लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः। तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥
- भावार्थ :
अधिक लाड़ से अनेक दोष तथा अधिक ताड़न से गुण आते हैं । इसलिए पुत्र और शिष्य को लालन की नहीं ताड़न की आवश्यकता होती है ?mac.dev.sanskritslokas
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