जो प्राप्त है उसे
बचाए रखना
जो खो गया वो कभी
अपना था ही नहीं
👆🏻🤟😊❤️🤗
बचाए रखना
जो खो गया वो कभी
अपना था ही नहीं
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👌1
अरमाँ तमाम उम्र के
सीने में दफ़्न कर के
हम जैसे चलते फिरते लोग
कोई मज़ारों से कम नहीं हैं
👆🏻🤟😊🤗❤️
सीने में दफ़्न कर के
हम जैसे चलते फिरते लोग
कोई मज़ारों से कम नहीं हैं
👆🏻🤟😊🤗❤️
मेरी पसंद से नहीं मिलती
पसन्द उसकी
बस हमारी आपस की पसंद
मेल खाती रही है हमेशा
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पसन्द उसकी
बस हमारी आपस की पसंद
मेल खाती रही है हमेशा
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वो सब देख रहा है,
प्रार्थना, संघर्ष, तकलीफ़े,
संयम और कर्म
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प्रार्थना, संघर्ष, तकलीफ़े,
संयम और कर्म
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👍1
कोई कितना भी सुंदर
क्यो ना हो,
बगैर चरित्र सब व्यर्थ है
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क्यो ना हो,
बगैर चरित्र सब व्यर्थ है
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🔥1
हमें नहीं ज़रूरी है किसी
के पीछे पीछे चलने की
जब सफ़र मेरा है तो
मेरी ही रवानी चाहिए
👆🏻🤟😊❤️🤗
के पीछे पीछे चलने की
जब सफ़र मेरा है तो
मेरी ही रवानी चाहिए
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इतिहास गवाह हैं
जिसको चाय से लगाव रहा
जरूर उसके दिल में
कोई घाव रहा
👆🏻🤟😊❤️🤗
जिसको चाय से लगाव रहा
जरूर उसके दिल में
कोई घाव रहा
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👍1
क्या शिकवा करे हम
अपनी किस्मत का
वो लोग भी बदल गए
जो कभी कहते थे
यकीन करो हम
अब की तरह नहीं हैं
👆🏻🤟😊❤️🤗
अपनी किस्मत का
वो लोग भी बदल गए
जो कभी कहते थे
यकीन करो हम
अब की तरह नहीं हैं
👆🏻🤟😊❤️🤗
बेचैनियाँ बाजारों में
नहीं मिला करती
मेरे दोस्त
इन्हें बाँटने वाला, कोई
बहुत नजदीक का होता हैं
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नहीं मिला करती
मेरे दोस्त
इन्हें बाँटने वाला, कोई
बहुत नजदीक का होता हैं
👆🏻🤟😊❤️🤗
👍1
❛इबादतों में मसरूफ
है सभी आजकल,
दिलों को तोड़ कर सजदो
में रोया जा रहा है
👆🏻🤟😊❤️🤗
है सभी आजकल,
दिलों को तोड़ कर सजदो
में रोया जा रहा है
👆🏻🤟😊❤️🤗
हर एक पल उससे
उम्मीद करना भी कौन सी
मजबूरी है
अब छोड़ो भी यार इश्क
कौन सा जरूरी है
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उम्मीद करना भी कौन सी
मजबूरी है
अब छोड़ो भी यार इश्क
कौन सा जरूरी है
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❤1🔥1
कितना समझते
हो तुम ?
स्त्रियों को उनकी
देह से परे
कितना समझे
उसके मन,
उनके मौन को
की,
हर हंसी हां
नहीं होती,
हर चुप्पी ना
नहीं होती
हर स्त्री तुम्हारे
गणित के
समीकरण पर जरूरी
नहीं की,
खरी उतरे
बेजान कुछ
वस्तुओं में,
खुश होने वाली
नहीं होती
तुम्हें उनका प्रेम
स्वीकार है
प्रतिकार नहीं??
उनको भी प्रिय है,
उनका मान-स्वाभिमान
तुम उन्हें पाना
चाहते हो
संभालना नहीं
👆🏻🤟😍
हो तुम ?
स्त्रियों को उनकी
देह से परे
कितना समझे
उसके मन,
उनके मौन को
की,
हर हंसी हां
नहीं होती,
हर चुप्पी ना
नहीं होती
हर स्त्री तुम्हारे
गणित के
समीकरण पर जरूरी
नहीं की,
खरी उतरे
बेजान कुछ
वस्तुओं में,
खुश होने वाली
नहीं होती
तुम्हें उनका प्रेम
स्वीकार है
प्रतिकार नहीं??
उनको भी प्रिय है,
उनका मान-स्वाभिमान
तुम उन्हें पाना
चाहते हो
संभालना नहीं
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