लोवर पीसीएस भर्ती के संबंध में आज गोरखनाथ मंदिर के प्रांगण में कुछ साथियों ने सीधे CM योगी जी से मुलाकात की है। और ये बोला है कि ये भर्ती पिछले सात सालों से नहीं आई है, चार बार पेट परीक्षा आयोजित हो चुकी है लेकिन इस भर्ती के संबंध में आश्वासन के अतिरिक्त अभ्यर्थियों को कुछ नहीं मिला है । साक्ष्य स्वरूप रिक्त पदों का RTI रिप्लाई भी दिखाया और आयोग को शीघ्र विज्ञापन जारी करने हेतु निर्देशित करने का निवेदन किया । CM साहब ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गोरखपुर DM को निर्देशित किया है कि ये पत्र तुरंत आयोग को प्रेषित किया जाए और साथ ही साथ अपने OSD को आयोग से संपर्क करके इस विज्ञापन को प्राथमिकता पर जारी करने के लिए निर्देशित किया है। जाते जाते अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया है कि एक माह के भीतरी ये विज्ञापन जारी हो जाएगा
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एक व्यक्ति जो राजा की तरह सोचता है, समय उसे कितना भी कमजोर क्यों न करे, वह निश्चित रूप से एक दिन राजा बन जाता है।✨️💥🦋 #IAS Shakti Dubey IAS
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💥पटना हाईकोर्ट में दायर इस रिट याचिका में याचिकाकर्ताओं ने बिहार सरकार द्वारा 5 अगस्त 2025 को जारी शिक्षक नियुक्ति नियमों में संशोधन को चुनौती दी है। उनका कहना है कि:
1. आरक्षण (SC/ST/OBC/EWS) को केवल बिहार डोमिसाइल तक सीमित करना असंवैधानिक है।
2. अनारक्षित 40% सीटों में से 35% बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित करना गलत है।
3. केवल बिहार से मैट्रिक/इंटर पास अभ्यर्थियों को ही उस श्रेणी में पात्र मानना संविधान के अनुच्छेद 14, 16(1), 16(2), 16(3) का उल्लंघन है।
4. भर्ती में पूरे देश के अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए और डोमिसाइल/शिक्षा आधारित प्रतिबंध हटाए जाएँ।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी में निवास (डोमिसाइल) आधारित आरक्षण केवल संसद ही कानून बनाकर लागू कर सकती है, राज्य सरकार नहीं।
वहीं, राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि यह डोमिसाइल आरक्षण नहीं है, बल्कि बिहार के स्कूलों से पढ़े अभ्यर्थियों के लिए शैक्षणिक आधार पर प्रावधान है, जिसमें अन्य राज्यों के छात्र भी शामिल हो सकते हैं यदि उन्होंने बिहार से पढ़ाई की हो।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने तैयारी के लिए समय माँगा है और कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की है।
1. आरक्षण (SC/ST/OBC/EWS) को केवल बिहार डोमिसाइल तक सीमित करना असंवैधानिक है।
2. अनारक्षित 40% सीटों में से 35% बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित करना गलत है।
3. केवल बिहार से मैट्रिक/इंटर पास अभ्यर्थियों को ही उस श्रेणी में पात्र मानना संविधान के अनुच्छेद 14, 16(1), 16(2), 16(3) का उल्लंघन है।
4. भर्ती में पूरे देश के अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए और डोमिसाइल/शिक्षा आधारित प्रतिबंध हटाए जाएँ।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी में निवास (डोमिसाइल) आधारित आरक्षण केवल संसद ही कानून बनाकर लागू कर सकती है, राज्य सरकार नहीं।
वहीं, राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि यह डोमिसाइल आरक्षण नहीं है, बल्कि बिहार के स्कूलों से पढ़े अभ्यर्थियों के लिए शैक्षणिक आधार पर प्रावधान है, जिसमें अन्य राज्यों के छात्र भी शामिल हो सकते हैं यदि उन्होंने बिहार से पढ़ाई की हो।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने तैयारी के लिए समय माँगा है और कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की है।
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टूटी हुई टहनियां कहा छांव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीद हमेशा घाव देती हैं...!!
Government job
✍️Vikas
हद से ज्यादा उम्मीद हमेशा घाव देती हैं...!!
Government job
✍️Vikas
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