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STUDY UPDATE WALE || UPSSSC/SSC/UPPSC/RAILWAY
हर भर्ती लटका देंगे कोर्ट में तुम फार्म तो भरो उत्तरप्रदेश में स्टूडेंट ही चाहता है भर्ती कोर्ट में फंसी रही कुछ लोग लेखपाल भर्ती को कोर्ट में चैलेंज करने को बोल रहे हम इतना ही बोलना चाहते कोर्ट कोर्ट मत खेलो पढ़ने वाले कही ना कही सिलेक्ट हो ही जायेंगे
### इस दस्तावेज़ की हिंदी में विस्तार से व्याख्या
यह दस्तावेज़ इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) में दाखिल की गई एक रिट याचिका (Writ Petition) का ड्राफ्ट है। याचिका का नंबर अभी नहीं भरा गया है (2025 की याचिका)। यह सर्विस सिंगल जज के सामने सुनवाई के लिए है।
#### याचिकाकर्ता कौन है?
- नाम: पंकज कुमार
- उम्र: लगभग 28 वर्ष
- पिता: सत्यनंद कुमार
- पता: गांव-सोंगट्रा, पोस्ट-मेओली, जिला-मऊ, उत्तर प्रदेश
- याचिकाकर्ता खुद एक उम्मीदवार हैं, जो इस भर्ती परीक्षा में हिस्सा लेना चाहते हैं। वे या तो खुद या वकील के माध्यम से याचिका दाखिल कर रहे हैं।
#### प्रतिवादी (विरोधी पक्ष) कौन हैं?
1. उत्तर प्रदेश सरकार (राजस्व विभाग के प्रधान सचिव के माध्यम से)
2. यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) - इसका सचिव
3. उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड - इसका आयुक्त/सचिव
#### मुख्य शिकायत क्या है?
याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश राजस्व लेखपाल भर्ती 2025 (कुल 7994 पदों) में सीट मैट्रिक्स (आरक्षण की सूची) में किए गए संशोधन को चुनौती दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह संशोधन मनमाना, असंवैधानिक और अवैध है।
- मूल विज्ञापन में क्या था?
- सामान्य (अनारक्षित/जनरल) श्रेणी के पद ज्यादा थे (लगभग 4165)।
- संशोधित (रिवाइज्ड) सूची में क्या बदलाव हुआ?
- ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के पद बढ़ाए गए: लगभग 2158 (करीब 27%)
- एससी (अनुसूचित जाति) के पद बढ़ाए: लगभग 1679 (करीब 21%)
- एसटी के पद भी बढ़े।
- सामान्य श्रेणी के पद घटाए गए: केवल 3205 (करीब 40%)
यह बदलाव ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्गों के विरोध और प्रदर्शनों के बाद किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोग ने आरक्षण नियमों का पालन करते हुए संशोधन किया।
याचिकाकर्ता (जो सामान्य श्रेणी से हैं) का कहना है कि इस बदलाव से सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदल दिए गए।
#### मुख्य तर्क और कानूनी आधार
याचिकाकर्ता ने निम्नलिखित आधार पर याचिका दाखिल की है:
1. संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन:
- अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर की गारंटी देता है।
- इंद्रा साहनी केस (1992) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता।
- यहां ईडब्ल्यूएस को छोड़कर भी आरक्षण करीब 60% हो गया है, जो गलत है।
- सामान्य श्रेणी "ओपन पूल" है, जिसमें सभी श्रेणी के मेरिट वाले उम्मीदवार आ सकते हैं। इसे घटाना गलत है।
2. आरक्षण रोस्टर का गलत इस्तेमाल:
- बैकलॉग (पिछले खाली पद) को भरने के लिए सामान्य पद नहीं घटाए जा सकते।
- अगर आरक्षित पद बढ़ाने हैं, तो कुल पद बढ़ाने चाहिए, न कि सामान्य पद घटाकर।
3. वैध अपेक्षा का सिद्धांत (Doctrine of Legitimate Expectation):
- के. मंजुश्री केस (सुप्रीम कोर्ट) के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते, अगर इससे उम्मीदवारों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
- उम्मीदवारों ने मूल विज्ञापन के आधार पर तैयारी शुरू की थी, अब बीच में बदलाव से उनका नुकसान हो रहा है।
#### याचिकाकर्ता क्या मांग रहे हैं? (प्रार्थना)
1. सर्टियोरारी रिट जारी कर संशोधित सीट मैट्रिक्स को रद्द किया जाए (जहां सामान्य पद 3205 किए गए)।
2. मैंडेमस रिट जारी कर आयोग को निर्देश दिया जाए कि भर्ती मूल 50% सामान्य श्रेणी के आधार पर पूरी की जाए।
3. अंतरिम राहत: परीक्षा पर रोक लगाई जाए या परीक्षा का रिजल्ट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखा जाए।
यह दस्तावेज़ इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) में दाखिल की गई एक रिट याचिका (Writ Petition) का ड्राफ्ट है। याचिका का नंबर अभी नहीं भरा गया है (2025 की याचिका)। यह सर्विस सिंगल जज के सामने सुनवाई के लिए है।
#### याचिकाकर्ता कौन है?
- नाम: पंकज कुमार
- उम्र: लगभग 28 वर्ष
- पिता: सत्यनंद कुमार
- पता: गांव-सोंगट्रा, पोस्ट-मेओली, जिला-मऊ, उत्तर प्रदेश
- याचिकाकर्ता खुद एक उम्मीदवार हैं, जो इस भर्ती परीक्षा में हिस्सा लेना चाहते हैं। वे या तो खुद या वकील के माध्यम से याचिका दाखिल कर रहे हैं।
#### प्रतिवादी (विरोधी पक्ष) कौन हैं?
1. उत्तर प्रदेश सरकार (राजस्व विभाग के प्रधान सचिव के माध्यम से)
2. यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) - इसका सचिव
3. उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड - इसका आयुक्त/सचिव
#### मुख्य शिकायत क्या है?
याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश राजस्व लेखपाल भर्ती 2025 (कुल 7994 पदों) में सीट मैट्रिक्स (आरक्षण की सूची) में किए गए संशोधन को चुनौती दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह संशोधन मनमाना, असंवैधानिक और अवैध है।
- मूल विज्ञापन में क्या था?
- सामान्य (अनारक्षित/जनरल) श्रेणी के पद ज्यादा थे (लगभग 4165)।
- संशोधित (रिवाइज्ड) सूची में क्या बदलाव हुआ?
- ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के पद बढ़ाए गए: लगभग 2158 (करीब 27%)
- एससी (अनुसूचित जाति) के पद बढ़ाए: लगभग 1679 (करीब 21%)
- एसटी के पद भी बढ़े।
- सामान्य श्रेणी के पद घटाए गए: केवल 3205 (करीब 40%)
यह बदलाव ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्गों के विरोध और प्रदर्शनों के बाद किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोग ने आरक्षण नियमों का पालन करते हुए संशोधन किया।
याचिकाकर्ता (जो सामान्य श्रेणी से हैं) का कहना है कि इस बदलाव से सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदल दिए गए।
#### मुख्य तर्क और कानूनी आधार
याचिकाकर्ता ने निम्नलिखित आधार पर याचिका दाखिल की है:
1. संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन:
- अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर की गारंटी देता है।
- इंद्रा साहनी केस (1992) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता।
- यहां ईडब्ल्यूएस को छोड़कर भी आरक्षण करीब 60% हो गया है, जो गलत है।
- सामान्य श्रेणी "ओपन पूल" है, जिसमें सभी श्रेणी के मेरिट वाले उम्मीदवार आ सकते हैं। इसे घटाना गलत है।
2. आरक्षण रोस्टर का गलत इस्तेमाल:
- बैकलॉग (पिछले खाली पद) को भरने के लिए सामान्य पद नहीं घटाए जा सकते।
- अगर आरक्षित पद बढ़ाने हैं, तो कुल पद बढ़ाने चाहिए, न कि सामान्य पद घटाकर।
3. वैध अपेक्षा का सिद्धांत (Doctrine of Legitimate Expectation):
- के. मंजुश्री केस (सुप्रीम कोर्ट) के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते, अगर इससे उम्मीदवारों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
- उम्मीदवारों ने मूल विज्ञापन के आधार पर तैयारी शुरू की थी, अब बीच में बदलाव से उनका नुकसान हो रहा है।
#### याचिकाकर्ता क्या मांग रहे हैं? (प्रार्थना)
1. सर्टियोरारी रिट जारी कर संशोधित सीट मैट्रिक्स को रद्द किया जाए (जहां सामान्य पद 3205 किए गए)।
2. मैंडेमस रिट जारी कर आयोग को निर्देश दिया जाए कि भर्ती मूल 50% सामान्य श्रेणी के आधार पर पूरी की जाए।
3. अंतरिम राहत: परीक्षा पर रोक लगाई जाए या परीक्षा का रिजल्ट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखा जाए।
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STUDY UPDATE WALE || UPSSSC/SSC/UPPSC/RAILWAY
सहायक लेखाकार व लेखाकार DV नोटिस 👍👍👍
AGTA वालो अभी ठंडी है रजाई में पड़े रहो गर्मी आने पर निकलना😂
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उत्तर प्रदेश में जनपद बदायूं के उझानी थाना क्षेत्र के पिपरौल गांव में एक भैंस की मौत के बाद गांव में डर का माहौल बन गया. हालात ऐसे हो गए कि एक घर में तेरहवीं की दावत में रायता खाने वाले करीब 200 ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उझानी पहुंचकर एहतियातन रैबीज का टीका लगवाया.
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🥱2😐2