ख़ामोशियों का दौर 🧿
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Welcome to ख़ामोशियों का दौर ❤️
दिल को छू जाने वाली शायरी और अनकहे अल्फ़ाज़।

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दौलत की शौक़ीन स्त्री और..,

स्त्री के शौक़ीन पुरुष,...

कभी वफादार नहीं हो सकते____
💯10💔3❤2😢2
हम दुनिया की बातों से मुकर जायेंगे__।

हम तेरी बेवफाई को भी वफ़ा बताएंगे__।

और जब कोई पूछेगा सच्चा इश्क मुक्कम्मल होता है क्या__।

तब उन्हें अपनी दास्तां बता कर सच से रूबरू कराएंगे____🖇🫶
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जब रिश्ते पर ही धूल पड़ चुकी हो

तो फिर ब्लाॅक अनब्लाॅक मायने नहीं
रखता...

☺️😡😡
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❤5
ये कैसी व्यवस्था है, ये कैसा विधान है?

जहाँ सिर्फ देह की बनावट ही, स्त्री की पहचान है।

हज़ारों सालों की बुद्धि, और सदियों का संघर्ष,

क्या फीका पड़ गया... देख चेहरे का उत्कर्ष?

वह त्वचा की सतही चमक, बस एक छलावा है, स्त्री का व्यक्तित्व तो, अग्नि का लावा है। सिर्फ गालों की सुर्खी ही क्यों, पैमाना बनी सुंदरता का?

क्यों जिक्र नहीं होता उसकी, आँखों की गहरी धीरता का?

उन आँखों में समंदर है, कहानियों का घेरा है,

उनमें कहीं क्रांति का सूरज, कहीं यादों का बसेरा है।

उसकी हँसी को देखो—

वह महज़ लबों की थिरकन नहीं,

अंधेरों को चीरती हुई, उम्मीदों की किरन है।

उसकी आवाज़ को सुनो—

वह महज़ कोमल सुर नहीं,

वो सोए हुए युग को जगाने वाला, इंकलाब का स्वर है।

सुंदरता तो वह है— जहाँ वह टूटकर, बिखरकर, फिर से खड़ी होती है,

जब वह अपने हक़ के लिए, अकेले ही बड़ी होती है।

उसका सौंदर्य उसके चेहरे में नहीं, उसके इरादों में है,

उसकी चमक दिखावटी दावों में नहीं, निभाए हुए वादों में है।

वह रूप से नहीं, अपनी अदम्य शक्ति से महान है,

वही नए युग की जननी, वही नया आसमान है।
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कुछ यादें याद रखना कुछ बातें याद रखना

ज़िन्दगी में हम तुम साथ नहीं रहेंगे, लेकिन हम कभी साथ थे, ये ज़िन्दगी भर याद रखना !
❤17🥰3
YAAD AYEGI HAR ROJ PAR AWAJ NA DUGA..🫶💐

LIKHUGA HAR SHAYARI TERE LIYE LEKIN NAAM NHI LUGA..🖇🦋
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❤12🔥1💯1
चाँद की तमन्ना थी, हाथों में हमारे,
पर वो तो सितारा बन कर, कहीं और चमक गई।
हमने दिल की हर धड़कन, उसके नाम की थी,
और वो बेवफ़ा हमें, रस्ते में ही छोड़ गई।


💔........ ........💔
💔9😢5❤1
[__समंदर के बीच ले जाकर फ़रेब करने की जरूरत क्या थी,



तुम कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम__]

Զเधे  Զเधे
»»——🥀🌿🥀——««
💯9❤8
कुछ कहानियों का अधूरा रह जाना भी जरूरी है ग़ालिब...!
हर मुकम्मल चीज जीवन जीने की जरूरत नहीं बताती..।।
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𝚃𝙴𝚁𝙴 𝙺𝙷𝙰𝚈𝙰𝙻𝙾 𝙼𝙴 𝙺𝙷𝙾𝚈𝙰 𝚁𝙴𝙷𝚃𝙰 𝙷𝚄..

𝙴𝙺 𝙶𝙴𝙷𝚁𝙸 𝙽𝙸𝙽𝙳 𝙼𝙴 𝚂𝙾𝚈𝙰 𝚁𝙴𝙷𝚃𝙰 𝙷𝚄..

𝚃𝙴𝚁𝙸 𝚈𝙰𝙰𝙳𝙾𝙽 𝙼𝙴 𝙷𝙾𝚃𝙸 𝙷𝙴 𝙰𝙽𝙺𝙷𝙴 𝙽𝚄𝙼 𝙼𝙴𝚁𝙸..

𝙺𝚄𝙲𝙷 𝙸𝚂 𝚃𝙰𝚁𝙷𝙰 𝙼𝙴 𝙿𝙰𝙻𝙺𝙾 𝙺𝙾 𝙱𝙷𝙸𝙶𝙾𝚈𝙴 𝚁𝙴𝙷𝚃𝙰 𝙷𝚄..🥀❤️💐
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❤17❤‍🔥3🔥2
शादी किसी और से,, लेकिन शारीरिक_संबंध किसी और से,, 💔👀

माना कि
ये बात  गलत है,, लेकिन ये आजकल प्रचलन बन चुका है,, "जब दिल पति के साथ बंधा हो और शरीर किसी और की बाँहों में सुकून ढूंढे — तब स्त्री के भीतर एक ऐसा द्वंद शुरू होता है, जिसे न समाज समझता है और न ही वो खुद..."
मेघा, 31 साल की, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और एक सुंदर, जिम्मेदार पत्नी।
उसकी शादी को 6 साल हो चुके थे — पति रोहित, एक भरोसेमंद, शांत स्वभाव का इंसान।
वो मेघा की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखता था, उसका सम्मान करता था, और उसे कभी कोई दुख नहीं दिया।

पर फिर भी, कहीं कुछ अधूरा था…

शादी ने सुरक्षा दी थी, पर वो बेचैनी नहीं… जो कभी दिल को धड़काती थी।

भाग 2: पुराने चैट की दस्तक

एक रात, मेघा फेसबुक पर स्क्रॉल कर रही थी, जब "अनुराग" का मैसेज चमका।
कॉलेज का पहला प्यार… पहली कविता… पहला चूम लेना… और पहली बेवफाई।

अनुराग ने एक लाइन लिखी थी:

"क्या अब भी वो पायल पहनती हो?"

मेघा के होठों पर एक पुरानी मुस्कान लौट आई।

भाग 3: दोबारा जुड़े धागे

कुछ दिनों की बातों ने दूरी मिटा दी।
अनुराग ने कहा —
"मैं अब भी तुझे पढ़ सकता हूँ मेघा… तू अब भी वही है — बस थोड़ा थक गई है।”

मेघा मुस्कुरा देती, लेकिन भीतर कहीं मान भी जाती।

वो चाहती थी कि कोई उसके जज़्बात को बिना बोले समझे…
और अनुराग वही था।

भाग 4: दो प्यार, दो धड़कनें

एक दिन अनुराग शहर आया — और मिलने की जिद की।
कॉफी शॉप की एक टेबल पर, 7 साल बाद — वो आमने-सामने बैठे।

वो बोला,
"क्या तेरे दिल में अब भी मेरे लिए कुछ बाकी है?"

मेघा ने धीरे से कहा —
"मैं तुम्हें भूली नहीं… पर मैंने खुद को संभाल लिया था।
अब मैं एक पत्नी हूँ… और रोहित एक बहुत अच्छा इंसान है।"

अनुराग ने जवाब दिया —
"अच्छा इंसान होना ही काफी होता है क्या?"

मेघा चुप रही।

भाग 5: प्यार की उलझी परिभाषा

मेघा अब दो रिश्तों के बीच जी रही थी —
रोहित की ममता और जिम्मेदारी… और अनुराग का जूनून और साया।

एक उसे थामे रखता था, दूसरा उसे उड़ने देता था।

उसने खुद से पूछा —
"क्या मैं पाप कर रही हूँ? या सिर्फ इंसान बनने की कोशिश?"

रातें करवटों में बीतने लगीं।
रोहित अब भी कुछ नहीं जानता था…
लेकिन वो मेघा की आंखों में थकान देखता था।

भाग 6: सच का सामना

एक शाम, रोहित ने पूछा —
"मेघा, क्या तू खुश है मेरे साथ?"

मेघा की आँखें भर आईं।
उसने धीमे से कहा —
"मैं तुम्हें छोड़ना नहीं चाहती… लेकिन मैं किसी और से भी बंधी हुई हूँ — भावनाओं से।"

रोहित सन्न रह गया।

कुछ देर बाद, उसने बस इतना कहा —
"मैं तुम्हारा मालिक नहीं हूँ मेघा…
लेकिन जो तुम्हारा हिस्सा मेरे पास है, उसे अधूरा मत छोड़ो।
जो भी फैसला ले, पूरे मन से ले… और सच्चे दिल से।"

भाग 7: एक चौराहा —

और एक औरत की जीत
अगले दिन मेघा ने अनुराग से मिलने को कहा।

वो आई, और बोली —
"तू मुझे मेरी अधूरी कविता जैसा लगता है अनुराग…
पर अब मैं पूरी हो चुकी हूँ — रोहित के साथ।
मैं तुझे चाहती थी, लेकिन शायद खुद से ज़्यादा नहीं।"

अनुराग ने सिर झुकाया —
"मैं तुझे खोकर भी खुश हूँ… क्योंकि इस बार तू टूटी नहीं, तू जी गई है।"

भाग 8: एक नया रिश्ता —

खुद से
मेघा अब रोहित के साथ है — लेकिन झूठ नहीं,
पूरे सच के साथ।

अब वो सिर्फ़ पत्नी नहीं है,
एक ऐसी औरत है जिसने अपने भीतर की उथल-पुथल को सुना, समझा, और संभाला।

उसने प्यार को सिर्फ़ देह नहीं,
आत्मा और ईमानदारी के साथ जिया।

अंतिम पंक्तियाँ —

जो दिल को झकझोर दें
🕯️ कभी-कभी एक औरत दो लोगों से प्यार कर बैठती है —
पर उसकी सबसे बड़ी वफ़ादारी उस रिश्ते से होती है, जिसमें वो अपनी सच्चाई के साथ जी सके।

💔 प्यार सिर्फ़ बाँटना नहीं होता…
कभी-कभी छोड़ना भी प्यार होता है — ताकि कोई भी अधूरा ना रहे...!!

💗🥀
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"क़िरदार देख कर लोग मुरीद हो जाते हैं,

हम जबरदस्ती दिलों पर कब्ज़ा नहीं करते" 💖
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Ummeed ki Thakaan

Kitabein wahi hain, kamra wahi hai, aur wahi purani raatein,

Magar ab thakne lagi hain mujhse, meri hi khud se baatein.

Salo ki mehnat, aankhon ka dard, aur darwaze pe khadi umeed,

Har baar wahi nakaami, har baar wahi rone ki tadeed.

Ghar walon ki nazron mein ab, ek sawal sa dikhta hai,

Mera wajood unki aankhon mein, ab dhundhla sa dikhta hai.

Umar ki seedhi chadh raha hoon, magar pair wahin thame hain,

Sab aage nikal gaye mujhse, bas mere hi raste jame hain.

Andar ek shor hai bhari, jo bahar nikal nahi pata,

Ghut raha hoon is khamoshi mein, dil ab sambhal nahi pata.

Kabhi lagta hai ruk jaun, kabhi lagta hai sab chhod doon,

Is saans ki dori ko bas, ek jhatke mein hi tod doon.

Magar ruko...

Kya meri hasti sirf ek panna, ek result ka mohtaj hai?

Kya meri jaan ki keemat, bas ek sarkari taj hai?

Maa ki mamta, baap ka saya, kya itne saste hain?

Mushkil hai rasta beshak, par abhi aur bhi raste hain.

Main haar sakta hoon jung, par zindagi se nahi hara hoon,

Main thaka zaroor hoon, magar abhi tak bechara nahi hoon.

Ek baar phir uthunga, khud ko thoda aur waqt doonga,

Main maut ko nahi, zindagi ko hi jeet kar dikhaunga.

✍️ Abhimanyu
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जिद भी बदल जाती है जनाब

कल जिसे पाने की जिद थी, आज उसे भुल जाने की है
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वो कहती है, “मर जाओगे मेरे लिए?”
मैंने हँस कर कहा,
“इश्क़ में तो हम पहले ही मर चुके हैं।”
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मेरी मोहब्बत को मौत का डर नहीं,
डर तो बस इतना है,
कहीं मेरी कमी उसे महसूस न हो।
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