हम सब भारतवासी... मूलनिवासी
📍9 अगस्त का सच!
📍मूलनिवासी दिवस की आवश्यकता!
📍मूलनिवासी होने का प्रमाण!
📍सभी भारतवासी... मूलनिवासी
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The Narrative Podcast
> भारत में मूलनिवासी दिवस क्यों?
📍सुप्रीम कोर्ट के वकील क्या कह रहे?
📍युवाओं में भ्रम कौन फैला रहा?
📍देखें पूरा वीडियो!
यूट्यूब लिंक - https://youtu.be/5xjiHr0h1fU
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भारत में मूलनिवासी दिवस क्यों? | Indigenous Day | 9 August | Podcast | Tribal
भारत में विश्व मूलनिवासी दिवस क्यों? क्या ‘Indigenous’ की वैश्विक अवधारणा भारतीय जनजातीय समाज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ पर लागू होती है? क्या विदेशी नैरेटिव भारतीय जनजातीय युवाओं की पहचान को प्रभावित कर रहा है?
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1857 की क्रांति: भारतीय स्वातंत्र्य समर
> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
ब्रिटिश ईसाई सत्ता की विभिन्न कुनीतियों के कारण वर्षों तक अपने भीतर आक्रोश लिए बैठे भारतीयों को क्रांति के लिए एक चिंगारी मिल गई थी. 'गाय की चर्बी' लगे कारतूस का विरोध करते हुए 10 मई 1857 को मेरठ से इसकी शुरुआत हुई.
इस क्रांति का विस्तार बंगाल से होते हुए लखनऊ, मेरठ से दिल्ली पहुंचा. इसके बाद राजस्थान से लेकर बिहार और मध्यप्रदेश तक क्रांतिकारियों की बाढ़ सी आ गई, जिसने ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ें हिला दी.
नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाबू कुंवर सिंह, मंगल पांडे ने प्रमुख रूप से इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं क्रांतिकारी घटनाओं का नेतृत्व किया.
स्वाधीनता के इस महान संग्राम को 'वीर सावरकर' ने भारतीय स्वाधीनता का पहला संग्राम कहा था.
मेरी संस्कृति….मेरा देश….मेरा अभिमान 🚩
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> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
ब्रिटिश ईसाई सत्ता की विभिन्न कुनीतियों के कारण वर्षों तक अपने भीतर आक्रोश लिए बैठे भारतीयों को क्रांति के लिए एक चिंगारी मिल गई थी. 'गाय की चर्बी' लगे कारतूस का विरोध करते हुए 10 मई 1857 को मेरठ से इसकी शुरुआत हुई.
इस क्रांति का विस्तार बंगाल से होते हुए लखनऊ, मेरठ से दिल्ली पहुंचा. इसके बाद राजस्थान से लेकर बिहार और मध्यप्रदेश तक क्रांतिकारियों की बाढ़ सी आ गई, जिसने ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ें हिला दी.
नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाबू कुंवर सिंह, मंगल पांडे ने प्रमुख रूप से इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं क्रांतिकारी घटनाओं का नेतृत्व किया.
स्वाधीनता के इस महान संग्राम को 'वीर सावरकर' ने भारतीय स्वाधीनता का पहला संग्राम कहा था.
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आजाद हिंद फौज: स्वाधीनता संग्राम में शामिल भारतीय क्रांतिकारियों की सेना
> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
ब्रिटिश ईसाइयों से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अक्टूबर 1943 में 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया गया था, जिसमें कैप्टन मोहन सिंह, रासबिहारी बोस एवं निरंजन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
तत्पश्चात नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली और ब्रिटिश ईसाई सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया. जापान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों की सहायता से नेताजी ने फौज को आगे बढ़ाया और भारत को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया.
आजाद हिंद फौज का मुख्यालय सिंगापुर एवं रंगून में बनाया गया. 30 दिसंबर 1943 को अंडमान-निकोबार द्वीप पर स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराकर आजाद हिंद फौज ने स्वाधीनता की ओर पहला कदम रखा.
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> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
ब्रिटिश ईसाइयों से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अक्टूबर 1943 में 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया गया था, जिसमें कैप्टन मोहन सिंह, रासबिहारी बोस एवं निरंजन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
तत्पश्चात नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली और ब्रिटिश ईसाई सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया. जापान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों की सहायता से नेताजी ने फौज को आगे बढ़ाया और भारत को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया.
आजाद हिंद फौज का मुख्यालय सिंगापुर एवं रंगून में बनाया गया. 30 दिसंबर 1943 को अंडमान-निकोबार द्वीप पर स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराकर आजाद हिंद फौज ने स्वाधीनता की ओर पहला कदम रखा.
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The Narrative
China in Focus - Mainland China
> China’s intelligence laws, surveillance system, and opaque state-corporate ties raise serious concerns over data security and digital sovereignty. Read the full story.
https://shorturl.at/d5kBx
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The Dragon’s Digital Delusion : China Can Build Technology, But It Can't Install Trust
The CCP’s Digital Silk Road promises connectivity, but China’s intelligence laws, surveillance system, and opaque state-corporate ties raise serious concerns over data security and digital sovereignty.
The Narrative
Bharat - Internal Security
> New FCRA rules exclude proselytisation from permitted religious activities, tightening India’s oversight of foreign funding and its utilisation by registered organisations.
https://shorturl.at/SiV0L
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Bharat - Internal Security
> New FCRA rules exclude proselytisation from permitted religious activities, tightening India’s oversight of foreign funding and its utilisation by registered organisations.
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Foreign Funds Under Scrutiny: FCRA, Proselytisation and NGO Accountability
New FCRA rules exclude proselytisation from permitted religious activities, tightening India’s oversight of foreign funding and its utilisation by registered organisations.
Video Story by The Narrative
> Rahul Gandhi’s Selective Outrage!
📍 Silence on Jharkhand & Punjab
📍 Strong Speeches at Jantar Mantar
📍 Rahul Gandhi’s Political Duality
YouTube Link - https://youtu.be/K2MFb-439nA
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Rahul Gandhi’s Selective Outrage! | The Narrative
Rahul Gandhi speaks strongly on student protest at Jantar Mantar, but does the same concern extend to Punjab, Jharkhand and Kerala? From student rights and lathi charge to political silence, this video exposes the double standards of Rahul Gandhi’s stand…
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☘️ हरेली तिहार – छत्तीसगढ़ का लोक पर्व
श्रावण अमावस्या को मनाया जाने वाला हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है.
‘हरेली’ यानी हरियाली , यही जीवन है, यही प्रकृति की आत्मा.
किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर मिट्टी और परिश्रम दोनों को प्रणाम करते हैं.
गेड़ी खेल, उपकरणों की आरती, और नैसर्गिक प्रसाद, हर परंपरा में छिपा है लोक जीवन का विज्ञान.
यह छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है, जहाँ खेत भी पूज्य हैं, और खलिहान भी.
जहाँ हर हरियाली में ईश्वर है, वही है हरेली…
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श्रावण अमावस्या को मनाया जाने वाला हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है.
‘हरेली’ यानी हरियाली , यही जीवन है, यही प्रकृति की आत्मा.
किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर मिट्टी और परिश्रम दोनों को प्रणाम करते हैं.
गेड़ी खेल, उपकरणों की आरती, और नैसर्गिक प्रसाद, हर परंपरा में छिपा है लोक जीवन का विज्ञान.
यह छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है, जहाँ खेत भी पूज्य हैं, और खलिहान भी.
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श्रावण मास में कांवड़ यात्रा
प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में लाखों शिवभक्त गंगा जल लेकर पवित्र तीर्थों से पैदल चलकर शिवलिंग पर जल अर्पण करते हैं, यही है कांवड़ यात्रा.
इस यात्रा में भक्तगण कंधे पर कांवड़ उठाकर, नंगे पाँव चलते हैं और “बोल बम!” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं.
पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण जी ने भी कांवड़ में गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना की थी.
कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह भारतीय जनमानस में महादेव से जुड़ने की जीवंत परंपरा है, जहाँ भक्ति और कठोर तप एक साथ चलते हैं.
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प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में लाखों शिवभक्त गंगा जल लेकर पवित्र तीर्थों से पैदल चलकर शिवलिंग पर जल अर्पण करते हैं, यही है कांवड़ यात्रा.
इस यात्रा में भक्तगण कंधे पर कांवड़ उठाकर, नंगे पाँव चलते हैं और “बोल बम!” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं.
पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण जी ने भी कांवड़ में गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना की थी.
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कम्युनिज़्म - प्रोपेगेंडा
> जनजातीय अधिकारों के नाम पर खड़ा हुआ संगठन, जिसके पीछे है ईसाइयों की Liberation Theology और वामपंथी नेटवर्क! पीटर उर्फ प्रदीप के पुराने कनेक्शन और नेटवर्क की पूरी कहानी, पढ़िए इस लेख में!
https://tinyurl.com/mw9fnzxh
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कम्युनिज़्म - प्रोपेगेंडा
> जनजातीय अधिकारों के नाम पर खड़ा हुआ संगठन, जिसके पीछे है ईसाइयों की Liberation Theology और वामपंथी नेटवर्क! पीटर उर्फ प्रदीप के पुराने कनेक्शन और नेटवर्क की पूरी कहानी, पढ़िए इस लेख में!
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काश्तकारी संगठन: जनजातीय अधिकारों की लड़ाई की आड़ में खड़ा वामपंथी नेटवर्क?
पीटर उर्फ़ प्रदीप का नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा। उसे वामपंथियों के तमाम आंदोलन जैसे नर्मदा बचाओ आंदोलन, भारत जन आंदोलन, नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट्स, आदिवासी एकता परिषद और अन्य कम्युनिस्ट आंदोलनों में देखा गया है।
The Narrative Graphical Document
भारत की स्वाधीनता के समय कम्युनिस्टों ने इसे "झूठा" बता दिया था, क्योंकि भारत में कम्युनिस्ट तानाशाही की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सरकार स्थापित हुई. आखिर क्या चाहते थे कम्युनिस्ट? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
> YE AZADI JHOOTHI HAI - THE COMMUNIST BETRAYAL
✒️ The Narrative
भारत की स्वाधीनता के समय कम्युनिस्टों ने इसे "झूठा" बता दिया था, क्योंकि भारत में कम्युनिस्ट तानाशाही की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सरकार स्थापित हुई. आखिर क्या चाहते थे कम्युनिस्ट? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
> YE AZADI JHOOTHI HAI - THE COMMUNIST BETRAYAL
✒️ The Narrative
Video Story by The Narrative
> हिन्दू विरोधी पन्नालाल का सच!
📍 ईसाई पादरी अरुण पन्नालाल का आपत्तिजनक बयान!
📍 पहलगाम पोस्ट पर पहले भी हो चुकी है FIR!
📍 आखिर बार-बार क्यों हिन्दू विरोधी बयान?
YouTube Link - https://youtu.be/cuGOVkIUr4c
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> हिन्दू विरोधी पन्नालाल का सच!
📍 ईसाई पादरी अरुण पन्नालाल का आपत्तिजनक बयान!
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हिन्दू विरोधी पन्नालाल का सच! | The Narrative
पहलगाम हमले से जुड़े पुराने सोशल मीडिया पर विवाद, CNI Diocese द्वारा प्रतिनिधित्व के दावे से इनकार और अब गिरफ्तारी – अरुण पन्नालाल एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। जानिये अरुण पन्नालाल से जुड़े पूरे विवाद की कहानी इस वीडियो में।
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स्वदेशी आंदोलन - आत्मनिर्भरता से जागा राष्ट्रीय स्वाभिमान
> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध से उभरा स्वदेशी आंदोलन, केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं था. यह भारतीयों में आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला व्यापक जनआंदोलन बन गया.
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविंद घोष जैसे नेताओं ने स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाया.
इस आंदोलन ने विद्यार्थियों, महिलाओं, व्यापारियों, श्रमिकों और सामान्य नागरिकों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा.
स्वदेशी की वह चेतना आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनी और आज भी आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरणा देती है.
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> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा
वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध से उभरा स्वदेशी आंदोलन, केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं था. यह भारतीयों में आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला व्यापक जनआंदोलन बन गया.
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविंद घोष जैसे नेताओं ने स्वदेशी के विचार को जन-जन तक पहुँचाया.
इस आंदोलन ने विद्यार्थियों, महिलाओं, व्यापारियों, श्रमिकों और सामान्य नागरिकों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ा.
स्वदेशी की वह चेतना आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला बनी और आज भी आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरणा देती है.
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The Narrative
भारत - विचार
> एक तरफ गालियाँ, अराजकता और कैमरों के सामने हंगामा; दूसरी तरफ बिना पत्थर उठाए अनुशासित छात्र आंदोलन! आखिर किसका प्रतिरोध अधिक शक्तिशाली है और क्यों? पढ़िए पूरा विश्लेषण!
https://tinyurl.com/96t6zhkb
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भारत - विचार
> एक तरफ गालियाँ, अराजकता और कैमरों के सामने हंगामा; दूसरी तरफ बिना पत्थर उठाए अनुशासित छात्र आंदोलन! आखिर किसका प्रतिरोध अधिक शक्तिशाली है और क्यों? पढ़िए पूरा विश्लेषण!
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जब कोई आंदोलन पत्थर नहीं उठाता
आंदोलन की शक्ति पत्थरों, गालियों और अराजकता में नहीं, बल्कि विचार, अनुशासन और स्पष्ट माँगों में होती है।