Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
🔸हरिपुरा अधिवेशन - 19-21 फरवरी,1938
🔸इस अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस के द्वारा की गईथी
🔸इस अधिवेशन में कांग्रेस ने रियासतों में जन आंदोलन चलाने का समर्थन देने का निर्णय किया ।
🔸इस अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति का गठन किया गया ।
🔸इस अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस ने हिंदी भाषा के लिए रोमन लिपि लागू करने की वकालत की।
@his_inq
कुछ अन्य जानकारी हो तो आप add कर दीजिए।
🔸इस अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस के द्वारा की गईथी
🔸इस अधिवेशन में कांग्रेस ने रियासतों में जन आंदोलन चलाने का समर्थन देने का निर्णय किया ।
🔸इस अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति का गठन किया गया ।
🔸इस अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस ने हिंदी भाषा के लिए रोमन लिपि लागू करने की वकालत की।
@his_inq
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जब दूसरों पर मुसीबत आती है,
तो हम उन्हें माफ़ करने और धैर्य रखने की सलाह देते हैं।
लेकिन जब वही दर्द खुद के हिस्से में आता है,
तो हमारी सोच और हमारे सिद्धांत बदलने लगते हैं।
दूसरों के दर्द पर ज्ञान देना आसान है,
लेकिन उसी दर्द को खुद सहना बहुत मुश्किल है।
इसलिए किसी के दर्द को समझे बिना उसे गलत मत ठहराइए,
क्योंकि वक्त बदलते देर नहीं लगती और परिस्थितियाँ कभी भी किसी की भी परीक्षा ले सकती हैं।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
डायरेक्ट एक्शन डे घोषणा :
29 जुलाई 1946 — बम्बई में मुस्लिम लीग काउंसिल– बम्बई में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग काउंसिल की बैठक हुई। काउंसिल ने कैबिनेट मिशन योजना को अपनी स्वीकृति वापस लेने का निर्णय किया।
इसी बैठक में लीग ने पाकिस्तान की माँग को प्राप्त करने के लिए “Direct Action” अपनाने का निर्णय किया।
अम्बेडकर और पाकिस्तान का प्रश्न–
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने 1941 में Thoughts on Pakistan प्रकाशित की, बाद में इसका संशोधित रूप Pakistan or the Partition of India के रूप में आया।
पार्थ चटर्जी ने अम्बेडकर की इस कथित निष्पक्षता को आलोचनात्मक ढंग से देखा।
चटर्जी के अनुसार अम्बेडकर की 1941 की पुस्तक की संरचना:
हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों को सामने रखकर तर्क-वितर्क के माध्यम से चर्चा की गई है।
लेकिन चटर्जी तुरंत यह भी संकेत करते हैं कि यह “perfect neutrality” (पूर्ण निष्पक्षता) नहीं है।
चटर्जी के अनुसार अम्बेडकर का पाकिस्तान के प्रश्न से संबंध केवल एक बाहरी, निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषक का नहीं था। उनका दलित समुदायों के भविष्य से भी गहरा राजनीतिक हित जुड़ा हुआ था।
https://t.me/historyfact00
29 जुलाई 1946 — बम्बई में मुस्लिम लीग काउंसिल– बम्बई में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग काउंसिल की बैठक हुई। काउंसिल ने कैबिनेट मिशन योजना को अपनी स्वीकृति वापस लेने का निर्णय किया।
इसी बैठक में लीग ने पाकिस्तान की माँग को प्राप्त करने के लिए “Direct Action” अपनाने का निर्णय किया।
अम्बेडकर और पाकिस्तान का प्रश्न–
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने 1941 में Thoughts on Pakistan प्रकाशित की, बाद में इसका संशोधित रूप Pakistan or the Partition of India के रूप में आया।
पार्थ चटर्जी ने अम्बेडकर की इस कथित निष्पक्षता को आलोचनात्मक ढंग से देखा।
चटर्जी के अनुसार अम्बेडकर की 1941 की पुस्तक की संरचना:
हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों को सामने रखकर तर्क-वितर्क के माध्यम से चर्चा की गई है।
लेकिन चटर्जी तुरंत यह भी संकेत करते हैं कि यह “perfect neutrality” (पूर्ण निष्पक्षता) नहीं है।
चटर्जी के अनुसार अम्बेडकर का पाकिस्तान के प्रश्न से संबंध केवल एक बाहरी, निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषक का नहीं था। उनका दलित समुदायों के भविष्य से भी गहरा राजनीतिक हित जुड़ा हुआ था।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
पुस्तक के मुख्य मुद्दे—
• कांग्रेस के प्रतिनिधित्व के दावे की आलोचना— अंबेडकर ने प्रश्न उठाया कि क्या कांग्रेस वास्तव में दलितों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती थी
• 1937 के चुनाव— उन्होंने चुनाव परिणामों और आरक्षित सीटों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस की सफलता को दलितों के स्वतंत्र समर्थन का प्रमाण मानने पर आपत्ति की
• पूना पैक्ट— अंबेडकर ने दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न और पृथक निर्वाचक मंडल से संयुक्त निर्वाचन की ओर हुए बदलाव के प्रभावों पर चर्चा की
• राजनीतिक अधिकार बनाम “सुधार”— उनका जोर था कि दलितों को केवल सामाजिक सुधार या सहानुभूति नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा चाहिए
• गांधी और हरिजन आंदोलन— अंबेडकर ने गांधी के दलित-उद्धार संबंधी दावों और उनके तरीकों की तीखी राजनीतिक आलोचना की तथा सामाजिक सुधार और राजनीतिक अधिकारों के बीच अंतर स्पष्ट किया
• “दलित ब्रिटिशों के हाथ का औजार हैं” वाले आरोप का जवाब— अंबेडकर ने इस आरोप को चुनौती दी कि कांग्रेस से स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार माँगने वाले दलित नेता ब्रिटिशों के समर्थक थे।
https://t.me/historyfact00
• कांग्रेस के प्रतिनिधित्व के दावे की आलोचना— अंबेडकर ने प्रश्न उठाया कि क्या कांग्रेस वास्तव में दलितों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती थी
• 1937 के चुनाव— उन्होंने चुनाव परिणामों और आरक्षित सीटों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस की सफलता को दलितों के स्वतंत्र समर्थन का प्रमाण मानने पर आपत्ति की
• पूना पैक्ट— अंबेडकर ने दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न और पृथक निर्वाचक मंडल से संयुक्त निर्वाचन की ओर हुए बदलाव के प्रभावों पर चर्चा की
• राजनीतिक अधिकार बनाम “सुधार”— उनका जोर था कि दलितों को केवल सामाजिक सुधार या सहानुभूति नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा चाहिए
• गांधी और हरिजन आंदोलन— अंबेडकर ने गांधी के दलित-उद्धार संबंधी दावों और उनके तरीकों की तीखी राजनीतिक आलोचना की तथा सामाजिक सुधार और राजनीतिक अधिकारों के बीच अंतर स्पष्ट किया
• “दलित ब्रिटिशों के हाथ का औजार हैं” वाले आरोप का जवाब— अंबेडकर ने इस आरोप को चुनौती दी कि कांग्रेस से स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार माँगने वाले दलित नेता ब्रिटिशों के समर्थक थे।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
पूना पैक्ट (24 सितंबर 1932)
लगातार वार्ता के बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा गया।
प्रमुख शर्तें
1. अलग निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए
2. उनके स्थान पर संयुक्त निर्वाचन (Joint Electorate) में आरक्षित सीटें दी गईं
3. केंद्रीय विधानमंडल में पहले 71 सीटें तय थीं बढ़ाकर 148 सीटें कर दी गईं
4. प्रांतीय विधानसभाओं में भी दलितों के लिए अनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया गया
5. महत्व (Significance)
यह भारत में आरक्षण व्यवस्था की नींव बना
दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला
हिंदू समाज का औपचारिक विभाजन टल गया
गांधीजी का अनशन समाप्त हुआ।
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लगातार वार्ता के बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा गया।
प्रमुख शर्तें
1. अलग निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए
2. उनके स्थान पर संयुक्त निर्वाचन (Joint Electorate) में आरक्षित सीटें दी गईं
3. केंद्रीय विधानमंडल में पहले 71 सीटें तय थीं बढ़ाकर 148 सीटें कर दी गईं
4. प्रांतीय विधानसभाओं में भी दलितों के लिए अनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया गया
5. महत्व (Significance)
यह भारत में आरक्षण व्यवस्था की नींव बना
दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला
हिंदू समाज का औपचारिक विभाजन टल गया
गांधीजी का अनशन समाप्त हुआ।
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®ग्रुप के सभी सदस्यों के लिए आवश्यक निर्देश ®
इस ग्रुप का उद्देश्य NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली NET /JRF EXAM के इतिहास (HISTORY) विषय के परीक्षार्थियों के आपसी सहयोग और आपसी संवाद को बनाना है, ताकि वे साथ आकर परीक्षा से जुड़ी अपनी समस्त शंकाओं और तैयारी से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान कर सके। पुराने व सफल परीक्षार्थियों के अनुभव का फायदा ग्रुप के सभी सदस्यों को मिले यह भी इस ग्रुप का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। परंतु इसके लिए ग्रुप के वातावरण से संबंधित कुछ नियमो का पालन सभी सदस्यों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।
🔹नियमावली: UGC NET JRF History
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
1.हमारा समूह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की पालना करता है।
2. अपने मेसेज को सीमित शब्दो में रखने का प्रयास करे।
3.किसी भी सदस्य द्वारा बिना प्रशासकों की सहमति किसी भी तरह का link शेयर करने पर blacklisted किया जायेगा।
4.कोई भी सदस्य किसी भी सदस्य को निजी संदेश न प्रेषित करें, अत्यावश्यक कार्य होने की दशा में प्रशासकों से संपर्क किया जा सकता है।
5.किसी भी महिला सदस्य को निजी संदेश प्रेषित कर परेशान न करें।
6.महिला सदस्य किसी भी अनजान व्यक्ति से संदेश प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति को तुरंत block कर दें।अगर अधिक समस्या हो तो screenshot आदि सबूत के साथ समूह के प्रशासक के समक्ष शिकायत दर्ज करें। और न कोई लड़की भी लडको को पर्सनल मेसेज करके परेशान करे। नियम दोनों पर लागू।
7.किसी भी सदस्य पर कटाक्ष करने, दुर्व्यवहार करने पर blacklisted किया जायेगा। समूह में सम्मानसूचक शब्द का प्रयोग करें।
8.समूह में निजी बातचीत प्रतिबंधित रहेगी।
9.ग्रुप में किसी प्रकार का प्रमोशनल मेसेज ना भेजे अन्यथा आपको ban कर दिया जायेगा।
10.ग्रुप में बातचीत के दौरान अपनी भाषा के स्तर को बनाए रखे, सामने वाले व्यक्ति के विचारो का सम्मान करे।
11.ग्रुप में धार्मिक, राजनेतिक मुद्दों पर विवाद या बातचीत प्रतिबंधित है।
12.किसी प्रश्न को पूछते या उसका उत्तर देते समय प्रामाणिकता का ध्यान रखे।
13.किसी प्रश्न/मुद्दे पर असहमति होने पर विनम्र भाषा में अपना पक्ष रखे और दूसरे पक्ष के विचारो का भी सम्मान करें।किसी भी प्रतिउत्तर हेतु धैर्य बनाकर रखें।
14. ग्रुप में किसी सामग्री या pdf की demand करने से पूर्व ग्रुप फाइल्स में सर्च कर लेवे।
15.समूह में अपना स्पष्ट नाम रखें।
16.समूह के सदस्य के रूप में उक्त नियमावली की पालना अनिवार्य रूप से सभी सदस्यों पर लागू रहेगी।
17.कोई भी सदस्य अपवाह नहीं फैलावे, अपनी बात प्रमाण के साथ रखें। अपवाह फैलाने पर आपको Blacklisted किया जायेगा।
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@Ramsing2023
प्रिय दोस्तों,
चैनल मै केवल इतिहास से संबधित और अच्छे अच्छे पोस्ट हो ही शेयर किया करे,
नियम सब पर लागू है।
इस ग्रुप का उद्देश्य NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली NET /JRF EXAM के इतिहास (HISTORY) विषय के परीक्षार्थियों के आपसी सहयोग और आपसी संवाद को बनाना है, ताकि वे साथ आकर परीक्षा से जुड़ी अपनी समस्त शंकाओं और तैयारी से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान कर सके। पुराने व सफल परीक्षार्थियों के अनुभव का फायदा ग्रुप के सभी सदस्यों को मिले यह भी इस ग्रुप का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। परंतु इसके लिए ग्रुप के वातावरण से संबंधित कुछ नियमो का पालन सभी सदस्यों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।
🔹नियमावली: UGC NET JRF History
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4.कोई भी सदस्य किसी भी सदस्य को निजी संदेश न प्रेषित करें, अत्यावश्यक कार्य होने की दशा में प्रशासकों से संपर्क किया जा सकता है।
5.किसी भी महिला सदस्य को निजी संदेश प्रेषित कर परेशान न करें।
6.महिला सदस्य किसी भी अनजान व्यक्ति से संदेश प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति को तुरंत block कर दें।अगर अधिक समस्या हो तो screenshot आदि सबूत के साथ समूह के प्रशासक के समक्ष शिकायत दर्ज करें। और न कोई लड़की भी लडको को पर्सनल मेसेज करके परेशान करे। नियम दोनों पर लागू।
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10.ग्रुप में बातचीत के दौरान अपनी भाषा के स्तर को बनाए रखे, सामने वाले व्यक्ति के विचारो का सम्मान करे।
11.ग्रुप में धार्मिक, राजनेतिक मुद्दों पर विवाद या बातचीत प्रतिबंधित है।
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13.किसी प्रश्न/मुद्दे पर असहमति होने पर विनम्र भाषा में अपना पक्ष रखे और दूसरे पक्ष के विचारो का भी सम्मान करें।किसी भी प्रतिउत्तर हेतु धैर्य बनाकर रखें।
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