No Document No History
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
👏5❤1🔥1
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤1
Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
अक्टूबर 2026 :
[1] सुखना झील वेटलैंड (चंडीगढ़) (102 वाँ स्थल )
[2] सौंज झील वेटलैंड (उत्तर प्रदेश) ( 103 वाँ स्थल )
•दो भारत में नए रामसर स्थल जोड़े गए हैं, जिससे देश में कुल रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
@his_inq
GS Paper 1 के लिए अगत्यपूर्ण।
--------------------------------------------------
भारत में अब कुल 103 रामसर स्थल।
🔸 देश में 2 नए वेटलैंड्स को आधिकारिक तौर पर 'रामसर स्थल' (Wetlands of International Importance) का दर्जा मिला है:
❇️ परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु :
रामसर कन्वेंशन: 2 फरवरी 1971 (ईरान)
भारत के पहले स्थल (1981): चिल्का झील (ओडिशा) & केवलादेव (राजस्थान)
सबसे बड़ा स्थल: सुंदरबन (पश्चिम बंगाल)
सर्वाधिक स्थल: तमिलनाडु।
@his_inq
👍1💯1
कभी-कभी समझ नहीं आता कि लोगों की सोच आखिर काम कैसे करती है! गांधीजी से जुड़ी कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी, कोई अनछुआ पहलू या कोई ऐसा तथ्य सामने रखो, जो उनके जीवन और विचारों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करे, तो उस पर न कोई चर्चा होती है, न कोई प्रतिक्रिया। ऐसा लगता है कि शायद किसी ने उस विषय को पढ़ने की ज़हमत तक नहीं उठाई।
लेकिन जैसे ही गांधीजी से जुड़ी कोई अलग जानकारी सामने आती है, सब सक्रिय हो जाते हैं— “गांधीजी का मज़ाक बना दिया, गांधीजी के बारे में ऐसा कैसे कह दिया, गांधीजी तो ये थे, गांधीजी तो वो थे!”
अगर किसी जानकारी में तथ्यात्मक गलती है, तो उसका खंडन कीजिए। अपने शोध, प्रमाण और प्रामाणिक स्रोतों के साथ अपनी बात रखिए। किसी तथ्य को गलत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके विरुद्ध सही तथ्य और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाएँ।
लेकिन समस्या यह है कि कई बार लोग शोध और प्रमाण के साथ खंडन करने के बजाय केवल बहस करने लगते हैं। उन्हें विषय की गहराई में जाने से अधिक अपनी राय को सही साबित करने में दिलचस्पी होती है।
आखिर किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अध्ययन करने का उद्देश्य उसकी प्रशंसा करना या उसकी आलोचना करने वालों का विरोध करना भर तो नहीं होना चाहिए। इतिहास को समझने के लिए भावनाओं से अधिक तथ्यों, तर्कों और शोध की आवश्यकता होती है।
बहस तो कोई भी कर सकता है, लेकिन तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए पढ़ना पड़ता है, शोध करना पड़ता है और प्रमाणों के आधार पर अपनी समझ विकसित करनी पड़ती है।
किसी व्यक्तित्व के प्रति सम्मान होना अच्छी बात है, लेकिन उस सम्मान के कारण उससे जुड़े तथ्यों को जानने, समझने और उन पर चर्चा करने से बचना उचित नहीं है। इतिहास आस्था या व्यक्तिगत पसंद से नहीं, बल्कि प्रमाणों और विवेक से समझा जाता है।
लेकिन जैसे ही गांधीजी से जुड़ी कोई अलग जानकारी सामने आती है, सब सक्रिय हो जाते हैं— “गांधीजी का मज़ाक बना दिया, गांधीजी के बारे में ऐसा कैसे कह दिया, गांधीजी तो ये थे, गांधीजी तो वो थे!”
अगर किसी जानकारी में तथ्यात्मक गलती है, तो उसका खंडन कीजिए। अपने शोध, प्रमाण और प्रामाणिक स्रोतों के साथ अपनी बात रखिए। किसी तथ्य को गलत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसके विरुद्ध सही तथ्य और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाएँ।
लेकिन समस्या यह है कि कई बार लोग शोध और प्रमाण के साथ खंडन करने के बजाय केवल बहस करने लगते हैं। उन्हें विषय की गहराई में जाने से अधिक अपनी राय को सही साबित करने में दिलचस्पी होती है।
आखिर किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अध्ययन करने का उद्देश्य उसकी प्रशंसा करना या उसकी आलोचना करने वालों का विरोध करना भर तो नहीं होना चाहिए। इतिहास को समझने के लिए भावनाओं से अधिक तथ्यों, तर्कों और शोध की आवश्यकता होती है।
बहस तो कोई भी कर सकता है, लेकिन तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए पढ़ना पड़ता है, शोध करना पड़ता है और प्रमाणों के आधार पर अपनी समझ विकसित करनी पड़ती है।
किसी व्यक्तित्व के प्रति सम्मान होना अच्छी बात है, लेकिन उस सम्मान के कारण उससे जुड़े तथ्यों को जानने, समझने और उन पर चर्चा करने से बचना उचित नहीं है। इतिहास आस्था या व्यक्तिगत पसंद से नहीं, बल्कि प्रमाणों और विवेक से समझा जाता है।
💯6
Forwarded from Achrya
World History Nath Publications.pdf
31.8 MB
World History Nath Publications.pdf
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
रणजीत गुहा ने अपनी पुस्तक 'A Rule of Property for Bengal' में स्थायी बंदोबस्त की बौद्धिक जड़ें किन दो यूरोपीय विचारधाराओं के संगम में मानी हैं?
(A) मार्क्सवाद और समाजवाद
(B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक (प्रकृतिंत्यवादी) विचारधारा
(C) प्रत्यक्षवाद और आदर्शवाद
(D) अराजकतावाद और उपयोगितावाद
उत्तर: (B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक
व्याख्या: रणजीत गुहा के अनुसार निजी संपत्ति की सुरक्षा और कृषि को धन का स्रोत मानने वाली फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक विचारधारा तथा ब्रिटिश अनुभवों ने स्थायी बंदोबस्त की नींव रखी।
(A) मार्क्सवाद और समाजवाद
(B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक (प्रकृतिंत्यवादी) विचारधारा
(C) प्रत्यक्षवाद और आदर्शवाद
(D) अराजकतावाद और उपयोगितावाद
उत्तर: (B) ब्रिटिश वणिकवादी और फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक
व्याख्या: रणजीत गुहा के अनुसार निजी संपत्ति की सुरक्षा और कृषि को धन का स्रोत मानने वाली फ्रांसीसी फिजियोक्रेटिक विचारधारा तथा ब्रिटिश अनुभवों ने स्थायी बंदोबस्त की नींव रखी।
🤷♀2
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤8😁5🤷♀1🔥1👏1
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 108.pdf
21.6 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 107.pdf
22.2 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 106.pdf
21 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK 96.pdf
24.8 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK 97.pdf
6 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK 98.pdf
11.4 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK 99.pdf
27.2 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK 100.pdf
8.4 MB
Forwarded from PDF WALLAH
ENG_CA_JAN_2026_Current_Affairs_English_medium_international_national.pdf
4.2 MB
Forwarded from PDF WALLAH
MOOMAL DWIMASIK PATRIKA ANK - 110.pdf
26 MB