मोहान्धकार-भरिते हृदये मदीये
मातः सदैव कुरु वासमुदारभावे।
स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिः
शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम् ॥
मां सरस्वती हम सभी पर करुणा और विद्या की कृपा करें ।
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मातः सदैव कुरु वासमुदारभावे।
स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिः
शीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम् ॥
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सीरियल्स के विपरीत , महाभारत में ऋषि नारद की महिमा को दर्शाया गया है। वे " शरारती " या " कलहप्रिय " नहीं थे , जैसा कि टीवी में दिखाया जाता है ; अपितु वे चपलतादि दोषों से रहित थे । वे समस्त प्राणियों के हित में तत्पर रहते और स्वाध्यायशील थे ।
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~ शान्तिपर्वांतरगत श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद
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Forwarded from Modern Sāṃkhyavādin (Mystical Garuda 🦅)
Some guys :- Evolution is fake. It is against the notion of Vedas 😢😢.
Avg. Satkāryavādin :- Nahh it isn't. It is an explainable fact , whose essence doesn't even go against Sāṃkhya's basic principle of Satkāryavāda.
Source :- Jyotiṣmatī Vyākhyā of Sāṃkhyatattva-kaumudī
Avg. Satkāryavādin :- Nahh it isn't. It is an explainable fact , whose essence doesn't even go against Sāṃkhya's basic principle of Satkāryavāda.
Source :- Jyotiṣmatī Vyākhyā of Sāṃkhyatattva-kaumudī
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अनाथस्य दीनस्य तृष्णातुरस्य भयार्तस्य भीतस्य बद्धस्य जन्तोः ।
त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ॥
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त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ॥
Credit :- Dark Sanatan ji
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आरजी भंडारकर ने अपना मत सिद्ध करने क चक्कर में वेदार्थ का जो विनाश किया ; वह प्रकरण, अलंकार और उनकी अज्ञता सिद्ध करते हुए कल्पना से अधिक कुछ नहीं |
आर्य-द्रविड़ विभाजन करने के चक्कर में वेदार्थ का विनाश करना ; कहाँ तक उचित है ?
क्या वो पूर्वाचार्यों से ज्यादा वेद को समझते हैं ?
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आर्य-द्रविड़ विभाजन करने के चक्कर में वेदार्थ का विनाश करना ; कहाँ तक उचित है ?
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क्या वैदिक धर्म में बाल-विवाह की अनुमति है ?
गृह्यसूत्रों के पूर्वाचार्यों का कथन है कि विवाहोपरांत , ३ दिनों के ब्रह्मचर्य के बाद चौथी रात्रि में प्रथम बार गर्भाधान करना चाहिए | आचार्य गोभिल का कथन है कि स्त्री के पति के घर में आने के पश्चात् जब ऋतुमती (गर्भधारण की क्षमता से युक्त) होने के बाद ही समागम करना चाहिए |
~ गोभिल गृह्यसूत्र २/५/७-८
शंका :- बाल-विवाह के कुछ वर्ष उपरांत भी गर्भाधान किया जा सकता है ; तो इससे बाल विवाह का खंडन कैसे होता है ?
उत्तर :- आश्वलायन , आपस्तम्ब , कात्यायन प्रभृति आदि आचार्यों के मत में भी विवाह की चतुर्थ रात्रि में गर्भाधान किया जा सकता है | इसके हिसाब से गर्भाधान के ३ मास बाद पुंसवन होगा , जो गर्भावस्था का सूचक माना जाता है |
१६-१७ से कम आयु की कन्या सफल गर्भ धारण नहीं करती ; न ही आयुर्वेद में १६ वर्ष से कम आयु में इसकी अनुमति है |
परमर्षि कपिल के अनुसार भी :-
अपनी स्त्री से समागम तभी करें जब वह ऋतुस्नान कर चुकी हो | ऐसा करने से ही उपस्थ द्वार की रक्षा होती है |
~ महाभारत , शांतिपर्व
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Maheśvarasya Liṅgodbhava !!
नोट :- ये पोस्ट कुछ लोगों की भावनाओं को आहत कर सकती है ; अतः अपने रिस्क पर ही पढ़ें |
बिना वास्तविक अर्थ जाने उसका मजाक बनाना कितना आसान होता है , परंतु वास्तविकता समझ आने पर उतना ही पश्चात्ताप भी होता है ।
छाया स्थाणोरपि तव तापं नमतां हरत्यहो शिव भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥
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Historicity of Sanskrit :-
Warning ⚠️:- We don't support to any Linguistic conflicts
Sanskrit clearly existed before the Tamil. Tamil in it's formative stages (inscriptions of around 3rd century BCE) bought many loan words of Sanskritic origin.
Thus , Sanskrit could be termed as Lingua-Primordium of the Indian Subcontinent.
संस्कृत अवश्य ही तमिल से प्राचीन भाषा है | जब तृतीय शताब्दी ईसापूर्व अभिलेखीय युग में तमिल का विकास हो रहा था , उस समय भी तमिल में कई सारे संस्कृतोद्भव शब्दों का समन्वय था |
अतः संस्कृत कहीं न कहीं भारतीय उपमहाद्वीप की आद्यभाषा कही जाने योग्य है |
Source :- A history of South India , KA Nilakantha Shashtri
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