सनातन धर्म • Sanatan Dharma
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शंका - एक बालक पैदा होने पर गर्भ से रोता हुआ क्यों बाहर आता है? उसे तो जन्म लेने की प्रसन्नता होनी चाहिए?

समाधान - चिकित्सा विज्ञान के अनुसार रोने से फेफड़े खुलते है और वह सुप्त अवस्था से जागृत अवस्था में प्रवेश कर जाता है। गर्भ नाल के छेदन के पश्चात वह स्वतन्त्र जीवन जीने के लायक हो जाता है।

जबकि दार्शनिक व्याख्या के अनुसार वह रोता इसलिए है क्योंकि उसे फिर से एक बार जन्म लेना पड़ा। 9 मास तक माता के गर्भ में उलटी लटकी आत्मा, मूत्र, रक्त आदि में सनी हुई, घोर अन्धकार से ग्रसित होती हैं। वह हर समय ईश्वर से प्रार्थना करती है कि उसे उसे दुःख से मुक्ति दिलाये। पर जब उसका जन्म होता है तो उसे यह ज्ञान होता है कि उसकी मुक्ति नहीं हुई। उसने तो फिर से जन्म ले लिया। उसे फिर से आवागमन के चक्कर में आना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके कर्म ऐसे नहीं थे जिससे उसकी मुक्ति हो। ऐसा इसलिए क्योंकि वह मोक्ष मार्ग का पथिक तो बना पर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँचा। अब उसे फिर से शैशव, जवानी, बुढ़ापा देखना पड़ेगा। उसे सर्दी-गर्मी, भूख-प्यास, व्याधि, मोह, क्रोध, स्वजनों का बिछड़ना आदि देखने पड़ेंगे। उसे फिर पिछले अच्छे-बुरे कर्मों का फल भोगना पड़ेगा। उसे फिर से सांसारिक जीव बनकर मुक्ति की प्रतीक्षा चिरकाल तक करनी पड़ेगी। यह स्मृति होते ही उसका इस जगत में जन्म लेते ही रोना शुरू हो जाता हैं। यह बोध होते ही उसे अपने पूर्व कर्मों में रह गई क्षीणता का स्मरण हो जाता है। यह बोध होते ही उसे आत्मग्लानि का अनुभव होने लगता है। इसलिए उसका नया जीवन रोने से आरम्भ होता है।

जो यह कहते है कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ जायेगा। वह सांसारिक पदार्थों के उपलक्ष में तो सही हो सकता है पर दार्शनिक विचार से देखे तो मनुष्य अपने साथ पूर्व जन्मों में किये गए कर्मों के फल लेकर आता है और इस जन्म में अनेकों को भोगता भी हैं। और इस जन्म में किये गए कर्मों में से अनेकों के फल भोगने के लिए अगले जन्म में भी साथ ले जाता हैं। इसलिए मनुष्य कभी खाली हाथ तो नहीं आता।

इसलिए हे मनुष्यों! पवित्र आत्मा के जन्म के रोने से सीख लो। यह जन्म तो हो गया। पर अभी और कितने जन्मों तक माता के गर्भ का अन्धकार देखोगे? कितने जन्मों तक यह आवागमन के चक्र् में फंसे रहोगे? कितने जन्मों तक मोक्ष के चरम सुख का आनंद भोगने ने से दूर रहोगे।
सत्कर्म करते हुए योग मार्ग का पथिक बने और दुःखों छूटकर मोक्ष के अधिकारी बने।

🪷
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