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मणिपुर की रासलीला - कृष्णभक्ति में नृत्य
पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में विकसित रासलीला, श्रीकृष्ण और राधारानी की भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण को नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाली विशिष्ट परंपरा है.
स्थानीय लोगों की भक्ति और कल्पना ने इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान में कृष्णभक्ति को एक विशिष्ट स्थान प्रदान किया.
रासलीला में राधा, कृष्ण और गोपियों के प्रसंगों को अत्यंत सौम्य और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है. कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, मृदंग की ध्वनि और मधुर संकीर्तन वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं.
इस नृत्य की सबसे विशेष बात इसकी कोमलता और अनुशासित गतियाँ हैं. इसमें भाव-भंगिमाओं और संगीत के माध्यम से भक्ति को प्रधानता दी जाती है, न कि केवल प्रदर्शन को.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में विकसित रासलीला, श्रीकृष्ण और राधारानी की भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण को नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाली विशिष्ट परंपरा है.
स्थानीय लोगों की भक्ति और कल्पना ने इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान में कृष्णभक्ति को एक विशिष्ट स्थान प्रदान किया.
रासलीला में राधा, कृष्ण और गोपियों के प्रसंगों को अत्यंत सौम्य और लयबद्ध नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है. कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, मृदंग की ध्वनि और मधुर संकीर्तन वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं.
इस नृत्य की सबसे विशेष बात इसकी कोमलता और अनुशासित गतियाँ हैं. इसमें भाव-भंगिमाओं और संगीत के माध्यम से भक्ति को प्रधानता दी जाती है, न कि केवल प्रदर्शन को.
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The Narrative
नैरेटिव एक्सक्लुसिव - कनेक्टिंग डॉट्स
> माओवादी खत्म हुए तो बस्तर में नया संघर्ष कौन खड़ा कर रहा है? कांग्रेस के जल-जंगल-जमीन अभियान और वामपंथी नैरेटिव के बीच क्या है कनेक्शन? पढ़ें पूरी पड़ताल!
https://bit.ly/3UPjZqb
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बस्तर में "दिमागी नक्सल" रणनीति : नक्सलियों के बाद अब कांग्रेस कर रही है ‘वर्ग संघर्ष’ की राजनीति?
सच्चाई यही है कि बस्तर को अब ‘वर्ग संघर्ष’ से मुक्ति चाहिए। बस्तर ने माओवाद की कीमत चुकाई है। उसने अपने जवान खोए हैं। अपने जनप्रतिनिधि खोए हैं। अपने ग्रामीण खोए हैं। विकास के कई दशक खोए हैं। अब बस्तर को किसी नए संघर्ष की प्रयोगशाला बनाना सबसे बड़ी राजनीतिक…
The Narrative
Bharat - Politics
> Suvendu Adhikari has put Bengal’s radical Left ecosystem on notice, challenging Maoist glorification, separatist slogans and campus radicalism centred around Jadavpur University
https://bit.ly/4ckNw16
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No More Lal Salaam: Bengal’s Radical Left Under Fire
From Maoist murals to separatist slogans, Sevundu Adhikari is confronting Bengal’s radical Left ecosystem.
Video Story by The Narrative
> We will “Pray” and we will “Donate”
📍 आस्था पर प्रहार!
📍 समाधान या गलत संदेश?
📍 देखे पूरा वीडियो!
YouTube Link - https://www.youtube.com/watch?v=r7sUiENk9WU
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We will “pray” and we will “donate” | The Narrative
राम मंदिर में चंदे की रकम में चोरी होने के बाद, एक नया नैरेटिव सामने आया है - “we will pray, but we will not donate”. “दान रोकना समाधान नहीं है, बलकी पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करना ही सही समाधान है।”
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी, वह पावन रात्रि, जब मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ. भारतीय परंपरा में यह दिन जन्माष्टमी के रूप में श्रद्धा और उत्सव के साथ मनाया जाता है.
कंस के अत्याचार से त्रस्त मथुरा और देवकी-वसुदेव का कारावास श्रीकृष्ण जन्म की कथा का केंद्र है. श्रीकृष्ण जी का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ.
श्रीकृष्ण जी के बाल स्वरूप का अभिषेक होता है, झूला सजता है और भक्त “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय कर देते हैं.
मथुरा-वृंदावन की जन्माष्टमी विशेष रूप से प्रसिद्ध है. यहाँ मंदिरों की झाँकियाँ, रास-लीला और भक्ति-संगीत इस पर्व को जीवंत बना देते हैं.
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी, वह पावन रात्रि, जब मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ. भारतीय परंपरा में यह दिन जन्माष्टमी के रूप में श्रद्धा और उत्सव के साथ मनाया जाता है.
कंस के अत्याचार से त्रस्त मथुरा और देवकी-वसुदेव का कारावास श्रीकृष्ण जन्म की कथा का केंद्र है. श्रीकृष्ण जी का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ.
श्रीकृष्ण जी के बाल स्वरूप का अभिषेक होता है, झूला सजता है और भक्त “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय कर देते हैं.
मथुरा-वृंदावन की जन्माष्टमी विशेष रूप से प्रसिद्ध है. यहाँ मंदिरों की झाँकियाँ, रास-लीला और भक्ति-संगीत इस पर्व को जीवंत बना देते हैं.
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जयंती - शिक्षक दिवस
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति, द्वितीय राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद एवं आस्थावान हिंदू विचारक तथा प्रखर राष्ट्रवादी थे.
शिक्षा के क्षेत्र में डॉ राधाकृष्णन के उत्कृष्ट योगदान के कारण प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को उनकी जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.
भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं पौराणिक इतिहास का गहन अध्ययन कर वैश्विक पटल में हिंदु दर्शन का प्रसार किया था.
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The Narrative
Narrative Exclusive - Positive Narrative
> Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat’s three-nation outreach takes the RSS’s century-old vision of social harmony, selfless service and universal oneness from Bharat to the world.
https://short-url.cc/1xA9Y
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The Narrative Graphical Document
अर्बन माओवादी कौन होते हैं? क्या सच में ऐसा कुछ होता है? शहरों में क्या वास्तव में ऐसा कोई तंत्र काम करता है? यदि है, तो पकड़ में क्यों नहीं आता? पढ़िए पूरी पड़ताल, द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
> अर्बन माओवादी - शहरों में छिपा माओवादी तंत्र
✒️ The Narrative
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> अर्बन माओवादी - शहरों में छिपा माओवादी तंत्र
✒️ The Narrative
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Politics - Appeasement
> Tamil Nadu’s rising debt and Muslim-Christian-focused schemes under Vijay raise serious questions about fiscal priorities and the equal treatment of taxpayers.
https://short-url.cc/1xABS
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कैंची धाम - श्री नीम करोली बाबा आश्रम
उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थलों में गिना जाता है. हरे-भरे पहाड़ों और शांत वातावरण के बीच बना यह आश्रम नीम करोली बाबा की स्मृति और उनकी सेवा-परंपरा से जुड़ा है.
नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त महाराज-जी के नाम से भी पुकारते हैं, ने अपने जीवन में भक्ति, सेवा और मानवता को विशेष महत्व दिया.
कैंची धाम में उनका आश्रम इसी विचार का केंद्र बना, जहाँ आज भी देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं. कैंची धाम की स्थापना 1960 के दशक में हुई और यहाँ हनुमान जी का मंदिर आश्रम का प्रमुख केंद्र है.
समय के साथ कैंची धाम की ख्याति भारत से बाहर भी पहुँची. विश्व के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहाँ आध्यात्मिक शांति और आत्मिक अनुभव की तलाश में आते हैं.
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नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त महाराज-जी के नाम से भी पुकारते हैं, ने अपने जीवन में भक्ति, सेवा और मानवता को विशेष महत्व दिया.
कैंची धाम में उनका आश्रम इसी विचार का केंद्र बना, जहाँ आज भी देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं. कैंची धाम की स्थापना 1960 के दशक में हुई और यहाँ हनुमान जी का मंदिर आश्रम का प्रमुख केंद्र है.
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Short Video Story by The Narrative
> ‘Urban Naxal’ पर कांग्रेस के बदलते स्टैंडर्ड्स!
📍 कांग्रेस का बदलता चरित्र!
📍 सत्ता बदलते ही बदल गए स्टैंडर्ड्स!
📍अपने ही हलफनामे से पलटी कांग्रेस!
YouTube Link - https://youtube.com/shorts/CAjh5zdZVBA
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‘Urban Naxal’ पर कांग्रेस के बदलते स्टैंडर्ड्स! | The Narrative
2013 में जिस “Urban Naxal” नेटवर्क को UPA सरकार ने कभी गंभीर खतरा ब...