तुम उस किरदार के लिए ज़िम्मेदार नहीं हो.. जो किसी ने अपनी सोच में तुम्हें दे दिया है..
अगर वे इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि
तुम उनकी उम्मीदों के हिसाब से नहीं जी रहे
तो ये उनकी समस्या है..
तुम्हारी नहीं..
ज़िन्दगी तुम्हारी है -खुद के सच के लिए जियो..
किसी और के सपनों के लिए नहीं..
तुम्हारी पहचान तुम्हारे हाथ में है..
जो सच में तुम्हें चाहता है..
वो तुम्हें जैसे हो वैसे अपनाएगा..l
#Maahiya💯❤️🩹🥀
अगर वे इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि
तुम उनकी उम्मीदों के हिसाब से नहीं जी रहे
तो ये उनकी समस्या है..
तुम्हारी नहीं..
ज़िन्दगी तुम्हारी है -खुद के सच के लिए जियो..
किसी और के सपनों के लिए नहीं..
तुम्हारी पहचान तुम्हारे हाथ में है..
जो सच में तुम्हें चाहता है..
वो तुम्हें जैसे हो वैसे अपनाएगा..l
#Maahiya💯❤️🩹🥀
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हो फ़ुरसत तो चले आना...
इश्क़ का मौसम है...बहार भी है...💞
इन्तज़ार है तीनों को तुम्हारा...
चाय है ...मैं हूं ....और बरसात भी है...💞
#Maahiya🥰❤️
इश्क़ का मौसम है...बहार भी है...💞
इन्तज़ार है तीनों को तुम्हारा...
चाय है ...मैं हूं ....और बरसात भी है...💞
#Maahiya🥰❤️
👍6🥰5❤1
वो जो शक्श भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है।
ना जाने मेरी कितनी वो नींद खाए बैठा है।
ना जाने क्या है कोई आंखो को जँचता ही नहीं तब से
जब से मेरे दिल मे वो घर बनाए बैठा है।
वो जो शक्श भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है।
उसके सिवा दिल का कोई अरमान नही लगता..
वो मालिक सा है दिल का मेरे मेहमान नही लगता..
मैं देखती हूं सामने से सब कुछ थम सा जाता है..
वो भी मुझे देखकर खुद धड़कन बढ़ाए बैठा है।
वो जो शख्स भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है।
बड़ा शातिर चोर है खुद को इल्जाम नही देता है..
मुझे सब कुछ देता है बस अपना नाम नही देता है..
एक मैं हू मुझे हर कहानी मे जिसकी तलाश है..
एक वो जो मेरे लिए गजले बनाए बैठा है..
वो जो शख्स भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है..।
ना जाने कितनी मेरी जान खाए बैठा है..।।
#foryou💞
#Maahiya ❤️🥀
ना जाने मेरी कितनी वो नींद खाए बैठा है।
ना जाने क्या है कोई आंखो को जँचता ही नहीं तब से
जब से मेरे दिल मे वो घर बनाए बैठा है।
वो जो शक्श भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है।
उसके सिवा दिल का कोई अरमान नही लगता..
वो मालिक सा है दिल का मेरे मेहमान नही लगता..
मैं देखती हूं सामने से सब कुछ थम सा जाता है..
वो भी मुझे देखकर खुद धड़कन बढ़ाए बैठा है।
वो जो शख्स भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है।
बड़ा शातिर चोर है खुद को इल्जाम नही देता है..
मुझे सब कुछ देता है बस अपना नाम नही देता है..
एक मैं हू मुझे हर कहानी मे जिसकी तलाश है..
एक वो जो मेरे लिए गजले बनाए बैठा है..
वो जो शख्स भीड़ से मुंह छिपाए बैठा है..।
ना जाने कितनी मेरी जान खाए बैठा है..।।
#foryou💞
#Maahiya ❤️🥀
❤22😢5👍2
दोहरा रहा हूँ बात पुरानी कही हुई
तस्वीर तेरे घर में थी मेरी लगी हुई
इन बद-नसीब आँखों ने देखी है बार बार
दीवार में ग़रीब की ख़्वाहिश चुनी हुई
ताज़ा ग़ज़ल ज़रूरी है महफ़िल के वास्ते
सुनता नहीं है कोई दोबारा सुनी हुई
मुद्दत से कोई दूसरा रहता है हम नहीं
दरवाज़े पर हमारी है तख़्ती लगी हुई
जब तक है डोर हाथ में तब तक का खेल है
देखी तो होंगी तुम ने पतंगें कटी हुई
जिस की जुदाई ने मुझे शाइर बना दिया
पढ़ता हूँ मैं ग़ज़ल भी उसी की लिखी हुई
लगता है जैसे घर में नहीं हूँ मैं क़ैद हूँ
मिलती हैं रोटियाँ भी जहाँ पर गिनी हुई
साँसों के आने जाने पे चलता है कारोबार
छूता नहीं है कोई भी हाँडी जली हुई
ये ज़ख़्म का निशान है जाएगा देर से
छुटती नहीं है जल्दी से मेहंदी लगी हुई
"मुनव्वर राना"✍
तस्वीर तेरे घर में थी मेरी लगी हुई
इन बद-नसीब आँखों ने देखी है बार बार
दीवार में ग़रीब की ख़्वाहिश चुनी हुई
ताज़ा ग़ज़ल ज़रूरी है महफ़िल के वास्ते
सुनता नहीं है कोई दोबारा सुनी हुई
मुद्दत से कोई दूसरा रहता है हम नहीं
दरवाज़े पर हमारी है तख़्ती लगी हुई
जब तक है डोर हाथ में तब तक का खेल है
देखी तो होंगी तुम ने पतंगें कटी हुई
जिस की जुदाई ने मुझे शाइर बना दिया
पढ़ता हूँ मैं ग़ज़ल भी उसी की लिखी हुई
लगता है जैसे घर में नहीं हूँ मैं क़ैद हूँ
मिलती हैं रोटियाँ भी जहाँ पर गिनी हुई
साँसों के आने जाने पे चलता है कारोबार
छूता नहीं है कोई भी हाँडी जली हुई
ये ज़ख़्म का निशान है जाएगा देर से
छुटती नहीं है जल्दी से मेहंदी लगी हुई
"मुनव्वर राना"✍
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