No Document No History
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🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
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No Document No History pinned «®ग्रुप के सभी सदस्यों के लिए आवश्यक निर्देश ® इस ग्रुप का उद्देश्य NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली NET /JRF EXAM के इतिहास (HISTORY) विषय के परीक्षार्थियों के आपसी सहयोग और आपसी संवाद को बनाना है, ताकि वे साथ आकर परीक्षा से जुड़ी अपनी समस्त शंकाओं और तैयारी…»
Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
शहरी क्रांति
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
300 विदेशी जहाज
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सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 1
41-90.pdf
117.6 MB
सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 2
91-142.pdf
140 MB
सुमित सरकार
आधुनिक भारत पार्ट 3
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Forwarded from All history hub 📖📖📖 (Pooja Pandey)
⚔️ प्रथम एवं द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध: पंजाब पर अंग्रेजी अधिकार की कहानी

📌 "पंजाब अंग्रेजों के हाथ कैसे गया?"
1839 ई. में महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य में उत्तराधिकार का संकट शुरू हो गया। सबसे पहले खड़क सिंह शासक बने, लेकिन शीघ्र ही उनका निधन हो गया। इसके बाद नौ निहाल सिंह और फिर शेर सिंह सत्ता में आए, किन्तु उनकी भी असामयिक मृत्यु हो गई।
परिणामस्वरूप पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता और दरबारी षड्यंत्र बढ़ने लगे।

1843 ई. में रणजीत सिंह के सबसे छोटे पुत्र दिलीप सिंह को पंजाब का शासक बनाया गया। चूँकि वे अल्पवयस्क थे, इसलिए उनकी माता रानी जिंद कौर (रानी झिंदन) संरक्षिका बनीं। प्रारम्भ में हीरा सिंह डोगरा वज़ीर थे, किन्तु बाद में लाल सिंह वज़ीर तथा तेज सिंह सेना के प्रधान बने।

इतिहासकारों के अनुसार लाल सिंह और तेज सिंह पर प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध के दौरान अंग्रेजों से गुप्त संपर्क रखने और विश्वासघात करने के आरोप लगाए गए, जिसने सिख सेना की स्थिति को कमजोर कर दिया।

⚔️ प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845–46)

इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—

📍 मुदकी (Mudki)
📍 फिरोजशाह (Ferozeshah)
📍 बद्दोवाल (Baddowal)
📍 अलीवाल (Aliwal)
📍 सबरांव/सोबरांव (Sobraon)
इन युद्धों में अंततः सिखों की पराजय हुई।


📜 लाहौर की संधि (8 मार्च 1846)
सिखों की पराजय के बाद अंग्रेजों और लाहौर दरबार के बीच 8 मार्च 1846 को लाहौर की संधि हुई। इसके प्रमुख प्रावधान थे—

✅ सतलज नदी के दक्षिण का क्षेत्र अंग्रेजों को मिला।
✅ लाहौर दरबार ने ₹1.5 करोड़ का युद्ध-हरजाना स्वीकार किया।
✅ पूरी राशि न दे पाने के कारण कश्मीर और हज़ारा का पर्वतीय क्षेत्र अंग्रेजों को सौंप दिया गया।
इसके बाद अंग्रेजों ने 16 मार्च 1846 को अमृतसर की संधि के माध्यम से कश्मीर को डोगरा शासक गुलाब सिंह को ₹1 करोड़ में सौंप दिया, जिससे डोगरा शासन की स्थापना हुई।
ध्यान दें: 1947 में जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह इसी डोगरा वंश के उत्तराधिकारी थे।


📜 भैरोवाल की संधि (16 दिसंबर 1846)

इस संधि के अंतर्गत—

1.रानी जिंद कौर को शासन से अलग कर दिया गया।

2.उन्हें ₹48,000 वार्षिक पेंशन देकर शेखुपुरा भेज दिया गया।

3.अंग्रेजी रेजिडेंट की देखरेख में एक संरक्षक परिषद गठित की गई।

4.पंजाब का प्रशासन अंग्रेजों के प्रभाव में आ गया।

द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1848–49)

1848 ई. में मुल्तान के गवर्नर मूलराज के विद्रोह से द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध प्रारम्भ हुआ।
इस युद्ध के प्रमुख युद्ध थे—

📍 रामनगर

📍 चिलियाँवाला

📍 गुजरात

अंततः सिखों की पराजय हुई और 29 मार्च 1849 को लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया। इसके साथ ही स्वतंत्र सिख साम्राज्य का अंत हो गया।


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व्याख्यान सहित हल

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प्राचीन_भारत_का_इतिहास_रामशरण_शर्मा.pdf
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प्राचीन भारत का इतिहास
रामशरण शर्मा | हिन्दी माध्यम UPSC
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