Sanatani Balika🚩
1.08K subscribers
9.16K photos
1.04K videos
9.45K links
Download Telegram
🔱🙏जय श्री ॐकारेश्वर महादेव 🙏 🔱

कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।
सदैवमान्धातृपुरे वसन्तमो‌ङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥

श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंगजी नर्मदा तट खण्डवा म.प्र. से आज का मंगला आरती श्रृंगार दर्शन

आश्विन कृष्ण पक्ष, तिथि षष्ठी, संवत् २०८३, दिन- शुक्रवार, ०२अक्टूबर २०२६

🙏🌸 ॐ नमः शिवाय 🙏
🌸

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री ओंकारेश्वर महादेव 🙏🔱🚩

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏5❤1
🕉जय श्री सोमनाथ महादेव🔱🚩🙏

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥


श्री सोमनाथ महादेव मंदिर
प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र)
02 / 10 / 2026  दिन शुक्रवार प्रातः शृंगार दर्शन


श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री सोमनाथ महादेव 🙏🔱🚩

 𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤1
🙏जय श्री नीलकंठ महादेव🙏🔱

श्री नीलकंठ महादेव पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड से आज प्रातःकाल का अद्भुत एवं अलौकिक दर्शन


आश्विन कृष्ण पक्ष, तिथि - षष्ठी, संवत् २०८३, दिन शुक्रवार, ०२ अक्तूबर २०२६

ॐ नमस्ते अस्तु भगवान विश्रवेश्वराय महादेवाय त्रयम्बकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकालाग्निकालाय कालाग्निरुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजय सर्वेश्वराय सदाशिवाय श्रीमन् महादेवाय नमः

हर हर महादेव 🙏🔱🚩

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏3❤2💯1
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम के प्रातः कालीन प्रभु राम लला के दर्शन

आश्विन, कृष्ण पक्ष, तिथि षष्ठी ,संवत् २०८३, दिन शुक्रवार, ०२ अक्टूबर २०२६५

🌼🙏जय श्री राम, जय सियाराम
🙏🌼

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏5❤2
जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺

जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 02 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार

🌺🌸जय माता की 🌸🌺

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤2
जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 02 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार के आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश

🌺 जय हो माई की
🙏🌺🔱

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤2
🙏🔱जय मां विंध्यवासिनी🙏🌺

02-10-2026 , दिन शुक्रवार,प्रातः श्रृंगार आरती दर्शन धाम मिर्जापुर


𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
❤3🙏3
सप्तमी श्राद्ध आज 🙏

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4
🙏4
Sanatani Balika🚩
Photo
।। ऋग्वेद, महाभारत, मनुस्मृति, गरुड़पुराण, विष्णुपुराण, स्कंदपुराण, वायुपुराण आदि के आधार पर पितरों का परिचय, महत्व एवं कर्म विधान ।।

'पितृ' शब्द संस्कृत के 'पिता' से निष्पन्न है, जिसका अर्थ पूर्वज या पिता-पितामह आदि है। शास्त्रों में पितर दो प्रकार के माने गए हैं- व्यक्तिगत पितर (व्यक्ति विशेष के दिवंगत पिता, पितामह, प्रपितामह आदि), सार्वभौम पितर (मनुष्य जाति के आदि पूर्वज)

ऋग्वेद (मंडल १०, सूक्त १५- पितृ सूक्त) में पितरों को 'तीन श्रेणियों में वर्णित किया गया है। १- सोमवन्तः, २- बर्हिषदः और ३- अग्निष्वात्ताः। वे परलोक में स्थित हैं और वंशजों के कर्म, दान एवं श्राद्ध से संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं। उनकी उपेक्षा से जीवन में बाधाएँ आ सकती हैं, जबकि श्रद्धापूर्वक तर्पण-श्राद्ध से परिवार में सुख, समृद्धि, संतान और शांति की प्राप्ति होती है।

पितरों का निवास स्थान पितृलोक है। यह मर्त्यलोक (पृथ्वी) और सूर्यलोक के मध्य या चंद्रमा के पथ के निकट माना गया है। कुछ पुराणों में इसे भुवर्लोक के निकट बताया गया है। यमराज को पितृसम्राट कहा गया है। पितर सूक्ष्म शरीर में रहते हैं और श्राद्ध-तर्पण के समय पृथ्वी पर आकर अर्पण ग्रहण करते हैं। गरुड़ पुराण एवं विष्णु पुराण में स्पष्ट है कि पितृलोक में वे तृप्ति की प्रतीक्षा करते हैं।

शास्त्रों में पितृयज्ञ को पंच महायज्ञों में से एक माना गया है (मनुस्मृति- ३/७०) में मुख्य कर्म निम्नलिखित हैं-श्राद्ध- श्रद्धापूर्वक पितरों के निमित्त भोजन, दान एवं ब्राह्मण भोजन।

तर्पण (जलदान)- काले तिल, कुश एवं जल से अर्घ्य अर्पण।
तीन-तीन अंजलियाँ दी जाती हैं।

पिंडदान- जौ या चावल के आटे में दूध, घी, शहद, शक्कर मिलाकर गोल पिंड बनाकर दक्षिणाभिमुख होकर समर्पण।

दान एवं ब्राह्मण भोजन- गौ, कौआ, कुत्ता, चींटी, गरीब एवं ब्राह्मण को भोजन-वस्त्र दान।

गरुड़ पुराण एवं मत्स्य पुराण में कहा गया है कि पिंडदान से पशु-पक्षी योनि में पड़े पितर भी तृप्त होते हैं।

✨पितरों का प्रभाव-

अनुग्रह होने पर- आयु, स्वास्थ्य, सुसंतति, धन-धान्य, यश, बल, वैभव एवं मोक्ष की प्राप्ति।

असंतोष होने पर- कलह, रोग, आर्थिक कठिनाई, मानसिक अशांति, संतान संबंधी बाधाएँ।

महाभारत एवं पुराणों में स्पष्ट है कि पितर प्रसन्न होकर वंशजों को वरदान देते हैं।

✨वैदिक एवं पुराणिक दृष्टि-

ऋग्वेद (१०/१५ एवं १०/१४) में पितरों का आह्वान एवं यम-वरुण का उल्लेख-

महाभारत (अनुशासन पर्व) में भीष्म पितामह युधिष्ठिर को

श्राद्ध की महिमा बताते हैं। महर्षि निमि को प्रथम श्राद्धकर्ता माना गया।

भागवत पुराण, गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण में श्राद्ध की विस्तृत महिमा।

पितरों को देवताओं के समान अन्न-जल से तृप्त करना आवश्यक बताया गया है। विश्वेदेव पितरों के रक्षक हैं, अतः पहले उनकी पूजा की जाती है।

✨पितृदोष एवं निवारण-

जन्मकुंडली में यदि पूर्वजों की अधूरी इच्छाएँ या अतृप्त आत्मा के कारण पितृदोष बनता है, तो संतान, विवाह, स्वास्थ्य एवं अर्थ संबंधी बाधाएँ आती हैं। निवारण के शास्त्रोक्त उपाय-नियमित श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान। गायत्री मंत्र जप, रुद्राभिषेक। नारायण नागबलि, त्रिपिंडी श्राद्ध। गया, ब्रह्मकपाल, काशी आदि तीर्थों में श्राद्ध, दान, सेवा एवं गौ-सेवा।

गरुड़ पुराण में कहा गया है- "गयाश्राद्धात् प्रमुच्यन्ते पितरो भवसागरात्।"

पितृ मंत्र-

(शास्त्रोक्त पितृ-तर्पण, श्राद्ध एवं पिण्डदान के प्रमुख मंत्र-ऋग्वेद, यजुर्वेद, पुराण एवं धर्मशास्त्रीय परम्परा के आधार पर।)

१. पितृ-नमस्कार एवं स्वधा-मंत्र।
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
ॐ सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः।
ॐ पितृदेवतायै नमः।
ॐ सर्वपितृदेवताभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधायै नमः।
ॐ सर्वपितृभ्यः स्वधा नमः।

२. स्वधा देवी का मंत्र-

"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधायै नमः।"

अर्थ- स्वधा देवी को प्रणाम। यह मंत्र पितृकर्म में स्वधा-तत्त्व की उपासना के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

३. सर्वपितृ प्रसन्नता प्रार्थना-

ॐ सर्वपितृ प्रसन्न भवः। या प्रार्थनात्मक रूप में-ॐ सर्वपितरः प्रसन्नाः भवन्तु ।

अर्थ- सभी पितृदेव प्रसन्न हों।

नोट-

"ॐ सर्व पितृ प्रसन्न भवः" को वैदिक मूलमंत्र के रूप में प्रस्तुत न करके प्रार्थना-वाक्य के रूप में रखना अधिक उचित है।

४. यजुर्वेदीय परम्परा के स्वधा-मंत्र-

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
ॐ पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
ॐ प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

५. पितृ-आवाहन मंत्र-

ॐ आगच्छन्तु मे पितरः सर्वे, गृह्णन्तु जलाञ्जलिम्।

अर्थ- मेरे सभी पितर यहाँ पधारें और इस जलाञ्जलि को स्वीकार करें।

शेष भाग 👇
🙏2👍1
६. पिता, पितामह एवं प्रपितामह के लिए तर्पण-
पिता- वसु-स्वरूप।

ॐ अद्य अस्मत्पिता (गोत्र) गोत्रः (नाम) शर्मा वसुस्वरूपः।
इदं सतिलं गोपुच्छोदकं तस्मै स्वधा नमः। तस्मै स्वधा नमः। तस्मै स्वधा नमः।

पितामह- रुद्र-स्वरूप-
ॐ अद्य अस्मत्पितामहः (गोत्र) गोत्रः (नाम) शर्मा रुद्रस्वरूपः।
इदं सतिलं गोपुच्छोदकं तस्मै स्वधा नमः। तस्मै स्वधा नमः। बतस्मै स्वधा नमः।

प्रपितामह- आदित्य-स्वरूप।
ॐ अद्य अस्मत्प्रपितामहः (गोत्र) गोत्रः (नाम) शर्मा आदित्यस्वरूपः।
इदं सतिलं गोपुच्छोदकं तस्मै स्वधा नमः। तस्मै स्वधा नमः। तस्मै स्वधा नमः।

७. मातृ-पक्ष के तर्पण-मंत्र-

माता - वसु-स्वरूपा।
ॐ अद्य अस्मन्माता (गोत्र) गोत्रोत्पन्ना (नाम) देवी वसुस्वरूपा।
इदं सतिलं गोपुच्छोदकं तस्यै स्वधा नमः।
तस्यै स्वधा नमः। तस्यै स्वधा नमः।

इसी प्रकार-

पितामही- रुद्रस्वरूपा,
प्रपितामही- आदित्यस्वरूपा,
मातामह- वसु/रुद्र/आदित्य परम्परा अनुसार मातामही एवं अन्य ज्ञात-अज्ञात पितृगण के लिए नाम एवं गोत्र के अनुसार तर्पण किया जाता है।

८. सर्वपितृ तर्पण-
ॐ सर्वपितृणां तृप्तये इदं तिलोदकं स्वधा नमः।
ॐ दिव्याय पितृगणाय नमः।

तृप्यन्ताम्। इदं जलं सतिलं सयवं गृह्णन्ताम्।

९. ऋग्वैदिक (ऋग्वेद- १०/१५ पितृ-सूक्त के प्रमुख मंत्र- उदीरतामवर उत्परास उन्मध्यमा पितरः सोम्यासः। असुं य ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु।

इदं पितृभ्यो नमो अस्त्वद्य ये पूर्वासो य उपरास ईयुः।

ये पार्थिवे रजस्या निषत्ताः ये वा नूनं सुवृजनासु विक्षु ।।

१०. पितृ-गायत्री-

ॐ पितृगणाय विद्महे, जगद्धारिणे धीमहि। तन्नः पितृः प्रचोदयात् ।।

ॐ पितृदेवाय विद्महे, प्रपितामहाय धीमहि। तन्नः पितृः प्रचोदयात् ।।

महत्त्वपूर्ण-

इन दोनों को वैदिक ऋचा न कहकर पितृ-गायत्री/प्रार्थना-मंत्र के रूप में रखना अधिक सुरक्षित है।

११. सर्वपितृ गायत्री-प्रार्थना-

ॐ सर्वपितृभ्यो विद्महे, पितृदेवेभ्यो धीमहि। तन्नः पितरः प्रचोदयन्तु।

यह भी प्रार्थनात्मक गायत्री-रचना के रूप में रखें, न कि किसी वेद की मूल ऋचा के रूप में।

१२. पितृ-संबोधन मंत्र-

ॐ नमो वः पितरो रसाय। नमो वः पितरः शोषाय।
नमो वः पितरो जीवाय। नमो वः पितरः स्वधायै। नमो वः पितरो घोराय। नमो वः पितरो नमो नमः।

१३. श्राद्ध में विष्णु-मंत्र-

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

अर्थ- भगवान वासुदेव को नमस्कार।

१४. विश्वेदेव आवाहन-

ॐ विश्वेदेवाः आगत शृणुत मे हवम्।

इदं बर्हिः निषीदत।

श्राद्ध-विधि में पितृकर्म से पूर्व विश्वेदेवों का आवाहन परम्परानुसार किया जाता है।

१५. महामृत्युञ्जय मंत्र-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

यह मूलतः मृत्यु-निवारण एवं अमृतत्व की वैदिक प्रार्थना है, इसे पितृकर्म में सहायक जप के रूप में रखा जा सकता है।

१६. तर्पण-संकल्प मंत्र-

ॐ अद्य (तिथि-नक्षत्र) अस्मत्पितृ-पितामह-प्रपितामहानां सपत्नीकानाम् अक्षयतृप्तिसम्पादनार्थं पितृतर्पणं करिष्ये।

वैकल्पिक व्यापक संकल्प-

ॐ अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त-सर्वसांसारिक, सुखसमृद्धिप्राप्तये वंशवृद्धिहेतवे देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणमहं करिष्ये।

१७. पिण्डदान में पितृ-स्मरण-

पिण्डदान के समय संबंधित पितृ का नाम गोत्र + सम्बन्ध + स्वधा का उच्चारण किया जाता है।

उदाहरण-

ॐ अस्मत्पितुः (नाम) (गोत्र) गोत्रस्य इदं पिण्डं स्वधा नमः।

ॐ अस्मत्पितामहस्य (नाम) (गोत्र) गोत्रस्य इदं पिण्डं स्वधा नमः।

ॐ अस्मत्प्रपितामहस्य (नाम) (गोत्र) गोत्रस्य इदं पिण्डं स्वधा नमः।

१८. तर्पण की सामान्य समापन प्रार्थना-

ॐ सर्वे पितरः तृप्यन्तु। ॐ सर्वे पितरः प्रसन्नाः भवन्तु ।

ॐ सर्वे पितरः स्वधां गृह्णन्तु। ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।।

विशेष-

दानवीर कर्ण की कथा-

महाभारत एवं लोक-परंपरा के अनुसार, कर्ण मृत्यु के बाद स्वर्ग पहुँचे तो उन्हें अन्न के स्थान पर स्वर्ण मिला, क्योंकि उन्होंने जीवन में अन्नदान एवं पितृ-तर्पण नहीं किया था। इंद्रएवं यमराज की अनुमति से वे १५-१६ दिनों के लिए पृथ्वी पर लौटे, पितरों का श्राद्ध-तर्पण-पिंडदान किया और अन्नदान किया। तभी उन्हें तृप्ति मिली। यही १६ दिन आज पितृपक्ष के रूप में मनाए जाते हैं। यह कथा पितृऋण की महत्ता को सिद्ध करती है।

✨भरणी श्राद्ध-
भरणी नक्षत्र में होने वाला श्राद्ध महाभरणी श्राद्ध कहलाता है। यह गया श्राद्ध के समान फलदायी माना गया है। इस दिन कौवा, कुत्ता एवं गौ को भोजन अवश्य कराना चाहिए।

शेष भाग 👇
🙏2
✨श्राद्ध के नियम एवं विशेष बातें (शास्त्रोक्त)-

गाय का घी, दूध, दही ही प्रयोग करें (दस दिन से अधिक बछड़े वाली गाय का)। चांदी या चांदी-तांबे के बर्तन श्रेष्ठ हैं। मौन ब्राह्मण भोजन आवश्यक ।

✨समय- कुतप मुहूर्त (दिन का आठवाँ मुहूर्त, लगभग प्रातः ११: ३० से दोपहर १२:३० या ०१ बजे तक सर्वश्रेष्ठ। अपराह्न काल भी शुभ। रात्रि, संध्या एवं शुक्ल पक्ष निषिद्ध।

पितरों को प्रिय-खीर, दूध, दही, शहद, घी, जौ।

कौआ, गाय, कुत्ता, चींटी आदि को भोजन अर्पण (पंचबली)।

तुलसी, कुशा, काला तिल, गंगाजल अनिवार्य। दक्षिण दिशा मुख करके, अपसव्य (जनेऊ दाएँ कंधे पर) होकर कर्म करें। लहसुन-प्याज, मांस, मदिरा, बासी अन्न वर्जित। तीन पीढ़ियों तक श्राद्ध का विधान।

✨श्राद्ध स्थलों का शास्त्रोक्त महत्व (गया के अतिरिक्त प्रमुख पितृतीर्थ)-

गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, स्कंद पुराण एवं अन्य धर्मशास्त्रों में गया को पितृतीर्थराज कहा गया है, किन्तु कई अन्य स्थलों पर भी श्राद्ध-पिंडदान अत्यंत फलदायी एवं मोक्षदायी माना गया है। प्रमुख स्थान निम्नलिखित हैं-

✨गया (बिहार) -
सर्वोच्च पितृतीर्थ। विष्णुपद मंदिर एवं फल्गु नदी तट पर पिंडदान से सात पीढ़ियों तक के पितरों को अक्षय तृप्ति एवं मोक्ष मिलता है। गरुड़ पुराण एवं वायु पुराण में इसकी महिमा सर्वोपरि कही गई है।

✨ब्रह्मकपाल (बद्रीनाथ, उत्तराखंड) -
अलकनंदा नदी के तट पर स्थित। स्कंद पुराण (बदरीमहात्म्य) में इसे गया से आठ गुना अधिक फलदायी बताया गया है। यहाँ पिंडदान करने से पितरों को पूर्ण एवं अंतिम मुक्ति (मोक्ष) मिलती है, जिससे आगे वार्षिक श्राद्ध की आवश्यकता नहीं रहती। ब्रह्मा जी ने स्वयं यहाँ श्राद्ध किया था तथा शिव जी को ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली थी। पांडवों ने भी यहाँ पिंडदान किया था। इसे अंतिम (अंतिम श्राद्ध) स्थल माना जाता है।

✨प्रयागराज (त्रिवेणी संगम, उत्तर प्रदेश) -
तीर्थराज। गंगा-यमुना-सरस्वती संगम पर तर्पण-पिंडदान से १४ पीढ़ियों तक के पितर तृप्त होते हैं। मत्स्य पुराण एवं अन्य ग्रंथों में इसकी विशेष महिमा है।

✨काशी / वाराणसी (उत्तर प्रदेश) -
मणिकर्णिका घाट एवं पिशाचमोचन कुंड। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध से प्रेतबाधा, अकाल मृत्यु एवं अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है। शिव की नगरी होने से मोक्षदायी है।

✨रामेश्वरम (तमिलनाडु) -
अग्नि तीर्थम्। भगवान राम ने लंका युद्ध में मृत योद्धाओं एवं पितरों का यहाँ श्राद्ध किया था। यहाँ पिंडदान से पितर पूर्ण संतुष्ट होते हैं।

✨हरिद्वार (उत्तराखंड) -
हर की पैड़ी, नारायणी शिला एवं कुशावर्त घाट। गंगा तट पर तर्पण-पिंडदान अत्यंत पुण्यदायी है। स्कंद पुराण में उल्लेख।

✨अन्य प्रमुख शास्त्रोक्त स्थल-
देवप्रयाग (उत्तराखंड), भागीरथी अलकनंदा संगम । कुरुक्षेत्र / पेहोवा (हरियाणा), सरस्वती तट। पुष्कर (राजस्थान), ब्रह्मा की तपोभूमि। उज्जैन / सिद्धवट (मध्य प्रदेश)। त्र्यम्बकेश्वर (महाराष्ट्र)। जगन्नाथ पुरी (ओडिशा)। बिंदू सरोवर / सिद्धपुर (गुजरात)। लोहार्गल (राजस्थान)। नैमिषारण्य, अयोध्या, मथुरा, गंगासागर आदि।

विष्णुधर्मसूत्र, शंख स्मृति एवं पुराणों में कहा गया है कि नदी तट, पर्वत, तीर्थ, कुंज एवं गोबर से लिप्त पवित्र स्थलों पर किया गया श्राद्ध अक्षय फलदायी होता है। गया, प्रयाग, काशी, पुष्कर, कुरुक्षेत्र आदि पर दिया गया दान कोटि गुना फल देता है।

✨पितृपक्ष का महत्व-
भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के १६ दिन पितृपक्ष कहलाते हैं। इस अवधि में पितर पृथ्वी पर आते हैं। पितृऋण से मुक्ति, वंश की उन्नति, संतान, स्वास्थ्य एवं धन की वृद्धि, पूर्वजों की आत्मा को शांति एवं वंशजों को सुख-समृद्धि।

✨मनुस्मृति एवं पुराणों में तीन ऋण बताए गए हैं- देवऋण, ऋषिऋण एवं पितृऋण। श्राद्ध से पितृऋण चुकता है।

निष्कर्ष- शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है कि श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने से पितर तृप्त होते हैं और वंश पर उनकी कृपा बनी रहती है। गया सर्वश्रेष्ठ है, किन्तु ब्रह्मकपाल (बद्रीनाथ) को स्कंद पुराण में गया से भी अधिक शक्तिशाली अंतिम मुक्ति स्थल बताया गया है। यह केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि कृतज्ञता एवं धर्म का पालन है।

(सभी विवरण ऋग्वेद, महाभारत, मनुस्मृति, गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, वायु पुराण एवं अन्य धर्मशास्त्रों पर आधारित हैं। व्यक्तिगत विधि के लिए योग्य पंडित से परामर्श लें।)

।। ॐ पितृभ्यो नमः ।।

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏2
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
🌹🙏जय श्री कृष्णा🙏🌹
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
🦚〰️🩵〰️🦚〰️🩵〰️🦚
ओ मेरे प्यारे कान्हा....!!🙏❤️!!
जुबाँ को रोकूं तो,आँखों से छलक
आता है ये तुम्हारा ईश्क है,इसे सब्र
कहाँ आता है प्यारे......जिंदगी मेरी
सांसें मेरी, इवादत भी मेरी हर चीज़
को मुकम्मल करने के लिए जरूरत
तुम्हारी है मेरे प्यारे कान्हा..राधे राधे
🌹🙏हरे कृष्णा हरि बोल 🙏🌹
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
आईए दिन की सुरूबात प्रभु के श्रीचरणों
में हाजरी लगा कर करें..!!🙏🌹!!
🌹🙏जय जय श्री राधे🙏🌹
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
🌹🙏राधे राधे जी🙏🌹
🦚〰️🩵〰️🦚〰️🩵〰️🦚
🙏6❤1🥰1
🙏6
❤️मेरी सुन्दरी माई और मेरे महाकाल ❤️

🔱 जगत पिता अवंतिका नरेश अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक राजाधिराज योगिराज मृत्यलोकाधिपति कालों के काल बाबा महाकाल

🔱जगत जननी आदि शक्ति मातेश्वरी मां हरसिद्धि माता
🙏🪷

दिनांक 02 अक्टूबर 2026 राजसंध्याकालीन आरती श्रृंगार दर्शन उज्जैन

🕉सांब सदाशिव 🙏🔱🚩
🕉जय मां हरसिद्धि जय श्री महाकाल🔱🚩

𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤3
🌺🙏जय श्री कृष्णा🙏🌺
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
💙〰️〰️〰️💙〰️〰️〰️💙
आपमें और मुझमें समान रूप से
विराजमान श्री राधे गोविन्द को
मेरा कोटि कोटि प्रणाम.!!🙏!!
💙〰️〰️〰️💙〰️〰️〰️💙
श्री राधे कृष्णा...!!🙏❤️.!!
मेरा क्या है प्रभु…मेरा तो हर वजूद
आपसे ही है....मैं तो बस एक कोरा
कागज़ हूँ,मेरी ज़िंदगी पर लिखी हर
कहानी आपके प्रेम और कृपा से है.
मेरी हर साँस में राधे,हर धड़कन में
कृष्ण बस यूँ ही बसे रहना आप दोनों
का हाथ मेरे सिर पर रहे,राधे राधे🙏
🌺🙏हरे कृष्णा हरि बोल 🙏🌺
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
🌺🙏जय जय श्री राधे🙏🌺
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
🌺🙏राधे राधे जी🙏🌺
💙〰️〰️〰️💙〰️〰️〰️💙
🙏5❤1
🚩 जय सत्य सनातन 🚩

🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२८
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८३
⛅ 🚩तिथि - सप्तमी सुबह ०७:५९ तक, तत्पश्चात् अष्टमी प्रातः ०५:५१ अक्टूबर ०४ तक, तत्पश्चात् नवमी

https://t.me/sanatanibalika

⛅ दिनांक - ०३ अक्टूबर २०२६
⛅ दिन - शनिवार
⛅ अयन - दक्षिणायण
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - आश्विन
⛅ पक्ष - कृष्ण
⛅ नक्षत्र - आर्द्रा मध्यरात्रि ०१:२९ तक तत्पश्चात् पुनर्वसु
⛅ योग - वरीयान् दोपहर ०३:२१ तक तत्पश्चात् परिघ
⛅ राहुकाल - सुबह ०९:१७ से सुबह १०:४७ तक
⛅ सूर्योदय - ०६:१८
⛅ सूर्यास्त - ०६:१२
⛅ दिशा शूल - पूर्व दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०४:४२ से प्रातः ०५:३१ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर ११:५२ से दोपहर १२:४० तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ निशिता मुहूर्त - रात्रि ११:५२ से मध्यरात्रि १२:४० तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
🌥️ व्रत पर्व विवरण - सप्तमी, अष्टमी का श्राद्ध, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, जीवित्पुत्रिका व्रत, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण
🌥️ विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)


𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏3
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् । अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ||

🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 03 अक्टूबर 2026 (शनिवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से   🚩🙏

ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩

 𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤2
श्री काशी विश्वेश्वराय नमः 🙏🔱

यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके,
भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा, शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्री शंकरः पातु माम् ॥

सानन्दमानन्दवने वसन्त मानन्दकन्दं हतपापवृन्दम् । वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ॥

🪷🙏जय श्री काशी विश्वनाथ महादेव 🙏

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंगजी काशी उ.प्र. से आज का मंगला आरती श्रृंगार दर्शन

आश्विन कृष्ण पक्ष, तिथि सप्तमी/अष्टमी, संवत् २०८३, दिन - शनिवार, ०३ अक्टूबर २०२६

🙏🔱।। श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम ।।🙏🔱

शिवाय नमः
जय श्री काशी विश्वनाथ 🙏🔱🚩


 𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
🙏4❤1