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✨नवरात्रि की हार्दिक शुभकामना✨
ग्रुप के मेरे समस्त साथियों को नवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं। शक्ति की उपासना का यह महापर्व हर किसी के लिए सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आरोग्य लेकर आए, यही कामना है। जय माता दी!
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🎲 Quiz 'प्रमुख नियुक्तियाँ (Appointment) September 2025 .'
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🖊 60 questions · ⏱ 15 sec
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🖊 60 questions · ⏱ 15 sec
❤6
हैदराबाद विलय की संक्षिप्त कहानी■
( बड़ा लेख है, मग़र पढ़ना जरूर)
स्वतंत्रता से पूर्व भारत में 565 रियासतें (कहीं 562 भी लिखा मिलता है) थी.... तीन रियासतों को छोड़कर, अन्य सभी रियासतों का विलय भारतीय संघ में कर दिया गया था...तीन रियासतें यथा जूनागढ़, हैदराबाद औऱ कश्मीर का विलय अभी तक हुआ नहीं था.... बाद में जूनागढ़ को जनमत संग्रह के माध्यम से मिला लिया गया... कश्मीर अभी तक विवाद का विषय बना हुआ था , आज बात करना चाहूंगा हैदराबाद के विलय की...
यहाँ निज़ाम का शासन था.... इस समय निज़ाम था ओस्मान अली खान आसफजहां सप्तम ... निज़ाम भारत के साथ विलय चाहता नहीं था... भारतीय संघ के साथ स्टैंडस्टिल अग्रीमेंट अर्थात यथास्थिति बनाये रखने का समझौता किया था.... समझौते के उपरांत निज़ाम ने स्वतंत्र व्यवहार करना आरम्भ कर दिया.... ऐसे में जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने कार्यवाही का निर्णय लिया....पत्रकार दुर्गादास ने अपनी पुस्तक " इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर... में लिखा है कि नेहरू जी बलपूर्वक कार्यवाही के खिलाफ थे .. वो शान्तिपूर्ण समाधान चाहते थे... मगर सरदार पटेल ने यह कहकर सैन्य अभियान किया कि " हैदराबाद भारत के हृदय पर बना हुआ फोड़ा है, जिसे शल्यक्रिया द्वारा हटाया जाना अत्यावश्यक है"।
इस सैन्य अभियान के अंतर्गत... 35000 भारतीय सैनिकों को हैदराबाद राज्य में भेजा गया.... इनका सामना निज़ाम की सेना (जोकि संख्या में करीबन 25000 थी) तथा रज़ाकर,जोकि अनियमित सेना थी जिसकी संख्या करीबन 2 लाख थी... से होना था... भारतीय सेना ने 13 सितंबर से कार्यवाही आरम्भ की.... 17 सितंबर,1948 को निज़ाम ने समर्पण कर लिया... विलयपत्र पर हस्ताक्षर कर, हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय कर दिया गया .. औऱ 18 सितंबर,(1948) को आज ही के दिन भारतीय सेना ने यह अभियान समाप्त घोषित कर दिया... हैदराबाद में पोलो के खेल की अत्यधिक लोकप्रियता के कारण इस सम्पूर्ण अभियान को "ऑपरेशन पोलो" और "ऑपरेशन कैटरपिलर" नाम दिया गया....
ऑपरेशन के दौरान 32 भारतीय सैनिक शहीद हुए.. वहीं करीबन 2000 की संख्या में निज़ाम की सेना और रजाकार को मौत के घाट उतारा गया... जनहानि कितनी हुई? इसकी जानकारी के लिए सुंदरलाल समिति गठित की गई... जिसमें कहा गया कि करीबन 30-40 हज़ार नागरिक मारे गए... हालांकि इस समिति की रिपोर्ट आजतक सार्वजनिक नहीं कि गयी... मग़र प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 2लाख से अधिक नागरिक मारे गए... और इस प्रकार भारत की सबसे धनी और विशाल रियासत का भारत में विलय कर दिया गया।☺️
( बड़ा लेख है, मग़र पढ़ना जरूर)
स्वतंत्रता से पूर्व भारत में 565 रियासतें (कहीं 562 भी लिखा मिलता है) थी.... तीन रियासतों को छोड़कर, अन्य सभी रियासतों का विलय भारतीय संघ में कर दिया गया था...तीन रियासतें यथा जूनागढ़, हैदराबाद औऱ कश्मीर का विलय अभी तक हुआ नहीं था.... बाद में जूनागढ़ को जनमत संग्रह के माध्यम से मिला लिया गया... कश्मीर अभी तक विवाद का विषय बना हुआ था , आज बात करना चाहूंगा हैदराबाद के विलय की...
यहाँ निज़ाम का शासन था.... इस समय निज़ाम था ओस्मान अली खान आसफजहां सप्तम ... निज़ाम भारत के साथ विलय चाहता नहीं था... भारतीय संघ के साथ स्टैंडस्टिल अग्रीमेंट अर्थात यथास्थिति बनाये रखने का समझौता किया था.... समझौते के उपरांत निज़ाम ने स्वतंत्र व्यवहार करना आरम्भ कर दिया.... ऐसे में जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने कार्यवाही का निर्णय लिया....पत्रकार दुर्गादास ने अपनी पुस्तक " इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर... में लिखा है कि नेहरू जी बलपूर्वक कार्यवाही के खिलाफ थे .. वो शान्तिपूर्ण समाधान चाहते थे... मगर सरदार पटेल ने यह कहकर सैन्य अभियान किया कि " हैदराबाद भारत के हृदय पर बना हुआ फोड़ा है, जिसे शल्यक्रिया द्वारा हटाया जाना अत्यावश्यक है"।
इस सैन्य अभियान के अंतर्गत... 35000 भारतीय सैनिकों को हैदराबाद राज्य में भेजा गया.... इनका सामना निज़ाम की सेना (जोकि संख्या में करीबन 25000 थी) तथा रज़ाकर,जोकि अनियमित सेना थी जिसकी संख्या करीबन 2 लाख थी... से होना था... भारतीय सेना ने 13 सितंबर से कार्यवाही आरम्भ की.... 17 सितंबर,1948 को निज़ाम ने समर्पण कर लिया... विलयपत्र पर हस्ताक्षर कर, हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय कर दिया गया .. औऱ 18 सितंबर,(1948) को आज ही के दिन भारतीय सेना ने यह अभियान समाप्त घोषित कर दिया... हैदराबाद में पोलो के खेल की अत्यधिक लोकप्रियता के कारण इस सम्पूर्ण अभियान को "ऑपरेशन पोलो" और "ऑपरेशन कैटरपिलर" नाम दिया गया....
ऑपरेशन के दौरान 32 भारतीय सैनिक शहीद हुए.. वहीं करीबन 2000 की संख्या में निज़ाम की सेना और रजाकार को मौत के घाट उतारा गया... जनहानि कितनी हुई? इसकी जानकारी के लिए सुंदरलाल समिति गठित की गई... जिसमें कहा गया कि करीबन 30-40 हज़ार नागरिक मारे गए... हालांकि इस समिति की रिपोर्ट आजतक सार्वजनिक नहीं कि गयी... मग़र प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 2लाख से अधिक नागरिक मारे गए... और इस प्रकार भारत की सबसे धनी और विशाल रियासत का भारत में विलय कर दिया गया।☺️
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🎲 Quiz '🔰भारत सरकार की योजनाएं🔰'
🙏जय मां दुर्गा 🙏 जरूरी नहीं की सभी लोग हमें समझ पाए। तराजू waight बता सकती है, लेकिन क्वालिटी नहीं।🤞https://t.me/singhclasss
🖊 49 questions · ⏱ 15 sec
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🎲 Quiz '🍂🌿 𝚂𝙲𝙸𝙴𝙽𝙲𝙴 𝚀𝚄𝙸𝚇🌿🍂 𝙱𝚈- 📚(अच्छी शिक्षा) 📚'
🖊 200 questions · ⏱ 15 sec
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☘️🌸 ज्ञान 🌸☘️ pinned «🎲 Quiz '🍂🌿 𝚂𝙲𝙸𝙴𝙽𝙲𝙴 𝚀𝚄𝙸𝚇🌿🍂 𝙱𝚈- 📚(अच्छी शिक्षा) 📚' 🖊 200 questions · ⏱ 15 sec»
RPSC में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति
चर्चा में:
राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 316 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर RPSC में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की है।
1. IPS हेमंत प्रियदर्शी
2. डॉ. अशोक कुमार कलवार
3. डॉ. सुशील कुमार बिस्सू
संवैधानिक प्रावधान:
संविधान के भाग 14 के दूसरे अध्याय में अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोग का उल्लेख किया गया है।
लोक सेवा आयोग:
अनुच्छेद 315 (1) के अनुसार संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा।
व्याख्या: इस उपबंध में संघ और राज्य दोनों के लिए अलग अलग लोक सेवा आयोगों का प्रावधान किया गया है। इसी उपबंध के तहत राजस्थान में RPSC का गठन किया गया।
नियुक्ति:
अनुच्छेद 316 (1) के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाएगी
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
अर्हता:
अनुच्छेद 316 (1) के अनुसार प्रत्येक लोक सेवा आयोग के सदस्यों में से यथाशक्य निकटतम आधे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं
व्याख्या: इस उपबंध में RPSC के कम से कम आधे सदस्यों के लिए अर्हता के रूप में अपेक्षा की गई है कि वे भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष तक पद धारण कर चुके हों। शेष आधे सदस्यों के लिए इस इस अर्हता की बाध्यता नहीं है।
पदावधि:
अनुच्छेद 316 (2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्य 6 वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तब तक पद पर रहते हैं। ध्यान रहे कि मूल संविधान में इस हेतु 60 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था लेकिन 41वें संविधान संशोधन द्वारा इसे 62 वर्ष कर दिया गया।
त्यागपत्र:
अनुच्छेद 316 (2) (क) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य राज्य के राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्य राजस्थान के राज्यपाल को सम्बोधित त्यागपत्र से अपना पद छोड़ सकते हैं।
पदमुक्ति:
अनुच्छेद 316 (2) (ख) के अनुसार लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को अनुच्छेद 317 के खंड (1) में उपबंधित रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा।
अनुच्छेद 317 (1) के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल कदाचार के आधार पर किए गए राष्ट्रपति के ऐसे आदेश से उसके पद से हटाया जाएगा जो उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति द्वारा निर्देश किए जाने पर उस न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 145 के अधीन इस निमित्त विहित प्रक्रिया के अनुसार की गई जाँच पर, यह प्रतिवेदन किए जाने के पश्चात् किया गया है कि, यथास्थिति, अध्यक्ष या ऐसे किसी सदस्य को ऐसे किसी आधार पर हटा दिया जाए।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के इस संबंध में दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर हटाया जा सकता है।
ध्यान रहे कि RPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है लेकिन वह उन्हें हटा नहीं सकता।
निलंबन:
अनुच्छेद 317 (2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को राज्यपाल उसके पद से तब तक के लिए निलंबित कर सकेगा जब तक राष्ट्रपति उसे पद से हटाने के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय का प्रतिवेदन मिलने पर अपना आदेश पारित नहीं कर देता है।
व्याख्या: राज्यपाल RPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा तो नहीं सकता लेकिन वह इसे निलंबित कर सकता है। लेकिन यह निलंबन केवल उस परिस्थिति में ही किया जा सकता है जब उसके विरुद्ध पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो।
पुनर्नियुक्ति:
अनुच्छेद 316 (3) के अनुसार कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
अनुच्छेद 319 (घ) के अनुसार किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से भिन्न कोई अन्य सदस्य उसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होगा।
व्याख्या: RPSC का कोई सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति के बाद पुनः इस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकेगा लेकिन वह RPSC के अध्यक्ष के रूप मे नियुक्त किया जा सकता है।
ध्यान रहे कि RPSC का अध्यक्ष अपनी पदावधि की समाप्ति के बाद पुनः RPSC का अध्यक्ष या सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकता है हालांकि उसे UPSC का अध्यक्ष या सदस्य बनाया जा सकता है।
चर्चा में:
राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 316 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर RPSC में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की है।
1. IPS हेमंत प्रियदर्शी
2. डॉ. अशोक कुमार कलवार
3. डॉ. सुशील कुमार बिस्सू
संवैधानिक प्रावधान:
संविधान के भाग 14 के दूसरे अध्याय में अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोग का उल्लेख किया गया है।
लोक सेवा आयोग:
अनुच्छेद 315 (1) के अनुसार संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा।
व्याख्या: इस उपबंध में संघ और राज्य दोनों के लिए अलग अलग लोक सेवा आयोगों का प्रावधान किया गया है। इसी उपबंध के तहत राजस्थान में RPSC का गठन किया गया।
नियुक्ति:
अनुच्छेद 316 (1) के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाएगी
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
अर्हता:
अनुच्छेद 316 (1) के अनुसार प्रत्येक लोक सेवा आयोग के सदस्यों में से यथाशक्य निकटतम आधे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं
व्याख्या: इस उपबंध में RPSC के कम से कम आधे सदस्यों के लिए अर्हता के रूप में अपेक्षा की गई है कि वे भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष तक पद धारण कर चुके हों। शेष आधे सदस्यों के लिए इस इस अर्हता की बाध्यता नहीं है।
पदावधि:
अनुच्छेद 316 (2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्य 6 वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तब तक पद पर रहते हैं। ध्यान रहे कि मूल संविधान में इस हेतु 60 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था लेकिन 41वें संविधान संशोधन द्वारा इसे 62 वर्ष कर दिया गया।
त्यागपत्र:
अनुच्छेद 316 (2) (क) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य राज्य के राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष और सदस्य राजस्थान के राज्यपाल को सम्बोधित त्यागपत्र से अपना पद छोड़ सकते हैं।
पदमुक्ति:
अनुच्छेद 316 (2) (ख) के अनुसार लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को अनुच्छेद 317 के खंड (1) में उपबंधित रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा।
अनुच्छेद 317 (1) के अनुसार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल कदाचार के आधार पर किए गए राष्ट्रपति के ऐसे आदेश से उसके पद से हटाया जाएगा जो उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति द्वारा निर्देश किए जाने पर उस न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 145 के अधीन इस निमित्त विहित प्रक्रिया के अनुसार की गई जाँच पर, यह प्रतिवेदन किए जाने के पश्चात् किया गया है कि, यथास्थिति, अध्यक्ष या ऐसे किसी सदस्य को ऐसे किसी आधार पर हटा दिया जाए।
व्याख्या: RPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के इस संबंध में दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर हटाया जा सकता है।
ध्यान रहे कि RPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है लेकिन वह उन्हें हटा नहीं सकता।
निलंबन:
अनुच्छेद 317 (2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को राज्यपाल उसके पद से तब तक के लिए निलंबित कर सकेगा जब तक राष्ट्रपति उसे पद से हटाने के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय का प्रतिवेदन मिलने पर अपना आदेश पारित नहीं कर देता है।
व्याख्या: राज्यपाल RPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा तो नहीं सकता लेकिन वह इसे निलंबित कर सकता है। लेकिन यह निलंबन केवल उस परिस्थिति में ही किया जा सकता है जब उसके विरुद्ध पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो।
पुनर्नियुक्ति:
अनुच्छेद 316 (3) के अनुसार कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
अनुच्छेद 319 (घ) के अनुसार किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से भिन्न कोई अन्य सदस्य उसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होगा।
व्याख्या: RPSC का कोई सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति के बाद पुनः इस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकेगा लेकिन वह RPSC के अध्यक्ष के रूप मे नियुक्त किया जा सकता है।
ध्यान रहे कि RPSC का अध्यक्ष अपनी पदावधि की समाप्ति के बाद पुनः RPSC का अध्यक्ष या सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकता है हालांकि उसे UPSC का अध्यक्ष या सदस्य बनाया जा सकता है।
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Who among the following was not associated with the foundation of the Indian Association in 1876?
निम्नलिखित में से कौन 1876 में स्थापित इंडियन एसोसिएशन से संबंधित नहीं थे?
निम्नलिखित में से कौन 1876 में स्थापित इंडियन एसोसिएशन से संबंधित नहीं थे?
Anonymous Quiz
29%
Surendranath Banarji सुरेंद्रनाथ बनर्जी
43%
Anand Mohan Bosआनंद मोहन बोस
21%
Motilaal Nehru मोतीलाल नेहरू
7%
Dwarikanath Ganguli द्वारकानाथ गांगुली
❤4
🎲 Quiz '📚✒️🌱😉 मजेदार प्रश्न🤭🌺⚫📚✒️'
https://t.me/singhclasss👉 .......SUCCESS..... 👈 💫की सबसे खास बात है कि वह मेहनत करने वालों पर फिदा हो जाती हैं💞' &&&& अगर हम 👩🏫👩💻किसी के दुख😞 को पेंसिल✏️ बन कर लिख 📝नहीं ❌सकते तो रबड़ 🏮बनकर 🤟मिटा तो सकते हैं 💪🤙...... 🌸 BY-SEhWAG SIR 🌸
🖊 33 questions · ⏱ 15 sec
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❤5
निम्नलिखित में से कौन-सा एक मौलिक कर्तव्य नहीं है ?
Anonymous Quiz
13%
देश की रक्षा करें और आवाह्न किया जाने पर राष्ट्र की सेवा करें
67%
राष्ट्रीय महत्व के संस्मरकों स्थान और वस्तुओं का संरक्षण करें
13%
हिंसा से दूर रहे
7%
प्राणीमात्र के प्रति दया भाव रखें
👍2
☘️🌸 ज्ञान 🌸☘️
निम्नलिखित में से कौन-सा एक मौलिक कर्तव्य नहीं है ?
उत्तर : राष्ट्रीय महत्व के संस्मारकों, स्थानों या वस्तुओं का संरक्षण करे।
व्याख्या: उक्त विकल्प मौलिक कर्तव्य नहीं है बल्कि अनुच्छेद 49 में उल्लेखित नीति निदेशक तत्व है।
विशेष ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि अधिकांश स्टूडेंट्स अनुच्छेद 51A (i) में दिए गए नौवें मौलिक कर्तव्य और अनुच्छेद 49 में दिए गए नीति निदेशक तत्व के बीच अंतर ना समझ पाने की वजह से कंफ्यूज हो जाते हैं। ध्यान ये रखना है कि मौलिक कर्तव्य में सार्वजनिक सम्पत्ति के संरक्षण का उल्लेख है जबकि नीति निदेशक तत्व में राष्ट्रीय महत्व के स्मारक, स्थान और वस्तुओं के संरक्षण का।
अनुच्छेद 51A(i) : “सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।”
अनुच्छेद 49 : “संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व वाले घोषित किए गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुंचि वाले प्रत्येक संस्मारक या स्थान या वस्तु का, यथास्थिति, लुंठन, विरूंपण, विनाश, अपसारण, व्ययन या निर्यात से संरक्षण करना राज्य की बाध्यता होगी।”
नोट: अनुच्छेद 49 को इस रूप में भी याद रखना है कि इस नीतिनिदेशक तत्व को राज्य की बाध्यता के रूप में उपबंधित किया गया है।
व्याख्या: उक्त विकल्प मौलिक कर्तव्य नहीं है बल्कि अनुच्छेद 49 में उल्लेखित नीति निदेशक तत्व है।
विशेष ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि अधिकांश स्टूडेंट्स अनुच्छेद 51A (i) में दिए गए नौवें मौलिक कर्तव्य और अनुच्छेद 49 में दिए गए नीति निदेशक तत्व के बीच अंतर ना समझ पाने की वजह से कंफ्यूज हो जाते हैं। ध्यान ये रखना है कि मौलिक कर्तव्य में सार्वजनिक सम्पत्ति के संरक्षण का उल्लेख है जबकि नीति निदेशक तत्व में राष्ट्रीय महत्व के स्मारक, स्थान और वस्तुओं के संरक्षण का।
अनुच्छेद 51A(i) : “सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।”
अनुच्छेद 49 : “संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व वाले घोषित किए गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुंचि वाले प्रत्येक संस्मारक या स्थान या वस्तु का, यथास्थिति, लुंठन, विरूंपण, विनाश, अपसारण, व्ययन या निर्यात से संरक्षण करना राज्य की बाध्यता होगी।”
नोट: अनुच्छेद 49 को इस रूप में भी याद रखना है कि इस नीतिनिदेशक तत्व को राज्य की बाध्यता के रूप में उपबंधित किया गया है।
❤3🔥2
🎲 Quiz '♻️SSC CHSL GK-इतिहास♻️'
🙏जय श्यामा माई🙏 हक वहीं दिखाना चाहिए, जहां हमारे शब्दों व भावनाओं की कद्रहो।🤞🤞 https://t.me/singhclasss
🖊 30 questions · ⏱ 15 sec
🙏जय श्यामा माई🙏 हक वहीं दिखाना चाहिए, जहां हमारे शब्दों व भावनाओं की कद्रहो।🤞🤞 https://t.me/singhclasss
🖊 30 questions · ⏱ 15 sec
❤5🔥1
अब बिहार में कुल पांच रामसर स्थल हो गए हैं।
1. कंवर झील/बेगूसराय (2020)
2. नागी पक्षी विहार/जमुई (2024)
3. नकटीधाम पक्षी विहार/जमुई (2024)
4. गोकुल जलाशय/बक्सर(2025)
5. उदयपुर झील/प. चंपारण (2025)
1. कंवर झील/बेगूसराय (2020)
2. नागी पक्षी विहार/जमुई (2024)
3. नकटीधाम पक्षी विहार/जमुई (2024)
4. गोकुल जलाशय/बक्सर(2025)
5. उदयपुर झील/प. चंपारण (2025)
👏4❤1
❤5👏1
जस्टिस संजीव शर्मा बने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
चर्चा में:
विधि और न्याय मंत्रालय ने शुक्रवार को जस्टिस संजीव शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश पद पर नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। जस्टिस संजीव शर्मा वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के आर श्रीराम के 27 सितंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यभार सँभालेंगे।
संवैधानिक प्रावधान:
अनुच्छेद 223 के अनुसार जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति का पद रिक्त है या जब ऐसा मुख्य न्यायमूर्ति अनुपस्थिति के कारण या अन्यथा अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, तब न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से ऐसा एक न्यायाधीश, जिसे राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा।
व्याख्या: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति या पदरिक्ति की दशा में राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करता है।
चर्चा में:
विधि और न्याय मंत्रालय ने शुक्रवार को जस्टिस संजीव शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश पद पर नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। जस्टिस संजीव शर्मा वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के आर श्रीराम के 27 सितंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यभार सँभालेंगे।
संवैधानिक प्रावधान:
अनुच्छेद 223 के अनुसार जब किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति का पद रिक्त है या जब ऐसा मुख्य न्यायमूर्ति अनुपस्थिति के कारण या अन्यथा अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, तब न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से ऐसा एक न्यायाधीश, जिसे राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा।
व्याख्या: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति या पदरिक्ति की दशा में राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों में से किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करता है।
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🎲 Quiz '🟤♣️🌿MOST IMPORTANT QUESTIONS ♣️🟤🌱'
https://t.me/singhclasss मेहनत पे विश्वाश रखो ।।❤️😍🧿🤍
🖊 19 questions · ⏱ 30 sec
https://t.me/singhclasss मेहनत पे विश्वाश रखो ।।❤️😍🧿🤍
🖊 19 questions · ⏱ 30 sec
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🎲 Quiz '🔰CURRENT AFFAIRS | 21 - 27 SEP 2025🔰'
🙏जय मां शेरावाली🙏 किसी का सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होती। संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं है, किंतु उसकी बहाव बड़ी से बड़ीचट्टान के भी टुकड़े कर देता है ।💯🤞 https://t.me/singhclasss
🖊 40 questions · ⏱ 15 sec
🙏जय मां शेरावाली🙏 किसी का सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होती। संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं है, किंतु उसकी बहाव बड़ी से बड़ीचट्टान के भी टुकड़े कर देता है ।💯🤞 https://t.me/singhclasss
🖊 40 questions · ⏱ 15 sec
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