References to Bhagavad Geeta in Sangam Literature !!
Kural , the famous Sangam text dated back to 2nd-1st century BCE has very much parallels to Bhagavad geeta.
These are said to be loaned from Mahabharata , Arthashastra , Manusmriti etc.
We will talk about these texts later. Now check out the Parallels of Bhagavad geeta and Kural..
Megasthenes Indica also mentions the Dandamis ( Sanyasi ) quoting exact word to word said in Bhagavad Geeta 2/22 in front of the the messenger of Alexander.
Hence these are some major and powerful references , debunking Aryan Migrations and establishing the antiquity of Vedic culture in Bharat...
The next part will be on Mahabharata historicity : showing BCE old evidence for it.
Source : Studies in Tamil literature & History , VR Ramachandra DIkshitar
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नवबौद्धों के नीले सपने : भाग 10
यह नवबौद्धों का वैदिकों पर स्पष्ट आरोप है कि हमने अपने भगवान कृष्ण को गढ़ने के लिए घटजातक के वासुदेव को चुरा लिया ।
लेकिन क्या आप जानते हैं ?
भारतीय इतिहासकार हेमचंद्र रायचौधरी के अनुसार जातक कथाएँ पूरी तरह से काल्पनिक हैं और उनमें कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने भगवान कृष्ण की किंवदंतियों को संरक्षित किया, उन्हें पुराणों और महाकाव्य महाभारत की मूल कहानियों से अलग किया।
इससे यह सिद्ध हो गया कि इन लोगों ने वासुदेव कृष्ण की कहानियाँ हमसे चुरा लीं और उन्हें सारिपुत्र का पूर्व जन्म बना दिया ।
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यह नवबौद्धों का वैदिकों पर स्पष्ट आरोप है कि हमने अपने भगवान कृष्ण को गढ़ने के लिए घटजातक के वासुदेव को चुरा लिया ।
लेकिन क्या आप जानते हैं ?
भारतीय इतिहासकार हेमचंद्र रायचौधरी के अनुसार जातक कथाएँ पूरी तरह से काल्पनिक हैं और उनमें कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने भगवान कृष्ण की किंवदंतियों को संरक्षित किया, उन्हें पुराणों और महाकाव्य महाभारत की मूल कहानियों से अलग किया।
प्रसिद्ध भारतीय विद्वान RG Bhandarkar ने घटपंडित जातक का काल निर्धारण ईसा की बाद की शताब्दियों में किया है।
इससे यह सिद्ध हो गया कि इन लोगों ने वासुदेव कृष्ण की कहानियाँ हमसे चुरा लीं और उन्हें सारिपुत्र का पूर्व जन्म बना दिया ।
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पांडा का पोपट : भाग 15
पांडा बाबू का कहना है महाभारत महर्षि पाणिनि से भी नवीन है।
आइये इसके विपक्ष में ऐतिहासिक दृष्टिकोण देखते हैं ।
महर्षि पाणिनि अपने अष्टाध्यायी 6/2/38 के सूत्र में महान के पूर्वपद के उदाहरण में महाभारत को उद्धृत करते हैं। इसके भावार्थ और इसकी प्राचीन कशिका वृत्ति में भी इसको महाभारत ग्रंथ का ही प्रमाण माना गया है ।
प्रसिद्ध इतिहासकार श्रीनिवास अयंगर कहते हैं , कि युद्ध के बाद महाभारत का पुनर्वचन शौनक ने किया था, जो अर्जुन के छठी पीढ़ी के अधिसिमकृष्ण के समकालीन थे। उनके अनुसर प्रारम्भिक ग्रन्थरचना 1400 ईसा पूर्व (अयंगर अनुसर भारतयुद्ध का काल) के ही आस पास हुआ था।
ऐसा माना जाता है कि पाणिनि कम से कम 6th-5th century BC के थे , इसलिए हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि महाभारत महाकाव्य पाणिनि और आश्वलायन से पहले अस्तित्व में था।
इति...
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पांडा बाबू का कहना है महाभारत महर्षि पाणिनि से भी नवीन है।
आइये इसके विपक्ष में ऐतिहासिक दृष्टिकोण देखते हैं ।
महर्षि पाणिनि अपने अष्टाध्यायी 6/2/38 के सूत्र में महान के पूर्वपद के उदाहरण में महाभारत को उद्धृत करते हैं। इसके भावार्थ और इसकी प्राचीन कशिका वृत्ति में भी इसको महाभारत ग्रंथ का ही प्रमाण माना गया है ।
प्रसिद्ध इतिहासकार दीक्षितर के अनुसार महाभारत और 2nd century BCE के संगमसाहित्य कुरल में बहुत समानता देखने को मिलती हैं।
प्रसिद्ध इतिहासकार श्रीनिवास अयंगर कहते हैं , कि युद्ध के बाद महाभारत का पुनर्वचन शौनक ने किया था, जो अर्जुन के छठी पीढ़ी के अधिसिमकृष्ण के समकालीन थे। उनके अनुसर प्रारम्भिक ग्रन्थरचना 1400 ईसा पूर्व (अयंगर अनुसर भारतयुद्ध का काल) के ही आस पास हुआ था।
हेमचंद्र का मानना है, पाणिनि और आश्वलायन महाकाव्य महाभारत को उसके प्राचीन रूप में जानते थे ।
ऐसा माना जाता है कि पाणिनि कम से कम 6th-5th century BC के थे , इसलिए हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि महाभारत महाकाव्य पाणिनि और आश्वलायन से पहले अस्तित्व में था।
इति...
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