Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
पुस्तक के मुख्य मुद्दे—
• कांग्रेस के प्रतिनिधित्व के दावे की आलोचना— अंबेडकर ने प्रश्न उठाया कि क्या कांग्रेस वास्तव में दलितों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती थी
• 1937 के चुनाव— उन्होंने चुनाव परिणामों और आरक्षित सीटों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस की सफलता को दलितों के स्वतंत्र समर्थन का प्रमाण मानने पर आपत्ति की
• पूना पैक्ट— अंबेडकर ने दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न और पृथक निर्वाचक मंडल से संयुक्त निर्वाचन की ओर हुए बदलाव के प्रभावों पर चर्चा की
• राजनीतिक अधिकार बनाम “सुधार”— उनका जोर था कि दलितों को केवल सामाजिक सुधार या सहानुभूति नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा चाहिए
• गांधी और हरिजन आंदोलन— अंबेडकर ने गांधी के दलित-उद्धार संबंधी दावों और उनके तरीकों की तीखी राजनीतिक आलोचना की तथा सामाजिक सुधार और राजनीतिक अधिकारों के बीच अंतर स्पष्ट किया
• “दलित ब्रिटिशों के हाथ का औजार हैं” वाले आरोप का जवाब— अंबेडकर ने इस आरोप को चुनौती दी कि कांग्रेस से स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार माँगने वाले दलित नेता ब्रिटिशों के समर्थक थे।
https://t.me/historyfact00
• कांग्रेस के प्रतिनिधित्व के दावे की आलोचना— अंबेडकर ने प्रश्न उठाया कि क्या कांग्रेस वास्तव में दलितों की स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती थी
• 1937 के चुनाव— उन्होंने चुनाव परिणामों और आरक्षित सीटों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस की सफलता को दलितों के स्वतंत्र समर्थन का प्रमाण मानने पर आपत्ति की
• पूना पैक्ट— अंबेडकर ने दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न और पृथक निर्वाचक मंडल से संयुक्त निर्वाचन की ओर हुए बदलाव के प्रभावों पर चर्चा की
• राजनीतिक अधिकार बनाम “सुधार”— उनका जोर था कि दलितों को केवल सामाजिक सुधार या सहानुभूति नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा चाहिए
• गांधी और हरिजन आंदोलन— अंबेडकर ने गांधी के दलित-उद्धार संबंधी दावों और उनके तरीकों की तीखी राजनीतिक आलोचना की तथा सामाजिक सुधार और राजनीतिक अधिकारों के बीच अंतर स्पष्ट किया
• “दलित ब्रिटिशों के हाथ का औजार हैं” वाले आरोप का जवाब— अंबेडकर ने इस आरोप को चुनौती दी कि कांग्रेस से स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार माँगने वाले दलित नेता ब्रिटिशों के समर्थक थे।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
पूना पैक्ट (24 सितंबर 1932)
लगातार वार्ता के बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा गया।
प्रमुख शर्तें
1. अलग निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए
2. उनके स्थान पर संयुक्त निर्वाचन (Joint Electorate) में आरक्षित सीटें दी गईं
3. केंद्रीय विधानमंडल में पहले 71 सीटें तय थीं बढ़ाकर 148 सीटें कर दी गईं
4. प्रांतीय विधानसभाओं में भी दलितों के लिए अनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया गया
5. महत्व (Significance)
यह भारत में आरक्षण व्यवस्था की नींव बना
दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला
हिंदू समाज का औपचारिक विभाजन टल गया
गांधीजी का अनशन समाप्त हुआ।
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लगातार वार्ता के बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा गया।
प्रमुख शर्तें
1. अलग निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए
2. उनके स्थान पर संयुक्त निर्वाचन (Joint Electorate) में आरक्षित सीटें दी गईं
3. केंद्रीय विधानमंडल में पहले 71 सीटें तय थीं बढ़ाकर 148 सीटें कर दी गईं
4. प्रांतीय विधानसभाओं में भी दलितों के लिए अनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया गया
5. महत्व (Significance)
यह भारत में आरक्षण व्यवस्था की नींव बना
दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला
हिंदू समाज का औपचारिक विभाजन टल गया
गांधीजी का अनशन समाप्त हुआ।
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®ग्रुप के सभी सदस्यों के लिए आवश्यक निर्देश ®
इस ग्रुप का उद्देश्य NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली NET /JRF EXAM के इतिहास (HISTORY) विषय के परीक्षार्थियों के आपसी सहयोग और आपसी संवाद को बनाना है, ताकि वे साथ आकर परीक्षा से जुड़ी अपनी समस्त शंकाओं और तैयारी से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान कर सके। पुराने व सफल परीक्षार्थियों के अनुभव का फायदा ग्रुप के सभी सदस्यों को मिले यह भी इस ग्रुप का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। परंतु इसके लिए ग्रुप के वातावरण से संबंधित कुछ नियमो का पालन सभी सदस्यों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।
🔹नियमावली: UGC NET JRF History
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1.हमारा समूह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की पालना करता है।
2. अपने मेसेज को सीमित शब्दो में रखने का प्रयास करे।
3.किसी भी सदस्य द्वारा बिना प्रशासकों की सहमति किसी भी तरह का link शेयर करने पर blacklisted किया जायेगा।
4.कोई भी सदस्य किसी भी सदस्य को निजी संदेश न प्रेषित करें, अत्यावश्यक कार्य होने की दशा में प्रशासकों से संपर्क किया जा सकता है।
5.किसी भी महिला सदस्य को निजी संदेश प्रेषित कर परेशान न करें।
6.महिला सदस्य किसी भी अनजान व्यक्ति से संदेश प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति को तुरंत block कर दें।अगर अधिक समस्या हो तो screenshot आदि सबूत के साथ समूह के प्रशासक के समक्ष शिकायत दर्ज करें। और न कोई लड़की भी लडको को पर्सनल मेसेज करके परेशान करे। नियम दोनों पर लागू।
7.किसी भी सदस्य पर कटाक्ष करने, दुर्व्यवहार करने पर blacklisted किया जायेगा। समूह में सम्मानसूचक शब्द का प्रयोग करें।
8.समूह में निजी बातचीत प्रतिबंधित रहेगी।
9.ग्रुप में किसी प्रकार का प्रमोशनल मेसेज ना भेजे अन्यथा आपको ban कर दिया जायेगा।
10.ग्रुप में बातचीत के दौरान अपनी भाषा के स्तर को बनाए रखे, सामने वाले व्यक्ति के विचारो का सम्मान करे।
11.ग्रुप में धार्मिक, राजनेतिक मुद्दों पर विवाद या बातचीत प्रतिबंधित है।
12.किसी प्रश्न को पूछते या उसका उत्तर देते समय प्रामाणिकता का ध्यान रखे।
13.किसी प्रश्न/मुद्दे पर असहमति होने पर विनम्र भाषा में अपना पक्ष रखे और दूसरे पक्ष के विचारो का भी सम्मान करें।किसी भी प्रतिउत्तर हेतु धैर्य बनाकर रखें।
14. ग्रुप में किसी सामग्री या pdf की demand करने से पूर्व ग्रुप फाइल्स में सर्च कर लेवे।
15.समूह में अपना स्पष्ट नाम रखें।
16.समूह के सदस्य के रूप में उक्त नियमावली की पालना अनिवार्य रूप से सभी सदस्यों पर लागू रहेगी।
17.कोई भी सदस्य अपवाह नहीं फैलावे, अपनी बात प्रमाण के साथ रखें। अपवाह फैलाने पर आपको Blacklisted किया जायेगा।
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@Ramsing2023
प्रिय दोस्तों,
चैनल मै केवल इतिहास से संबधित और अच्छे अच्छे पोस्ट हो ही शेयर किया करे,
नियम सब पर लागू है।
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2. अपने मेसेज को सीमित शब्दो में रखने का प्रयास करे।
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4.कोई भी सदस्य किसी भी सदस्य को निजी संदेश न प्रेषित करें, अत्यावश्यक कार्य होने की दशा में प्रशासकों से संपर्क किया जा सकता है।
5.किसी भी महिला सदस्य को निजी संदेश प्रेषित कर परेशान न करें।
6.महिला सदस्य किसी भी अनजान व्यक्ति से संदेश प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति को तुरंत block कर दें।अगर अधिक समस्या हो तो screenshot आदि सबूत के साथ समूह के प्रशासक के समक्ष शिकायत दर्ज करें। और न कोई लड़की भी लडको को पर्सनल मेसेज करके परेशान करे। नियम दोनों पर लागू।
7.किसी भी सदस्य पर कटाक्ष करने, दुर्व्यवहार करने पर blacklisted किया जायेगा। समूह में सम्मानसूचक शब्द का प्रयोग करें।
8.समूह में निजी बातचीत प्रतिबंधित रहेगी।
9.ग्रुप में किसी प्रकार का प्रमोशनल मेसेज ना भेजे अन्यथा आपको ban कर दिया जायेगा।
10.ग्रुप में बातचीत के दौरान अपनी भाषा के स्तर को बनाए रखे, सामने वाले व्यक्ति के विचारो का सम्मान करे।
11.ग्रुप में धार्मिक, राजनेतिक मुद्दों पर विवाद या बातचीत प्रतिबंधित है।
12.किसी प्रश्न को पूछते या उसका उत्तर देते समय प्रामाणिकता का ध्यान रखे।
13.किसी प्रश्न/मुद्दे पर असहमति होने पर विनम्र भाषा में अपना पक्ष रखे और दूसरे पक्ष के विचारो का भी सम्मान करें।किसी भी प्रतिउत्तर हेतु धैर्य बनाकर रखें।
14. ग्रुप में किसी सामग्री या pdf की demand करने से पूर्व ग्रुप फाइल्स में सर्च कर लेवे।
15.समूह में अपना स्पष्ट नाम रखें।
16.समूह के सदस्य के रूप में उक्त नियमावली की पालना अनिवार्य रूप से सभी सदस्यों पर लागू रहेगी।
17.कोई भी सदस्य अपवाह नहीं फैलावे, अपनी बात प्रमाण के साथ रखें। अपवाह फैलाने पर आपको Blacklisted किया जायेगा।
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सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 1
आधुनिक भारत पार्ट 1
41-90.pdf
117.6 MB
सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 2
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91-142.pdf
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सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 3
आधुनिक भारत पार्ट 3
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Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
⚔️ प्रथम एवं द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध: पंजाब पर अंग्रेजी अधिकार की कहानी
📌 "पंजाब अंग्रेजों के हाथ कैसे गया?"
1839 ई. में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य में उत्तराधिकार का संकट शुरू हो गया। सबसे पहले खड़क सिंह शासक बने, लेकिन शीघ्र ही उनका निधन हो गया। इसके बाद नौ निहाल सिंह और फिर शेर सिंह सत्ता में आए, किन्तु उनकी भी असामयिक मृत्यु हो गई।
परिणामस्वरूप पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता और दरबारी षड्यंत्र बढ़ने लगे।
1843 ई. में रणजीत सिंह के सबसे छोटे पुत्र दिलीप सिंह को पंजाब का शासक बनाया गया। चूँकि वे अल्पवयस्क थे, इसलिए उनकी माता रानी जिंद कौर (रानी झिंदन) संरक्षिका बनीं। प्रारम्भ में हीरा सिंह डोगरा वज़ीर थे, किन्तु बाद में लाल सिंह वज़ीर तथा तेज सिंह सेना के प्रधान बने।
इतिहासकारों के अनुसार लाल सिंह और तेज सिंह पर प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध के दौरान अंग्रेजों से गुप्त संपर्क रखने और विश्वासघात करने के आरोप लगाए गए, जिसने सिख सेना की स्थिति को कमजोर कर दिया।
⚔️ प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845–46)
इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—
📍 मुदकी (Mudki)
📍 फिरोजशाह (Ferozeshah)
📍 बद्दोवाल (Baddowal)
📍 अलीवाल (Aliwal)
📍 सबरांव/सोबरांव (Sobraon)
इन युद्धों में अंततः सिखों की पराजय हुई।
📜 लाहौर की संधि (8 मार्च 1846)
सिखों की पराजय के बाद अंग्रेजों और लाहौर दरबार के बीच 8 मार्च 1846 को लाहौर की संधि हुई। इसके प्रमुख प्रावधान थे—
✅ सतलज नदी के दक्षिण का क्षेत्र अंग्रेजों को मिला।
✅ लाहौर दरबार ने ₹1.5 करोड़ का युद्ध-हरजाना स्वीकार किया।
✅ पूरी राशि न दे पाने के कारण कश्मीर और हज़ारा का पर्वतीय क्षेत्र अंग्रेजों को सौंप दिया गया।
इसके बाद अंग्रेजों ने 16 मार्च 1846 को अमृतसर की संधि के माध्यम से कश्मीर को डोगरा शासक गुलाब सिंह को ₹1 करोड़ में सौंप दिया, जिससे डोगरा शासन की स्थापना हुई।
ध्यान दें: 1947 में जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह इसी डोगरा वंश के उत्तराधिकारी थे।
📜 भैरोवाल की संधि (16 दिसंबर 1846)
इस संधि के अंतर्गत—
1.रानी जिंद कौर को शासन से अलग कर दिया गया।
2.उन्हें ₹48,000 वार्षिक पेंशन देकर शेखुपुरा भेज दिया गया।
3.अंग्रेजी रेजिडेंट की देखरेख में एक संरक्षक परिषद गठित की गई।
4.पंजाब का प्रशासन अंग्रेजों के प्रभाव में आ गया।
द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1848–49)
1848 ई. में मुल्तान के गवर्नर मूलराज के विद्रोह से द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध प्रारम्भ हुआ।
इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—
📍 रामनगर
📍 चिलियाँवाला
📍 गुजरात
अंततः सिखों की पराजय हुई और 29 मार्च 1849 को लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया। इसके साथ ही स्वतंत्र सिख साम्राज्य का अंत हो गया।
https://t.me/ramjeetttpandeallhistoryhub
व्याख्यान सहित हल
https://t.me/+uoNbFdX-U4o3YmI1
Quiz group
📌 "पंजाब अंग्रेजों के हाथ कैसे गया?"
1839 ई. में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य में उत्तराधिकार का संकट शुरू हो गया। सबसे पहले खड़क सिंह शासक बने, लेकिन शीघ्र ही उनका निधन हो गया। इसके बाद नौ निहाल सिंह और फिर शेर सिंह सत्ता में आए, किन्तु उनकी भी असामयिक मृत्यु हो गई।
परिणामस्वरूप पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता और दरबारी षड्यंत्र बढ़ने लगे।
1843 ई. में रणजीत सिंह के सबसे छोटे पुत्र दिलीप सिंह को पंजाब का शासक बनाया गया। चूँकि वे अल्पवयस्क थे, इसलिए उनकी माता रानी जिंद कौर (रानी झिंदन) संरक्षिका बनीं। प्रारम्भ में हीरा सिंह डोगरा वज़ीर थे, किन्तु बाद में लाल सिंह वज़ीर तथा तेज सिंह सेना के प्रधान बने।
इतिहासकारों के अनुसार लाल सिंह और तेज सिंह पर प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध के दौरान अंग्रेजों से गुप्त संपर्क रखने और विश्वासघात करने के आरोप लगाए गए, जिसने सिख सेना की स्थिति को कमजोर कर दिया।
⚔️ प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845–46)
इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—
📍 मुदकी (Mudki)
📍 फिरोजशाह (Ferozeshah)
📍 बद्दोवाल (Baddowal)
📍 अलीवाल (Aliwal)
📍 सबरांव/सोबरांव (Sobraon)
इन युद्धों में अंततः सिखों की पराजय हुई।
📜 लाहौर की संधि (8 मार्च 1846)
सिखों की पराजय के बाद अंग्रेजों और लाहौर दरबार के बीच 8 मार्च 1846 को लाहौर की संधि हुई। इसके प्रमुख प्रावधान थे—
✅ सतलज नदी के दक्षिण का क्षेत्र अंग्रेजों को मिला।
✅ लाहौर दरबार ने ₹1.5 करोड़ का युद्ध-हरजाना स्वीकार किया।
✅ पूरी राशि न दे पाने के कारण कश्मीर और हज़ारा का पर्वतीय क्षेत्र अंग्रेजों को सौंप दिया गया।
इसके बाद अंग्रेजों ने 16 मार्च 1846 को अमृतसर की संधि के माध्यम से कश्मीर को डोगरा शासक गुलाब सिंह को ₹1 करोड़ में सौंप दिया, जिससे डोगरा शासन की स्थापना हुई।
ध्यान दें: 1947 में जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह इसी डोगरा वंश के उत्तराधिकारी थे।
📜 भैरोवाल की संधि (16 दिसंबर 1846)
इस संधि के अंतर्गत—
1.रानी जिंद कौर को शासन से अलग कर दिया गया।
2.उन्हें ₹48,000 वार्षिक पेंशन देकर शेखुपुरा भेज दिया गया।
3.अंग्रेजी रेजिडेंट की देखरेख में एक संरक्षक परिषद गठित की गई।
4.पंजाब का प्रशासन अंग्रेजों के प्रभाव में आ गया।
द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1848–49)
1848 ई. में मुल्तान के गवर्नर मूलराज के विद्रोह से द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध प्रारम्भ हुआ।
इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—
📍 रामनगर
📍 चिलियाँवाला
📍 गुजरात
अंततः सिखों की पराजय हुई और 29 मार्च 1849 को लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया। इसके साथ ही स्वतंत्र सिख साम्राज्य का अंत हो गया।
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