीन भारत — भाग 2
➜ Detailed Study
📕 मध्यकालीन भारत का इतिहास
➜ Reference Reading
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Competitive + Conceptual Preparation
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Exam-oriented Study
📕 मध्यकालीन भारत
➜ Revision + Competitive Preparation
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🟠 4. आधुनिक भारत
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📕 आधुनिक भारत का इतिहास
📕 भारत का स्वतंत्रता संग्राम
➜ Conceptual Understanding
📕 प्लासी से विभाजन तक
➜ Detailed + Analytical Study
📕 आधुनिक भारत
➜ Advanced / Analytical Reading
📕 आधुनिक भारत का इतिहास
➜ Competitive Exams + Revision
📕 आधुनिक भारत
➜ Exam-oriented Preparation
📕 आधुनिक भारत
➜ Competitive Examination
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🟣 5. विश्व इतिहास
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➜ आधुनिक विश्व इतिहास
➜ Mastering Modern World History
➜ World Civilizations
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🟤 6. इतिहासलेखन (HISTORIOGRAPHY)
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➜ UGC-NET/JRF के लिए महत्वपूर्ण।
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🟡 7. SOURCES + RESEARCH METHODOLOGY
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➜ इसके लिए UGC-NET History के Unit-wise Notes, IGNOU Material और PYQs साथ रखें।
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CONCEPT
↓
STANDARD BOOK
↓
NOTES
↓
PYQ
↓
REVISION
↓
MOCK / PRACTICE
हर विषय की 4–5 किताबें पढ़ना जरूरी नहीं है। सही किताब चुनें, उसे पूरा पढ़ें, Notes बनाएं, PYQs लगाएं और Revision करें।
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YouTube पर History 360 — रवि कुलरिया सर का चैनल देख सकते हैं। वहाँ अलग-अलग History Books के Book Reviews मिलते हैं।
किताब खरीदने से पहले Review देखकर भाषा, Content, Concept/Facts, Level और Presentation समझ सकते हैं।
अगली बार "कौन-सी किताब पढ़ूं?" पूछते समय अपना EXAM, TARGET, तैयारी का LEVEL और उपलब्ध TIME जरूर बताएं।
क्योंकि सही किताब का चुनाव
TIME + TARGET + LEVEL + READING STYLE
पर निर्भर करता है।
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ही तैयारी को मजबूत बनाती है।
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https://t.me/Ramsing2023
https://t.me/historyfact00
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No Document No History
🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
📚 History PDFs | Notes | PYQs | Research Material
🎓 NET/JRF • SET • Assistant Professor • Competitive Exam
@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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@RamsingRajput786 https://t.me/HistoryChatAdda
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Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
अक्टूबर 2026 :
[1] सुखना झील वेटलैंड (चंडीगढ़) (102 वाँ स्थल )
[2] सौंज झील वेटलैंड (उत्तर प्रदेश) ( 103 वाँ स्थल )
•दो भारत में नए रामसर स्थल जोड़े गए हैं, जिससे देश में कुल रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
@his_inq
GS Paper 1 के लिए अगत्यपूर्ण।
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भारत में अब कुल 103 रामसर स्थल।
🔸 देश में 2 नए वेटलैंड्स को आधिकारिक तौर पर 'रामसर स्थल' (Wetlands of International Importance) का दर्जा मिला है:
❇️ परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु :
रामसर कन्वेंशन: 2 फरवरी 1971 (ईरान)
भारत के पहले स्थल (1981): चिल्का झील (ओडिशा) & केवलादेव (राजस्थान)
सबसे बड़ा स्थल: सुंदरबन (पश्चिम बंगाल)
सर्वाधिक स्थल: तमिलनाडु।
@his_inq
👍1💯1
कभी-कभी समझ नहीं आता कि लोगों की सोच आखिर काम कैसे करती है! गांधीजी से जुड़ी कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी, कोई अनछुआ पहलू या कोई ऐसा तथ्य सामने रखो, जो उनके जीवन और विचारों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करे, तो उस पर न कोई चर्चा होती है, न कोई प्रतिक्रिया। ऐसा लगता है कि शायद किसी ने उस विषय को पढ़ने की ज़हमत तक नहीं उठाई।
लेकिन जैसे ही गांधीजी से जुड़ी कोई अलग जानकारी सामने आती है, सब सक्रिय हो जाते हैं— “गांधीजी का मज़ाक बना दिया, गांधीजी के बारे में ऐसा कैसे कह दिया, गांधीजी तो ये थे, गांधीजी तो वो थे!”
अगर किसी जानकारी में तथ्यात्मक गलती है, तो उसका खंडन कीजिए। अपने शोध, प्रमाण और प्रामाणिक स्रोतों के साथ अपनी बात रखिए। किसी तथ्य को गलत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके विरुद्ध सही तथ्य और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाएँ।
लेकिन समस्या यह है कि कई बार लोग शोध और प्रमाण के साथ खंडन करने के बजाय केवल बहस करने लगते हैं। उन्हें विषय की गहराई में जाने से अधिक अपनी राय को सही साबित करने में दिलचस्पी होती है।
आखिर किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अध्ययन करने का उद्देश्य उसकी प्रशंसा करना या उसकी आलोचना करने वालों का विरोध करना भर तो नहीं होना चाहिए। इतिहास को समझने के लिए भावनाओं से अधिक तथ्यों, तर्कों और शोध की आवश्यकता होती है।
बहस तो कोई भी कर सकता है, लेकिन तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए पढ़ना पड़ता है, शोध करना पड़ता है और प्रमाणों के आधार पर अपनी समझ विकसित करनी पड़ती है।
किसी व्यक्तित्व के प्रति सम्मान होना अच्छी बात है, लेकिन उस सम्मान के कारण उससे जुड़े तथ्यों को जानने, समझने और उन पर चर्चा करने से बचना उचित नहीं है। इतिहास आस्था या व्यक्तिगत पसंद से नहीं, बल्कि प्रमाणों और विवेक से समझा जाता है।
लेकिन जैसे ही गांधीजी से जुड़ी कोई अलग जानकारी सामने आती है, सब सक्रिय हो जाते हैं— “गांधीजी का मज़ाक बना दिया, गांधीजी के बारे में ऐसा कैसे कह दिया, गांधीजी तो ये थे, गांधीजी तो वो थे!”
अगर किसी जानकारी में तथ्यात्मक गलती है, तो उसका खंडन कीजिए। अपने शोध, प्रमाण और प्रामाणिक स्रोतों के साथ अपनी बात रखिए। किसी तथ्य को गलत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके विरुद्ध सही तथ्य और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाएँ।
लेकिन समस्या यह है कि कई बार लोग शोध और प्रमाण के साथ खंडन करने के बजाय केवल बहस करने लगते हैं। उन्हें विषय की गहराई में जाने से अधिक अपनी राय को सही साबित करने में दिलचस्पी होती है।
आखिर किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अध्ययन करने का उद्देश्य उसकी प्रशंसा करना या उसकी आलोचना करने वालों का विरोध करना भर तो नहीं होना चाहिए। इतिहास को समझने के लिए भावनाओं से अधिक तथ्यों, तर्कों और शोध की आवश्यकता होती है।
बहस तो कोई भी कर सकता है, लेकिन तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए पढ़ना पड़ता है, शोध करना पड़ता है और प्रमाणों के आधार पर अपनी समझ विकसित करनी पड़ती है।
किसी व्यक्तित्व के प्रति सम्मान होना अच्छी बात है, लेकिन उस सम्मान के कारण उससे जुड़े तथ्यों को जानने, समझने और उन पर चर्चा करने से बचना उचित नहीं है। इतिहास आस्था या व्यक्तिगत पसंद से नहीं, बल्कि प्रमाणों और विवेक से समझा जाता है।
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Forwarded from Achrya
World History Nath Publications.pdf
31.8 MB
World History Nath Publications.pdf
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
रणजीत गुहा ने अपनी पुस्तक 'A Rule of Property for Bengal' में स्थायी बंदोबस्त की बौद्धिक जड़ें किन दो यूरोपीय विचारधाराओं के संगम में मानी हैं?
(A) मार्क्सवाद और समाजवाद
(B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक (प्रकृतिंत्यवादी) विचारधारा
(C) प्रत्यक्षवाद और आदर्शवाद
(D) अराजकतावाद और उपयोगितावाद
उत्तर: (B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक
व्याख्या: रणजीत गुहा के अनुसार निजी संपत्ति की सुरक्षा और कृषि को धन का स्रोत मानने वाली फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक विचारधारा तथा ब्रिटिश अनुभवों ने स्थायी बंदोबस्त की नींव रखी।
(A) मार्क्सवाद और समाजवाद
(B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक (प्रकृतिंत्यवादी) विचारधारा
(C) प्रत्यक्षवाद और आदर्शवाद
(D) अराजकतावाद और उपयोगितावाद
उत्तर: (B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक
व्याख्या: रणजीत गुहा के अनुसार निजी संपत्ति की सुरक्षा और कृषि को धन का स्रोत मानने वाली फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक विचारधारा तथा ब्रिटिश अनुभवों ने स्थायी बंदोबस्त की नींव रखी।
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Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 108.pdf
21.6 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 107.pdf
22.2 MB