जब भी तुम लिखने बैठो मुझे तो,,
शुरुआत करना मेरे डार्क साइड से,,,
क्योंकी मेरी खूबिया तो मुझे सब बताते हैं,,
मुझे सुनना हैं तुमसे मैं कंहा कंहा से गलत हूँ,,,
मेरी नादानियाँ कोंन सी हैं,,,
किस बात ने मेरी तुम्हे रुला दिया था,,,
किस बात को आज भी याद करते हो तो गुस्सा आ जाता है।
तुम लिखना मेरी किस शायरी को बदलना चाहोगे,,
लिखना मुझे मुझसे नाराज होके आखिरी बार मुझे छोड़ने का मन किया था,,
मैं ज़ानती हूँ मुझे मुझसे बेहतर जानते हो तुम...
नाराजगी लिखते लिखते कंही किसी कोने में लिखना,,
मेरी वो बाते ज़िन्हे याद करके आज भी मुस्करा लेते हो,,,
उसी कोने के नीचे लिखना वो बाते जो अलग करती है मुझे तेरी दुनिया से,,,
लिखना वो बाते जो तुझे मजबुर करती है मुझपे प्यार लुटाने के लिए,,,
ओर वो जलन भी लिखना जो तुझे होती हैं जब कोई ओर पढ़ता है।
मुझे वो भी लिखना जब कोई तारीफ़ करते करते मुझे चाहने का दावा करने लगता है..
ओर तुम्हे लगता है क्यूँ आखिर क्यूँ लिखती हो माही...
और आखिर में वो लिखना जो अक्सर हम दोनो को रुला देता है,,,,
वो काश जो मजबूर करता है हमे दूर रहने पर,,,
एक आश जो ऊमीद देती हैं हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे,,,
और आखिर में एक सच के हम कभी नहीं मिलेंगे..
हाँ मगर तुम लिखना ज़रूर क्योंकी लिख हम वो सब सकते हैं,,,
जो अक्सर हम बताते नही है एक दुसरे को,,
तुम बस लिख देना मे पढ़ लूँगी अल्फ़ाजो की आँखो मे आंखे डाल के..।
#Maahiya❤️🥀
#sanatani_ishq💖
शुरुआत करना मेरे डार्क साइड से,,,
क्योंकी मेरी खूबिया तो मुझे सब बताते हैं,,
मुझे सुनना हैं तुमसे मैं कंहा कंहा से गलत हूँ,,,
मेरी नादानियाँ कोंन सी हैं,,,
किस बात ने मेरी तुम्हे रुला दिया था,,,
किस बात को आज भी याद करते हो तो गुस्सा आ जाता है।
तुम लिखना मेरी किस शायरी को बदलना चाहोगे,,
लिखना मुझे मुझसे नाराज होके आखिरी बार मुझे छोड़ने का मन किया था,,
मैं ज़ानती हूँ मुझे मुझसे बेहतर जानते हो तुम...
नाराजगी लिखते लिखते कंही किसी कोने में लिखना,,
मेरी वो बाते ज़िन्हे याद करके आज भी मुस्करा लेते हो,,,
उसी कोने के नीचे लिखना वो बाते जो अलग करती है मुझे तेरी दुनिया से,,,
लिखना वो बाते जो तुझे मजबुर करती है मुझपे प्यार लुटाने के लिए,,,
ओर वो जलन भी लिखना जो तुझे होती हैं जब कोई ओर पढ़ता है।
मुझे वो भी लिखना जब कोई तारीफ़ करते करते मुझे चाहने का दावा करने लगता है..
ओर तुम्हे लगता है क्यूँ आखिर क्यूँ लिखती हो माही...
और आखिर में वो लिखना जो अक्सर हम दोनो को रुला देता है,,,,
वो काश जो मजबूर करता है हमे दूर रहने पर,,,
एक आश जो ऊमीद देती हैं हम एक दिन ज़रूर मिलेंगे,,,
और आखिर में एक सच के हम कभी नहीं मिलेंगे..
हाँ मगर तुम लिखना ज़रूर क्योंकी लिख हम वो सब सकते हैं,,,
जो अक्सर हम बताते नही है एक दुसरे को,,
तुम बस लिख देना मे पढ़ लूँगी अल्फ़ाजो की आँखो मे आंखे डाल के..।
#Maahiya❤️🥀
#sanatani_ishq💖
❤14🥰2
यूं तो बहुत से लोग है दुनिया मे पर मेरी तो दुनिया वही है,,,
ये मेरी बातें मीठी मीठी सी सब उनकी सोहबत का असर है,,,
ये शायरी ये गजले मुझसे कहाँ बनती थी,
ये तो उन्हे खुल कर हंसते देखा तो हुनर आया,,
मैं कभी मिली नही उनसे लेकिन रोज मिलती हूं,,,
कभी ख्यालों मे कभी ख्यालों की दुनिया मे,, यानि Maahi ki duniya में,,
अब तक का सफर और ना जाने कब तक का सफर यूं ही बदस्तूर जारी रहने वाला है,,,,
क्योंकि अब उसे न सोचूं तो सोचती हूं और आखिर क्या सोचूं,,
क्योंकि मेरी हर सोच मे वही है,,,
मैं भटक जाती हूं लेकिन लौट कर उसी के पास आती हूं...
उम्र मे भले कम हो तजुर्बे मे बहुत बड़ा है वो..।
❤️❤️❤️
#sanatani_ishq💖
#Maahiya ❤️
ये मेरी बातें मीठी मीठी सी सब उनकी सोहबत का असर है,,,
ये शायरी ये गजले मुझसे कहाँ बनती थी,
ये तो उन्हे खुल कर हंसते देखा तो हुनर आया,,
मैं कभी मिली नही उनसे लेकिन रोज मिलती हूं,,,
कभी ख्यालों मे कभी ख्यालों की दुनिया मे,, यानि Maahi ki duniya में,,
अब तक का सफर और ना जाने कब तक का सफर यूं ही बदस्तूर जारी रहने वाला है,,,,
क्योंकि अब उसे न सोचूं तो सोचती हूं और आखिर क्या सोचूं,,
क्योंकि मेरी हर सोच मे वही है,,,
मैं भटक जाती हूं लेकिन लौट कर उसी के पास आती हूं...
उम्र मे भले कम हो तजुर्बे मे बहुत बड़ा है वो..।
❤️❤️❤️
#sanatani_ishq💖
#Maahiya ❤️
❤11
हर स्पर्श प्रेम नहीं होता, पर कुछ दुर्लभ साथी ऐसे होते हैं जिनकी बाँहें देह को नहीं, आत्मा को थामती हैं!-- उनका आलिंगन कोई बाहरी क्रिया नहीं, भीतर तक उतरती एक सूक्ष्म साधना होता है-- जहाँ शब्द समाप्त होकर मौन मंत्र की तरह कंपन जन्म लेता है!--
___
ऐसे स्पर्श में सुख नहीं दिया जाता, बल्कि थकी हुई चेतना गलकर शांत हो जाती है!-- वहाँ बाँहें नहीं फैलतीं, अपनापन एक निःशब्द उपस्थिति बनकर भीतर टिक जाता है!---
___
यही आलिंगन देह से नहीं, चेतना से होता है और थोड़े पल के लिए आत्मा को समाधि-सा विश्राम दे जाता है!--
___
©® स्मिता सिन्हा
#sanatani_ishq❤️🥀
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ऐसे स्पर्श में सुख नहीं दिया जाता, बल्कि थकी हुई चेतना गलकर शांत हो जाती है!-- वहाँ बाँहें नहीं फैलतीं, अपनापन एक निःशब्द उपस्थिति बनकर भीतर टिक जाता है!---
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यही आलिंगन देह से नहीं, चेतना से होता है और थोड़े पल के लिए आत्मा को समाधि-सा विश्राम दे जाता है!--
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©® स्मिता सिन्हा
#sanatani_ishq❤️🥀
❤13👍1
वनवास के दिनों में, सिर्फ 'जुगनू 'का सहारा है।
घी के जलते दीपक तो, संसार का छलावा है।।
#sanatani_ishq 🧿❤️
घी के जलते दीपक तो, संसार का छलावा है।।
#sanatani_ishq 🧿❤️
❤19
कभी-कभी जीवन की गहराइयाँ इतनी तीव्र होती है
कि उन्हें व्यक्त करने के लिए शब्द अपर्याप्त पड़ जाते है!-
__
दर्द का हर अध्याय चुप्पी में लिखा जाता है---
वहाँ न कोई भाषा पहुँचती है और
न कोई अभिव्यक्ति उसका भार उठा पाती है!--
___
जिन संघर्षों से गुजरकर हम स्वयं को सँवारते है,
उनकी तीव्रता को केवल हमारा मन ही जानता है!--
___
दूसरो को वही रूप दिखाई देता है
जो हमने टूटकर फिर से खुद को गढ़कर बनाया है,
पर उस निर्माण का इतिहास
हमारी चुप्पी के भीतर ही दफ़्न रहता है!--
___
©® स्मिता सिन्हा
#sanatani_ishq❤️🥀
कि उन्हें व्यक्त करने के लिए शब्द अपर्याप्त पड़ जाते है!-
__
दर्द का हर अध्याय चुप्पी में लिखा जाता है---
वहाँ न कोई भाषा पहुँचती है और
न कोई अभिव्यक्ति उसका भार उठा पाती है!--
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जिन संघर्षों से गुजरकर हम स्वयं को सँवारते है,
उनकी तीव्रता को केवल हमारा मन ही जानता है!--
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दूसरो को वही रूप दिखाई देता है
जो हमने टूटकर फिर से खुद को गढ़कर बनाया है,
पर उस निर्माण का इतिहास
हमारी चुप्पी के भीतर ही दफ़्न रहता है!--
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©® स्मिता सिन्हा
#sanatani_ishq❤️🥀
❤7👍1
आज घर में दीपक जले हैं,
मगर दिल में अब भी वही एक नाम टिमटिमा रहा है…
सब कह रहे हैं — “खुश रहो, दिवाली है”…
पर कोई नहीं जानता,
कि कुछ रोशनियाँ आँखों में नमी भी छोड़ जाती हैं।
तू कहीं भी हो…
बस इतना जान ले,
तेरी याद आज फिर मेरी खिड़की के पास बैठी है —
जैसे कोई पुराना दिया, जो बुझना ही नहीं चाहता।
इस बार की दिवाली पर
मैंने कोई नया दिया नहीं जलाया,
बस तेरे जाने के बाद जो बुझा था,
उसी को फिर से जगा दिया है…
क्योंकि प्यार कभी खत्म नहीं होता,
बस वक़्त के साथ उसकी लौ थोड़ी शांत हो जाती है।
💫 हैप्पी दिवाली… उन सबको,
जिनकी रोशनी किसी की याद में जलती है।
#sanatani_ishq ❤️🥀
#Happy_diwali🪔
मगर दिल में अब भी वही एक नाम टिमटिमा रहा है…
सब कह रहे हैं — “खुश रहो, दिवाली है”…
पर कोई नहीं जानता,
कि कुछ रोशनियाँ आँखों में नमी भी छोड़ जाती हैं।
तू कहीं भी हो…
बस इतना जान ले,
तेरी याद आज फिर मेरी खिड़की के पास बैठी है —
जैसे कोई पुराना दिया, जो बुझना ही नहीं चाहता।
इस बार की दिवाली पर
मैंने कोई नया दिया नहीं जलाया,
बस तेरे जाने के बाद जो बुझा था,
उसी को फिर से जगा दिया है…
क्योंकि प्यार कभी खत्म नहीं होता,
बस वक़्त के साथ उसकी लौ थोड़ी शांत हो जाती है।
💫 हैप्पी दिवाली… उन सबको,
जिनकी रोशनी किसी की याद में जलती है।
#sanatani_ishq ❤️🥀
#Happy_diwali🪔
❤9
कुछ लम्हें
सिर्फ लम्हें नहीं होते
जिन्दगी बन जाते हैं
जैसे
तुम्हारे साथ बिताया
वो हर एक पल
जो जीवंत हैं
आज भी
और रहेंगे
जीवन के
अंतिम पहर तक...
#pathankot_ki_yaadein 🥀
#sanatani_ishq❤️
सिर्फ लम्हें नहीं होते
जिन्दगी बन जाते हैं
जैसे
तुम्हारे साथ बिताया
वो हर एक पल
जो जीवंत हैं
आज भी
और रहेंगे
जीवन के
अंतिम पहर तक...
#pathankot_ki_yaadein 🥀
#sanatani_ishq❤️
❤8
बहुत सी नाराज़गी
और गुस्सा पी जाने के बाद भी
बचा रहता है बहुत कुछ...
जैसे पौधों के सूखने के बाद भी
बची रहती है कोमल संवेदनाएं...नर्म रुई सी...
थोड़ा सा ही सही
बचा लेता है अपना अस्तित्व...
कभी जो पुष्पित- पल्लवित हुई थीं...
समेट लेता उनका पूरा जीवन
अपनी छोटी सी काया में
उस खुश्बू को संभाले
डूबता, तैरता, उड़ता रहता आजीवन ...!
इसलिए शायद
तकिए ने समेटे हैं सबसे ज्यादा आँसू...
क्योकि उसे पता होता है सम्बन्धों के सूखने की पीड़ा...!!
#sanatani_ishq❤️🥀
और गुस्सा पी जाने के बाद भी
बचा रहता है बहुत कुछ...
जैसे पौधों के सूखने के बाद भी
बची रहती है कोमल संवेदनाएं...नर्म रुई सी...
थोड़ा सा ही सही
बचा लेता है अपना अस्तित्व...
कभी जो पुष्पित- पल्लवित हुई थीं...
समेट लेता उनका पूरा जीवन
अपनी छोटी सी काया में
उस खुश्बू को संभाले
डूबता, तैरता, उड़ता रहता आजीवन ...!
इसलिए शायद
तकिए ने समेटे हैं सबसे ज्यादा आँसू...
क्योकि उसे पता होता है सम्बन्धों के सूखने की पीड़ा...!!
#sanatani_ishq❤️🥀
❤16👍3
मेरे शेरों की तामीर बदल देता है,,,
लहज़ा लफ्ज़ों की तासीर बदल देता है,,,
सोचा था आज़ाद करेगा अब के मुझको,,,
वो बस आकर के ज़ंजीर बदल देता है,,,
तेरे बिना बिखरा रहता है मन का कमरा,,,
तू आकर इसकी तस्वीर बदल देता है,,..
..........
#Maahiya ❤️✨
लहज़ा लफ्ज़ों की तासीर बदल देता है,,,
सोचा था आज़ाद करेगा अब के मुझको,,,
वो बस आकर के ज़ंजीर बदल देता है,,,
तेरे बिना बिखरा रहता है मन का कमरा,,,
तू आकर इसकी तस्वीर बदल देता है,,..
..........
#Maahiya ❤️✨
❤29