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🚨 Latest SSC Update ⚡️⚡️
📝 Request for Information (RFI) – Exploring Technologies to Conduct Examinations in Digital Mode
📅 Date: 24-02-2026
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📅 Date: 24-02-2026
👆👇♦️📌AI ने लगाई IBM के किले में सेंध, एक ब्लॉग ने बैठाया भट्ठा
दशकों से IBM का दबदबा न केवल भविष्य, बल्कि अतीत की बुनियाद पर भी टिका था। उसका 'आर्थिक किला' COBOL पर खड़ा था। COBOL यानी कॉमन बिज़नस ओरिएंटेड लैंग्वेज। क़रीब 65 साल पुरानी एक प्रोग्रामिंग भाषा जो आज भी वैश्विक वित्त व्यवस्था के लिए एक अदृश्य नर्वस सिस्टम की तरह काम करती है। AI ने अब उस किले में सेंध लगा दी है।
सबसे पहले, इन चौंकाने वाले आँकड़ों पर नज़र डालते हैं:
- अमेरिका में आज भी 95% ATM लेन-देन COBOL पर आधारित हैं और 80% इन-पर्सन बैंकिंग भी इसी पर आधारित है। 220 अरब से ज़्यादा लाइनों वाले इस कोड के साथ, ये पुराने सिस्टम इतने विशाल हो चुके हैं जिसे 'टू बिग टू फ़ेल' (नाकाम होना ही कल्पना से परे है) माना जाता है।
जैसे-जैसे COBOL के विशेषज्ञ रिटायर हुए, IBM का अरबों डॉलर का कंसल्टिंग कारोबार टैलेंट की इसी कमी पर फलता-फूलता रहा। कंपनी लाइसेंस और दूसरी चीज़ों के लिए भारी रकम लेती थी। ऐतिहासिक रूप से COBOL आधारित इन सिस्टम को आधुनिक बनाना किसी 'सुसाइड मिशन' से कम नहीं था। इसमें कई साल और अरबों डॉलर लग सकते थे। यह एक ऐसा जोखिम था जिसे लेने से ज़्यादातर कंपनियों के सीईओ डरते थे।
आख़िर वह दौर 23 फरवरी, 2026 को ख़त्म हो गया। एंथ्रोपिक ने कहा कि उसका Claude एआई टूल COBOL को आधुनिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में बदल सकता है।
जिस काम में पहले पाँच साल लग सकते थे, वह अब महज़ दो तिमाहियों या छह महीने में संभव है। आधुनिकीकरण का 'डरावना सपना' अब एक ऑटोमेटेड पाइपलाइन में बदल चुका है, जिसने दुनिया के सबसे संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच को वास्तव में लोकतांत्रिक बना दिया है।
आईबीएम के शेयर इस ब्लॉग को नहीं झेल पाए और 25 साल में कंपनी के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट आई। एक ही दिन में 30 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू ख़त्म हो गई।
यह केवल शेयर बाज़ार का एक छोटा सा 'झटका' नहीं था। यह एक संकेत था कि कारोबारों से वसूले जाने वाले 'लीगेसी प्रीमियम' का दौर ख़त्म हो गया है। निवेशकों को समझ आ गया है कि अब इस किले की विशेष चाबियाँ सिर्फ IBM के पास नहीं हैं। संदेश साफ़ है: जब 'अपरिहार्य' समझी जाने वाली चीज़ें 'ऑटोमेटेड' हो जाती हैं, तो बिज़नस मॉडल हाई-मार्जिन कंसल्टिंग नहीं, एक साधारण कमोडिटी में बदल जाता है।
दशकों से IBM का दबदबा न केवल भविष्य, बल्कि अतीत की बुनियाद पर भी टिका था। उसका 'आर्थिक किला' COBOL पर खड़ा था। COBOL यानी कॉमन बिज़नस ओरिएंटेड लैंग्वेज। क़रीब 65 साल पुरानी एक प्रोग्रामिंग भाषा जो आज भी वैश्विक वित्त व्यवस्था के लिए एक अदृश्य नर्वस सिस्टम की तरह काम करती है। AI ने अब उस किले में सेंध लगा दी है।
सबसे पहले, इन चौंकाने वाले आँकड़ों पर नज़र डालते हैं:
- अमेरिका में आज भी 95% ATM लेन-देन COBOL पर आधारित हैं और 80% इन-पर्सन बैंकिंग भी इसी पर आधारित है। 220 अरब से ज़्यादा लाइनों वाले इस कोड के साथ, ये पुराने सिस्टम इतने विशाल हो चुके हैं जिसे 'टू बिग टू फ़ेल' (नाकाम होना ही कल्पना से परे है) माना जाता है।
जैसे-जैसे COBOL के विशेषज्ञ रिटायर हुए, IBM का अरबों डॉलर का कंसल्टिंग कारोबार टैलेंट की इसी कमी पर फलता-फूलता रहा। कंपनी लाइसेंस और दूसरी चीज़ों के लिए भारी रकम लेती थी। ऐतिहासिक रूप से COBOL आधारित इन सिस्टम को आधुनिक बनाना किसी 'सुसाइड मिशन' से कम नहीं था। इसमें कई साल और अरबों डॉलर लग सकते थे। यह एक ऐसा जोखिम था जिसे लेने से ज़्यादातर कंपनियों के सीईओ डरते थे।
आख़िर वह दौर 23 फरवरी, 2026 को ख़त्म हो गया। एंथ्रोपिक ने कहा कि उसका Claude एआई टूल COBOL को आधुनिक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में बदल सकता है।
जिस काम में पहले पाँच साल लग सकते थे, वह अब महज़ दो तिमाहियों या छह महीने में संभव है। आधुनिकीकरण का 'डरावना सपना' अब एक ऑटोमेटेड पाइपलाइन में बदल चुका है, जिसने दुनिया के सबसे संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच को वास्तव में लोकतांत्रिक बना दिया है।
आईबीएम के शेयर इस ब्लॉग को नहीं झेल पाए और 25 साल में कंपनी के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट आई। एक ही दिन में 30 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू ख़त्म हो गई।
यह केवल शेयर बाज़ार का एक छोटा सा 'झटका' नहीं था। यह एक संकेत था कि कारोबारों से वसूले जाने वाले 'लीगेसी प्रीमियम' का दौर ख़त्म हो गया है। निवेशकों को समझ आ गया है कि अब इस किले की विशेष चाबियाँ सिर्फ IBM के पास नहीं हैं। संदेश साफ़ है: जब 'अपरिहार्य' समझी जाने वाली चीज़ें 'ऑटोमेटेड' हो जाती हैं, तो बिज़नस मॉडल हाई-मार्जिन कंसल्टिंग नहीं, एक साधारण कमोडिटी में बदल जाता है।
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👆👇📌🚨 कन्फर्म: 26 फरवरी को ही आएगा LT ग्रेड TET केस का फैसला 🚨
📍 इलाहाबाद हाई कोर्ट अपडेट
✅ केस: WRIT-A 18038/2025
✅ कोर्ट नंबर: 40
✅ स्टेज: For Delivery of Judgment / Opinion
📅 तारीख: 26 फरवरी 2026 –
👉 इसका सीधा मतलब है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और 26feb कोर्ट अंतिम निर्णय सुनाएगा।
⚖️ माननीय बेंच:
• न्यायमूर्ति सराल श्रीवास्तव
• न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान
📌 यह फैसला LT ग्रेड भर्ती में TET अनिवार्यता पर निर्णायक होगा और इससे:
✔ चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति
✔ नियुक्ति प्रक्रिया
✔ आगे की भर्ती नियमावली
तीनों पर सीधा असर पड़ेगा।
📌 Official Preparation Updates के लिए
श्री क्लासेस संस्थान से जुड़ें 👇
▪️Telegram: https://tinyurl.com/bdfesx4b
▪️Facebook: https://tinyurl.com/ye29dcvj
▪️ WhatsApp: https://tinyurl.com/48ckr4sc
▪️ Twitter: https://tinyurl.com/59pxubyz
▪️Instagram https://tinyurl.com/58rapnmh
✨ श्री क्लासेस – नई दिशा, नई पहचान ✨
📱Helpline: 8840713937 👆
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• न्यायमूर्ति सराल श्रीवास्तव
• न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान
📌 यह फैसला LT ग्रेड भर्ती में TET अनिवार्यता पर निर्णायक होगा और इससे:
✔ चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति
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✔ आगे की भर्ती नियमावली
तीनों पर सीधा असर पड़ेगा।
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❤4🙏3
📌एक चुनावी राज्य का नाम केरल से केरलम हुआ,
तो दूसरे चुनावी राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से भी मांग उठी कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बंगाल क्यों न कर दिया जाए।
तो दूसरे चुनावी राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से भी मांग उठी कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बंगाल क्यों न कर दिया जाए।
❤15
♦️📌अगर किसी ने धोखा दिया,
अगर किसी ने तुम्हें ठेस पहुँचाई,
अगर तुम्हारी कद्र नहीं की—
हर बार प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं होता।
कभी-कभी चुप रहना
हार नहीं,
परिपक्वता होती है।......
अगर किसी ने तुम्हें ठेस पहुँचाई,
अगर तुम्हारी कद्र नहीं की—
हर बार प्रतिक्रिया देना ज़रूरी नहीं होता।
कभी-कभी चुप रहना
हार नहीं,
परिपक्वता होती है।......
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