प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
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" येन बद्धो बलि राजा,दानवेन्द्रो महाबल: ।
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।। "

इस साल का रक्षाबंधन मैं अपने उन भाइयों और बहनों को समर्पित करता हूं , जो अन्याय के शिकार हुए , न्याय मांगने गए तो धिक्कार मिली , जो स्वयं के हृदय से तिरस्कृत होकर बोझ बनकर जी रहे हैं , जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया , जिनका शोषण हुआ है , तथा जिन्होंने इस देश , हमारी मातृभूमि भारत की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान कर दिया ।

हम उन अमर शहीदों को नमन करते हैं , जो सही मायने में हमारे हीरो हैं तथा हमारे अंदर राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा जगाते हैं ।
हम अपने देश व धर्म की रक्षा करने का प्रण लेते हैं ।

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The Weber's Manuscript : Part 4


Let's move forward and talk about some other important Gotras in the manuscript.

1. अग्निवेश्य:- अग्निवेश से, आत्रेय पुनर्वसु के 6 प्राथमिक शिष्यों में से एक।
2.वशिष्ठ
3. कौशिकी : ऋषि कौशिक/विश्वामित्र से
4. कात्यायनी
5. हरितायन: ऋषि हरित से, आत्रेय पुनर्वसु के 6 प्राथमिक शिष्यों में से एक।

तो, यहां वे ऋषि-मुनि हैं, जो मुख्य रूप से प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित स्वदेशी औषधीय प्रणाली आयुर्वेद से जुड़े हैं।

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बौद्ध देवी तारा को हिंदू देवी की अवधारणा से लिया गया है।

सिर्फ उनकी ही नहीं, बल्कि पर्णसाबरी नामक एक अन्य देवी की नकल मां दुर्गा/आर्यादेवी से की गई है, जिसका उल्लेख हरिवंश और महाभारत में किया गया है।

Source : The Sakti Cult and Tara , by Eminent Historian DC Sircar


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" भूमंडल पर कोई ऐसा राजा नहीं है जो भगवान श्रीकृष्ण के तेज से परास्त ना हुआ हो । भूमंडल पर कोई ऐसा राजा नहीं जो उन्हें जीत सके ।

वेद-वेदांग आदि का ज्ञान , क्षमा दृष्टि पुष्टि धृति योग सांख्य यश शौर्य बल कीर्ति आदि सभी गुण भगवान श्रीकृष्ण में सर्वोच्च रूप में प्रतिष्ठित हैं । त्रैलोक्य के में कोई इनकी समानता नहीं कर सकता । "

- महाभारत सभापर्व अध्याय ३८ , भीष्म पितामह का मंतव्य

भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण की भांति हमें भी श्रेष्ठ बनना चाहिए , वह योद्धा , गुरु , स्वयं नारायण , धर्मरक्षक तथा सत्यचरित्र थे ; छलिया , रणछोड़ तथा विलासी नहीं ।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।


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जो भरोसा आज आपने मुझ पर दिखाया है , आशा करता हूं वह भरोसा आगे तक चलेगा ।

हमारे समूह से 500 लोग जुड़ चुके हैं । उनमें से हर एक को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं , क्योंकि आज मैं जो कुछ भी हूं , आपके साथ के कारण हूं ।

मैं अपने अग्रज कार्तिक जी , आशीष जी , आर्यबोस जी और प्रिय मित्र पुष्यमित्र का भी आभार व्यक्त करता हूं , जिन्होंने हमेशा ही मेरी सहायता की ।

जयतु भारतम् जयतु संस्कृतम्
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्
जयतु देवी 🙏🙏

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वामपंथी तथा नवबौद्धों द्वारा गायत्री मंत्र पर लगाए गए अश्लीलता के आरोप का खण्डन पर हमारा यह लेख जरूर पढ़े। 🙏🙏👇👇
https://vedkabhedexposse.blogspot.com/2024/08/blog-post_28.html?m=1

Written by : Ashish Bhai 🗿🤝


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क्या पारस्कर गृह्यसूत्र १/३/२९-३० में गौहत्या है ?


जी हां आपने सही सुना । आजकल हमारे ग्रंथों पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं । जानकर और दुख होता है किया आरोप लगाने वाले कुछ हिंदू ही हैं ।

यह अतिथि सत्कार प्रकरण है जहां पर गवालभन् किया जा रहा है ।

आलभन शब्द का अर्थ मैं पहले ही समझा चुका हूं , कि इसकी धातु लभ् स्पर्श तथा प्राप्त करने हेतु प्रयोग में लाई जाती है ।


इसी प्रकार यहां पर गौ का स्पर्श किया जाता है । यहां तक तो फिर भी सब ठीक है , परंतु अचानक से सूत्र २९-३० आते ही हमें मांसाहार प्रकरण दिखता है , और वो भी गौ का ।

अब आपको एक चीज बताता हूं ।

खुद इस पारस्कर गृह्यसूत्र के भाष्याकार हरिहर तथा गदाधर ने खुद इस चीज को गलत , वेदविरुद्ध , स्मृतिविरुद्ध , तथा अप्रमाण्य माना है ।


आचार्य गदाधर , आचार्य जयराम का मत उद्धरित करते हुए बोलते हैं कि गोवध करने की आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि मधुपर्क के साथ अजालभन् कर उसके दूध का पायस ( खीर ) देना चाहिए ।

इसके अलावा याज्ञवल्क्यस्मृति की मिताक्षराटीका १/१५६ में भी इसका स्पष्ट खंडन आता है :
मधुपर्के गोवधादिकम् नाचरेत्

ये सर्वकालिक धर्मविरुद्ध कार्य है ।

क्रमशः ।।
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