माधव... 🦚
अगर यह पिछले जन्म के पापों का फल है, तो मुझे हर परिणाम मंज़ूर है, माधव। लेकिन एक प्रश्न है, जिसका उत्तर मुझे आज तक नहीं मिला.......
मुझे तो याद ही नहीं कि मैंने पिछले जन्म में किसके साथ क्या किया था, कौन-सा पाप किया था, किसका दिल दुखाया था। फिर मेरे कर्मों का हिसाब मुझे याद क्यों नहीं है, माधव?
जब मुझे अपने ही अपराध का बोध नहीं, तो क्या मुझे दोषी ठहराना उचित है? क्या बिना गलती जाने, बिना अपराध समझे, इतना सब सहना उचित है?
माधव, अगर यह मेरे कर्मों का फल है, तो मुझे इतना तो बता दीजिए कि आखिर मेरा अपराध क्या है?
यह कैसी न्याय की रीति है, माधव, जहाँ सज़ा तो मिल रही है, लेकिन गुनाह याद ही नहीं है?
मैं आपके न्याय पर प्रश्न नहीं उठाना चाहती, माधव, बस अपने मन में उठते इन सवालों का उत्तर चाहती हूँ।
आखिर ऐसा कौन-सा हिसाब बाकी है, जिसे चुकाते-चुकाते मेरा मन थक गया है?
बताइए न, माधव... क्या हर पीड़ा सहना ही मेरे भाग्य में लिखा है, या कभी मेरे हिस्से में भी शांति आएगी?
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