Video Story by The Narrative
> नक्सलवाद का अंत या नई शुरुआत ?
📍 क्या नक्सलवाद सच में खत्म हो रहा ?
📍 नक्सलियों की नई रणनीति!
📍 देखें पूरा वीडियो!
YouTube Link – https://youtu.be/Fg-8fW92IpE
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नक्सलवाद का अंत या नई शुरुआत? | The Narrative
क्या नक्सलवाद सच में खत्म हो रहा है… या भारत एक और खतरनाक शुरुआत के मुहाने पर खड़ा है? छत्तीसगढ़, आंध्रा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और उड़ीसा में लगातार हो रही मुठभेड़ और आत्मसमर्पण की घटनाओं ने माओवादी आतंक को उसके आखिरी दौर में ला दिया है, लेकिन शहरों में उठ…
विज्ञान भैरव तंत्र - चेतना के द्वार खोलने वाली दिव्य शिक्षा
कश्मीर के प्राचीन त्रिक शैव दर्शन का हृदय माने जाने वाले विज्ञान भैरव तंत्र में जीवन और चेतना को समझने के 112 अद्वितीय ध्यान-मार्ग बताए गए हैं.
यह ग्रंथ न किसी जटिल सिद्धांत पर आधारित है, न किसी बाहरी अनुष्ठान पर.
यह कहता है कि ईश्वर बाहर नहीं, हर श्वास, हर क्षण, हर अनुभव में है.
भैरव और भैरवी के संवाद के रूप में रचित यह ग्रंथ मनुष्य को भीतर की शक्ति से जोड़ता है.
🕉 श्वास की सरल गति,
🕉 मौन का विस्तार,
🕉 ध्वनि का कंपन,
🕉 भावना, ध्यान, प्रकाश, शून्यता,
इन सबको आध्यात्मिक साधना का द्वार माना गया है.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
The Narrative के अपडेट्स के लिए अपने नाम एवं स्थान के साथ 9589045439 पर व्हाट्सएप करें
कश्मीर के प्राचीन त्रिक शैव दर्शन का हृदय माने जाने वाले विज्ञान भैरव तंत्र में जीवन और चेतना को समझने के 112 अद्वितीय ध्यान-मार्ग बताए गए हैं.
यह ग्रंथ न किसी जटिल सिद्धांत पर आधारित है, न किसी बाहरी अनुष्ठान पर.
यह कहता है कि ईश्वर बाहर नहीं, हर श्वास, हर क्षण, हर अनुभव में है.
भैरव और भैरवी के संवाद के रूप में रचित यह ग्रंथ मनुष्य को भीतर की शक्ति से जोड़ता है.
🕉 श्वास की सरल गति,
🕉 मौन का विस्तार,
🕉 ध्वनि का कंपन,
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इन सबको आध्यात्मिक साधना का द्वार माना गया है.
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The Narrative
भारत - षड्यंत्र
> लश्कर और जैश के आतंकियों ने लोकतंत्र को दहलाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों के अदम्य साहस ने उनकी खौफनाक साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। पढ़िए पूरी कहानी!
https://shorturl.at/ItiSh
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भारत - षड्यंत्र
> लश्कर और जैश के आतंकियों ने लोकतंत्र को दहलाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों के अदम्य साहस ने उनकी खौफनाक साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। पढ़िए पूरी कहानी!
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Parliament Attack 2001: 24वीं बरसी पर देश का नमन, जब वीरों ने जान देकर बचाई थी लोकतंत्र की अस्मिता
लश्कर और जैश के आतंकियों ने लोकतंत्र को दहलाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों के अदम्य साहस ने उनकी खौफनाक साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया।
> धुरंधर फिल्म ने आते ही वह सच दिखा दिया है जिसे वर्षों तक दबाकर रखा गया। इस फिल्म ने पाकिस्तान, आईएसआई, अंडरवर्ल्ड और भारत में बैठे “भारत विरोधी” इकोसिस्टम की असलियत उजागर कर दी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
https://shorturl.at/MPi6f
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सच सामने आते ही बौखलाया "भारत विरोधी" गैंग!
धुरंधर फिल्म ने आते ही वह सच दिखा दिया है जिसे वर्षों तक दबाकर रखा गया। 5 दिन में 200 करोड़ कमाने वाली इस फिल्म ने पाकिस्तान, आईएसआई, अंडरवर्ल्ड और भारत में बैठे “भारत विरोधी” इकोसिस्टम की असलियत उजागर कर दी है।
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Communism - Maoism
> How did Madhya Pradesh truly become Naxal-free? Which operational strike and which major revelation broke the back of the Maoists? You will be astonished to read the full truth. Read the inside story!
https://shorturl.at/Nm4t2
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Madhya Pradesh Declares Victory Over Armed Maoism, But the Lessons Remain Stark
The three-decade-long Naxalite crisis in Madhya Pradesh has finally come to an end. Following the surrender of two notorious Maoist commanders in Balaghat, the state declared itself "Naxal-free." This achievement marks not only a victory for the security…
Short Video Story by The Narrative
> कर्नाटक का नया Hate Speech Bill 2025 - क्या सामान्य राय भी अपराध मानी जाएगी!
📍 कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति!
📍 क्या 'सर तन से जुदा' पर होगी कार्रवाई ?
📍 देखें पूरा वीडियो!
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> कर्नाटक का नया Hate Speech Bill 2025 - क्या सामान्य राय भी अपराध मानी जाएगी!
📍 कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति!
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कर्नाटक का नया Hate Speech Bill 2025 | क्या सामान्य राय भी अपराध मानी जाएगी? | The Narrative
कर्नाटक में प्रस्तावित बिल पर यह वीडियो दिखाता है कि Hate Speech & Hate Crimes Bill 2025 सामान्य राय, धार्मिक आयोजनों और डिजिटल अभिव्यक्ति को कैसे प्रभावित क...
गवरी महोत्सव - जनजातीय आस्था का लोक पर्व
राजस्थान के मेवाड़ अंचल में भील जनजातीय समाज द्वारा मनाया जाने वाला गवरी महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि 40 तक चलने वाली आध्यात्मिक साधना है.
यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की लोक पारंपरिक कथा, प्रकृति पूजन और सामाजिक चेतना से जुड़ा है.
गवरी में पात्र मुखौटे धारण कर नृत्य-नाट्य के माध्यम से धर्म, अधर्म, न्याय और अन्याय की कथाएँ प्रस्तुत करते हैं.
इन प्रस्तुतियों में कोई मंच नहीं होता, पूरा गाँव ही रंगमंच बन जाता है. गवरी खेलने वाले भोपा कठोर संयम, नियम और पवित्रता का पालन करते हैं.
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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राजस्थान के मेवाड़ अंचल में भील जनजातीय समाज द्वारा मनाया जाने वाला गवरी महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि 40 तक चलने वाली आध्यात्मिक साधना है.
यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की लोक पारंपरिक कथा, प्रकृति पूजन और सामाजिक चेतना से जुड़ा है.
गवरी में पात्र मुखौटे धारण कर नृत्य-नाट्य के माध्यम से धर्म, अधर्म, न्याय और अन्याय की कथाएँ प्रस्तुत करते हैं.
इन प्रस्तुतियों में कोई मंच नहीं होता, पूरा गाँव ही रंगमंच बन जाता है. गवरी खेलने वाले भोपा कठोर संयम, नियम और पवित्रता का पालन करते हैं.
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गोल्ज्यू देवता, उत्तराखंड ⛰️
उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में पूजित गोल्ज्यू देवता को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है.
लोकमान्यताओं के अनुसार गोल्ज्यू देवता, भगवान शिव के अवतार हैं, जो सफेद घोड़े पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करते हैं.
न्यायप्रियता और निष्पक्षता के कारण इन्हें न्याय देवता भी कहा जाता है.
आज भी कुमाऊँ के गाँवों में जब किसी को अन्याय सहना पड़ता है तो लोग न्यायालय नहीं, बल्कि गोल्ज्यू देवता के दरबार में प्रार्थना लगाते हैं.
भक्तगण कपड़े पर अपनी प्रार्थना लिखकर उनके मंदिर में टाँगते हैं, और विश्वास करते हैं कि देवता अवश्य न्याय देंगे.
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उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में पूजित गोल्ज्यू देवता को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है.
लोकमान्यताओं के अनुसार गोल्ज्यू देवता, भगवान शिव के अवतार हैं, जो सफेद घोड़े पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करते हैं.
न्यायप्रियता और निष्पक्षता के कारण इन्हें न्याय देवता भी कहा जाता है.
आज भी कुमाऊँ के गाँवों में जब किसी को अन्याय सहना पड़ता है तो लोग न्यायालय नहीं, बल्कि गोल्ज्यू देवता के दरबार में प्रार्थना लगाते हैं.
भक्तगण कपड़े पर अपनी प्रार्थना लिखकर उनके मंदिर में टाँगते हैं, और विश्वास करते हैं कि देवता अवश्य न्याय देंगे.
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जनजातीय विषय - षड्यंत्र
> विदेशी फंडिंग कैसे जनजातीय क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदल रही है ? शेल NGOs एवं डिजिटल प्रचार की सीक्रेट कहानी पहली बार सबके सामने! पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
https://shorturl.at/m9PWv
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विदेशी फंडिंग कैसे बदल रही है भारत की जनजातीय जनसांख्यिकी
भारत के जनजातीय क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के पीछे विदेशी फंडिंग, शेल NGOs और डिजिटल प्रचार की एक संगठित श्रृंखला काम कर रही है। रिलीजियस नेटवर्क किस तरह विकास योजनाओं की आड़ में वैचारिक पकड़ बढ़ाते हैं और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करते हैं?…
काशी की पंचकोशी परिक्रमा - मोक्ष की पदयात्रा
काशी केवल नगर नहीं, जीवात्मा से परमात्मा तक की यात्रा है.
यहां पंचकोशी परिक्रमा एक 5 कोस (लगभग 15 किमी) लंबी दिव्य यात्रा है, जो अंतःकरण की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम मानी जाती है.
श्रद्धालु जन नंगे पाँव इस परिक्रमा में निकलते हैं, पांच मुख्य स्थानों पर रुकते हैं. मणिकर्णिका, कर्णेश्वर, भीमचंडी, रति-करणी और कपिलधारा.
ऐसी आस्था है जो श्रद्धा से पंचकोशी यात्रा करता है, उसे वाराणसी में मोक्ष पुण्य प्राप्त होता है.
यह परिक्रमा नहीं, आत्मा की वापसी है उस शिव में, जिससे वह निकली थी.
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काशी केवल नगर नहीं, जीवात्मा से परमात्मा तक की यात्रा है.
यहां पंचकोशी परिक्रमा एक 5 कोस (लगभग 15 किमी) लंबी दिव्य यात्रा है, जो अंतःकरण की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम मानी जाती है.
श्रद्धालु जन नंगे पाँव इस परिक्रमा में निकलते हैं, पांच मुख्य स्थानों पर रुकते हैं. मणिकर्णिका, कर्णेश्वर, भीमचंडी, रति-करणी और कपिलधारा.
ऐसी आस्था है जो श्रद्धा से पंचकोशी यात्रा करता है, उसे वाराणसी में मोक्ष पुण्य प्राप्त होता है.
यह परिक्रमा नहीं, आत्मा की वापसी है उस शिव में, जिससे वह निकली थी.
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ग्लोबल नैरेटिव - विश्व
> 16 मौतें और दर्जनों घायल इस सच की गवाही हैं कि इस्लामिक आतंकवाद किसी उम्र, समुदाय या इंसानियत की सीमाएं नहीं मानता। पढ़िए पूरा विश्लेषण।
https://shorturl.at/6liF2
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ग्लोबल नैरेटिव - विश्व
> 16 मौतें और दर्जनों घायल इस सच की गवाही हैं कि इस्लामिक आतंकवाद किसी उम्र, समुदाय या इंसानियत की सीमाएं नहीं मानता। पढ़िए पूरा विश्लेषण।
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बच्चों से बुज़ुर्गों तक पर गोलियां, सिडनी हमला इस्लामिक कट्टरता की अमानवीय सोच का आईना
16 मौतें और दर्जनों घायल इस सच की गवाही हैं कि इस्लामिक आतंकवाद किसी उम्र, समुदाय या इंसानियत की सीमाएं नहीं मानता।