Short Video Story by The Narrative
> 1962 India-China War | How Political Decisions Cost Us Victory
📍 Did Nehru’s choices betray our soldiers?
📍 Why was the Indian Air Force kept out of the war?
📍 How political blunders changed the course of history?
Watch Now – https://youtube.com/shorts/8k-tBqhj2co?feature=share
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📍 Did Nehru’s choices betray our soldiers?
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1962 India-China War | How Political Decisions Cost Us Victory | The Narrative
The 1962 India-China war exposed leadership failures. Brave soldiers fought courageously, yet political decisions denied them victory. Discover how Nehru’s c...
नवरात्रि पर शक्तिपूजा की एक अनोखी परंपरा : गोलू
🔱 अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक नवरात्रि का यह पर्व तमिलनाडु में "गोलू" के रूप में विशेष रीति से मनाया जाता है।
🔱 पौराणिक कथाओं के अनुसार वरदान के कारण महिषासुर को कोई पुरुष नहीं मार सकता था, तब माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के अन्त में उसका वध किया।
🔱 क्योंकि इस युद्ध के समय सभी देवता और जीव-जन्तु अपनी शक्ति माँ भवानी को अर्पित करने के कारण मूर्तियों की तरह स्थिर हो गए थे, इसीलिए गोलू में मूर्तियाँ सजाने की परंपरा है।
🔱 महालय अमावस्या के दिन से गोलू की सीढ़ियाँ सजाई जाती हैं, जिसमें नीचे जीव-जंतु और ऊपर देवताओं की प्रतिमाएँ रखी जाती हैं। दीप और नैवेद्य अर्पित कर सुहागिनों को सौभाग्यचिह्न भेंट किए जाते हैं।
🔱 वास्तव में "गोलू" हमारी भारतीय संस्कृति में नारी-शक्ति के सम्मान और धर्म के प्रति प्राणिमात्र के दृढ़ आग्रह का प्रतीक है।
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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🔱 अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक नवरात्रि का यह पर्व तमिलनाडु में "गोलू" के रूप में विशेष रीति से मनाया जाता है।
🔱 पौराणिक कथाओं के अनुसार वरदान के कारण महिषासुर को कोई पुरुष नहीं मार सकता था, तब माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के अन्त में उसका वध किया।
🔱 क्योंकि इस युद्ध के समय सभी देवता और जीव-जन्तु अपनी शक्ति माँ भवानी को अर्पित करने के कारण मूर्तियों की तरह स्थिर हो गए थे, इसीलिए गोलू में मूर्तियाँ सजाने की परंपरा है।
🔱 महालय अमावस्या के दिन से गोलू की सीढ़ियाँ सजाई जाती हैं, जिसमें नीचे जीव-जंतु और ऊपर देवताओं की प्रतिमाएँ रखी जाती हैं। दीप और नैवेद्य अर्पित कर सुहागिनों को सौभाग्यचिह्न भेंट किए जाते हैं।
🔱 वास्तव में "गोलू" हमारी भारतीय संस्कृति में नारी-शक्ति के सम्मान और धर्म के प्रति प्राणिमात्र के दृढ़ आग्रह का प्रतीक है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - शताब्दी वर्ष विशेष 🚩
वर्ष 1925 की विजयादशमी की पावन तिथि पर आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने एक बीज बोया था, *राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.* जो अब वटवृक्ष बन अपने 100 वर्ष पूर्ण कर रहा है.
इन सौ वर्षों में संघ ने भारत के समाज को संगठित किया, संस्कारों को जीवित रखा और सेवा को साधना बनाया.
मातृभूमि की स्वाधीनता का संग्राम हो, 1962-65-71 के युद्ध हों, आपातकाल का संघर्ष हो या प्राकृतिक आपदाएँ, स्वयंसेवक हमेशा राष्ट्र की रक्षा और समाज की सेवा में खड़े रहे.
शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, सेवा बस्तियों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में संघ ने असंख्य आयाम जोड़े.
आज जब विश्व भारत को “नेतृत्व” के रूप में देख रहा है, तब संघ की यह शताब्दी केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के नवोदय का संकल्प है.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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वर्ष 1925 की विजयादशमी की पावन तिथि पर आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने एक बीज बोया था, *राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.* जो अब वटवृक्ष बन अपने 100 वर्ष पूर्ण कर रहा है.
इन सौ वर्षों में संघ ने भारत के समाज को संगठित किया, संस्कारों को जीवित रखा और सेवा को साधना बनाया.
मातृभूमि की स्वाधीनता का संग्राम हो, 1962-65-71 के युद्ध हों, आपातकाल का संघर्ष हो या प्राकृतिक आपदाएँ, स्वयंसेवक हमेशा राष्ट्र की रक्षा और समाज की सेवा में खड़े रहे.
शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, सेवा बस्तियों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में संघ ने असंख्य आयाम जोड़े.
आज जब विश्व भारत को “नेतृत्व” के रूप में देख रहा है, तब संघ की यह शताब्दी केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के नवोदय का संकल्प है.
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विजयादशमी पर्व 🏹
सनातन परंपरा में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पर विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहते हैं.
पौराणिक आख्यानों के अनुसार इसी तिथि पर माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और युद्ध पर विजय प्राप्त की थी.
त्रेतायुग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण को युद्ध में पराजित कर उसका वध किया था, अतः इसे सत्य की असत्य पर विजय के रूप में मनाया जाता है.
इस तिथि पर शस्त्र पूजन, दशहरा उत्सव एवं रावण दहन की परंपरा प्रचलित है. देश में बस्तर एवं मैसूर का विशिष्ट दशहरा भी विख्यात है.
विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं 🙏
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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सनातन परंपरा में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पर विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहते हैं.
पौराणिक आख्यानों के अनुसार इसी तिथि पर माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और युद्ध पर विजय प्राप्त की थी.
त्रेतायुग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण को युद्ध में पराजित कर उसका वध किया था, अतः इसे सत्य की असत्य पर विजय के रूप में मनाया जाता है.
इस तिथि पर शस्त्र पूजन, दशहरा उत्सव एवं रावण दहन की परंपरा प्रचलित है. देश में बस्तर एवं मैसूर का विशिष्ट दशहरा भी विख्यात है.
विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं 🙏
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मुरिया दरबार - बस्तर में जन-संवाद का उत्सव
बस्तर दशहरे की पावन परंपरा में मुरिया दरबार का विशेष स्थान है. यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच संवाद का प्राचीन मंच है.
यहाँ दूरस्थ गाँवों से आए जनजातीय प्रतिनिधि, पुजारी और परगनों के मुखिया इकट्ठा होकर पहले राजा के समक्ष अपनी बात रखते थे, और अब राजा के साथ-साथ शासन-प्रशासन के समक्ष रखते हैं.
माँ दंतेश्वरी की छत्रछाया में होने वाला यह दरबार, बस्तर की जनजातीय संस्कृति और लोक-गौरव का जीवंत प्रतीक है.
यहाँ समाज के विषय रखे जाते हैं, परंपराएँ साझा होती हैं और समस्याओं के समाधान हेतु निर्णय भी लिए जाते हैं.
मुरिया दरबार इस बात का साक्षी है कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा केवल आधुनिक युग की देन नहीं, बल्कि पहले से ही हमारी परंपराओं में समाहित रही है.
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बस्तर दशहरे की पावन परंपरा में मुरिया दरबार का विशेष स्थान है. यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच संवाद का प्राचीन मंच है.
यहाँ दूरस्थ गाँवों से आए जनजातीय प्रतिनिधि, पुजारी और परगनों के मुखिया इकट्ठा होकर पहले राजा के समक्ष अपनी बात रखते थे, और अब राजा के साथ-साथ शासन-प्रशासन के समक्ष रखते हैं.
माँ दंतेश्वरी की छत्रछाया में होने वाला यह दरबार, बस्तर की जनजातीय संस्कृति और लोक-गौरव का जीवंत प्रतीक है.
यहाँ समाज के विषय रखे जाते हैं, परंपराएँ साझा होती हैं और समस्याओं के समाधान हेतु निर्णय भी लिए जाते हैं.
मुरिया दरबार इस बात का साक्षी है कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा केवल आधुनिक युग की देन नहीं, बल्कि पहले से ही हमारी परंपराओं में समाहित रही है.
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The Narrative
Communism - Maoism
> With leaders divided on surrender and armed struggle, does this rare rift signal collapse of Maoist terror, or another deceptive strategy for survival?
https://shorturl.at/irV8c
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Red Terrorism Splits? Recent Rift Exposes Cracks in the Red Fortress
With leaders divided on surrender and armed struggle, does this rare rift signal collapse of Maoist terror, or another deceptive strategy for survival?
*The Narrative*
Bharat - Positive Narrative
> How the Rashtriya Swayamsevak Sangh’s century long mission of individual and national transformation-built Bharat’s backbone.
https://shorturl.at/KmABR
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100 Years of Selfless Sacrifice: Sangh Continues to Contribute to Nation Building
How the Rashtriya Swayamsevak Sangh’s century long mission of individual and national transformation-built Bharat’s backbone.
The Narrative
कम्युनिज्म - माओवाद
> बीजापुर में नक्सलवाद को करारी चोट, 103 माओवादी आत्मसमर्पण कर हिंसा से दूर हुए, प्रशासन ने इसे विचारधारा की निर्णायक हार बताया।
https://shorturl.at/jf5sz
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कम्युनिज्म - माओवाद
> बीजापुर में नक्सलवाद को करारी चोट, 103 माओवादी आत्मसमर्पण कर हिंसा से दूर हुए, प्रशासन ने इसे विचारधारा की निर्णायक हार बताया।
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103 माओवादी हथियार डाल चुके, बीजापुर में आतंक की विचारधारा को करारा झटका
बीजापुर में नक्सलवाद को करारी चोट, 103 माओवादी आत्मसमर्पण कर हिंसा से दूर हुए, प्रशासन ने इसे विचारधारा की निर्णायक हार बताया।
लाचेन, सिक्किम 🏔️
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में से एक सिक्किम के उत्तरी क्षेत्र में अवस्थित पहाड़ी नगरी लाचेन पर्यटकों एवं रोमांच का अनुभव करने वालों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है.
लाचेन का अर्थ होता है 'बड़ा दर्रा'. यहां गर्मियों में हरियाली दिखाई देती है, वहीं शीत ऋतु में यह क्षेत्र हिमपात के कारण बर्फ से ढंक जाता है.
8800 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित लाचेन में एक बौद्ध मठ है, जो क्षेत्र में पर्यटन एवं आस्था का बड़ा केंद्र है.
यह पूरी पहाड़ी नगरी लाचेन आकर्षक घाटियों, ऊंचे पहाड़ियों, हिमालय की नैसर्गिक सुंदरता एवं मंत्रमुग्ध करने वाली झीलों से घिरी हुई है.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🇮🇳
The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में से एक सिक्किम के उत्तरी क्षेत्र में अवस्थित पहाड़ी नगरी लाचेन पर्यटकों एवं रोमांच का अनुभव करने वालों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है.
लाचेन का अर्थ होता है 'बड़ा दर्रा'. यहां गर्मियों में हरियाली दिखाई देती है, वहीं शीत ऋतु में यह क्षेत्र हिमपात के कारण बर्फ से ढंक जाता है.
8800 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित लाचेन में एक बौद्ध मठ है, जो क्षेत्र में पर्यटन एवं आस्था का बड़ा केंद्र है.
यह पूरी पहाड़ी नगरी लाचेन आकर्षक घाटियों, ऊंचे पहाड़ियों, हिमालय की नैसर्गिक सुंदरता एवं मंत्रमुग्ध करने वाली झीलों से घिरी हुई है.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🇮🇳
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The Narrative
कम्युनिज्म - माओवाद
> जनजातीय अधिकारों का नाम लेकर नक्सली फैलाते हैं आतंक, जबकि असलियत में उनका खेल धन, हिंसा और विदेशी गठजोड़ से जुड़ा हुआ है।
https://shorturl.at/WtQQ3
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कम्युनिज्म - माओवाद
> जनजातीय अधिकारों का नाम लेकर नक्सली फैलाते हैं आतंक, जबकि असलियत में उनका खेल धन, हिंसा और विदेशी गठजोड़ से जुड़ा हुआ है।
https://shorturl.at/WtQQ3
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नक्सलवाद का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: एक विस्तृत विश्लेषण
जनजातीय अधिकारों का नाम लेकर नक्सली फैलाते हैं आतंक, जबकि असलियत में उनका खेल धन, हिंसा और विदेशी गठजोड़ से जुड़ा हुआ है।
The Narrative
कम्युनिज़्म - माओवाद
> बस्तर में फिर माओवादी हिंसा का ख़ौफनाक चेहरा आया सामने। बौखलाए माओवादी कर रहे जनजातीय ग्रामीणों की निर्मम हत्या। पढ़िए नक्सलियों की वास्तविकता की पूरी कहानी, इस लेख में!
https://shorturl.at/xH0m9
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कम्युनिज़्म - माओवाद
> बस्तर में फिर माओवादी हिंसा का ख़ौफनाक चेहरा आया सामने। बौखलाए माओवादी कर रहे जनजातीय ग्रामीणों की निर्मम हत्या। पढ़िए नक्सलियों की वास्तविकता की पूरी कहानी, इस लेख में!
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बस्तर में नक्सली हिंसा: विचारधारा का खोखलापन और निर्दोषों का रक्त
बस्तर एक बार फिर नक्सली खूनखराबे से दहला है। बीजापुर और सुकमा जिलों में एक ही रात हुई दो हत्याओं ने जनजातीय समाज की पीड़ा को फिर उजागर कर दिया। माओवादी, जो खुद को जनता का रक्षक बताते हैं, वास्तव में निर्दोष ग्रामीणों के सबसे बड़े हत्यारे हैं।
The Narrative Graphical Report
From Iraq’s fake WMDs to conflicts in Syria and Libya, Western media has often served not as a watchdog, but as a weapon of power. Read The Narrative’s special graphical report.
> Deep State Narratives – When Western Media Becomes a Weapon
✒️ The Narrative
From Iraq’s fake WMDs to conflicts in Syria and Libya, Western media has often served not as a watchdog, but as a weapon of power. Read The Narrative’s special graphical report.
> Deep State Narratives – When Western Media Becomes a Weapon
✒️ The Narrative
वीरांगना रानी दुर्गावती जयंती
चतुरता, उन्नत युद्ध कौशल एवं वीरता से मुगल आक्रमणकारियों को तीन बार परास्त करने वाली वीरांगना का नाम है रानी दुर्गावती, जिनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 में हुआ था.
लंबी अवधि तक गोंडवाना राज्य की शासिका रहीं महारानी दुर्गावती ने अपने जीवनकाल में 52 युद्ध किए, जिनमें से 51 में उन्होंने विजय प्राप्त की.
माँ भारती एवं सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने आक्रमणकारियों से युद्ध लड़ा और युद्ध काल में वर्ष 1564 में उन्होंने आत्म बलिदान दे दिया.
चंदेलों की बेटी थी
गोंडवाने की रानी थी
चंडी थी, रणचंडी थी
वो दुर्गावती भवानी थी
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🇮🇳
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चतुरता, उन्नत युद्ध कौशल एवं वीरता से मुगल आक्रमणकारियों को तीन बार परास्त करने वाली वीरांगना का नाम है रानी दुर्गावती, जिनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 में हुआ था.
लंबी अवधि तक गोंडवाना राज्य की शासिका रहीं महारानी दुर्गावती ने अपने जीवनकाल में 52 युद्ध किए, जिनमें से 51 में उन्होंने विजय प्राप्त की.
माँ भारती एवं सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने आक्रमणकारियों से युद्ध लड़ा और युद्ध काल में वर्ष 1564 में उन्होंने आत्म बलिदान दे दिया.
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चंडी थी, रणचंडी थी
वो दुर्गावती भवानी थी
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