Motivation बनाम Discipline
विद्यार्थी जीवन में Motivation की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके बिना कोई स्टूडेंट लक्ष्य के प्रति अपने जुनून को बरक़रार नहीं रख पाता। Motivation एक रिचार्ज की भाँति होता है जो समय समय पर व्यक्ति में ऊर्जा का संचार करता है। लेकिन Motivation से प्राप्त ऊर्जा की अवधि सीमित होती है। कुछ समय के बाद इसका प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए इसे बार बार रिचार्ज करना पड़ता है।
Descipline की कहानी इससे अलग है। जहाँ Motivation बाहर से आता है, वहीं अनुशासन का स्रोत भीतर होता है। यह स्वयं के संकल्प से जुड़ा मामला है। जब व्यक्ति ख़ुद की ख़ुद पर जीत का जुनून पालता है, उसके परिणामस्वरूप अनुशासन पैदा होता है। यह दिखावे से बहुत दूर, स्वयं से किया गया संघर्ष है। जहाँ अनुशासन की शुरुआती इंटेंसिटी समय के साथ धीमी पड़ती जाती है, वहीं अनुशासन में निरंतरता होती है।
किसी भी सफलता के लिए दोनों की अपनी importance है लेकिन बड़ी सफलता बिना अनुशासन के संभव नहीं है। अनुशासन त्याग, समर्पण, संयम और परिश्रम का संयोग है। इसलिए विद्यार्थी के लिए अनुशासित होना पहली शर्त है।
विद्यार्थी जीवन में Motivation की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके बिना कोई स्टूडेंट लक्ष्य के प्रति अपने जुनून को बरक़रार नहीं रख पाता। Motivation एक रिचार्ज की भाँति होता है जो समय समय पर व्यक्ति में ऊर्जा का संचार करता है। लेकिन Motivation से प्राप्त ऊर्जा की अवधि सीमित होती है। कुछ समय के बाद इसका प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए इसे बार बार रिचार्ज करना पड़ता है।
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मद्रास का गवर्नर थॉमस पिट था। वर्ष 1702 में पिट ने 24,000 पाउण्ड (यह राशि उस समय काफ़ी बड़ी मानी जाती थी और 99 प्रतिशत अंग्रेज़ों की पहुँच से बाहर थी) से एक हीरा ख़रीदा जो “दुनिया का एक श्रेष्ठ रतन” कहा जाता था। पिट ने 400 कैरेट के इस हीरे को पानी के जहाज़ से ब्रिटेन भेजा। एक पत्र में उसने इसे “मेरी सबसे बड़ी चिन्ता” और “मेरा सब कुछ” कहा है। इस हीरे के ब्रिटेन में सुरक्षित पहुँचते ही उसने गवर्नर का पद छोड़ दिया, एक बड़ी एस्टेट ख़रीदी और संसद की सीट प्राप्त करने के लिए एक बड़ी रक़म दी।
ब्रिटेन के इतिहासकार जॉन की के अनुसार, पिट के हीरे को लेकर “ज़ोरदार अफ़वाहें” थीं, जिनमें से एक यह भी थी कि यह हीरा “एक हिन्दू देवता की आँख” से चुराया गया था अथवा एक दास खदानों से इसे तस्करी करके लाया था जिसने अपनी जंघा में स्वयं ज़ख़्म करके इसे उसमें छिपा लिया था। विकी कॉलिन्स के 1868 में आये उपन्यास “द मूनस्टोन” के हीरे के समान पिट का हीरा एक कहानी बन गया। यह हीरा भारत की व्यापक समृद्धि, उस समृद्धि को निचोड़ लेने वाली ब्रिटेन की शक्ति और भारत में सत्ता के साथ आयी अंग्रेज़ी विलासिता का प्रतीक बन गया।
थॉमस पिट ने भारत से हीरा ख़रीदने के 15 वर्ष बाद इसे फ्रांस के रीजेन्ट डक् डी ऑर्लिन्स को 1,35,000 पाउण्ड की बड़ी रक़म में बेच दिया। यह राशि पिट ने हीरा जितने में ख़रीदा था, उससे लगभग छह गुणा थी। इस भारी–भरकम राशि ने (आज के हिसाब से कई करोड़) पिट के परिवार को अंग्रेज़ समाज में एक नये स्थान पर पहुँचा दिया। इस प्रकार एक भारतीय हीरे ने एक ब्रिटिश घराने को एक ऐसा वित्तीय स्प्रिंगबोर्ड दे दिया जिसने बहुत ही कम समय में दो प्रधानमन्त्री प्रदान कर दिये–उसका पोता विलियम पिट, चेट्हम का प्रथम अर्ल और चेट्हम का अपना बेटा विलियम पिट “द यंगर”।
( पुस्तक पढ़ते हुए कुछ दिलचस्प मिला , इसलिए साझा कर रहा 😊)
ब्रिटेन के इतिहासकार जॉन की के अनुसार, पिट के हीरे को लेकर “ज़ोरदार अफ़वाहें” थीं, जिनमें से एक यह भी थी कि यह हीरा “एक हिन्दू देवता की आँख” से चुराया गया था अथवा एक दास खदानों से इसे तस्करी करके लाया था जिसने अपनी जंघा में स्वयं ज़ख़्म करके इसे उसमें छिपा लिया था। विकी कॉलिन्स के 1868 में आये उपन्यास “द मूनस्टोन” के हीरे के समान पिट का हीरा एक कहानी बन गया। यह हीरा भारत की व्यापक समृद्धि, उस समृद्धि को निचोड़ लेने वाली ब्रिटेन की शक्ति और भारत में सत्ता के साथ आयी अंग्रेज़ी विलासिता का प्रतीक बन गया।
थॉमस पिट ने भारत से हीरा ख़रीदने के 15 वर्ष बाद इसे फ्रांस के रीजेन्ट डक् डी ऑर्लिन्स को 1,35,000 पाउण्ड की बड़ी रक़म में बेच दिया। यह राशि पिट ने हीरा जितने में ख़रीदा था, उससे लगभग छह गुणा थी। इस भारी–भरकम राशि ने (आज के हिसाब से कई करोड़) पिट के परिवार को अंग्रेज़ समाज में एक नये स्थान पर पहुँचा दिया। इस प्रकार एक भारतीय हीरे ने एक ब्रिटिश घराने को एक ऐसा वित्तीय स्प्रिंगबोर्ड दे दिया जिसने बहुत ही कम समय में दो प्रधानमन्त्री प्रदान कर दिये–उसका पोता विलियम पिट, चेट्हम का प्रथम अर्ल और चेट्हम का अपना बेटा विलियम पिट “द यंगर”।
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प्लासी युद्ध के बाद क्लाइव इतना धन ले गया था, की ब्रिटिश संसद में खुद और पिताजी के लिए संसद की सीट ही खरीद ली... यह सीट उतरी आयरलैंड से ली थी, तो उस क्षेत्र का नाम कंट्री क्लेयर स्टेट से बदलकर "प्लासी" कर दिया गया... वालपोल लिखते हैं कि यहाँ पर क्लाइव ने "हीरे का घर" बनाया था...... नवाब के महल के खम्बे अपने महल में प्रयुक्त किये थे|
( पुनः पुस्तक पढ़ते हुए कुछ दिलचस्प मिला , 😊)
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♻️स्वास्थ्य एवं मिशन योजना♻️
🖊 16 questions · ⏱ 15 sec
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भारत में 1921-1951 की अवधि को स्थिर जनसंख्या वृद्धि काल कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान मृत्यु दर में कमी आई, जबकि जन्म दर उच्च बनी रही, जिससे जनसंख्या में लगातार, लेकिन धीमी गति से वृद्धि हुई. 1921 से पहले (स्थिर चरण): इस अवधि में उच्च जन्म और उच्च मृत्यु दर के कारण जनसंख्या लगभग स्थिर या स्थिर (stagnant) थी.
1921-1951 (स्थिर वृद्धि): 1921 को 'महान विभाजक वर्ष' (Year of Great Divide) कहा जाता है. इस अवधि में स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के कारण मृत्यु दर में कमी आने लगी, लेकिन जन्म दर अभी भी उच्च थी, जिससे जनसंख्या में एक स्थिर और व्यवस्थित वृद्धि हुई.
1951 के बाद (जनसंख्या विस्फोट): स्वतंत्रता के बाद, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई, जबकि जन्म दर उच्च बनी रही, जिससे जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई, जिसे जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है.
1921-1951 (स्थिर वृद्धि): 1921 को 'महान विभाजक वर्ष' (Year of Great Divide) कहा जाता है. इस अवधि में स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के कारण मृत्यु दर में कमी आने लगी, लेकिन जन्म दर अभी भी उच्च थी, जिससे जनसंख्या में एक स्थिर और व्यवस्थित वृद्धि हुई.
1951 के बाद (जनसंख्या विस्फोट): स्वतंत्रता के बाद, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई, जबकि जन्म दर उच्च बनी रही, जिससे जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई, जिसे जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है.
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