STUDY UPDATE WALE || UPSSSC/SSC/UPPSC/RAILWAY
🔰 लेखपाल भर्ती परीक्षा में कॉमन कटऑफ की मांग .!! ◾50 पर्सेंटाइल कटऑफ की मांग.!!
एक बार फिर से कोर्स बेचकर धंधा करने वाले यूट्यूबर UPSSSC PET में कॉमन कट ऑफ की मांग करने लगे हैं..!!
ये वही लोग हैं जो PET परीक्षा के समय 99 परसेंटाइल की तैयारी करा रहे थे और अपने कोर्स बेच रहे थे या तो तुम लोग उस समय सही थे या अब सही हो दोनों बातें विरोधाभास हैं असली मकसद है अपना धंधा बढ़ाना और लखपति बनना ।
कॉमन कट ऑफ की मांग ही नाजायज है किसी भर्ती में शून्य और किसी में 50 परसेंटाइल अपने आप में तर्कसंगत नहीं है , बस जहां भीड़ दिखे वहां निकल लो कोर्स बेचने के लिए ।
इन व्यापारियों और तथाकथित छात्रसंघ नेताओं से बचकर रहना होगा हर बार पैसे बनाने के मकसद से बच्चों को भड़काने का काम करते हैं ।
ये वही लोग हैं जो PET परीक्षा के समय 99 परसेंटाइल की तैयारी करा रहे थे और अपने कोर्स बेच रहे थे या तो तुम लोग उस समय सही थे या अब सही हो दोनों बातें विरोधाभास हैं असली मकसद है अपना धंधा बढ़ाना और लखपति बनना ।
कॉमन कट ऑफ की मांग ही नाजायज है किसी भर्ती में शून्य और किसी में 50 परसेंटाइल अपने आप में तर्कसंगत नहीं है , बस जहां भीड़ दिखे वहां निकल लो कोर्स बेचने के लिए ।
इन व्यापारियों और तथाकथित छात्रसंघ नेताओं से बचकर रहना होगा हर बार पैसे बनाने के मकसद से बच्चों को भड़काने का काम करते हैं ।
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-लीगलिक्स – इलाहाबाद हाई कोर्ट निर्णय सूचना प्रणाली
(निर्णय/आदेश – पाठ प्रारूप में)
यह प्रति केवल सूचना/संदर्भ हेतु अप्रमाणित (Uncertified) है। प्रमाणित प्रति के लिए केवल प्रमाणित कॉपी देखें। किसी त्रुटि की स्थिति में उप-निबंधक (कॉपीिंग) को सूचित करें।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ
न्यूट्रल सिटेशन संख्या: 2024:AHC-LKO:34041
कोर्ट संख्या: 6
मामला: रिट – ए संख्या 3354 / 2024
याचिकाकर्ता: राहुल यादव
प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश राज्य, प्रमुख सचिव (गृह), लखनऊ एवं अन्य
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता: रजत शर्मा, हरि ओम पांडेय
प्रतिवादी के अधिवक्ता: सी.एस.सी., गौरव मेहरोत्रा
माननीय न्यायमूर्ति: अब्दुल मोइन, जे.
याचिकाकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता तथा प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को सुना गया।
यह रिट याचिका तकनीकी सहायक, ग्रुप-सी के पदों पर भर्ती हेतु जारी विज्ञापन/अधिसूचना संख्या 07/2024 को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है और आरक्षण को पदों की संख्या के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि कुल 3446 पद विज्ञापित किए गए हैं, जिनमें से सामान्य वर्ग के लिए 519, अनुसूचित जाति के लिए 151, अनुसूचित जनजाति के लिए 629, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 344 तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए पद आरक्षित किए गए हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार आरक्षण की गणना पदों की संख्या के आधार पर होनी चाहिए, न कि रिक्तियों (vacancies) के आधार पर।
प्रतिवादियों की ओर से यह दलील दी गई कि आरक्षण कैडर स्ट्रेंथ (Cadre Strength) के आधार पर लागू किया जाता है, न कि केवल विज्ञापित रिक्तियों पर। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय R.K. Sabharwal बनाम पंजाब राज्य का हवाला दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण प्रतिशत कैडर स्ट्रेंथ पर लागू होता है।
यह भी बताया गया कि तकनीकी सहायक, ग्रुप-सी की कुल कैडर स्ट्रेंथ 10559 है, जिसमें से 5054 पद पहले ही भरे जा चुके हैं, और शेष 5505 पद रिक्त हैं। पहले ही 2059 पदों के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी थी और वर्तमान अधिसूचना भी इन्हीं रिक्तियों के संदर्भ में है।
न्यायालय ने माना कि आरक्षण नीति का पालन कैडर स्ट्रेंथ के आधार पर किया गया है और इसमें किसी प्रकार का उल्लंघन नहीं है।
न्यायालय का निष्कर्ष:
न्यायालय को अधिसूचना में कोई हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। अतः रिट याचिका खारिज की जाती है।
आदेश दिनांक: 01.05.2024
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(निर्णय/आदेश – पाठ प्रारूप में)
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ
न्यूट्रल सिटेशन संख्या: 2024:AHC-LKO:34041
कोर्ट संख्या: 6
मामला: रिट – ए संख्या 3354 / 2024
याचिकाकर्ता: राहुल यादव
प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश राज्य, प्रमुख सचिव (गृह), लखनऊ एवं अन्य
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता: रजत शर्मा, हरि ओम पांडेय
प्रतिवादी के अधिवक्ता: सी.एस.सी., गौरव मेहरोत्रा
माननीय न्यायमूर्ति: अब्दुल मोइन, जे.
याचिकाकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता तथा प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को सुना गया।
यह रिट याचिका तकनीकी सहायक, ग्रुप-सी के पदों पर भर्ती हेतु जारी विज्ञापन/अधिसूचना संख्या 07/2024 को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया गया है और आरक्षण को पदों की संख्या के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि कुल 3446 पद विज्ञापित किए गए हैं, जिनमें से सामान्य वर्ग के लिए 519, अनुसूचित जाति के लिए 151, अनुसूचित जनजाति के लिए 629, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 344 तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए पद आरक्षित किए गए हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार आरक्षण की गणना पदों की संख्या के आधार पर होनी चाहिए, न कि रिक्तियों (vacancies) के आधार पर।
प्रतिवादियों की ओर से यह दलील दी गई कि आरक्षण कैडर स्ट्रेंथ (Cadre Strength) के आधार पर लागू किया जाता है, न कि केवल विज्ञापित रिक्तियों पर। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय R.K. Sabharwal बनाम पंजाब राज्य का हवाला दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण प्रतिशत कैडर स्ट्रेंथ पर लागू होता है।
यह भी बताया गया कि तकनीकी सहायक, ग्रुप-सी की कुल कैडर स्ट्रेंथ 10559 है, जिसमें से 5054 पद पहले ही भरे जा चुके हैं, और शेष 5505 पद रिक्त हैं। पहले ही 2059 पदों के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी थी और वर्तमान अधिसूचना भी इन्हीं रिक्तियों के संदर्भ में है।
न्यायालय ने माना कि आरक्षण नीति का पालन कैडर स्ट्रेंथ के आधार पर किया गया है और इसमें किसी प्रकार का उल्लंघन नहीं है।
न्यायालय का निष्कर्ष:
न्यायालय को अधिसूचना में कोई हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। अतः रिट याचिका खारिज की जाती है।
आदेश दिनांक: 01.05.2024
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VPO/ AGTA DV शडूयल पर ही काम चल रहा आयोग गये कुछ साथियो के अनुसार आगामी 7-8 दिनों में शिड्यूल आ जायेगा AGTA या VPO में किसकी डीवी पहले लगे ये स्पष्ट जानकारी नही दी गयी बोला गया आपके ही कार्य में लगे है
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🔰 पर्यावरण अरावली से जुड़ी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पर आड़े........!!!
◾ अरावली क्षेत्र में खनन पूरी तरह से प्रतिबंध हो,,,, भूपेंद्र यादव.....!!!
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◾ अरावली क्षेत्र में खनन पूरी तरह से प्रतिबंध हो,,,, भूपेंद्र यादव.....!!!
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