🎲 Quiz '❇️🛑सामान्य ज्ञान🛑❇️'
🙏गणपति बप्पा मोरया🙏 खुद को खुद अंदर सर्च कर बाकी के लिए गुगल हैं। https://t.me/singhclasss
🖊 20 questions · ⏱ 15 sec
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VOCABULARY :-
1. Self-serving (Adjective) - स्वार्थी
~ egocentric; narcissistic, selfish, prideful, snobbish
2. Plausible (Adjective) - प्रशंसनीय
~ logical, sound, reasonable, credible, feasible
3. Polemic (Adjective) - विवाद
~ bitter, hostile; diatribe, tirade, harangue, brickbats
4. Construct (Verb) - निर्माण
~ devise, formulate, concoct, fabricate, establish
5. Yardstick (Noun) - मापदंड
~ touchstone, criterion, par, standard, gauge, reference point
6. Conflict (Noun) - संघर्ष
~ discord, bad blood, engagement, combat, clash, friction
7. Resolution (Noun) - संकल्प
~ intent, resolve, determination, commitment, pluck, purpose
1. Self-serving (Adjective) - स्वार्थी
~ egocentric; narcissistic, selfish, prideful, snobbish
2. Plausible (Adjective) - प्रशंसनीय
~ logical, sound, reasonable, credible, feasible
3. Polemic (Adjective) - विवाद
~ bitter, hostile; diatribe, tirade, harangue, brickbats
4. Construct (Verb) - निर्माण
~ devise, formulate, concoct, fabricate, establish
5. Yardstick (Noun) - मापदंड
~ touchstone, criterion, par, standard, gauge, reference point
6. Conflict (Noun) - संघर्ष
~ discord, bad blood, engagement, combat, clash, friction
7. Resolution (Noun) - संकल्प
~ intent, resolve, determination, commitment, pluck, purpose
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🎲 Quiz '❇️GENRAL KNOWLEDGE❇️'
💫✨नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ✨💫 दुनिया बदलनी है तो। घर से निकलना होगा कहीं पहुंचने के लिए कहीं से तो चलना होगा💯 https://t.me/singhclasss
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🎲 Quiz '❇️HINDI GRAMMAR❇️'
राधे-राधे मन की गहराई लिखु तो शब्द रूठजाते हैं और सच्चाई को लिखुं तो अपने रुठ जाते हैं ज़िन्दगी को समझना बहुत मुश्किल है जनाब https://t.me/singhclasss
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राधे-राधे मन की गहराई लिखु तो शब्द रूठजाते हैं और सच्चाई को लिखुं तो अपने रुठ जाते हैं ज़िन्दगी को समझना बहुत मुश्किल है जनाब https://t.me/singhclasss
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🎲 Quiz '❇️वैज्ञानिक नाम❇️'
जब गलत हो रहा है तो समझना सही होना बाकी है। जय सियाराम 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 https://t.me/singhclasss
🖊 61 questions · ⏱ 15 sec
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“अंतर्राष्ट्रीय राजनीति शक्ति के लिए संघर्ष है।” - मार्गेंथाऊ
वेनेजुएला की राजधानी कराकस में राष्ट्रपति मादुरो के निवास स्थान पर अमेरिकी डेल्टा फ़ोर्स अटैक कर राष्ट्रपति मादुरो को हथकड़ी लगाकर उनकी पत्नी सहित गिरफ़्तार कर अमेरिका ले जाने इस घटना ने एक बार फिर मार्गेंथाऊ द्वारा कही गई इन पंक्तियों की सार्थकता को सिद्ध कर दिया है।
लासवेल, रॉबर्ट डहल, आमंड जैसे व्यवहारवादी विचारकों के शक्ति को राजनीति के केंद्र में रखते हुए इसकी महता को स्थापित किया था।अंतर्राष्टीय राजनीति में इसे प्रमुखता देने का श्रेय मार्गेंथाऊ, केनेथ वाल्ट्ज़ आदि विचारको को जाता है।
वर्तमान दौर में वैश्विक स्तर के घटनाक्रम का विश्लेषण करने पर ये तथ्य प्रमुखता से सामने आता है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता के नियम लागू नहीं होते बल्कि यहाँ राष्ट्रीय हित की साधना ही अंतिम सत्य है। गत वर्ष के शांति के नोबल पुरस्कार के लिए लालसा जाहिर करने वाले शांतिदूत की कल की कार्यवाही को उचित ठहराने के लिए उनके पास पर्याप्त कारण है जबकि ठीक ऐसी ही कार्यवाही अगर किसी पूंजीवादी यूरोपीय देश पर की जाए तो वह शांति विरोधी गतिविधि के दायरे में आती है।
यहाँ यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि गत वर्ष का शांति नोबल पुरस्कार वेनेजुएला में विपक्षी महिला नेता मारियो को मिला था। दुनिया भर में जहाँ भी अमेरिका ने हस्तक्षेप किया है, उन सबमें एक पैटर्न समान रूप से दिखाई देता है कि पहले वहाँ सरकार के ख़िलाफ़ जन आंदोलन की प्रस्तावना रखी जाती है। ईरान में हो रहे जन आंदोलन का नतीजा निकट भविष्य में अमेरिकी दखल में तब्दील हो जाए तो यह आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। वेनेजुएला में हुई ये घटना किसी देश की संप्रभुता पर किया गया सबसे बड़ा हमला है जिसे किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक रूप से न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। लेकिन दुनियाभर में अमेरिकी प्रभुत्व का प्रभाव ये है कि पूरी दुनिया इस मुद्दे पर मौन है और अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक हेजमोनी के दम पर अमेरिका जल्द ही दुनियाभर में इसे न्यायपूर्ण भी ठहरा देगा। ठीक वैसे ही जैसे इसराइल द्वारा गाजा में किए गए भीषण नरसंहार को दुनिया भर के समक्ष जायज ठहराया और ऐसा करने के लिए इसराइल - अमेरिकी गठबंधन के पास पर्याप्त रूप से क्षमताएं है और वे ऐसा कर पाने में सफल भी रहे हैं।
देखते हैं अब अगला नंबर किसका है ?
संभवतः ईरान ।
वेनेजुएला की राजधानी कराकस में राष्ट्रपति मादुरो के निवास स्थान पर अमेरिकी डेल्टा फ़ोर्स अटैक कर राष्ट्रपति मादुरो को हथकड़ी लगाकर उनकी पत्नी सहित गिरफ़्तार कर अमेरिका ले जाने इस घटना ने एक बार फिर मार्गेंथाऊ द्वारा कही गई इन पंक्तियों की सार्थकता को सिद्ध कर दिया है।
लासवेल, रॉबर्ट डहल, आमंड जैसे व्यवहारवादी विचारकों के शक्ति को राजनीति के केंद्र में रखते हुए इसकी महता को स्थापित किया था।अंतर्राष्टीय राजनीति में इसे प्रमुखता देने का श्रेय मार्गेंथाऊ, केनेथ वाल्ट्ज़ आदि विचारको को जाता है।
वर्तमान दौर में वैश्विक स्तर के घटनाक्रम का विश्लेषण करने पर ये तथ्य प्रमुखता से सामने आता है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता के नियम लागू नहीं होते बल्कि यहाँ राष्ट्रीय हित की साधना ही अंतिम सत्य है। गत वर्ष के शांति के नोबल पुरस्कार के लिए लालसा जाहिर करने वाले शांतिदूत की कल की कार्यवाही को उचित ठहराने के लिए उनके पास पर्याप्त कारण है जबकि ठीक ऐसी ही कार्यवाही अगर किसी पूंजीवादी यूरोपीय देश पर की जाए तो वह शांति विरोधी गतिविधि के दायरे में आती है।
यहाँ यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि गत वर्ष का शांति नोबल पुरस्कार वेनेजुएला में विपक्षी महिला नेता मारियो को मिला था। दुनिया भर में जहाँ भी अमेरिका ने हस्तक्षेप किया है, उन सबमें एक पैटर्न समान रूप से दिखाई देता है कि पहले वहाँ सरकार के ख़िलाफ़ जन आंदोलन की प्रस्तावना रखी जाती है। ईरान में हो रहे जन आंदोलन का नतीजा निकट भविष्य में अमेरिकी दखल में तब्दील हो जाए तो यह आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। वेनेजुएला में हुई ये घटना किसी देश की संप्रभुता पर किया गया सबसे बड़ा हमला है जिसे किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक रूप से न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। लेकिन दुनियाभर में अमेरिकी प्रभुत्व का प्रभाव ये है कि पूरी दुनिया इस मुद्दे पर मौन है और अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक हेजमोनी के दम पर अमेरिका जल्द ही दुनियाभर में इसे न्यायपूर्ण भी ठहरा देगा। ठीक वैसे ही जैसे इसराइल द्वारा गाजा में किए गए भीषण नरसंहार को दुनिया भर के समक्ष जायज ठहराया और ऐसा करने के लिए इसराइल - अमेरिकी गठबंधन के पास पर्याप्त रूप से क्षमताएं है और वे ऐसा कर पाने में सफल भी रहे हैं।
देखते हैं अब अगला नंबर किसका है ?
संभवतः ईरान ।
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