Sanatani Balika🚩
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🌸🙏जय श्री कृष्णा🙏🌸
🌸🙏जय माता दी 🙏🌸
🦚〰️〰️〰️🦚〰️〰️〰️🦚
हे मेरे राधे-कृष्णा…!!🙏🩷!!
जिनकी नज़रों में हम बसे हैं,कसम
से वो नज़र हमें सबसे प्यारी लगती
है…दुनियां की हर खुशी एक तरफ़,
और मेरे राधे-कृष्ण की कृपा भरी
नज़र एक तरफ़....राधे कृष्णा 🙏💐
🌸🙏हरे कृष्णा हरि बोल🙏🌸
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
🦚〰️〰️〰️🦚〰️〰️〰️🦚
या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्मांडा रूपेण
संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमो नमः जय माता दी..!!🙏🩷!!
🦚〰️〰️〰️🦚〰️〰️〰️🦚
🌸🙏जय जय श्री राधे🙏🌸
🌸🙏राधे राधे जी🙏🌸
🌸🙏जय माता दी 🙏🌸
🦚〰️〰️〰️🦚〰️〰️〰️🦚

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🚩 जय सत्य सनातन 🚩

🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२८
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८३
⛅ 🚩तिथि - चतुर्थी मध्यरात्रि ०१:१३ तक तत्पश्चात् पञ्चमी

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⛅ दिनांक - १४ अक्टूबर २०२६
⛅ दिन - बुधवार
⛅ अयन - दक्षिणायण
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - आश्विन
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - अनुराधा प्रातः ०४:०३ अक्टूबर १५ तक तत्पश्चात् ज्येष्ठा
⛅ योग -  आयुष्मान् रात्रि ०८:३९ तक तत्पश्चात् सौभाग्य
⛅ राहुकाल - दोपहर १२:१३ से दोपहर ०१:४० तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ सूर्योदय - ०६:२३
⛅ सूर्यास्त - ०६:०२ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ दिशा शूल - उत्तर दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०४:४५ से प्रातः ०५:३४ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं
⛅ निशिता मुहूर्त - रात्रि ११:४८ से मध्यरात्रि १२:३८ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
🌥️ व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः ०६:२३ से प्रातः ०४:०३ अक्टूबर १५ तक)
🌥️ विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)


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अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् । अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ||

🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से   🚩🙏

ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩

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🔱🙏जय श्री ॐकारेश्वर महादेव 🙏 🔱

कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।
सदैवमान्धातृपुरे वसन्तमो‌ङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥

श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंगजी नर्मदा तट खण्डवा म.प्र. से आज का मंगला आरती श्रृंगार दर्शन

आश्विन शुक्ल पक्ष, तिथि - चतुर्थी ,संवत् २०८३, दिन- बुधवार,
१४ अक्टूबर २०२६

🙏🌸 ॐ नमः शिवाय 🙏
🌸

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री ओंकारेश्वर महादेव 🙏🔱🚩

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🙏🔱जय मां विंध्यवासिनी🙏🌺

14-10-2026 , दिन बुधवार,प्रातः श्रृंगार आरती दर्शन धाम मिर्जापुर


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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार के आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश

नवरात्रि विशेष श्रृंगार दर्शन 🙏🌺

शारदीय चतुर्थ नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

🌺 जय हो माई की
🙏🌺🔱

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जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺

जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 14 अक्टूबर 2026 दिन बुधवार

नवरात्र विशेष श्रृंगार दर्शन 🌺

चतुर्थ नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🌺

🌺🌸जय माता की 🌸🌺

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।। शारदीय नवरात्रि चतुर्थ दिवस- माँ कुष्मांडा ।।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तप‌द्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

माँ दुर्गाजीके चौथे स्वरूपका नाम कूष्माण्डा है। अपनी मन्द, हलकी हँसीद्वारा अण्ड अर्थात् ब्रह्माण्डको उत्पन्न करनेके कारण इन्हें कूष्माण्डा देवीके नामसे अभिहित किया गया है।

जब सृष्टिका अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अन्धकार-ही-अन्धकार परिव्याप्त था, तब इन्हीं देवीने अपने 'ईषत्' हास्यसे ब्रह्माण्डकी रचना की थी। अतः यही सृष्टिकी आदि-स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। इनके पूर्व ब्रह्माण्डका अस्तित्व था ही नहीं।

इनका निवासं सूर्यमण्डल के भीतर के लोक में है। सूर्यलोक में निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवलं इन्हीं में है। इनके शरीर की कान्ति और प्रभा भी सूर्यके समान ही देदीप्यमान और भास्वर है। इनके तेज की तुलना इन्हीं से की जा सकती है। अन्य कोई भी देवी-देवता इनके तेज और प्रभाव की समता नहीं कर सकते। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाए प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है।

इनकी आठ भुजाए हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथोंमें क्रमशः कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देनेवाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कुम्हड़े को कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी ये कूष्माण्डा कही जाती हैं।

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अनाहत' चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यन्त पवित्र और अचञ्चल मनसे कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए। माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक विनष्ट हो जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। माँ कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से भी प्रसन्न होनेवाली हैं। यदि मनुष्य सच्चे हृदय से इनका शरणागत बन जाय तो फिर उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है।

हमें चाहिये कि हम शास्त्रों-पुराणोंमें वर्णित विधि-विधानके अनुसार माँ दुर्गा की उपासना और भक्तिके मार्गपर अहर्निश अग्रसर हों। माँ के भक्ति-मार्गपर कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर भक्त साधकको उनकी कृपा का सूक्ष्म अनुभव होने लगता है। यह दुःख-स्वरूप संसार उसके लिये अत्यन्त सुखद और सुगम बन जाता है। माँ की उपासना मनुष्य को सहज भावसे भवसागर से पार उतारने के लिये सर्वाधिक सुगम और श्रेयस्कर मार्ग है। माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को आधियों-व्याधियों से सर्वथा विमुक्त करके उसे सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जानेवाली है। अतः अपनी लौकिक-पारलौकिक उन्नति चाहनेवालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिये।

नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव 🚩
      🙏🌺 जय मां कूष्मांडा 🌺🙏
            🚩 जय माता की 🚩

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Sanatani Balika🚩
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।। शारदीय नवरात्रि चतुर्थ दिवस- माँ कुष्मांडा ।।

शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि आठ दिनों की है। हिंदू मान्यताओं में मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार और अपनी दिव्य ऊर्जा से संसार को प्रकाश देने वाली देवी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि मां की आराधना से मनोबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। अतः प्रस्तुत है नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, आरती, व्रत कथा और प्रिय भोग से जुड़ी सभी जरूरी बातें।

मां कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व-

मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला विराजमान हैं। उनका वाहन सिंह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का तेज सूर्य के समान प्रकाशमान है और उनका निवास सूर्य मंडल में माना जाता है। उनकी उपासना को साहस, आरोग्य, यश और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि-

नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की सफाई करके मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर देवी का ध्यान करें और उन्हें जल, पुष्प, अक्षत, रोली तथा माला अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाएं और फल-मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

मां कूष्मांडा का भोग-

मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा यानी पेठा अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा केसरिया हलवा, पीले रंग की मिठाइयां, मालपुआ, बताशे, फल और नारियल भी चढ़ाए जा सकते हैं। कुछ परंपराओं में दही और विभिन्न प्रकार के हलवे का भोग लगाने की मान्यता है। व्रत रखने वाले भक्त सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर भी अर्पित कर सकते हैं।

मां कूष्मांडा की व्रत कथा-

नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार फैला हुआ था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। उनके दिव्य तेज से सृष्टि में प्रकाश का संचार हुआ। इसी कारण उन्हें आदिशक्ति और सृष्टि की रचनाकार माना जाता है।

मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित होते हैं। जपमाला को सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। देवी का वाहन सिंह है, जो साहस और पराक्रम दर्शाता है। कुम्हड़ा यानी कद्दू मां को प्रिय माना जाता है, इसलिए उनका नाम कूष्मांडा पड़ा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का निवास सूर्य मंडल में है और उनका तेज सूर्य के समान प्रकाशमान है। श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करने से रोग, शोक और कष्ट दूर होने की मान्यता है। भक्त मां से अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, यश, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन देवी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।


      🙏🌺 जय मां कूष्मांडा 🌺🙏
            🚩 जय माता की 🚩


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❤️मेरी सुन्दरी माई और मेरे महाकाल ❤️

🔱 जगत पिता अवंतिका नरेश अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक राजाधिराज योगिराज मृत्यलोकाधिपति कालों के काल बाबा महाकाल

🔱जगत जननी आदि शक्ति मातेश्वरी मां हरसिद्धि माता
🙏🪷

दिनांक 14 अक्टूबर 2026 राजसंध्याकालीन आरती श्रृंगार दर्शन उज्जैन

🕉सांब सदाशिव 🙏🔱🚩
🕉जय मां हरसिद्धि जय श्री महाकाल🔱🚩

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आप सभी सनातनी बालिका परिवार को नवरात्र पंचम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
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🌻🙏जय श्री कृष्णा🙏🌻
🌻🙏जय माता दी 🙏🌻
💛〰️🦚〰️💛〰️💛〰️🦚
ओ मेरे प्यारे राधे गोविन्द...🙏❣️
नज़रें ठहर गईं हमारी उस उस चेहरे
पर,जहाँ प्रेम भी है और सुकून भी वो
चेहरा है मेरे प्यारे राधे गोविन्द का..💕
🌻🙏हरे कृष्णा हरि बोल.🙏🌻
🙏श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास🙏
💛〰️🦚〰️💛〰️🦚〰️💛
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्द रूपेण
संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमो नमः जय माता दी..🙏🌻
💛〰️🦚〰️💛〰️💛〰️🦚
🌻🙏जय जय श्री राधे🙏🌻
🌻🙏राधे राधे जी🙏🌻
🌻🙏जय माता दी 🙏🌻
💛〰️🦚〰️💛〰️🦚〰️💛
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🚩 जय सत्य सनातन 🚩

🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२८
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८३
⛅ 🚩तिथि - पञ्चमी मध्यरात्रि ०३:२५ तक तत्पश्चात् षष्ठी

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⛅ दिनांक - १५ अक्टूबर २०२६
⛅ दिन - गुरुवार
⛅ अयन - दक्षिणायण
⛅ ऋतु - शरद
⛅ मास - आश्विन
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - ज्येष्ठा पूर्ण रात्रि तक
⛅ योग - सौभाग्य रात्रि ०९:१५ तक तत्पश्चात् शोभन
⛅ राहुकाल - दोपहर ०१:४० से दोपहर ०३:०७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ सूर्योदय - ०६:२४
⛅ सूर्यास्त - ०६:०१ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ दिशा शूल - दक्षिण दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०४:४५ से प्रातः ०५:३४ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - सुबह ११:४९ से दोपहर १२:३६ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ निशिता मुहूर्त - रात्रि ११:४८ से मध्यरात्रि १२:३७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
🌥️ व्रत पर्व विवरण - उपांग ललिता व्रत
🌥️ विशेष - पञ्चमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)


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अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् । अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ||

🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से   🚩🙏

ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩

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🕉जय श्री सोमनाथ महादेव🔱🚩🙏

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥


श्री सोमनाथ महादेव मंदिर
प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र)
15 / 10 / 2026  दिन गुरुवार प्रातः शृंगार दर्शन


श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री सोमनाथ महादेव 🙏🔱🚩

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जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺

जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 15 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार

नवरात्र विशेष श्रृंगार दर्शन 🌺

पंचम नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🌺

🌺🌸जय माता की 🌸🌺

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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 15 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार के आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश

नवरात्रि विशेष श्रृंगार दर्शन 🙏🌺

पंचम नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

🌺 जय हो माई की
🙏🌺🔱

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