Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
🔱 गायकवाड़ वंश: वीरता से बड़ौदा के सिंहासन तक 🔱
पेशवा बाजीराव और छत्रपति शाहू महाराज के समय मराठा शक्ति दिल्ली तक फैल चुकी थी और गुजरात में मुगलों को पीछे धकेला गया। इसी काल में दामाजी राव गायकवाड़ उभरे, जिनकी वंश-परंपरा नंदाजी से जुड़ी थी—जिन्होंने एक गाय को बाघ से बचाया, जिससे ‘गायकवाड़’ नाम पड़ा। दामाजी ने बाजीराव की सेना में वीरता दिखाई और राक्षसभुवन के युद्ध में निज़ाम की हार के बाद शाहू महाराज से ‘समशेर बहादुर’ की उपाधि पाई। उनके वंशज दामाजी राव द्वितीय ने मुगलों से बड़ौदा छीनकर गायकवाड़ शासन स्थापित किया। 1761 के पानीपत युद्ध के बाद वंश की एक शाखा नासिक क्षेत्र में बस गई, जहाँ काशीराव और उनके परिवार ने पाटिल और प्रशासनिक भूमिका निभाई। बाद में, महाराज खंडेराव के समय, कवलाना के गायकवाड़ अपने शाही संबंधों के आधार पर बड़ौदा पहुँचे।📖✍🏻
https://t.me/historyfact00
पेशवा बाजीराव और छत्रपति शाहू महाराज के समय मराठा शक्ति दिल्ली तक फैल चुकी थी और गुजरात में मुगलों को पीछे धकेला गया। इसी काल में दामाजी राव गायकवाड़ उभरे, जिनकी वंश-परंपरा नंदाजी से जुड़ी थी—जिन्होंने एक गाय को बाघ से बचाया, जिससे ‘गायकवाड़’ नाम पड़ा। दामाजी ने बाजीराव की सेना में वीरता दिखाई और राक्षसभुवन के युद्ध में निज़ाम की हार के बाद शाहू महाराज से ‘समशेर बहादुर’ की उपाधि पाई। उनके वंशज दामाजी राव द्वितीय ने मुगलों से बड़ौदा छीनकर गायकवाड़ शासन स्थापित किया। 1761 के पानीपत युद्ध के बाद वंश की एक शाखा नासिक क्षेत्र में बस गई, जहाँ काशीराव और उनके परिवार ने पाटिल और प्रशासनिक भूमिका निभाई। बाद में, महाराज खंडेराव के समय, कवलाना के गायकवाड़ अपने शाही संबंधों के आधार पर बड़ौदा पहुँचे।📖✍🏻
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
1810-1811 में उत्तर भारत के किस प्रमुख नगर में ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए 'मकान-कर' (House Tax) के विरुद्ध व्यापक अहिंसक हड़ताल हुई थी?
(A) पटना
(B) बनारस
(C) कानपुर
(D) लखनऊ
उत्तर: (B) बनारस
— 1810-1811 में बनारस में मकान-कर के विरोध में जनता और व्यापारियों द्वारा दुकानें बंद कर सामूहिक शांतिपूर्ण हड़ताल व विरोध प्रदर्शन किया गया था।
(A) पटना
(B) बनारस
(C) कानपुर
(D) लखनऊ
उत्तर: (B) बनारस
— 1810-1811 में बनारस में मकान-कर के विरोध में जनता और व्यापारियों द्वारा दुकानें बंद कर सामूहिक शांतिपूर्ण हड़ताल व विरोध प्रदर्शन किया गया था।
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Forwarded from 𝗔𝗹𝗹 𝗙𝗿𝗲𝗲 𝗘-𝗕𝗼𝗼𝗸𝘀 ❣️
Forwarded from 𝗔𝗹𝗹 𝗙𝗿𝗲𝗲 𝗘-𝗕𝗼𝗼𝗸𝘀 ❣️
सक्सेस_मिरर_हिंदी_नवंबर_2026.pdf
13.8 MB
सक्सेस मिरर हिंदी - नवंबर 2026.pdf
Forwarded from 𝗔𝗹𝗹 𝗙𝗿𝗲𝗲 𝗘-𝗕𝗼𝗼𝗸𝘀 ❣️
सामान्य_ज्ञान_दर्पण_हिंदी_नवंबर_2026.pdf
21.1 MB
सामान्य ज्ञान दर्पण हिंदी - नवंबर 2026.pdf
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Top 100 Current Affairs (Hindi).pdf
5.3 MB
UPSSSC,PET,UP POLICE,लेखपाल,VDO, जूनियर असिस्टेंट:
करेंट अफेयर्स 100 पॉइंट्स
Current Affairs 100 points
करेंट अफेयर्स 100 पॉइंट्स
Current Affairs 100 points
Forwarded from 𝗧𝗵𝗲 𝗚𝕐𝗮𝗻𝗱𝗮𝘆𝗻𝗶 𝗩αυLƚ••°
PET 25 एडमिट कार्ड जारी......
लिंक👇
https://upsssc.gov.in/upssscadmitcard/admitCard.aspx?ID=MAIN
ज्वाइन https://t.me/histovibe04
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Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
राजस्थानी चित्रकला का स्वर्ण काल
▪️बीकानेर चित्रशैली - अनूप सिंह
▪️मेवाड़ चित्रशैली - जगतसिंह प्रथम
▪️किशनगढ़ चित्रशैली - सावंत सिंह
▪️मारवाड़ चित्रशैली - जसवंत सिंह
▪️चावड चित्रशैली - अमरसिंह प्रथम
▪️अलवर चित्रशैली - विनय सिंह
▪️कोटा बूंदी चित्रशैली - उम्मेदसिंह प्रथम
▪️जैसलमेर चित्रशैली - मूलराज द्वितीय
▪️आमेर चित्रशैली - मिर्जा राजा जयसिंह
▪️जयपुर चित्रशैली - सवाई प्रताप सिंह
@his_inq
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Forwarded from A B
No Document No History
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गीता का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद सर चार्ल्स विल्किंस द्वारा किया गया और इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्रकाशित किया गया। इसमें भारत के प्रथम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स द्वारा लिखित एक प्रस्तावना भी शामिल है, जिसमें हमें निम्नलिखित दूरदर्शी वाक्य मिलता है: 'भारतीय दर्शन के लेखक तब भी जीवित रहेंगे जब भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व का अस्तित्व बहुत पहले समाप्त हो चुका होगा, और जब इसके धन और शक्ति के स्रोत विस्मृति में विलीन हो जाएंगे।'
एक शताब्दी बाद, गीता का एक और सुंदर अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित हुआ, जिसका नाम था सर एडविन अर्नोल्ड (1832-1904) द्वारा रचित 'द सॉन्ग सेलेस्टियल'। उन्होंने भारत में, पुणे और अन्य स्थानों पर काम करते हुए संस्कृत भाषा सीखी थी। उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव हो गया और इंग्लैंड लौटने के बाद उन्होंने यह उत्कृष्ट पुस्तक और बुद्ध पर एक और उतनी ही उत्कृष्ट पुस्तक, 'द लाइट ऑफ एशिया' लिखी।
दोनों ग्रंथों के पचास-साठ से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। दोनों ही पाठक के हृदय को सीधे छूते हैं। भगवद् गीता मानवीय समस्याओं का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करती है। यही कारण है कि यह इतनी लोकप्रिय है। इसने भारत में सदियों से मानव मन को प्रेरित किया है और आज यह विश्व के विभिन्न भागों में लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। यह देखना रोचक है कि इन सभी देशों में गीता पढ़ने के बाद लोगों का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। अमेरिका में एमर्सन, वॉल्ट व्हिटमैन और थोरो जैसे विचारकों और लेखकों तथा इंग्लैंड में कार्लाइल ने गीता का अध्ययन करने के बाद अपने दृष्टिकोण में यह विस्तार और गहराई का अनुभव किया और उनके लेखन में भी एक नया संदेश झलकने लगा।
एक शताब्दी बाद, गीता का एक और सुंदर अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित हुआ, जिसका नाम था सर एडविन अर्नोल्ड (1832-1904) द्वारा रचित 'द सॉन्ग सेलेस्टियल'। उन्होंने भारत में, पुणे और अन्य स्थानों पर काम करते हुए संस्कृत भाषा सीखी थी। उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव हो गया और इंग्लैंड लौटने के बाद उन्होंने यह उत्कृष्ट पुस्तक और बुद्ध पर एक और उतनी ही उत्कृष्ट पुस्तक, 'द लाइट ऑफ एशिया' लिखी।
दोनों ग्रंथों के पचास-साठ से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। दोनों ही पाठक के हृदय को सीधे छूते हैं। भगवद् गीता मानवीय समस्याओं का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करती है। यही कारण है कि यह इतनी लोकप्रिय है। इसने भारत में सदियों से मानव मन को प्रेरित किया है और आज यह विश्व के विभिन्न भागों में लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। यह देखना रोचक है कि इन सभी देशों में गीता पढ़ने के बाद लोगों का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। अमेरिका में एमर्सन, वॉल्ट व्हिटमैन और थोरो जैसे विचारकों और लेखकों तथा इंग्लैंड में कार्लाइल ने गीता का अध्ययन करने के बाद अपने दृष्टिकोण में यह विस्तार और गहराई का अनुभव किया और उनके लेखन में भी एक नया संदेश झलकने लगा।
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