🔳प्रमुख मत एवं उनके प्रवर्तक:-
◼️अद्वैतवाद- शंकराचार्य
◼️विशिष्टाद्वैतवाद-रामानुजाचार्य
◼️द्वैताद्वैतवाद -निम्बार्काचार्य
◼️शुद्धाद्वैतवाद -वल्लभाचार्य
◼️द्वैतवाद - माधवाचार्य
◼️भेदाभेदवाद -भास्कराचार्य
◼️शैव विशिष्टाद्वैत - श्रीकंठ
◼️अचिंत्य भेदाभेदवाद- बलदेव
◼️वीर शैव विशिष्टाद्वैत- श्री पति
◼️अविभागद्वैत -विज्ञान भिक्षु
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🎲 Quiz '♻️मुगल वंश के शासक व उनके शासनकाल♻️'
🙏हर हर महादेव🙏 https://t.me/singhclasss
🖊 20 questions · ⏱ 15 sec
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🎲 Quiz '🔰स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित आंदोलन एवं वर्ष🔰'
🙏हर हर महादेव🙏 https://t.me/singhclasss
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🎲 Quiz '🌿📚✒️🌺 सभी एग्जाम के लिए महत्पूर्ण प्रश्न(indian polity)🥰💯📚🌺'
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🎲 Quiz '♻️मध्यकालीन भारत♻️'
दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं महालक्ष्मी आप सबों पर अपनी कृपा बनाए रखें🙏 https://t.me/singhclasss
🖊 30 questions · ⏱ 15 sec
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🎲 Quiz '📚💯✒️ सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अनुच्छेद 📚💯✒️🌺'
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🎲 Quiz '♻️भारत के प्रमुख फसलों का सर्वाधिक उत्पादक राज्य♻️'
🙏जय मां काली🙏 हक वही दिखाना चाहिए, जहां हमारे भावनाओं और शब्दों की कद्र हो💯💯💯 https://t.me/singhclasss
🖊 19 questions · ⏱ 15 sec
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Motivation बनाम Discipline
विद्यार्थी जीवन में Motivation की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके बिना कोई स्टूडेंट लक्ष्य के प्रति अपने जुनून को बरक़रार नहीं रख पाता। Motivation एक रिचार्ज की भाँति होता है जो समय समय पर व्यक्ति में ऊर्जा का संचार करता है। लेकिन Motivation से प्राप्त ऊर्जा की अवधि सीमित होती है। कुछ समय के बाद इसका प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए इसे बार बार रिचार्ज करना पड़ता है।
Descipline की कहानी इससे अलग है। जहाँ Motivation बाहर से आता है, वहीं अनुशासन का स्रोत भीतर होता है। यह स्वयं के संकल्प से जुड़ा मामला है। जब व्यक्ति ख़ुद की ख़ुद पर जीत का जुनून पालता है, उसके परिणामस्वरूप अनुशासन पैदा होता है। यह दिखावे से बहुत दूर, स्वयं से किया गया संघर्ष है। जहाँ अनुशासन की शुरुआती इंटेंसिटी समय के साथ धीमी पड़ती जाती है, वहीं अनुशासन में निरंतरता होती है।
किसी भी सफलता के लिए दोनों की अपनी importance है लेकिन बड़ी सफलता बिना अनुशासन के संभव नहीं है। अनुशासन त्याग, समर्पण, संयम और परिश्रम का संयोग है। इसलिए विद्यार्थी के लिए अनुशासित होना पहली शर्त है।
विद्यार्थी जीवन में Motivation की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके बिना कोई स्टूडेंट लक्ष्य के प्रति अपने जुनून को बरक़रार नहीं रख पाता। Motivation एक रिचार्ज की भाँति होता है जो समय समय पर व्यक्ति में ऊर्जा का संचार करता है। लेकिन Motivation से प्राप्त ऊर्जा की अवधि सीमित होती है। कुछ समय के बाद इसका प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए इसे बार बार रिचार्ज करना पड़ता है।
Descipline की कहानी इससे अलग है। जहाँ Motivation बाहर से आता है, वहीं अनुशासन का स्रोत भीतर होता है। यह स्वयं के संकल्प से जुड़ा मामला है। जब व्यक्ति ख़ुद की ख़ुद पर जीत का जुनून पालता है, उसके परिणामस्वरूप अनुशासन पैदा होता है। यह दिखावे से बहुत दूर, स्वयं से किया गया संघर्ष है। जहाँ अनुशासन की शुरुआती इंटेंसिटी समय के साथ धीमी पड़ती जाती है, वहीं अनुशासन में निरंतरता होती है।
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🎲 Quiz '📚💯🎊HISTORY से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न 💯📚🌿'
जो बीत गया वह past था जो आने वाला है वह future है।।☺️❤️https://t.me/singhclasss
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🎲 Quiz '♻️प्रमुख फसल एवं उत्पादक देश♻️'
🙏जय सियाराम🙏 https://t.me/singhclasss
🖊 20 questions · ⏱ 15 sec
🙏जय सियाराम🙏 https://t.me/singhclasss
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मद्रास का गवर्नर थॉमस पिट था। वर्ष 1702 में पिट ने 24,000 पाउण्ड (यह राशि उस समय काफ़ी बड़ी मानी जाती थी और 99 प्रतिशत अंग्रेज़ों की पहुँच से बाहर थी) से एक हीरा ख़रीदा जो “दुनिया का एक श्रेष्ठ रतन” कहा जाता था। पिट ने 400 कैरेट के इस हीरे को पानी के जहाज़ से ब्रिटेन भेजा। एक पत्र में उसने इसे “मेरी सबसे बड़ी चिन्ता” और “मेरा सब कुछ” कहा है। इस हीरे के ब्रिटेन में सुरक्षित पहुँचते ही उसने गवर्नर का पद छोड़ दिया, एक बड़ी एस्टेट ख़रीदी और संसद की सीट प्राप्त करने के लिए एक बड़ी रक़म दी।
ब्रिटेन के इतिहासकार जॉन की के अनुसार, पिट के हीरे को लेकर “ज़ोरदार अफ़वाहें” थीं, जिनमें से एक यह भी थी कि यह हीरा “एक हिन्दू देवता की आँख” से चुराया गया था अथवा एक दास खदानों से इसे तस्करी करके लाया था जिसने अपनी जंघा में स्वयं ज़ख़्म करके इसे उसमें छिपा लिया था। विकी कॉलिन्स के 1868 में आये उपन्यास “द मूनस्टोन” के हीरे के समान पिट का हीरा एक कहानी बन गया। यह हीरा भारत की व्यापक समृद्धि, उस समृद्धि को निचोड़ लेने वाली ब्रिटेन की शक्ति और भारत में सत्ता के साथ आयी अंग्रेज़ी विलासिता का प्रतीक बन गया।
थॉमस पिट ने भारत से हीरा ख़रीदने के 15 वर्ष बाद इसे फ्रांस के रीजेन्ट डक् डी ऑर्लिन्स को 1,35,000 पाउण्ड की बड़ी रक़म में बेच दिया। यह राशि पिट ने हीरा जितने में ख़रीदा था, उससे लगभग छह गुणा थी। इस भारी–भरकम राशि ने (आज के हिसाब से कई करोड़) पिट के परिवार को अंग्रेज़ समाज में एक नये स्थान पर पहुँचा दिया। इस प्रकार एक भारतीय हीरे ने एक ब्रिटिश घराने को एक ऐसा वित्तीय स्प्रिंगबोर्ड दे दिया जिसने बहुत ही कम समय में दो प्रधानमन्त्री प्रदान कर दिये–उसका पोता विलियम पिट, चेट्हम का प्रथम अर्ल और चेट्हम का अपना बेटा विलियम पिट “द यंगर”।
( पुस्तक पढ़ते हुए कुछ दिलचस्प मिला , इसलिए साझा कर रहा 😊)
ब्रिटेन के इतिहासकार जॉन की के अनुसार, पिट के हीरे को लेकर “ज़ोरदार अफ़वाहें” थीं, जिनमें से एक यह भी थी कि यह हीरा “एक हिन्दू देवता की आँख” से चुराया गया था अथवा एक दास खदानों से इसे तस्करी करके लाया था जिसने अपनी जंघा में स्वयं ज़ख़्म करके इसे उसमें छिपा लिया था। विकी कॉलिन्स के 1868 में आये उपन्यास “द मूनस्टोन” के हीरे के समान पिट का हीरा एक कहानी बन गया। यह हीरा भारत की व्यापक समृद्धि, उस समृद्धि को निचोड़ लेने वाली ब्रिटेन की शक्ति और भारत में सत्ता के साथ आयी अंग्रेज़ी विलासिता का प्रतीक बन गया।
थॉमस पिट ने भारत से हीरा ख़रीदने के 15 वर्ष बाद इसे फ्रांस के रीजेन्ट डक् डी ऑर्लिन्स को 1,35,000 पाउण्ड की बड़ी रक़म में बेच दिया। यह राशि पिट ने हीरा जितने में ख़रीदा था, उससे लगभग छह गुणा थी। इस भारी–भरकम राशि ने (आज के हिसाब से कई करोड़) पिट के परिवार को अंग्रेज़ समाज में एक नये स्थान पर पहुँचा दिया। इस प्रकार एक भारतीय हीरे ने एक ब्रिटिश घराने को एक ऐसा वित्तीय स्प्रिंगबोर्ड दे दिया जिसने बहुत ही कम समय में दो प्रधानमन्त्री प्रदान कर दिये–उसका पोता विलियम पिट, चेट्हम का प्रथम अर्ल और चेट्हम का अपना बेटा विलियम पिट “द यंगर”।
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