एक बहुत बड़े ज्ञानी पुरुष ने कहा था सरकारी नौकरी ही एकमात्र ऐसी नौकरी है जिसमें काम न करने की सैलरी मिलती है और काम करने के चाय पानी ( रिश्वत ) मिलती है
#just_fun
#just_fun
❤8👎1
#जीवन झूठ है केवल #सत्य है तो वो है #मौत
#माइकल_जैक्सन 150 साल जीना चाहता था!!
किसी सेे साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !!
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !!
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की
जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे
खिलाया जाता था!!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी
छोड़ दिया
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया!!
और....
अपने दोस्त भी गोरे बनाए
शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो...
से विवाह किया,
जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997)
तथा
पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को
जन्म दिया।
वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर
चल रहा था!!
हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले
डोनर भी तैयार कर रखे थे!!
जिन्हें वह खर्चा देता था,
ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें
या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत
पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की
बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ
25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन
रुकने लगी,
उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में
हालत काबू में नहीं आए,
सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए
वह भी उसे नहीं बचा पाए।
उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी
50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था
और 25 जून 2009 को
वह इस दुनिया से चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था!
उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि,
उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!!
उसका सिर गंजा था,
उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे,
उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!
माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा
देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।
माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger
यह सभी क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलता ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने
माइकल जैकसन को सर्च किया!
ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर
सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और
गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले
हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!
सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग
कुदरती मौत की बजाय
बनावटी मौत ही मरते हैं!
"क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर"...
कुछ गंभीर प्रश्न--
चिन्तन अवश्य कीजियेगा.......
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?
हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और
बेहद खर्चीली शादियों से
किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?
क्या आपको याद है कि,
दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने
क्या खाया था ?
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में,
क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?
कितनी पीढ़ियों के,खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।
"हमारी जरूरत कितनी हैं ?और
हम पाना कितना चाहते हैं"?
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी
कमाने में सक्षम नहीं है जो,
हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा
सेविंग कर देना चाहते हैं ?
क्या हम सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों,
अपने परिवार और अपने लिए
स्पेयर नहीं कर सकते ?
क्या आप अपनी मासिक आय का
5% अपने आनंद के लिए,
अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ?
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है
हम कमाने के साथ साथ
आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ?
इससे पहले कि आप
स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ,
इससे पहले कि,
कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
#माइकल_जैक्सन 150 साल जीना चाहता था!!
किसी सेे साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !!
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !!
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की
जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे
खिलाया जाता था!!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी
छोड़ दिया
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया!!
और....
अपने दोस्त भी गोरे बनाए
शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो...
से विवाह किया,
जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997)
तथा
पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को
जन्म दिया।
वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर
चल रहा था!!
हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले
डोनर भी तैयार कर रखे थे!!
जिन्हें वह खर्चा देता था,
ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें
या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत
पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की
बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ
25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन
रुकने लगी,
उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में
हालत काबू में नहीं आए,
सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए
वह भी उसे नहीं बचा पाए।
उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी
50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था
और 25 जून 2009 को
वह इस दुनिया से चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था!
उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि,
उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!!
उसका सिर गंजा था,
उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे,
उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!
माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा
देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।
माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger
यह सभी क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलता ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने
माइकल जैकसन को सर्च किया!
ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर
सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और
गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले
हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!
सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग
कुदरती मौत की बजाय
बनावटी मौत ही मरते हैं!
"क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर"...
कुछ गंभीर प्रश्न--
चिन्तन अवश्य कीजियेगा.......
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?
हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और
बेहद खर्चीली शादियों से
किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?
क्या आपको याद है कि,
दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने
क्या खाया था ?
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में,
क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?
कितनी पीढ़ियों के,खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।
"हमारी जरूरत कितनी हैं ?और
हम पाना कितना चाहते हैं"?
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी
कमाने में सक्षम नहीं है जो,
हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा
सेविंग कर देना चाहते हैं ?
क्या हम सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों,
अपने परिवार और अपने लिए
स्पेयर नहीं कर सकते ?
क्या आप अपनी मासिक आय का
5% अपने आनंद के लिए,
अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ?
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है
हम कमाने के साथ साथ
आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ?
इससे पहले कि आप
स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ,
इससे पहले कि,
कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
❤4
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा
जब कोई उसे कहेगा कि,
"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "
किसी के बारे में,
उसके शानदार कपड़े और
बढ़िया कार देखकर,
राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक
स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!*
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले...
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे,
तब अपनी बातें,
अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे,
शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर
हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?
तब हम मुस्कुराकर
अपने अदृश्य आँसुओं के साथ
बड़े फख्र से कहेंगे---
"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने
अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "
इस मैसेज को
अपने उन सभी मित्रों को पोस्ट कीजिए,
जिन्हें आप कभी भूल नहीं पाएँगे।*
उन्हें पोस्ट कीजिए,
जो कभी भी आपकी मुस्कान की वजह बने थे!
बुझ गया वह #चिराग भी रात ढलते ही #गुमान बहुत जिसे अपनी #रोशनी का था!!
लेकिन इनके मरने के बाद आज जब इनका नाम चर्चित एपस्टीन फाइल्स मै लोगों को मिला है!
तो लोग बहुत अचंभित है!
ऊपरलिखित सारी बातों ने लोगों को भरम से बाहर निकाल दिया!
..
..
#beautiful #beautychallenge #beautifulchallenge
जब कोई उसे कहेगा कि,
"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "
किसी के बारे में,
उसके शानदार कपड़े और
बढ़िया कार देखकर,
राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक
स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!*
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले...
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे,
तब अपनी बातें,
अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे,
शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर
हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?
तब हम मुस्कुराकर
अपने अदृश्य आँसुओं के साथ
बड़े फख्र से कहेंगे---
"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने
अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "
इस मैसेज को
अपने उन सभी मित्रों को पोस्ट कीजिए,
जिन्हें आप कभी भूल नहीं पाएँगे।*
उन्हें पोस्ट कीजिए,
जो कभी भी आपकी मुस्कान की वजह बने थे!
बुझ गया वह #चिराग भी रात ढलते ही #गुमान बहुत जिसे अपनी #रोशनी का था!!
लेकिन इनके मरने के बाद आज जब इनका नाम चर्चित एपस्टीन फाइल्स मै लोगों को मिला है!
तो लोग बहुत अचंभित है!
ऊपरलिखित सारी बातों ने लोगों को भरम से बाहर निकाल दिया!
..
..
#beautiful #beautychallenge #beautifulchallenge
👍4❤1
हम वफा के मामले में दरख्तों की तरह है..🌸
कट जाते हैं लेकिन जगह नहीं बदलते है...🩵🤍
विकास✍️
Happy valentine day
कट जाते हैं लेकिन जगह नहीं बदलते है...🩵🤍
विकास✍️
Happy valentine day
❤6
बिहार: 8051 राजस्व कर्मियों एवं 765 अमीन समेत 16,584 पदों पर मार्च 2027 तक होगी बहाली
BSSC को 2023 में 3559 पदों पर बहाली के लिए अधियाचना भेजा गया था, कुछ पदों का अधियाचना GAD को 2025 में भेजा गया है।
❤5
📚 ज्ञानपीठ पुरस्कार (1965–2024)
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार – संपूर्ण जानकारी
▪️ प्रदानकर्ता: भारतीय ज्ञानपीठ न्यास
▪️ स्थापना वर्ष: 1961
▪️ प्रथम पुरस्कार: 1965
▪️ भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान
▪️ पात्र भाषाएँ: संविधान की 8वीं अनुसूची की भाषाएँ + अंग्रेज़ी
▪️ पुरस्कार स्वरूप:
💰 ₹11 लाख
🗿 वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा
📜 प्रशस्ति पत्र
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🔰 महत्वपूर्ण तथ्य
👑 प्रथम पुरस्कार विजेता (1965)
➡️ जी. शंकर कुरूप — मलयालम
👩🦰 प्रथम महिला विजेता (1976)
➡️ आशापूर्णा देवी — बांग्ला
🌐 प्रथम अंग्रेज़ी भाषा के विजेता (2018)
➡️ अमिताव घोष
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सूची (1965–2024)
📖 1965–1980
1️⃣ 1965 – जी. शंकर कुरूप (मलयालम)
2️⃣ 1966 – ताराशंकर बंदोपाध्याय (बांग्ला)
3️⃣ 1967 – उमाशंकर जोशी (गुजराती), के. वी. पुटप्पा (कन्नड़)
4️⃣ 1968 – सुमित्रानंदन पंत (हिंदी)
5️⃣ 1969 – फिराक गोरखपुरी (उर्दू)
6️⃣ 1970 – विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगू)
7️⃣ 1971 – विष्णु डे (बांग्ला)
8️⃣ 1972 – रामधारी सिंह दिनकर (हिंदी)
9️⃣ 1973 – डी. आर. बेन्द्रे (कन्नड़), गोपीनाथ मोहन्ती (ओड़िया)
🔟 1974 – विष्णु सखाराम खांडेकर (मराठी)
1️⃣1️⃣ 1975 – पी. वी. अकिलान (तमिल)
1️⃣2️⃣ 1976 – आशापूर्णा देवी (बांग्ला)
1️⃣3️⃣ 1977 – के. शिवराम कारंत (कन्नड़)
1️⃣4️⃣ 1978 – अज्ञेय (हिंदी)
1️⃣5️⃣ 1979 – बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)
1️⃣6️⃣ 1980 – एस. के. पोट्टकट्ट (मलयालम)
📖 1981–2000
1️⃣7️⃣ 1981 – अमृता प्रीतम (पंजाबी)
1️⃣8️⃣ 1982 – महादेवी वर्मा (हिंदी)
1️⃣9️⃣ 1983 – मस्ति वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)
2️⃣0️⃣ 1984 – थकाझी शिवशंकर पिल्लई (मलयालम)
2️⃣1️⃣ 1985 – पन्नालाल पटेल (गुजराती)
2️⃣2️⃣ 1986 – सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)
2️⃣3️⃣ 1987 – वी. वी. शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ (मराठी)
2️⃣4️⃣ 1988 – सी. नारायण रेड्डी (तेलुगू)
2️⃣5️⃣ 1989 – कुर्रतुलऐन हैदर (उर्दू)
2️⃣6️⃣ 1990 – विनायक कृष्ण गोकाक (कन्नड़)
2️⃣7️⃣ 1991 – सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)
2️⃣8️⃣ 1992 – नरेश मेहता (हिंदी)
2️⃣9️⃣ 1993 – सीताकांत महापात्रा (ओड़िया)
3️⃣0️⃣ 1994 – यू. आर. अनंतमूर्ति (कन्नड़)
3️⃣1️⃣ 1995 – एम. टी. वासुदेवन नायर (मलयालम)
3️⃣2️⃣ 1996 – महाश्वेता देवी (बांग्ला)
3️⃣3️⃣ 1997 – अली सरदार जाफरी (उर्दू)
3️⃣4️⃣ 1998 – गिरीश कर्नाड (कन्नड़)
3️⃣5️⃣ 1999 – निर्मल वर्मा (हिंदी), गुरदयाल सिंह (पंजाबी)
3️⃣6️⃣ 2000 – इंदिरा गोस्वामी (असमिया)
📖 2001–2024
3️⃣7️⃣ 2001 – राजेन्द्र शाह (गुजराती)
3️⃣8️⃣ 2002 – जयकांतन (तमिल)
3️⃣9️⃣ 2003 – विंदा करंदीकर (मराठी)
4️⃣0️⃣ 2004 – रहमान राही (कश्मीरी)
4️⃣1️⃣ 2005 – कुंवर नारायण (हिंदी)
4️⃣2️⃣ 2006 – रविन्द्र केलकर (कोंकणी), सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)
4️⃣3️⃣ 2007 – ओ. एन. वी. कुरुप (मलयालम)
4️⃣4️⃣ 2008 – शहरयार (उर्दू)
4️⃣5️⃣ 2009 – अमरकांत, श्रीलाल शुक्ल (हिंदी)
4️⃣6️⃣ 2010 – चन्द्रशेखर कंबार (कन्नड़)
4️⃣7️⃣ 2011 – प्रतिभा राय (ओड़िया)
4️⃣8️⃣ 2012 – रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)
4️⃣9️⃣ 2013 – केदारनाथ सिंह (हिंदी)
5️⃣0️⃣ 2014 – भालचंद्र नेमाड़े (मराठी)
5️⃣1️⃣ 2015 – रघुवीर चौधरी (गुजराती)
5️⃣2️⃣ 2016 – शंख घोष (बांग्ला)
5️⃣3️⃣ 2017 – कृष्णा सोबती (हिंदी)
5️⃣4️⃣ 2018 – अमिताव घोष (अंग्रेज़ी)
5️⃣5️⃣ 2019 – अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (मलयालम)
⚠️ 2020 – पुरस्कार नहीं दिया गया
5️⃣6️⃣ 2021 – नीलमणि फूकन (असमिया)
5️⃣7️⃣ 2022 – दामोदर मौउजो (कोंकणी)
5️⃣8️⃣ 2023 – रामभद्राचार्य (संस्कृत), गुलज़ार (उर्दू)
5️⃣9️⃣ 2024 – विनोद कुमार शुक्ल (हिंदी)
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🎯 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
✅ प्रथम पुरस्कार – 1965
✅ प्रथम महिला – आशापूर्णा देवी
✅ प्रथम अंग्रेज़ी लेखक – अमिताव घोष
✅ 2024 विजेता – विनोद कुमार शुक्ल
✅ सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान – ज्ञानपीठ
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
JOIN :- @STUDYUPDATEWALE
_______
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार – संपूर्ण जानकारी
▪️ प्रदानकर्ता: भारतीय ज्ञानपीठ न्यास
▪️ स्थापना वर्ष: 1961
▪️ प्रथम पुरस्कार: 1965
▪️ भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान
▪️ पात्र भाषाएँ: संविधान की 8वीं अनुसूची की भाषाएँ + अंग्रेज़ी
▪️ पुरस्कार स्वरूप:
💰 ₹11 लाख
🗿 वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा
📜 प्रशस्ति पत्र
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🔰 महत्वपूर्ण तथ्य
👑 प्रथम पुरस्कार विजेता (1965)
➡️ जी. शंकर कुरूप — मलयालम
👩🦰 प्रथम महिला विजेता (1976)
➡️ आशापूर्णा देवी — बांग्ला
🌐 प्रथम अंग्रेज़ी भाषा के विजेता (2018)
➡️ अमिताव घोष
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सूची (1965–2024)
📖 1965–1980
1️⃣ 1965 – जी. शंकर कुरूप (मलयालम)
2️⃣ 1966 – ताराशंकर बंदोपाध्याय (बांग्ला)
3️⃣ 1967 – उमाशंकर जोशी (गुजराती), के. वी. पुटप्पा (कन्नड़)
4️⃣ 1968 – सुमित्रानंदन पंत (हिंदी)
5️⃣ 1969 – फिराक गोरखपुरी (उर्दू)
6️⃣ 1970 – विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगू)
7️⃣ 1971 – विष्णु डे (बांग्ला)
8️⃣ 1972 – रामधारी सिंह दिनकर (हिंदी)
9️⃣ 1973 – डी. आर. बेन्द्रे (कन्नड़), गोपीनाथ मोहन्ती (ओड़िया)
🔟 1974 – विष्णु सखाराम खांडेकर (मराठी)
1️⃣1️⃣ 1975 – पी. वी. अकिलान (तमिल)
1️⃣2️⃣ 1976 – आशापूर्णा देवी (बांग्ला)
1️⃣3️⃣ 1977 – के. शिवराम कारंत (कन्नड़)
1️⃣4️⃣ 1978 – अज्ञेय (हिंदी)
1️⃣5️⃣ 1979 – बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)
1️⃣6️⃣ 1980 – एस. के. पोट्टकट्ट (मलयालम)
📖 1981–2000
1️⃣7️⃣ 1981 – अमृता प्रीतम (पंजाबी)
1️⃣8️⃣ 1982 – महादेवी वर्मा (हिंदी)
1️⃣9️⃣ 1983 – मस्ति वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)
2️⃣0️⃣ 1984 – थकाझी शिवशंकर पिल्लई (मलयालम)
2️⃣1️⃣ 1985 – पन्नालाल पटेल (गुजराती)
2️⃣2️⃣ 1986 – सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)
2️⃣3️⃣ 1987 – वी. वी. शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ (मराठी)
2️⃣4️⃣ 1988 – सी. नारायण रेड्डी (तेलुगू)
2️⃣5️⃣ 1989 – कुर्रतुलऐन हैदर (उर्दू)
2️⃣6️⃣ 1990 – विनायक कृष्ण गोकाक (कन्नड़)
2️⃣7️⃣ 1991 – सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)
2️⃣8️⃣ 1992 – नरेश मेहता (हिंदी)
2️⃣9️⃣ 1993 – सीताकांत महापात्रा (ओड़िया)
3️⃣0️⃣ 1994 – यू. आर. अनंतमूर्ति (कन्नड़)
3️⃣1️⃣ 1995 – एम. टी. वासुदेवन नायर (मलयालम)
3️⃣2️⃣ 1996 – महाश्वेता देवी (बांग्ला)
3️⃣3️⃣ 1997 – अली सरदार जाफरी (उर्दू)
3️⃣4️⃣ 1998 – गिरीश कर्नाड (कन्नड़)
3️⃣5️⃣ 1999 – निर्मल वर्मा (हिंदी), गुरदयाल सिंह (पंजाबी)
3️⃣6️⃣ 2000 – इंदिरा गोस्वामी (असमिया)
📖 2001–2024
3️⃣7️⃣ 2001 – राजेन्द्र शाह (गुजराती)
3️⃣8️⃣ 2002 – जयकांतन (तमिल)
3️⃣9️⃣ 2003 – विंदा करंदीकर (मराठी)
4️⃣0️⃣ 2004 – रहमान राही (कश्मीरी)
4️⃣1️⃣ 2005 – कुंवर नारायण (हिंदी)
4️⃣2️⃣ 2006 – रविन्द्र केलकर (कोंकणी), सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)
4️⃣3️⃣ 2007 – ओ. एन. वी. कुरुप (मलयालम)
4️⃣4️⃣ 2008 – शहरयार (उर्दू)
4️⃣5️⃣ 2009 – अमरकांत, श्रीलाल शुक्ल (हिंदी)
4️⃣6️⃣ 2010 – चन्द्रशेखर कंबार (कन्नड़)
4️⃣7️⃣ 2011 – प्रतिभा राय (ओड़िया)
4️⃣8️⃣ 2012 – रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)
4️⃣9️⃣ 2013 – केदारनाथ सिंह (हिंदी)
5️⃣0️⃣ 2014 – भालचंद्र नेमाड़े (मराठी)
5️⃣1️⃣ 2015 – रघुवीर चौधरी (गुजराती)
5️⃣2️⃣ 2016 – शंख घोष (बांग्ला)
5️⃣3️⃣ 2017 – कृष्णा सोबती (हिंदी)
5️⃣4️⃣ 2018 – अमिताव घोष (अंग्रेज़ी)
5️⃣5️⃣ 2019 – अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (मलयालम)
⚠️ 2020 – पुरस्कार नहीं दिया गया
5️⃣6️⃣ 2021 – नीलमणि फूकन (असमिया)
5️⃣7️⃣ 2022 – दामोदर मौउजो (कोंकणी)
5️⃣8️⃣ 2023 – रामभद्राचार्य (संस्कृत), गुलज़ार (उर्दू)
5️⃣9️⃣ 2024 – विनोद कुमार शुक्ल (हिंदी)
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🎯 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
✅ प्रथम पुरस्कार – 1965
✅ प्रथम महिला – आशापूर्णा देवी
✅ प्रथम अंग्रेज़ी लेखक – अमिताव घोष
✅ 2024 विजेता – विनोद कुमार शुक्ल
✅ सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान – ज्ञानपीठ
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
JOIN :- @STUDYUPDATEWALE
_______
❤4
जब महादेव की भक्ति करने वाले ही प्रेम विवाह से कतराये तो समझना भक्ति सिर्फ शब्दो में थी समझ में नही
हर हर महादेव❤️
हैप्पी महाशिवरात्रि
हर हर महादेव❤️
हैप्पी महाशिवरात्रि
❤6
उत्तराखंड के हरिद्वार से कांवड लेकर संभल जिले की निवासी मुस्लिम महिला तमन्ना मलिक उर्फ तुलसी शनिवार शाम को असमोली पहुंच गई हैं। बुर्के पहने कंधे पर कांवड़ लिए पुलिस सुरक्षा के बीच पहुंची तमन्ना ने लगभग रविवार सुबह वह महाशिवरात्रि के अवसर पर क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक कर अपना संकल्प पूरा करेंगी। अपने गृह जनपद पहुंचते ही तमन्ना मलिक का लोगों ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत सत्कार किया। इस दौरान पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया
तमन्ना ने कहा कि मैं पूरी रीति-रिवाज से कांवड़ लेकर आई हूं और मेरी भगवान भोलेनाथ में आस्था व विश्वास है। प्रतिदिन सुबह-शाम मैं भगवान शिव की पूजा-पाठ करतीं हूं। तमन्ना ने आगे कहा कि करीब साढ़े तीन साल पहले मैं गांव के ही अमन त्यागी से प्रेम करती थी, तभी ये मन्नत मांगी थी कि मेरा विवाह अमन के साथ हो जाए तो मैं कांवड़ लेकर पैदल आऊंगी और क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करूंगी। मेरी मनोकामना भगवान शिव ने पूरी की और अब अपना वैवाहिक जीवनयापन अमन के साथ हंसी-खुशी से कर रही हूं। भगवान शिव ने मेरी इच्छा पूरी तो मुझे भी अपना संकल्प याद था, इसलिए आज मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर यहां पहुंची हूं।
तमन्ना ने कहा कि मैं पूरी रीति-रिवाज से कांवड़ लेकर आई हूं और मेरी भगवान भोलेनाथ में आस्था व विश्वास है। प्रतिदिन सुबह-शाम मैं भगवान शिव की पूजा-पाठ करतीं हूं। तमन्ना ने आगे कहा कि करीब साढ़े तीन साल पहले मैं गांव के ही अमन त्यागी से प्रेम करती थी, तभी ये मन्नत मांगी थी कि मेरा विवाह अमन के साथ हो जाए तो मैं कांवड़ लेकर पैदल आऊंगी और क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करूंगी। मेरी मनोकामना भगवान शिव ने पूरी की और अब अपना वैवाहिक जीवनयापन अमन के साथ हंसी-खुशी से कर रही हूं। भगवान शिव ने मेरी इच्छा पूरी तो मुझे भी अपना संकल्प याद था, इसलिए आज मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर यहां पहुंची हूं।
❤6
महाशिवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनाएं l 🙏❣️
❤5
लोवर पीसीएस भर्ती के संबंध में आज गोरखनाथ मंदिर के प्रांगण में कुछ साथियों ने सीधे CM योगी जी से मुलाकात की है। और ये बोला है कि ये भर्ती पिछले सात सालों से नहीं आई है, चार बार पेट परीक्षा आयोजित हो चुकी है लेकिन इस भर्ती के संबंध में आश्वासन के अतिरिक्त अभ्यर्थियों को कुछ नहीं मिला है । साक्ष्य स्वरूप रिक्त पदों का RTI रिप्लाई भी दिखाया और आयोग को शीघ्र विज्ञापन जारी करने हेतु निर्देशित करने का निवेदन किया । CM साहब ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गोरखपुर DM को निर्देशित किया है कि ये पत्र तुरंत आयोग को प्रेषित किया जाए और साथ ही साथ अपने OSD को आयोग से संपर्क करके इस विज्ञापन को प्राथमिकता पर जारी करने के लिए निर्देशित किया है। जाते जाते अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया है कि एक माह के भीतरी ये विज्ञापन जारी हो जाएगा
❤6