Sanatani Balika🚩
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🚩 जय सत्य सनातन 🚩

🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२७
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८२
⛅ 🚩तिथि - पूर्णिमा शाम ०५:०७ तक तत्पश्चात् प्रतिपदा


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⛅ दिनांक - ०३ मार्च २०२६
⛅ दिन - मंगलवार
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - फाल्गुन
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - मघा प्रातः ०७:३१ तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी
⛅ योग - सुकर्मा सुबह १०:२५ तक तत्पश्चात् धृति
⛅ राहुकाल - दोपहर ०३:३५ से शाम ०५:०३ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ सूर्योदय - ०६:४७
⛅ सूर्यास्त - ०६:३१ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ दिशा शूल - उत्तर दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०५:०९ से प्रातः ०५:५८ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर १२:१५ से दोपहर ०१:०२ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि १२:१४ से मध्यरात्रि ०१:०३ तक
🌥️ व्रत पर्व विवरण - होली पूर्णिमा, चैतन्य महाप्रभु जयंती, लक्ष्मी जयंती, धुलेंडी, खग्रास चंद्रगहण
🌥️ विशेष - पूर्णिमा और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)


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🙏4
🔹होलाष्टक🔹

🔸होलाष्टक फाल्गुन मास के अष्टमी से शुरू होता है पूनम दिन होलिका दहन के साथ समाप्त होती हैं।

🔸होलाष्टक से ले कर पूनम तक हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए कई यातनाएं दिया था। आठवां दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली थी। होलिका को यह वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, ऐसे में होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्रह्लाद को अग्नि जला नहीं सकी, बल्कि होलिका इस अग्नि में जलकर भस्म हुई। यह सारी घटना उन्हीं आठ दिनों में हुई थी। जिन्हें होलाष्टक के नाम से जाना जाता हैं।

🔸इस आठ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता हैं। इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता हैं।

🔹होलाष्टक में वर्जित कार्य :🔹
०१. विवाह करना।
०२. वाहन खरीदना।
०३. घर खरीदना।
०४. भूमि पूजन।
०५. गृहप्रवेश।
०६. 16 संस्कार।
०७. यज्ञ, हवन या होम।
०८. नया व्यापार शुरु करना।
०९. नए वस्त्र या कोई वस्तु खरीदना।
१०. यात्रा करना।

🔸होलाष्टक के वक्त लोगों को सदाचार और संयम का पालन करना चाहिए। इसके अलावा इन दिनों में भगवान को याद करके मंत्र जप, साधना और आध्यात्मिक कार्य करना चाहिए। इस समय के अवधि साधना और सिद्धि के लिए काफी अनुकूल माना गया हैं।


            जय श्री राम
    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩


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🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 03 मार्च 2026 (मंगलवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से   🚩🙏🏻

ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩

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राधे राधे 🙏🌼🚩

🙏संत भगवान द्वारा आज के श्री वचन :-

" गुरुदेव की इच्छा को अपनी इच्छा बना लेना ही दीक्षा है।"

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🙏9
🌹🙏जय श्री कृष्णा🙏🌹
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
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श्री राधे कृष्णा....🙏❣️
रंगों में डूबी है ब्रज की हर गली
राधा के संग खेले कान्हा होली
पिचकारी से बरसे प्रेम की बोली
ऐसी सुहानी होती है राधा-कृष्ण
की होली...राधे राधे🙏❣️
🌹🙏हरे कृष्णा हरि बोल 🙏🌹
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
आईए दिन की सुरूबात प्रभु के श्रीचरणों
में हाजरी लगा कर करें..!!🙏🌹!!
🌹🙏जय जय श्री राधे🙏🌹
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
🌹🙏राधे राधे जी🙏🌹
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३ मार्च २०२६ चन्द्रग्रहण :

खगोलीय घटना, साधना का स्वर्ण अवसर

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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार के मंगला आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश

जय हो माई की
🙏🌺🔱

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Sanatani Balika🚩
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🌑खग्रास चन्द्रग्रहण- 3 मार्च ( मंगलवार ) 2026 (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय है ।)

ग्रहण समय- शाम : 6:11 से शाम 6:46 तक 

सुतक प्रारम्भ- सुबह 09:11से

सूतक प्रारम्भ (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) - 3 मार्च शाम 3:25  से ग्रहण प्रारम्भ होने तक

ग्रहण भारत में दिखेगा इसलिये ग्रहण के नियम पालनीय आवश्यक है ।

ग्रहणकाल में क्या करें, क्या न करें ? सम्पूर्ण जानकारी

🔹चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) और सूर्यग्रहण में 4 प्रहर (12 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । परंतु जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1.5 प्रहर (4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है । इसके बाद खाने से स्वास्थ्य की बड़ी हानि होती है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।

🔹सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश, तिल या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें । कुश आदि डला पानी सूतककाल में उपयोग में ला सकते हैं ।

ग्रहणकाल में भूलकर भी न करें ?

🔹ग्रहण में अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जीवन होगा । अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दंडित हो जायेंगे, दुःखी हो जायेंगे ।

ग्रहणकाल में –

(1) भोजन करनेवाला अधोगति को जाता है ।

(2) जो नींद करता है उसको रोग जरूर पकड़ेगा, उसकी रोगप्रतिकारकता का गला घुटेगा ।

(3) जो पेशाब करता है उसके घर में दरिद्रता आती है । जो शौच जाता है उसको कृमिरोग होता है तथा कीट की योनि में जाना पड़ता है ।

(4) जो संसार-व्यवहार (सम्भोग) करते हैं उनको सूअर की योनि में जाना पड़ता है ।

(5) तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

(6) ठगाई करनेवाला सर्पयोनि में जाता है । चोरी करनेवाले को दरिद्रता पकड़ लेती है ।

(7) जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करनेवाले को नारकीय योनियों में जाना पड़ता है ।

(8) पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि न तोड़ें । दंतधावन, अभी ब्रश समझ लो, न करें ।

(9) चिंता करते हैं तो बुद्धिनाश होता है ।

ये करने से सँवरेगा इहलोक–परलोक

(1) सूर्यग्रहण के समय रुद्राक्ष-माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बननेवाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।

(2) मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र का ग्रहण के समय जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है ।

(3) महर्षि वेदव्यासजी कहते हैं : ‘‘चन्द्रग्रहण के समय किया हुआ जप लाख गुना और सूर्यग्रहण के समय किया हुआ जप 10 लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’

तो स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना ।

🔹ग्रहण के समय किया हुआ ऐसा-वैसा कोई भी गलत या पाप कर्म अनंत गुना हो जाता है और इस समय भगवद्-चिंतन, भगवद्-ध्यान, भगवद्-ज्ञान का लाभ ले तो वह व्यक्ति सहज में भगवद्-धाम, भगवद्-रस को पाता है ।

🔹ग्रहण के समय अगर भगवद्-विरह पैदा हो जाता है तो वह भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है, उसने भगवान को पा लिया समझ लो । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु-सुमिरन अनेक गुना हो जाता है । ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।

कल्पनातीत मेधाशक्ति बढ़ाने का प्रयोग-

🔹नारद पुराण के अनुसार सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय उपवास करे और ब्राह्मी घृत को उँगली से स्पर्श करे एवं उसे देखते हुए ‘ॐ नमो नारायणाय ।’ मंत्र का 8000 बार (80 माला) जप करे । थोड़ा शांत बैठे । ग्रहण–समाप्ति पर स्नान के बाद घी का पान करे तो बुद्धि विलक्षण ढंग से चमकेगी, बुद्धिशक्ति बढ़ जायेगी, कल्पनातीत मेधाशक्ति, कवित्वशक्ति और वचनसिद्धि (वाक्–सिद्धि) प्राप्त हो जायेगी।

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गौर पुर्णिमा 🙏🌼 चैतन्य महाप्रभु जी के प्राकट्य महोत्सव की मंगल शुभकामनाएं🙏🌼

प्रेम, भक्ति और संकीर्तन की दिव्य ज्योति चैतन्य महाप्रभु के पावन प्राकट्य दिवस पर समस्त श्रद्धालुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं।

भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अखंड प्रेम, नाम-संकीर्तन और समर्पित भक्ति का जो अलौकिक मार्ग महाप्रभु ने दिखाया है।

गौरा पूर्णिमा का अर्थ है "सुनहरा पूर्णिमा का चंद्रमा,"
जिसका प्रतीक है:
1) भगवान चैतन्य का जन्म फाल्गुन पूर्णिमा के दिन हुआ था । उस दिन भी चन्द्र ग्रहण ही था और आज भी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण है 🙏

2) भगवान
अपने दिव्य
उपदेशों की सुखदायक, चंद्रमा जैसी किरणों से सभी को आशीर्वाद देते हैं।
उनके अनुयायी आम तौर पर इस त्योहार को

उपवास रखकर और दिन भर पवित्र नामों का जाप करके मनाते हैं।
गौरांग गौरांग!!


गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि गौर हरि 🙏🌼

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चैतन्य महाप्रभु स्वयं भगवान
कृष्ण हैं, जो अपने ही भक्त के रूप में प्रकट हुए हैं,
ताकि हमें यह सिखा सकें कि हम
केवल भगवान के पवित्र नामों का जप करके पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं:
“हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण,
हरे हरे /
हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे
हरे”
महाप्रभु की लीलाओं के साक्षी रहे लोगों
ने उन्हें ईश्वर के प्रति असीम प्रेम से नृत्य और जप करते देखा
, जैसा
पहले कभी नहीं देखा गया था। उन्होंने सभी को
इसी प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सिखाया कि कोई भी व्यक्ति—
चाहे उसकी पृष्ठभूमि या आध्यात्मिक
योग्यता कुछ भी हो— हरे कृष्ण मंत्र का जप करके
ईश्वर के प्रति अपने सहज प्रेम को विकसित कर सकता है और महान आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कर सकता है । 


गौरांग महाप्रभु की जय 🙏🌼

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🌷🙏जय श्री कृष्णा🙏🌷
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
🫟〰️〰️〰️🫟〰️〰️〰️🫟
सुनो मेरे साँवरे सरकार...🙏❣️
सांसो से बंधा है ये रिश्ता हमारा
और तुम्हारा कभी नहीं तुम तोड़
पाओगे...चाहे तुम पास हो या दूर
हो...मेरे साथ तुम हमेशा ही नजर
आओगे...हरे कृष्णा हरि बोल🙏🌷
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
🫟〰️〰️〰️🫟〰️〰️〰️🫟
मेरे और मेरे परिवार की तरफ से
आपको और आपके पूरे परिवार
को रंगों के इस आज के पावन
पर्व होली की बहुत बहुत हार्दिक
शुभकामनाएं एवं बधाई...❣️🫟
🫟🥰 हैप्पी होली 🥰🫟
बोलो होरी के रसिया की जय🙏
🌷🙏जय जय श्री राधे🙏🌷
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
🌷🙏राधे राधे जी🙏🌷
🫟〰️〰️〰️🫟〰️〰️〰️🫟

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🚩 जय सत्य सनातन 🚩

🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२७
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८२
⛅ 🚩तिथि - प्रतिपदा शाम ०४:४८ तक तत्पश्चात् द्वितीया


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⛅ दिनांक - ०४ मार्च २०२६
⛅ दिन - बुधवार
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - चैत्र
⛅ पक्ष - कृष्ण
⛅ नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी प्रातः ०७:३९ तक तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी
⛅ योग - धृति सुबह ०८:५२ तक तत्पश्चात् शूल
⛅ राहुकाल - दोपहर १२:३९ से दोपहर ०२:०७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ सूर्योदय - ०६:४६
⛅ सूर्यास्त - ०६:३१ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ दिशा शूल - उत्तर दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०५:०८ से प्रातः ०५:५७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं
⛅ निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि १२:१४ से मध्यरात्रि ०१:०३ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
🌥️ व्रत पर्व विवरण - होली, चैत्र  प्रारंभ
🌥️ विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाए, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)


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🔹औषधीय गुणों से भरपूरः ब्रह्मवृक्ष पलाश🔹

🔸जिसकी समिधा यज्ञ में प्रयुक्त होती है, ऐसे हिन्दू धर्म में पवित्र माने गये पलाश वृक्ष को आयुर्वेद ने 'ब्रह्मवृक्ष' नाम से गौरवान्विति किया है। पलाश के पाँचों अंग (पत्ते, फूल, फल, छाल, व मूल) औषधीय गुणों से सम्पन्न हैं। यह रसायन (वार्धक्य एवं रोगों को दूर रखने वाला), नेत्रज्योति बढ़ाने वाला व बुद्धिवर्धक भी हैं।

🔸इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं। इसके पुष्प मधुर व शीतल हैं। उनके उपयोग से पित्तजन्य रोग शांत हो जाते हैं।

🔸पलाश के बीज उत्तम कृमिनाशक व कुष्ठ (त्वचारोग) दूर करने वाले हैं। इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसकी जड़ अनेक नेत्ररोगों में लाभदायी हैं।

🔸पलाश व बेल के सूखे पत्ते, गाय का घी व मिश्री समभाग मिलाकर धूप करने से बुद्धि शुद्ध होती है व बढ़ती भी हैं। वसंत ऋतु में पलाश लाल फूलों से लद जाता हैं। इन फूलों को पानी में उबालकर केसरी रंग बनायें। यह रंग पानी में मिलाकर स्नान करने से आने वाली ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है, कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते हैं।

🔸पलाश के फूलों द्वारा उपचार : महिलाओं के मासिक धर्म में अथवा पेशाब में रूकावट हो तो फूलों को उबालकर पुल्टिस बना के पेड़ू पर बाँधें। अण्डकोषों की सूजन भी इस पुल्टिस से ठीक होती हैं।

🔸प्रमेह (मूत्र-संबंधी विकारों) में पलाश के फूलों का काढ़ा (५० मि.ली.) मिलाकर पिलायें।

🔸रतौंधी की प्रारम्भिक अवस्था में फूलों का रस आँखों में डालने से लाभ होता हैं।

🔸आँख आने पर (Conjunctivitis) फूलों के रस में शुद्ध शहद मिलाकर आँखों में आँजें।

            जय श्री राम
    🚩  हिन्दू राष्ट्र भारत 🚩


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🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 04 मार्च 2026 (बुधवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से   🚩🙏🏻

ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩

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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

माँ गढ़कालिका माता जी का आज 04 मार्च 2026 दिन बुधवार प्रातः आरती श्रृंगार दर्शन 🙏🔱🌺

मेरी प्यारी माँ🙏❤️

जय माँ गढ़कालिका 🙏🔱

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जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺

जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 04 मार्च 2026 दिन बुधवार

🌺🌸जय माता दी🌸🌺

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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 04 मार्च 2026 दिन बुधवार के मंगला आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश

जय हो माई की
🙏🌺🔱

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सिद्धिविनायक देव गणेश जी का 04 मार्च 2026 दिन बुधवार प्रातः मंगला आरती श्रृंगार दर्शन 🙏🌺

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जय श्री बाबा काशी विश्वनाथ 🙏🔱🚩
हर हर महादेव 🙏🔱🚩

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