स्त्रियों ने हमेशा सहा है।
सदियों से समाज ने उन्हें यह याद दिलाया है कि "तुम स्त्री हो।"
जब भी उन्होंने अपने पंख फैलाकर उड़ना चाहा,
उनके पंख काट दिए गए।
जब भी उन्होंने अपने लिए कोई निर्णय लेना चाहा,
उन्हें रोक दिया गया।
हर बार यह कहकर कि—
"तुम स्त्री हो।"
लेकिन हर बार समझौता केवल स्त्री ही क्यों करे?
हर बार वही क्यों झुके, वही क्यों रुके?
क्यों न अब समाज यह समझे कि
वह स्त्री है—अपूर्ण नहीं, पूर्ण है।
कमज़ोर नहीं, शक्ति का स्वरूप है।
किसी की छाया नहीं, स्वयं अपना अस्तित्व है।
जिस दिन समाज यह समझ जाएगा,
उस दिन स्त्री को यह साबित नहीं करना पड़ेगा
कि वह उड़ भी सकती है और आसमान भी रच सकती है।
सदियों से समाज ने उन्हें यह याद दिलाया है कि "तुम स्त्री हो।"
जब भी उन्होंने अपने पंख फैलाकर उड़ना चाहा,
उनके पंख काट दिए गए।
जब भी उन्होंने अपने लिए कोई निर्णय लेना चाहा,
उन्हें रोक दिया गया।
हर बार यह कहकर कि—
"तुम स्त्री हो।"
लेकिन हर बार समझौता केवल स्त्री ही क्यों करे?
हर बार वही क्यों झुके, वही क्यों रुके?
क्यों न अब समाज यह समझे कि
वह स्त्री है—अपूर्ण नहीं, पूर्ण है।
कमज़ोर नहीं, शक्ति का स्वरूप है।
किसी की छाया नहीं, स्वयं अपना अस्तित्व है।
जिस दिन समाज यह समझ जाएगा,
उस दिन स्त्री को यह साबित नहीं करना पड़ेगा
कि वह उड़ भी सकती है और आसमान भी रच सकती है।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤7
ज़िंदगी से ज़िंदगी छीनी गई है,
और उसे क़िस्मत बताया जा रहा है।
हाथ में खंजर छुपाए फिर रहे हैं,
काफ़िले को रहनुमा समझा रहा है।
सच को दफ़नाया गया है साज़िशों में,
झूठ को ही सच बनाया जा रहा है।
आग बस्ती में लगाई अपनों ने ही,
दोष हवाओं पर लगाया जा रहा है।
चेहरे पर मुस्कान का पर्दा चढ़ा कर,
अंदर ही अंदर ज़हर घोला जा रहा है।
रोने की मोहलत भी अब मिलती नहीं है,
ज़ख़्म पर हँसना सिखाया जा रहा है।
बिक रहे हैं फ़ैसले अब मंडियों में,
अदालतों को बस तमाशा बनाया जा रहा है।
कत्ल करते हैं वो बेहद सादगी से,
और ख़ून को पानी बताया जा रहा है।
और उसे क़िस्मत बताया जा रहा है।
हाथ में खंजर छुपाए फिर रहे हैं,
काफ़िले को रहनुमा समझा रहा है।
सच को दफ़नाया गया है साज़िशों में,
झूठ को ही सच बनाया जा रहा है।
आग बस्ती में लगाई अपनों ने ही,
दोष हवाओं पर लगाया जा रहा है।
चेहरे पर मुस्कान का पर्दा चढ़ा कर,
अंदर ही अंदर ज़हर घोला जा रहा है।
रोने की मोहलत भी अब मिलती नहीं है,
ज़ख़्म पर हँसना सिखाया जा रहा है।
बिक रहे हैं फ़ैसले अब मंडियों में,
अदालतों को बस तमाशा बनाया जा रहा है।
कत्ल करते हैं वो बेहद सादगी से,
और ख़ून को पानी बताया जा रहा है।
❤13🥰1
🌸 कान्हा का जन्म 🌸
जब धरती पर बढ़ा अत्याचार, तब कृष्ण कन्हैया आए,
कंस के पापों का अंत करने, बनकर रखवाले आए। 🦚
देवकी माँ और वासुदेव के घर जन्म लेने का संकल्प लिया,
अर्धरात्रि की उस पावन बेला में, जग ने नंदलाला पाया।
कारागार के बंद द्वार खुले, प्रभु की ऐसी माया थी,
वासुदेव ने सिर पर कान्हा को रखा, यमुना राह बनाई थी।
लहरों ने भी शीश झुकाया, शेषनाग ने छाया की,
यमुना पार कर गोकुल पहुँचे, जहाँ नंद-यशोदा की ममता थी।
नंद बाबा के आँगन में फिर, खुशियों ने डेरा डाला,
यशोदा मैया की गोद में आया, उनका नन्हा गोपाला।
अधर्म मिटाने धरती पर, धर्म का दीप जलाने आए,
जब-जब जग में संकट होगा, माधव फिर राह दिखाए।
राधे राधे 🌸🙏
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤12
लोग किरदार पूछेंगे
तो मैं नरमी बता दूँगी..,, 🤍
मोहब्बत को उसकी मैं
अपने होंठों की मुस्कान बता दूँगी.. 🤭✨
और जो पूछा किसी ने
उसकी ख़ूबसूरती के बारे में..,, 💗
मैं उसी पल
अपनी नज़रें झुका दूँगी.. 🫠
कितना सुंदर है वो
ये शर्माकर समझा दूँगी.. 🫣❤️
कारोबार पूछा किसी ने अगर
तो इश्क़ का नशा बता दूँगी..,, 🔥
पल-पल इबादत में जीते हैं हम
मैं प्रेम का आधार
तब भगवान को बता दूँगी.. 🥹🫂💘
तो मैं नरमी बता दूँगी..,, 🤍
मोहब्बत को उसकी मैं
अपने होंठों की मुस्कान बता दूँगी.. 🤭✨
और जो पूछा किसी ने
उसकी ख़ूबसूरती के बारे में..,, 💗
मैं उसी पल
अपनी नज़रें झुका दूँगी.. 🫠
कितना सुंदर है वो
ये शर्माकर समझा दूँगी.. 🫣❤️
कारोबार पूछा किसी ने अगर
तो इश्क़ का नशा बता दूँगी..,, 🔥
पल-पल इबादत में जीते हैं हम
मैं प्रेम का आधार
तब भगवान को बता दूँगी.. 🥹🫂💘
❤11
कान्हा के जन्म की खुशी
आज गोकुल में खुशियाँ छाई हैं,
मेरे कान्हा के जन्म की घड़ी आई है।
आँगन को फूलों से सजा दो,
हर ओर प्रेम की ज्योति जला दो।
नन्हे श्याम के लिए पालना सजा दो,
माखन-मिश्री का भोग लगा दो।
काजल का टीका कान्हा को लगाएँ,
मिलकर उनकी नज़र उतारें।
आओ सखियों, आओ मिलकर,
कान्हा की आरती उतारें।
दीप जलाएँ, शंख बजाएँ,
प्रेम से श्याम का स्वागत करें।
ढोल बजे और खुशियाँ गाएँ,
हर घर में राधे-राधे गूँजाएँ।
आज हमारे लल्ला का जन्मदिन है,
मिलकर इस दिन को यादगार बनाएँ।
कान्हा आए हैं खुशियाँ लेकर,
मन में प्रेम और चेहरे पर मुस्कान लेकर।
आओ सब मिलकर एक स्वर में बोलें—
नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की! 🙏
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤8
मित्रों की भीड़ नहीं चाहिए…
बस एक ऐसा मित्र चाहिए, जो भीड़ में भी अपना हो। ❤️
किस्मत वाले होते हैं वे लोग
जिनके पास सैकड़ों परिचित नहीं,
बल्कि कुछ गिने-चुने सच्चे मित्र होते हैं।
सच्चा मित्र वह नहीं
जो आपकी हर बात पर सहमति जताए,
बल्कि वह है
जो आपकी गलती पर आपको रोक सके।
वह नहीं जो आपकी सफलता से जले,
बल्कि वह है
जो आपकी खुशी में आपसे ज्यादा खुश हो।
मित्रता करनी हो तो
श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो—
जहाँ प्रेम के सामने गरीबी और वैभव का कोई अर्थ नहीं था।
मित्रता निभानी हो तो
श्रीकृष्ण और अर्जुन जैसी निभाओ—
जहाँ मित्र केवल साथ नहीं देता,
बल्कि आवश्यकता पड़ने पर
सही मार्ग भी दिखाता है।
और विश्वास निभाना हो तो
श्रीराम और सुग्रीव से सीखो—
जहाँ वचन केवल शब्द नहीं,
बल्कि निभाने का संकल्प था।
इसलिए हजारों दिखावटी रिश्तों से बेहतर है
एक सच्चा और ईमानदार मित्र।
जो आपके सामने आपका हो,
आपकी अनुपस्थिति में भी आपका सम्मान रखे,
आपकी गलती पर आपको समझाए
और आपकी कठिनाइयों में आपका साथ न छोड़े।
क्योंकि सच्ची मित्रता साथ रहने का नाम नहीं,
साथ निभाने का नाम है।
बस एक ऐसा मित्र चाहिए, जो भीड़ में भी अपना हो। ❤️
किस्मत वाले होते हैं वे लोग
जिनके पास सैकड़ों परिचित नहीं,
बल्कि कुछ गिने-चुने सच्चे मित्र होते हैं।
सच्चा मित्र वह नहीं
जो आपकी हर बात पर सहमति जताए,
बल्कि वह है
जो आपकी गलती पर आपको रोक सके।
वह नहीं जो आपकी सफलता से जले,
बल्कि वह है
जो आपकी खुशी में आपसे ज्यादा खुश हो।
मित्रता करनी हो तो
श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो—
जहाँ प्रेम के सामने गरीबी और वैभव का कोई अर्थ नहीं था।
मित्रता निभानी हो तो
श्रीकृष्ण और अर्जुन जैसी निभाओ—
जहाँ मित्र केवल साथ नहीं देता,
बल्कि आवश्यकता पड़ने पर
सही मार्ग भी दिखाता है।
और विश्वास निभाना हो तो
श्रीराम और सुग्रीव से सीखो—
जहाँ वचन केवल शब्द नहीं,
बल्कि निभाने का संकल्प था।
इसलिए हजारों दिखावटी रिश्तों से बेहतर है
एक सच्चा और ईमानदार मित्र।
जो आपके सामने आपका हो,
आपकी अनुपस्थिति में भी आपका सम्मान रखे,
आपकी गलती पर आपको समझाए
और आपकी कठिनाइयों में आपका साथ न छोड़े।
क्योंकि सच्ची मित्रता साथ रहने का नाम नहीं,
साथ निभाने का नाम है।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤7
सिर्फ़ चार महीने बचे हैं साल में... ⏳
कोई बदलाव नहीं हुआ हमारे हाल में। 💔
पुरानी उलझनें सुलझने का नाम नहीं लेतीं,
हम हर दिन फँस जाते हैं एक और नए जंजाल में। ⛓️😔
❤9
Forwarded from 🌸🪈 राधारानी की दुनिया 🦚✨ (राधा፝֟፝֟ रानी𝅯͢𓂃🦚)
आजकल के लोगों की मानसिकता शायद कुछ ऐसी हो गई है कि जो लोग कमजोर होते हैं, उनके चरित्र पर सवाल उठाना और उन पर उंगली उठाना सबसे आसान समझ लिया जाता है। क्योंकि उन्हें पता होता है कि सामने वाला कमजोर है, शायद कुछ बोल नहीं पाएगा, अपना पक्ष नहीं रख पाएगा—और इसी का फायदा उठाकर लोग उसके चरित्र को कटघरे में खड़ा कर देते हैं।
बहुत से लोग यहाँ शायरी और शब्दों में लड़कियों की इज़्ज़त करना जानते हैं, उनकी तारीफ़ करना जानते हैं, लेकिन जब बात वास्तविक ज़िंदगी में किसी लड़की के सम्मान की आती है, तो वही लोग पीछे हट जाते हैं। अगर सच में सम्मान करना आता, तो शायद वास्तविक जीवन में भी किसी के चरित्र पर बिना सोचे-समझे उंगली उठाने से पहले सौ बार सोचते।
कभी-कभी मैं सोचती हूँ—जब कोई किसी के साथ गलत करता है, उसे ठेस पहुँचाता है, उसके चरित्र पर सवाल उठाता है और फिर अपनी गलती को सही साबित करने के लिए तरह-तरह की बातें करता है, तो क्या उसका अंतरमन उसे रोकता नहीं होगा?
क्या उसके भीतर से कभी यह आवाज़ नहीं आती होगी कि—
“मैंने किसी के साथ गलत किया है।”
क्या उसका अंतरमन उससे यह सवाल नहीं करता होगा कि जिस इंसान को मैं गलत साबित करने की कोशिश कर रहा हूँ, क्या वास्तव में गलती उसकी है?
या फिर इंसान अपनी गलती स्वीकार करने से इतना डरने लगता है कि खुद को सही साबित करने के लिए किसी दूसरे की इज़्ज़त तक को दाँव पर लगा देता है?
मैं आपसे पूछना चाहूँगी—
क्या उनका अंतरमन उन्हें कभी जवाब देता होगा कि उन्होंने किसी के साथ गलत किया है?
क्या रात की खामोशी में, जब इंसान खुद के साथ अकेला होता है, तब उसकी अपनी अंतरात्मा उससे यह सवाल नहीं करती होगी कि—
“तुमने जो किया, क्या वह सच में सही था?”
शायद दुनिया के सामने कोई इंसान खुद को कितना भी सही साबित कर ले, लेकिन अपने अंतरमन के सामने सच्चाई से बच पाना इतना आसान नहीं होता।
बहुत से लोग यहाँ शायरी और शब्दों में लड़कियों की इज़्ज़त करना जानते हैं, उनकी तारीफ़ करना जानते हैं, लेकिन जब बात वास्तविक ज़िंदगी में किसी लड़की के सम्मान की आती है, तो वही लोग पीछे हट जाते हैं। अगर सच में सम्मान करना आता, तो शायद वास्तविक जीवन में भी किसी के चरित्र पर बिना सोचे-समझे उंगली उठाने से पहले सौ बार सोचते।
कभी-कभी मैं सोचती हूँ—जब कोई किसी के साथ गलत करता है, उसे ठेस पहुँचाता है, उसके चरित्र पर सवाल उठाता है और फिर अपनी गलती को सही साबित करने के लिए तरह-तरह की बातें करता है, तो क्या उसका अंतरमन उसे रोकता नहीं होगा?
क्या उसके भीतर से कभी यह आवाज़ नहीं आती होगी कि—
“मैंने किसी के साथ गलत किया है।”
क्या उसका अंतरमन उससे यह सवाल नहीं करता होगा कि जिस इंसान को मैं गलत साबित करने की कोशिश कर रहा हूँ, क्या वास्तव में गलती उसकी है?
या फिर इंसान अपनी गलती स्वीकार करने से इतना डरने लगता है कि खुद को सही साबित करने के लिए किसी दूसरे की इज़्ज़त तक को दाँव पर लगा देता है?
मैं आपसे पूछना चाहूँगी—
क्या उनका अंतरमन उन्हें कभी जवाब देता होगा कि उन्होंने किसी के साथ गलत किया है?
क्या रात की खामोशी में, जब इंसान खुद के साथ अकेला होता है, तब उसकी अपनी अंतरात्मा उससे यह सवाल नहीं करती होगी कि—
“तुमने जो किया, क्या वह सच में सही था?”
शायद दुनिया के सामने कोई इंसान खुद को कितना भी सही साबित कर ले, लेकिन अपने अंतरमन के सामने सच्चाई से बच पाना इतना आसान नहीं होता।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
👍7❤4
ख़ामोशियों का दौर 🧿 pinned «सिर्फ़ चार महीने बचे हैं साल में... ⏳ कोई बदलाव नहीं हुआ हमारे हाल में। 💔 पुरानी उलझनें सुलझने का नाम नहीं लेतीं, हम हर दिन फँस जाते हैं एक और नए जंजाल में। ⛓️😔»
तुम नए ज़माने के लड़के हो
सालो से चली आ रही
पुरुष प्रधानता को
ख़त्म कर देना।
तुम घुस जाना घर कि रसोई मे
और औरतों के साथ
खाना भी बनाना
घर के कामों मे हाथ भी बटाना
और साथ बैठकर भोजन भी
खाना।
रात में कभी माँ के तो कभी पत्नी के
पैर भी दबाना,
बहुत बेटियों को तुम खूब पढ़ना
उन्हें और उनके सपनो को
कभी घूँघट मे नहीं छुपाना।
मासिक धर्म मे पूछना हाल उनका
और रखना उनका बहुत ख्याल।
ना करना तुम कन्यादान पहले पूछ लेना
उनका हाल।
उनके मन में बैठे डर को तुम मिटाना।
उनके दिलों में प्रेम तुम जगाना।
अपने बराबर उनको हमेशा
तुम रखना,
नहीं अपने से काम बताना
उनके साथ मिलकर तुम
पुरुष प्रधानता को मिटाना।
सालो से चली आ रही
पुरुष प्रधानता को
ख़त्म कर देना।
तुम घुस जाना घर कि रसोई मे
और औरतों के साथ
खाना भी बनाना
घर के कामों मे हाथ भी बटाना
और साथ बैठकर भोजन भी
खाना।
रात में कभी माँ के तो कभी पत्नी के
पैर भी दबाना,
बहुत बेटियों को तुम खूब पढ़ना
उन्हें और उनके सपनो को
कभी घूँघट मे नहीं छुपाना।
मासिक धर्म मे पूछना हाल उनका
और रखना उनका बहुत ख्याल।
ना करना तुम कन्यादान पहले पूछ लेना
उनका हाल।
उनके मन में बैठे डर को तुम मिटाना।
उनके दिलों में प्रेम तुम जगाना।
अपने बराबर उनको हमेशा
तुम रखना,
नहीं अपने से काम बताना
उनके साथ मिलकर तुम
पुरुष प्रधानता को मिटाना।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤19👍4🥰1
लड़कों को भी रोने का हक़ है।
बचपन से ही जब कोई लड़का गिरता है और उसे चोट लगती है, तो अक्सर कहा जाता है—
“तुम लड़के हो, रोते नहीं।”
डर लगे, मन दुखे या कोई बात भीतर तक चोट कर जाए,
फिर भी उसे यही सिखाया जाता है कि
“तुम मजबूत हो, तुम्हें रोना नहीं चाहिए।”
लेकिन क्या मजबूत होने का मतलब अपनी भावनाओं को दबाना है?
लड़कों के पास भी दिल होता है,
उन्हें भी दर्द होता है, डर लगता है,
उन्हें भी किसी के सामने अपना मन हल्का करने की ज़रूरत होती है।
रोना कमजोरी नहीं है।
अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें स्वीकार करना भी ताकत है।
समाज को लड़कों से यह कहना बंद करना होगा कि
“तुम लड़के हो, रो नहीं सकते।”
उन्हें यह कहने की ज़रूरत है—
“तुम इंसान हो, तुम्हें महसूस करने का पूरा हक़ है।”
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤11
माधव सखी, चलो अपने सारे ग़मों को कर दें Delete,
पुरानी यादों के पन्नों को भी कर दें Delete।
आओ सखी, अब खुशियों की दुनिया में कदम रखें,
जो दिल को दुखाए, उन बातों को कर दें Delete।
जो बीत गया, उसे फिर से क्यों याद करें,
चलो आज से हर शिकवे को कर दें Delete।
माधव के नाम से दिल को सुकून मिलता रहे,
हर उदासी को प्रेम की धुन में कर दें Delete।
नई सुबह है, नई राह है, नई सी मुस्कान,
आओ सखी, अपनी ज़िंदगी को फिर से करें Restart।
पुरानी यादों के पन्नों को भी कर दें Delete।
आओ सखी, अब खुशियों की दुनिया में कदम रखें,
जो दिल को दुखाए, उन बातों को कर दें Delete।
जो बीत गया, उसे फिर से क्यों याद करें,
चलो आज से हर शिकवे को कर दें Delete।
माधव के नाम से दिल को सुकून मिलता रहे,
हर उदासी को प्रेम की धुन में कर दें Delete।
नई सुबह है, नई राह है, नई सी मुस्कान,
आओ सखी, अपनी ज़िंदगी को फिर से करें Restart।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤15
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
People judge girls in seconds, without knowing the battles they’ve fought. ✨
❤6
माँ-बहन की गालियाँ देने वाले लोगों से एक सवाल—
आख़िर इन गालियों से आप साबित क्या करना चाहते हैं?
जिस इंसान ने आपके साथ गलत किया है,
उसे उसके कर्मों के लिए जवाब दीजिए।
उसकी माँ या बहन ने आपके साथ कुछ नहीं किया,
फिर उन्हें गाली देकर आप किस बात का बदला ले रहे हैं?
किसी के शरीर या निजी अंगों को लेकर
अपशब्द कहना भी गुस्सा नहीं,
बल्कि आपकी भाषा और सोच का परिचय है।
गुस्सा आना स्वाभाविक है,
लेकिन गुस्से में भी शब्दों की मर्यादा रखना
हमारे संस्कार और समझ की पहचान है।
किसी को चोट पहुँचाने के लिए
शब्दों को हथियार मत बनाइए।
बोलने से पहले एक पल सोचिए—
क्योंकि सामने वाले के कर्म उसके अपने हैं,
लेकिन आपके शब्द आपकी पहचान हैं।
आख़िर इन गालियों से आप साबित क्या करना चाहते हैं?
जिस इंसान ने आपके साथ गलत किया है,
उसे उसके कर्मों के लिए जवाब दीजिए।
उसकी माँ या बहन ने आपके साथ कुछ नहीं किया,
फिर उन्हें गाली देकर आप किस बात का बदला ले रहे हैं?
किसी के शरीर या निजी अंगों को लेकर
अपशब्द कहना भी गुस्सा नहीं,
बल्कि आपकी भाषा और सोच का परिचय है।
गुस्सा आना स्वाभाविक है,
लेकिन गुस्से में भी शब्दों की मर्यादा रखना
हमारे संस्कार और समझ की पहचान है।
किसी को चोट पहुँचाने के लिए
शब्दों को हथियार मत बनाइए।
बोलने से पहले एक पल सोचिए—
क्योंकि सामने वाले के कर्म उसके अपने हैं,
लेकिन आपके शब्द आपकी पहचान हैं।
राधे राधे 🙏
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
❤11
जो हर हाल में गुजार सके उम्र सारी, हमसफर ऐसा वफादार चुनना,
बहुत मिलेंगे चेहरे के खूबसूरत लोग लेकिन तुम किरदार चुनना...❤️
बहुत मिलेंगे चेहरे के खूबसूरत लोग लेकिन तुम किरदार चुनना...❤️
❤9🥰1
💊7
💔🥀.......
Raat bhar jagte hai hum
Kuch aise logo ke liye
Jinhe kabhi din ke ujalon me bhi
Hamari yaad n aati
💔🥀.......
Raat bhar jagte hai hum
Kuch aise logo ke liye
Jinhe kabhi din ke ujalon me bhi
Hamari yaad n aati
💔🥀.......
❤8👍2
💔🥀........
फिर कभी मेरी तरफ मत देखना।
मुझे फिर लगेगा कि तुम मुझसे
मोहब्बत करते हो।
बहुत मुश्किल से
खुद को ये समझाया है
कि अब तुम मेरे नहीं हो।
तुम्हारी एक नजर भी
मेरी सारी कोशिशों को
एक पल में झूठा कर देती है।
इसलिए दूर रहना मुझसे।
मुझे अपनी आंखों से
फिर कोई उम्मीद मत देना।
क्योंकि मैं जानती हूं,
तुम शायद कुछ नहीं कहोगे।
पर मेरा दिल
तुम्हारी एक नजर को भी
मोहब्बत समझ लेगा।
और मैं फिर वही गलती नहीं करना चाहती।
जहां तुम्हारी खामोशी को भी
अपने लिए प्यार समझ बैठूं।
💔🥀..........
फिर कभी मेरी तरफ मत देखना।
मुझे फिर लगेगा कि तुम मुझसे
मोहब्बत करते हो।
बहुत मुश्किल से
खुद को ये समझाया है
कि अब तुम मेरे नहीं हो।
तुम्हारी एक नजर भी
मेरी सारी कोशिशों को
एक पल में झूठा कर देती है।
इसलिए दूर रहना मुझसे।
मुझे अपनी आंखों से
फिर कोई उम्मीद मत देना।
क्योंकि मैं जानती हूं,
तुम शायद कुछ नहीं कहोगे।
पर मेरा दिल
तुम्हारी एक नजर को भी
मोहब्बत समझ लेगा।
और मैं फिर वही गलती नहीं करना चाहती।
जहां तुम्हारी खामोशी को भी
अपने लिए प्यार समझ बैठूं।
💔🥀..........
❤11
जिस्म आयेगा किसी और के हिस्से में..
दिल आज भी किसी और की अमानत है 💞
दिल आज भी किसी और की अमानत है 💞
❤9