📚 ज्ञानपीठ पुरस्कार (1965–2024)
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🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार – संपूर्ण जानकारी
▪️ प्रदानकर्ता: भारतीय ज्ञानपीठ न्यास
▪️ स्थापना वर्ष: 1961
▪️ प्रथम पुरस्कार: 1965
▪️ भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान
▪️ पात्र भाषाएँ: संविधान की 8वीं अनुसूची की भाषाएँ + अंग्रेज़ी
▪️ पुरस्कार स्वरूप:
💰 ₹11 लाख
🗿 वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा
📜 प्रशस्ति पत्र
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🔰 महत्वपूर्ण तथ्य
👑 प्रथम पुरस्कार विजेता (1965)
➡️ जी. शंकर कुरूप — मलयालम
👩🦰 प्रथम महिला विजेता (1976)
➡️ आशापूर्णा देवी — बांग्ला
🌐 प्रथम अंग्रेज़ी भाषा के विजेता (2018)
➡️ अमिताव घोष
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🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सूची (1965–2024)
📖 1965–1980
1️⃣ 1965 – जी. शंकर कुरूप (मलयालम)
2️⃣ 1966 – ताराशंकर बंदोपाध्याय (बांग्ला)
3️⃣ 1967 – उमाशंकर जोशी (गुजराती), के. वी. पुटप्पा (कन्नड़)
4️⃣ 1968 – सुमित्रानंदन पंत (हिंदी)
5️⃣ 1969 – फिराक गोरखपुरी (उर्दू)
6️⃣ 1970 – विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगू)
7️⃣ 1971 – विष्णु डे (बांग्ला)
8️⃣ 1972 – रामधारी सिंह दिनकर (हिंदी)
9️⃣ 1973 – डी. आर. बेन्द्रे (कन्नड़), गोपीनाथ मोहन्ती (ओड़िया)
🔟 1974 – विष्णु सखाराम खांडेकर (मराठी)
1️⃣1️⃣ 1975 – पी. वी. अकिलान (तमिल)
1️⃣2️⃣ 1976 – आशापूर्णा देवी (बांग्ला)
1️⃣3️⃣ 1977 – के. शिवराम कारंत (कन्नड़)
1️⃣4️⃣ 1978 – अज्ञेय (हिंदी)
1️⃣5️⃣ 1979 – बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)
1️⃣6️⃣ 1980 – एस. के. पोट्टकट्ट (मलयालम)
📖 1981–2000
1️⃣7️⃣ 1981 – अमृता प्रीतम (पंजाबी)
1️⃣8️⃣ 1982 – महादेवी वर्मा (हिंदी)
1️⃣9️⃣ 1983 – मस्ति वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)
2️⃣0️⃣ 1984 – थकाझी शिवशंकर पिल्लई (मलयालम)
2️⃣1️⃣ 1985 – पन्नालाल पटेल (गुजराती)
2️⃣2️⃣ 1986 – सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)
2️⃣3️⃣ 1987 – वी. वी. शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ (मराठी)
2️⃣4️⃣ 1988 – सी. नारायण रेड्डी (तेलुगू)
2️⃣5️⃣ 1989 – कुर्रतुलऐन हैदर (उर्दू)
2️⃣6️⃣ 1990 – विनायक कृष्ण गोकाक (कन्नड़)
2️⃣7️⃣ 1991 – सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)
2️⃣8️⃣ 1992 – नरेश मेहता (हिंदी)
2️⃣9️⃣ 1993 – सीताकांत महापात्रा (ओड़िया)
3️⃣0️⃣ 1994 – यू. आर. अनंतमूर्ति (कन्नड़)
3️⃣1️⃣ 1995 – एम. टी. वासुदेवन नायर (मलयालम)
3️⃣2️⃣ 1996 – महाश्वेता देवी (बांग्ला)
3️⃣3️⃣ 1997 – अली सरदार जाफरी (उर्दू)
3️⃣4️⃣ 1998 – गिरीश कर्नाड (कन्नड़)
3️⃣5️⃣ 1999 – निर्मल वर्मा (हिंदी), गुरदयाल सिंह (पंजाबी)
3️⃣6️⃣ 2000 – इंदिरा गोस्वामी (असमिया)
📖 2001–2024
3️⃣7️⃣ 2001 – राजेन्द्र शाह (गुजराती)
3️⃣8️⃣ 2002 – जयकांतन (तमिल)
3️⃣9️⃣ 2003 – विंदा करंदीकर (मराठी)
4️⃣0️⃣ 2004 – रहमान राही (कश्मीरी)
4️⃣1️⃣ 2005 – कुंवर नारायण (हिंदी)
4️⃣2️⃣ 2006 – रविन्द्र केलकर (कोंकणी), सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)
4️⃣3️⃣ 2007 – ओ. एन. वी. कुरुप (मलयालम)
4️⃣4️⃣ 2008 – शहरयार (उर्दू)
4️⃣5️⃣ 2009 – अमरकांत, श्रीलाल शुक्ल (हिंदी)
4️⃣6️⃣ 2010 – चन्द्रशेखर कंबार (कन्नड़)
4️⃣7️⃣ 2011 – प्रतिभा राय (ओड़िया)
4️⃣8️⃣ 2012 – रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)
4️⃣9️⃣ 2013 – केदारनाथ सिंह (हिंदी)
5️⃣0️⃣ 2014 – भालचंद्र नेमाड़े (मराठी)
5️⃣1️⃣ 2015 – रघुवीर चौधरी (गुजराती)
5️⃣2️⃣ 2016 – शंख घोष (बांग्ला)
5️⃣3️⃣ 2017 – कृष्णा सोबती (हिंदी)
5️⃣4️⃣ 2018 – अमिताव घोष (अंग्रेज़ी)
5️⃣5️⃣ 2019 – अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (मलयालम)
⚠️ 2020 – पुरस्कार नहीं दिया गया
5️⃣6️⃣ 2021 – नीलमणि फूकन (असमिया)
5️⃣7️⃣ 2022 – दामोदर मौउजो (कोंकणी)
5️⃣8️⃣ 2023 – रामभद्राचार्य (संस्कृत), गुलज़ार (उर्दू)
5️⃣9️⃣ 2024 – विनोद कुमार शुक्ल (हिंदी)
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🎯 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
✅ प्रथम पुरस्कार – 1965
✅ प्रथम महिला – आशापूर्णा देवी
✅ प्रथम अंग्रेज़ी लेखक – अमिताव घोष
✅ 2024 विजेता – विनोद कुमार शुक्ल
✅ सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान – ज्ञानपीठ
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🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार – संपूर्ण जानकारी
▪️ प्रदानकर्ता: भारतीय ज्ञानपीठ न्यास
▪️ स्थापना वर्ष: 1961
▪️ प्रथम पुरस्कार: 1965
▪️ भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान
▪️ पात्र भाषाएँ: संविधान की 8वीं अनुसूची की भाषाएँ + अंग्रेज़ी
▪️ पुरस्कार स्वरूप:
💰 ₹11 लाख
🗿 वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा
📜 प्रशस्ति पत्र
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🔰 महत्वपूर्ण तथ्य
👑 प्रथम पुरस्कार विजेता (1965)
➡️ जी. शंकर कुरूप — मलयालम
👩🦰 प्रथम महिला विजेता (1976)
➡️ आशापूर्णा देवी — बांग्ला
🌐 प्रथम अंग्रेज़ी भाषा के विजेता (2018)
➡️ अमिताव घोष
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🏆 ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सूची (1965–2024)
📖 1965–1980
1️⃣ 1965 – जी. शंकर कुरूप (मलयालम)
2️⃣ 1966 – ताराशंकर बंदोपाध्याय (बांग्ला)
3️⃣ 1967 – उमाशंकर जोशी (गुजराती), के. वी. पुटप्पा (कन्नड़)
4️⃣ 1968 – सुमित्रानंदन पंत (हिंदी)
5️⃣ 1969 – फिराक गोरखपुरी (उर्दू)
6️⃣ 1970 – विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगू)
7️⃣ 1971 – विष्णु डे (बांग्ला)
8️⃣ 1972 – रामधारी सिंह दिनकर (हिंदी)
9️⃣ 1973 – डी. आर. बेन्द्रे (कन्नड़), गोपीनाथ मोहन्ती (ओड़िया)
🔟 1974 – विष्णु सखाराम खांडेकर (मराठी)
1️⃣1️⃣ 1975 – पी. वी. अकिलान (तमिल)
1️⃣2️⃣ 1976 – आशापूर्णा देवी (बांग्ला)
1️⃣3️⃣ 1977 – के. शिवराम कारंत (कन्नड़)
1️⃣4️⃣ 1978 – अज्ञेय (हिंदी)
1️⃣5️⃣ 1979 – बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)
1️⃣6️⃣ 1980 – एस. के. पोट्टकट्ट (मलयालम)
📖 1981–2000
1️⃣7️⃣ 1981 – अमृता प्रीतम (पंजाबी)
1️⃣8️⃣ 1982 – महादेवी वर्मा (हिंदी)
1️⃣9️⃣ 1983 – मस्ति वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)
2️⃣0️⃣ 1984 – थकाझी शिवशंकर पिल्लई (मलयालम)
2️⃣1️⃣ 1985 – पन्नालाल पटेल (गुजराती)
2️⃣2️⃣ 1986 – सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)
2️⃣3️⃣ 1987 – वी. वी. शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ (मराठी)
2️⃣4️⃣ 1988 – सी. नारायण रेड्डी (तेलुगू)
2️⃣5️⃣ 1989 – कुर्रतुलऐन हैदर (उर्दू)
2️⃣6️⃣ 1990 – विनायक कृष्ण गोकाक (कन्नड़)
2️⃣7️⃣ 1991 – सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)
2️⃣8️⃣ 1992 – नरेश मेहता (हिंदी)
2️⃣9️⃣ 1993 – सीताकांत महापात्रा (ओड़िया)
3️⃣0️⃣ 1994 – यू. आर. अनंतमूर्ति (कन्नड़)
3️⃣1️⃣ 1995 – एम. टी. वासुदेवन नायर (मलयालम)
3️⃣2️⃣ 1996 – महाश्वेता देवी (बांग्ला)
3️⃣3️⃣ 1997 – अली सरदार जाफरी (उर्दू)
3️⃣4️⃣ 1998 – गिरीश कर्नाड (कन्नड़)
3️⃣5️⃣ 1999 – निर्मल वर्मा (हिंदी), गुरदयाल सिंह (पंजाबी)
3️⃣6️⃣ 2000 – इंदिरा गोस्वामी (असमिया)
📖 2001–2024
3️⃣7️⃣ 2001 – राजेन्द्र शाह (गुजराती)
3️⃣8️⃣ 2002 – जयकांतन (तमिल)
3️⃣9️⃣ 2003 – विंदा करंदीकर (मराठी)
4️⃣0️⃣ 2004 – रहमान राही (कश्मीरी)
4️⃣1️⃣ 2005 – कुंवर नारायण (हिंदी)
4️⃣2️⃣ 2006 – रविन्द्र केलकर (कोंकणी), सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)
4️⃣3️⃣ 2007 – ओ. एन. वी. कुरुप (मलयालम)
4️⃣4️⃣ 2008 – शहरयार (उर्दू)
4️⃣5️⃣ 2009 – अमरकांत, श्रीलाल शुक्ल (हिंदी)
4️⃣6️⃣ 2010 – चन्द्रशेखर कंबार (कन्नड़)
4️⃣7️⃣ 2011 – प्रतिभा राय (ओड़िया)
4️⃣8️⃣ 2012 – रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)
4️⃣9️⃣ 2013 – केदारनाथ सिंह (हिंदी)
5️⃣0️⃣ 2014 – भालचंद्र नेमाड़े (मराठी)
5️⃣1️⃣ 2015 – रघुवीर चौधरी (गुजराती)
5️⃣2️⃣ 2016 – शंख घोष (बांग्ला)
5️⃣3️⃣ 2017 – कृष्णा सोबती (हिंदी)
5️⃣4️⃣ 2018 – अमिताव घोष (अंग्रेज़ी)
5️⃣5️⃣ 2019 – अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (मलयालम)
⚠️ 2020 – पुरस्कार नहीं दिया गया
5️⃣6️⃣ 2021 – नीलमणि फूकन (असमिया)
5️⃣7️⃣ 2022 – दामोदर मौउजो (कोंकणी)
5️⃣8️⃣ 2023 – रामभद्राचार्य (संस्कृत), गुलज़ार (उर्दू)
5️⃣9️⃣ 2024 – विनोद कुमार शुक्ल (हिंदी)
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🎯 परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
✅ प्रथम पुरस्कार – 1965
✅ प्रथम महिला – आशापूर्णा देवी
✅ प्रथम अंग्रेज़ी लेखक – अमिताव घोष
✅ 2024 विजेता – विनोद कुमार शुक्ल
✅ सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान – ज्ञानपीठ
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❤4
जब महादेव की भक्ति करने वाले ही प्रेम विवाह से कतराये तो समझना भक्ति सिर्फ शब्दो में थी समझ में नही
हर हर महादेव❤️
हैप्पी महाशिवरात्रि
हर हर महादेव❤️
हैप्पी महाशिवरात्रि
❤6
उत्तराखंड के हरिद्वार से कांवड लेकर संभल जिले की निवासी मुस्लिम महिला तमन्ना मलिक उर्फ तुलसी शनिवार शाम को असमोली पहुंच गई हैं। बुर्के पहने कंधे पर कांवड़ लिए पुलिस सुरक्षा के बीच पहुंची तमन्ना ने लगभग रविवार सुबह वह महाशिवरात्रि के अवसर पर क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक कर अपना संकल्प पूरा करेंगी। अपने गृह जनपद पहुंचते ही तमन्ना मलिक का लोगों ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत सत्कार किया। इस दौरान पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया
तमन्ना ने कहा कि मैं पूरी रीति-रिवाज से कांवड़ लेकर आई हूं और मेरी भगवान भोलेनाथ में आस्था व विश्वास है। प्रतिदिन सुबह-शाम मैं भगवान शिव की पूजा-पाठ करतीं हूं। तमन्ना ने आगे कहा कि करीब साढ़े तीन साल पहले मैं गांव के ही अमन त्यागी से प्रेम करती थी, तभी ये मन्नत मांगी थी कि मेरा विवाह अमन के साथ हो जाए तो मैं कांवड़ लेकर पैदल आऊंगी और क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करूंगी। मेरी मनोकामना भगवान शिव ने पूरी की और अब अपना वैवाहिक जीवनयापन अमन के साथ हंसी-खुशी से कर रही हूं। भगवान शिव ने मेरी इच्छा पूरी तो मुझे भी अपना संकल्प याद था, इसलिए आज मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर यहां पहुंची हूं।
तमन्ना ने कहा कि मैं पूरी रीति-रिवाज से कांवड़ लेकर आई हूं और मेरी भगवान भोलेनाथ में आस्था व विश्वास है। प्रतिदिन सुबह-शाम मैं भगवान शिव की पूजा-पाठ करतीं हूं। तमन्ना ने आगे कहा कि करीब साढ़े तीन साल पहले मैं गांव के ही अमन त्यागी से प्रेम करती थी, तभी ये मन्नत मांगी थी कि मेरा विवाह अमन के साथ हो जाए तो मैं कांवड़ लेकर पैदल आऊंगी और क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करूंगी। मेरी मनोकामना भगवान शिव ने पूरी की और अब अपना वैवाहिक जीवनयापन अमन के साथ हंसी-खुशी से कर रही हूं। भगवान शिव ने मेरी इच्छा पूरी तो मुझे भी अपना संकल्प याद था, इसलिए आज मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर यहां पहुंची हूं।
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महाशिवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनाएं l 🙏❣️
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लोवर पीसीएस भर्ती के संबंध में आज गोरखनाथ मंदिर के प्रांगण में कुछ साथियों ने सीधे CM योगी जी से मुलाकात की है। और ये बोला है कि ये भर्ती पिछले सात सालों से नहीं आई है, चार बार पेट परीक्षा आयोजित हो चुकी है लेकिन इस भर्ती के संबंध में आश्वासन के अतिरिक्त अभ्यर्थियों को कुछ नहीं मिला है । साक्ष्य स्वरूप रिक्त पदों का RTI रिप्लाई भी दिखाया और आयोग को शीघ्र विज्ञापन जारी करने हेतु निर्देशित करने का निवेदन किया । CM साहब ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गोरखपुर DM को निर्देशित किया है कि ये पत्र तुरंत आयोग को प्रेषित किया जाए और साथ ही साथ अपने OSD को आयोग से संपर्क करके इस विज्ञापन को प्राथमिकता पर जारी करने के लिए निर्देशित किया है। जाते जाते अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया है कि एक माह के भीतरी ये विज्ञापन जारी हो जाएगा
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एक व्यक्ति जो राजा की तरह सोचता है, समय उसे कितना भी कमजोर क्यों न करे, वह निश्चित रूप से एक दिन राजा बन जाता है।✨️💥🦋 #IAS Shakti Dubey IAS
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💥पटना हाईकोर्ट में दायर इस रिट याचिका में याचिकाकर्ताओं ने बिहार सरकार द्वारा 5 अगस्त 2025 को जारी शिक्षक नियुक्ति नियमों में संशोधन को चुनौती दी है। उनका कहना है कि:
1. आरक्षण (SC/ST/OBC/EWS) को केवल बिहार डोमिसाइल तक सीमित करना असंवैधानिक है।
2. अनारक्षित 40% सीटों में से 35% बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित करना गलत है।
3. केवल बिहार से मैट्रिक/इंटर पास अभ्यर्थियों को ही उस श्रेणी में पात्र मानना संविधान के अनुच्छेद 14, 16(1), 16(2), 16(3) का उल्लंघन है।
4. भर्ती में पूरे देश के अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए और डोमिसाइल/शिक्षा आधारित प्रतिबंध हटाए जाएँ।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी में निवास (डोमिसाइल) आधारित आरक्षण केवल संसद ही कानून बनाकर लागू कर सकती है, राज्य सरकार नहीं।
वहीं, राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि यह डोमिसाइल आरक्षण नहीं है, बल्कि बिहार के स्कूलों से पढ़े अभ्यर्थियों के लिए शैक्षणिक आधार पर प्रावधान है, जिसमें अन्य राज्यों के छात्र भी शामिल हो सकते हैं यदि उन्होंने बिहार से पढ़ाई की हो।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने तैयारी के लिए समय माँगा है और कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की है।
1. आरक्षण (SC/ST/OBC/EWS) को केवल बिहार डोमिसाइल तक सीमित करना असंवैधानिक है।
2. अनारक्षित 40% सीटों में से 35% बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित करना गलत है।
3. केवल बिहार से मैट्रिक/इंटर पास अभ्यर्थियों को ही उस श्रेणी में पात्र मानना संविधान के अनुच्छेद 14, 16(1), 16(2), 16(3) का उल्लंघन है।
4. भर्ती में पूरे देश के अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए और डोमिसाइल/शिक्षा आधारित प्रतिबंध हटाए जाएँ।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी में निवास (डोमिसाइल) आधारित आरक्षण केवल संसद ही कानून बनाकर लागू कर सकती है, राज्य सरकार नहीं।
वहीं, राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि यह डोमिसाइल आरक्षण नहीं है, बल्कि बिहार के स्कूलों से पढ़े अभ्यर्थियों के लिए शैक्षणिक आधार पर प्रावधान है, जिसमें अन्य राज्यों के छात्र भी शामिल हो सकते हैं यदि उन्होंने बिहार से पढ़ाई की हो।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने तैयारी के लिए समय माँगा है और कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की है।
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टूटी हुई टहनियां कहा छांव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीद हमेशा घाव देती हैं...!!
Government job
✍️Vikas
हद से ज्यादा उम्मीद हमेशा घाव देती हैं...!!
Government job
✍️Vikas
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