Debunking Rishi uvach #3 : historicity of Murti puja of Devi :-
भाई, यूनानियों के पास स्वयं एक भी देवता या देवी नहीं है जिसके एकाधिक 8/10 हाथ हों। फिर वे हमें ऐसी मूर्तियाँ बनाने के लिए कैसे प्रभावित कर सकते हैं ?? 🤡🤡
अब, देवी माँ की "मूर्तिपूजा" कितनी पुरानी है? इतिहासकारों के अनुसार, उनकी मूर्ति बनाने का इतिहास कम से कम 3000 ईसा पूर्व का है ; प्रारंभिक हड़प्पा सभ्यता के उत्कर्ष के दौरान ।
इसके अलावा उस समय भी लगभग हर जगह देवी को महिष से जोड़ा जाता था ; देवी की मूर्तियाँ भी मिलीं।
यहाँ तक कि प्रारंभिक हड़प्पा चरण के समय में भी यही प्रथा भारत में थी। अत: यह सिद्ध हुआ कि उस काल में भी देवी की पूजा महिषासुरमर्दिनी के रूप में होती थी। यहां तक कि युद्ध, मातृत्व और सुरक्षा की देवी के सम्मान में उनकी मूर्तियां भी बनाई गईं।
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उपरोक्त की तरह ही, शैवधर्म के इतिहास में प्राचीन काल से ही भगवान शिव के लिंग और " मूर्ति " की पूजा की जाती थी । वीआर रामचन्द्र दीक्षितार ने इसे ताम्रपाषाण काल से भी पुराना बताया है।
इससे साबित हुआ कि ये सभी बातें जैसे " देवी की मूर्तिपूजा नवीन, महाभारत के बाद ब्ला ब्ला " ऋषिउवाच के सभी झूठ हैं, जिनका कोई सबूत नहीं है ।
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सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
देवी स्कंदमाता सबका कल्याण करें 🙏
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Check out Hypocrisy of Rishi uvach 😂😂
Earlier he claimed that Ashtabhuja form of Devi was taken from Greeks. Now he's telling that it wasn't his topic.
Why so ? 😂
Afraid of pramanas or you're lacking them ??
आगे बोलते हैं कि हम किसी द्रविड़वादी को नहीं मानेंगे और ताम्रपाषाण काल कल्पित है 🤡
भाई आपको कुछ मानना ही नहीं है तो आप प्रमाण मांगते ही क्यों है ?
और शैव संप्रदाय तो महाभारत और उसके पहले भी था , इसका प्रमाण तो मैंने सीधा-सीधा दे दिया है । इसके अलावा प्रतिभा और लिंग दोनों के ही पूजन का समर्थन आपके इतिहासकार द्वारा मिल जाएगा । आप में दम हो तो पुरातत्व व इतिहास से खंडन कीजिए ।
इसको देने का औचित्य यही था कि भारत में मूर्तिपूजा का इतिहास जो लोग नवीन/यवन आक्रमण के बाद मानते हैं , वह लोग थोड़ा अध्ययन पर ध्यान दें ।
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Earlier he claimed that Ashtabhuja form of Devi was taken from Greeks. Now he's telling that it wasn't his topic.
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आगे बोलते हैं कि हम किसी द्रविड़वादी को नहीं मानेंगे और ताम्रपाषाण काल कल्पित है 🤡
भाई आपको कुछ मानना ही नहीं है तो आप प्रमाण मांगते ही क्यों है ?
और शैव संप्रदाय तो महाभारत और उसके पहले भी था , इसका प्रमाण तो मैंने सीधा-सीधा दे दिया है । इसके अलावा प्रतिभा और लिंग दोनों के ही पूजन का समर्थन आपके इतिहासकार द्वारा मिल जाएगा । आप में दम हो तो पुरातत्व व इतिहास से खंडन कीजिए ।
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Devi's association with Trishula is as old as the Neolithic and Megalithic periods.
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Source : Vicissitudes of the Goddess
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प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
Devi's association with Trishula is as old as the Neolithic and Megalithic periods. Source : Vicissitudes of the Goddess Join us at 👇⬇️ @scienceinsightdharma @history_of_manuvadii
हम देवी दुर्गा को सिंहवाहिनी या शेरावाली माता कहकर बुलाते हैं ।
परंतु क्या आप जानते हैं ?
मां आदिशक्ति का शेर से जुड़ाव होने का प्रमाण हमें आचार्य विष्णुशर्मा कृत पंचतंत्र में भी मिलता है , जो काम से कम ईसा से 200 वर्ष पूर्व का ग्रंथ है ।
अतः सिद्ध है , कि सिंहवाहिनी रूप में माता दुर्गा की पूजा इतिहास में बहुत पहले से होते आ रही है ।
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परंतु क्या आप जानते हैं ?
मां आदिशक्ति का शेर से जुड़ाव होने का प्रमाण हमें आचार्य विष्णुशर्मा कृत पंचतंत्र में भी मिलता है , जो काम से कम ईसा से 200 वर्ष पूर्व का ग्रंथ है ।
अतः सिद्ध है , कि सिंहवाहिनी रूप में माता दुर्गा की पूजा इतिहास में बहुत पहले से होते आ रही है ।
संदर्भ : पंचतंत्र , मित्रभेदः
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Even Sri Lakshmi as in her Mahalaxmi form and Durga maa both were associated with Lion in Mauryan , Kushana and Gupta period.
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Pratapaditya pal , Indian Sculptures Vol. 1
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Choti sadri inscription mentions devi durga as mounted on a chariot of Lions.
So We got indian records for Devi as Simhavahini.
So We got indian records for Devi as Simhavahini.
Source : Aulikaras inscriptions by Daniel Balogh
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प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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अतः यहां से ऋषिउवाच के एक और झूठ का खंडन होता है ।
देवी को अत्यंत प्राचीन काल से ही शेर से जोड़ा जाता था । इसकी पुष्टि भारतीय और विदेशी दोनों ही प्रमाणों से हो जाती है । देवी की मूर्तिकला पूरे भारत में शेर के साथ मिलती है ।
देवी को अत्यंत प्राचीन काल से ही शेर से जोड़ा जाता था । इसकी पुष्टि भारतीय और विदेशी दोनों ही प्रमाणों से हो जाती है । देवी की मूर्तिकला पूरे भारत में शेर के साथ मिलती है ।
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