आँधी आवे एक दिन
सफ़ाई चाले दस दिन
और मम्मी के लेक्चर चाले बीस दिन
के करा म्हारे छोरियां के बड़ी समस्या होरी है
😩😫
😁😁😁
#Smiling_on💖
सफ़ाई चाले दस दिन
और मम्मी के लेक्चर चाले बीस दिन
के करा म्हारे छोरियां के बड़ी समस्या होरी है
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😁😁😁
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आओ हाथ पकड़ो मेरा -- मेरे साथ प्रकृति का आंनद लेने चलो -- जहाँ मोर नाचते दिखेंगे तुम्हे, पास झरने से पानी गिरने की मद्धम आवाज़ -- तितलियाँ, आकाश नीला सा - रात्रि रहने के लिए टेंट ले जाएंगे -- चाय को तो स्किप भी मत करना- वहाँ हल्की हल्की ठंड लगती है --- मोबाइल को स्विच ऑफ़ ही कर देंगे -- बातें - प्रकृति - चाय और हमारा प्रेम!- 🪻कोई नेगेटिविटी तुम्हे छुएगी भी नहीं --- क्युँकि तुम प्रकृति के सानिध्य मे होगे और साथ मेरा ---!-
सब से गहरा प्रेम तुम्हे बस मेरी आँखों मे ही दिखेगा --- जहाँ से तुम्हे सहजता होगी समझने मे की मुझे तुमसे कितना प्रेम है!- इससे अधिक और क्या ही दूँ मै तुम्हे --- खुद को समर्पित कर रखा है मैने!- 🪻
_
©® 2023
#pathankot
#Maahiya❤️🥀
सब से गहरा प्रेम तुम्हे बस मेरी आँखों मे ही दिखेगा --- जहाँ से तुम्हे सहजता होगी समझने मे की मुझे तुमसे कितना प्रेम है!- इससे अधिक और क्या ही दूँ मै तुम्हे --- खुद को समर्पित कर रखा है मैने!- 🪻
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©® 2023
#pathankot
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उससे बात करने के लिए...
उस से ही लड़ाई कर लेता हूं..🥹
उस से ही लड़ाई कर लेता हूं..🥹
❤11🥰1
"मुझे मेरे जैसे लोग बेहद पसंद हैं —
जिनकी मुस्कान में शरारत हो,
बातों में मिठास हो,
और दिल… बिल्कुल बेफिक्री से भरपूर हो।
जो हर लम्हा जिएं पूरे दिल से,
Unlimited cute, boundless vibes... ❤️✨
खुद से मोहब्बत करना भी एक हुनर है!"
#Maahiya ❤️🥰
जिनकी मुस्कान में शरारत हो,
बातों में मिठास हो,
और दिल… बिल्कुल बेफिक्री से भरपूर हो।
जो हर लम्हा जिएं पूरे दिल से,
Unlimited cute, boundless vibes... ❤️✨
खुद से मोहब्बत करना भी एक हुनर है!"
#Maahiya ❤️🥰
❤6🥰2
सब कुछ मन में ही रखना अगर काफी होता तो कुदरत हमें अभिव्यक्ति की काबिलियत नहीं देता......
मान, सम्मान, गुस्सा, अवसाद, समर्पण, प्रेम, वेदना, संवेदना जो कुछ भी हो अभिव्यक्त किया जाना जरूरी है...!!
#Maahiya 💛🌻
मान, सम्मान, गुस्सा, अवसाद, समर्पण, प्रेम, वेदना, संवेदना जो कुछ भी हो अभिव्यक्त किया जाना जरूरी है...!!
#Maahiya 💛🌻
❤1
तेरे हर हूक्म पर गुजारा करूँ,,
तेरी हर रज़ा को गँवारा करूँ..!!
बने आईना तूँ मेरा,,,
तुझे देख-देख खुद को सँवारा करूँ...
#Maahiya❤️🥰🥀
तेरी हर रज़ा को गँवारा करूँ..!!
बने आईना तूँ मेरा,,,
तुझे देख-देख खुद को सँवारा करूँ...
#Maahiya❤️🥰🥀
❤7
कुछ लड़कियाँ ग़ुस्से में लिपटी मिलती हैं
सख्त दिखती हैं, तेज़ बोलती हैं।
लोग उन्हें देखकर डरते हैं,
कुछ उनसे उकता भी जाते हैं।
पर कोई नहीं समझता
उनके इस कठोर आवरण के पीछे
कितना टूटा हुआ दिल धड़कता है,
कितनी चोटें हैं जो मुस्कान ओढ़े छुपी रहती हैं।
जो बाहर से चट्टान लगती है,
अंदर से बिल्कुल काँच होती है — नाज़ुक और दरकती हुई।
वे हार मानना नहीं जानतीं,
न ही हर दर्द पर आँसू बहाती हैं।
लेकिन जब टूटती हैं
तो शोर नहीं होता।
बस भीतर एक भूकंप आता है
चुपचाप, अकेले।
आँसू उनकी पलकों तक भी नहीं पहुँचते,
सिर्फ़ दिल के किसी कोने में घुलते रहते हैं।
वो छोटे-छोटे तानों से टूटती हैं —
ख़ास कर अपनों से मिली चोटों से।
जिनसे बेइंतहा प्यार करती हैं,
उन्हीं से सबसे गहरे जख़्म भी पाती हैं।
और इन अनकहे दर्दों का बोझ
धीरे-धीरे उन्हें भीतर ही भीतर डुबो देता है।
फिर एक दिन
ग़ुस्सा भी ख़त्म हो जाता है,
अभिमान भी चुप हो जाता है।
ना कोई शिकायत, ना कोई आंसू।
बस एक लंबी चुप्पी
जिसे कोई पढ़ नहीं पाता।
लोग कहते हैं
"तुम पहले जैसी नहीं रहीं, अब बहुत शांत हो गई हो।"
पर कोई नहीं जानता —
इस चुप्पी के पीछे कितनी रातों की सिसकियाँ दबी हैं,
कितना टूट कर बिखर जाना छुपा है।
ग़ुस्से वाली लड़कियाँ ज़्यादा दिन नहीं जीतीं —
कम से कम मन से नहीं।
वो बस जीती हैं
एक खाली शरीर में,
टूटे हुए सपनों और थकी हुई रूह के साथ।
दुनिया बस उनकी परछाई देखती है,
मगर उनकी असली मुस्कान,
उनकी असली जान,
कब और कैसे खो गई
ये कोई नहीं जानता।
©️®️Vanita Banerjee ✍❤️💯
सख्त दिखती हैं, तेज़ बोलती हैं।
लोग उन्हें देखकर डरते हैं,
कुछ उनसे उकता भी जाते हैं।
पर कोई नहीं समझता
उनके इस कठोर आवरण के पीछे
कितना टूटा हुआ दिल धड़कता है,
कितनी चोटें हैं जो मुस्कान ओढ़े छुपी रहती हैं।
जो बाहर से चट्टान लगती है,
अंदर से बिल्कुल काँच होती है — नाज़ुक और दरकती हुई।
वे हार मानना नहीं जानतीं,
न ही हर दर्द पर आँसू बहाती हैं।
लेकिन जब टूटती हैं
तो शोर नहीं होता।
बस भीतर एक भूकंप आता है
चुपचाप, अकेले।
आँसू उनकी पलकों तक भी नहीं पहुँचते,
सिर्फ़ दिल के किसी कोने में घुलते रहते हैं।
वो छोटे-छोटे तानों से टूटती हैं —
ख़ास कर अपनों से मिली चोटों से।
जिनसे बेइंतहा प्यार करती हैं,
उन्हीं से सबसे गहरे जख़्म भी पाती हैं।
और इन अनकहे दर्दों का बोझ
धीरे-धीरे उन्हें भीतर ही भीतर डुबो देता है।
फिर एक दिन
ग़ुस्सा भी ख़त्म हो जाता है,
अभिमान भी चुप हो जाता है।
ना कोई शिकायत, ना कोई आंसू।
बस एक लंबी चुप्पी
जिसे कोई पढ़ नहीं पाता।
लोग कहते हैं
"तुम पहले जैसी नहीं रहीं, अब बहुत शांत हो गई हो।"
पर कोई नहीं जानता —
इस चुप्पी के पीछे कितनी रातों की सिसकियाँ दबी हैं,
कितना टूट कर बिखर जाना छुपा है।
ग़ुस्से वाली लड़कियाँ ज़्यादा दिन नहीं जीतीं —
कम से कम मन से नहीं।
वो बस जीती हैं
एक खाली शरीर में,
टूटे हुए सपनों और थकी हुई रूह के साथ।
दुनिया बस उनकी परछाई देखती है,
मगर उनकी असली मुस्कान,
उनकी असली जान,
कब और कैसे खो गई
ये कोई नहीं जानता।
©️®️Vanita Banerjee ✍❤️💯
❤15😢2🥰1💯1