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भोजपत्र–हिमालय कि छाल में सुरक्षित ज्ञान की परम्परा🧾🚩
भोजपत्र हिमालय में पाए जाने वाले भोज वृक्ष (Betula Utilis) की छाल है, जिस पर प्राचीन भारत में ग्रन्थ लिखे जाते थे।
कागज के प्रचनल से पूर्व यही वह माध्यम था, जिस पर वेद, उपनिषद्, तंत्र और अनेक शास्त्र सुरक्षित रखे गए।
इसकी विशेषता यह है कि यह छाल पतली मजबूत और दीर्घकाल तक सुरक्षित रहने वाली होती है। ऋषि मुनियों ने इसी पर अपने ज्ञान को अंकित कर आने वाली पढ़ियों तक पहुंचाया।
भोजपत्र केवल एक लेखन सामग्री नहीं, बल्कि वह माध्यम है जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को शास्त्राब्दियों तक जीवित रखा।
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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भोजपत्र हिमालय में पाए जाने वाले भोज वृक्ष (Betula Utilis) की छाल है, जिस पर प्राचीन भारत में ग्रन्थ लिखे जाते थे।
कागज के प्रचनल से पूर्व यही वह माध्यम था, जिस पर वेद, उपनिषद्, तंत्र और अनेक शास्त्र सुरक्षित रखे गए।
इसकी विशेषता यह है कि यह छाल पतली मजबूत और दीर्घकाल तक सुरक्षित रहने वाली होती है। ऋषि मुनियों ने इसी पर अपने ज्ञान को अंकित कर आने वाली पढ़ियों तक पहुंचाया।
भोजपत्र केवल एक लेखन सामग्री नहीं, बल्कि वह माध्यम है जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को शास्त्राब्दियों तक जीवित रखा।
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The Narrative
Communism - Maoism
> With the Red Corridor dismantled, Vanvasi communities across multiple states emerge from decades of violence into stability and opportunity.
https://shorturl.at/ywSLE
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Communism - Maoism
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The End of Naxalism: Vanvasi of Bharat Liberated from Maoist Tyranny
Decades of Maoist coercion end as tribal regions transition from terror zones to centres of development and local empowerment.
*The Narrative*
भारत - कानून
> क्या विदेशी फंडिंग के जरिए चलने वाले वैचारिक और राजनीतिक प्रभाव के साथ कन्वर्जन नेटवर्क पर लगाम की आशंका ही इस पूरे विवाद और विरोध का असली कारण है?
https://shorturl.at/EqnNO
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भारत - कानून
> क्या विदेशी फंडिंग के जरिए चलने वाले वैचारिक और राजनीतिक प्रभाव के साथ कन्वर्जन नेटवर्क पर लगाम की आशंका ही इस पूरे विवाद और विरोध का असली कारण है?
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FCRA Amendment Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर सख्ती से घबराया विपक्ष?
क्या विदेशी फंडिंग के जरिए चलने वाले वैचारिक और राजनीतिक प्रभाव के साथ कन्वर्जन नेटवर्क पर लगाम की आशंका ही इस पूरे विवाद और विरोध का असली कारण है?
Short Video Story by The Narrative
> नक्सलवाद का सच जिसे आपसे छुपाया गया
📍 "क्रांति" के नाम पर फैली दहशत
📍 मासूमों को कैसे बनाया गया हथियार?
📍 अब कैसे बदल रही है ज़मीन की हकीकत?
YouTube Link - https://youtube.com/shorts/A2an_F71ji8
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नक्सलवाद का सच जिसे आपसे छुपाया गया | Naxalism | The Narrative
नक्सलवाद की असलियत क्या है? जानिए कैसे एक विचारधारा ने हिंसा को जन्म दिया, आम लोगों को प्रभावित किया और वर्षों तक सच्चाई छुपाई गई। अब समय है पूरे सच को समझने...
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केरल का प्रसिद्ध कोलम
आकर्षक समुद्री तटों और प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा कोलम भी दक्षिण भारत की एक विशेष पहचान है.
कोलम एक प्रकार की रंगोली है जो चांवल के आटे, फूलों और पत्तों से बनाई जाती है.
कोलम का उपयोग शुभ अवसरों, जैसे त्योहारों और उत्सवों पर घरों को सजाने के लिए किया जाता है.
ओणम के अवसर पर संपूर्ण भारत में भी कोलम बनाया जाता है जो हमारी विविधता में निहित एक्य के भाव को दर्शाता है.
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आकर्षक समुद्री तटों और प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा कोलम भी दक्षिण भारत की एक विशेष पहचान है.
कोलम एक प्रकार की रंगोली है जो चांवल के आटे, फूलों और पत्तों से बनाई जाती है.
कोलम का उपयोग शुभ अवसरों, जैसे त्योहारों और उत्सवों पर घरों को सजाने के लिए किया जाता है.
ओणम के अवसर पर संपूर्ण भारत में भी कोलम बनाया जाता है जो हमारी विविधता में निहित एक्य के भाव को दर्शाता है.
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The Narrative
कम्युनिज़्म - माओवाद
> क्या माओवादी खुद मजबूत हुए थे या कांग्रेस सरकार कमजोर हुई थी? रेड कॉरिडोर तक की सच्चाई जानिए! कैसे तत्कालीन सरकार की नीतियों की चूक ने हिंसा को बढ़ाया। पढ़िए पूरी कहानी!
https://bit.ly/4dpgRZy
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कम्युनिज़्म - माओवाद
> क्या माओवादी खुद मजबूत हुए थे या कांग्रेस सरकार कमजोर हुई थी? रेड कॉरिडोर तक की सच्चाई जानिए! कैसे तत्कालीन सरकार की नीतियों की चूक ने हिंसा को बढ़ाया। पढ़िए पूरी कहानी!
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लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 2: जब राज्य कमजोर पड़ा और हिंसा बढ़ी
माओवादी हिंसा का विस्तार केवल उनकी रणनीति का परिणाम नहीं था, बल्कि उस दौर की नीतिगत अस्पष्टता और कमजोर राज्य उपस्थिति का भी असर था। बस्तर से लेकर रेड कॉरिडोर तक, कई क्षेत्रों में समानांतर नियंत्रण स्थापित हुआ।
The Narrative
Bharat - Positive Narrative
> Structured rehabilitation initiatives are turning former Maoists into wage earners, reducing violence while strengthening trust in governance and public institutions.
https://shorturl.at/YeqK1
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Bharat - Positive Narrative
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How Surrendered Naxals Are Being Reintegrated into Bharat's Development Story
Structured rehabilitation initiatives are turning former Maoists into wage earners, reducing violence while strengthening trust in governance and public institutions.
The Narrative
कम्युनिज्म - माओवाद
> मनीष कुंजाम ने बस्तर में नक्सलियों के कथित जन आंदोलन को कॉरपोरेट वसूली के संगठित तंत्र के रूप में पेश किया।
https://shorturl.at/wihCI
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कम्युनिज्म - माओवाद
> मनीष कुंजाम ने बस्तर में नक्सलियों के कथित जन आंदोलन को कॉरपोरेट वसूली के संगठित तंत्र के रूप में पेश किया।
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माओवाद की आड़ में फल-फूल रहा था कॉरपोरेट वसूली का खेल
मनीष कुंजाम ने बस्तर में नक्सलियों के कथित जन आंदोलन को कॉरपोरेट वसूली के संगठित तंत्र के रूप में पेश किया।
Short Video Story by The Narrative
> FCRA Amendment Bill 2026: क्या विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैला रहा है?
📍 डर या सिर्फ राजनीति?
📍 सच क्या है और भ्रम क्या?
📍 अभी देखें पूरा विडियो!
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> FCRA Amendment Bill 2026: क्या विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैला रहा है?
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FCRA Amendment Bill 2026 | क्या विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैला रहा है? | जानिए पूरा सच | The Narrative
FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर फैले विवाद और दावों की सच्चाई जानिए। क्या यह बिल वाकई खतरनाक है या सिर्फ राजनीतिक भ्रम? समझिए पारदर्शिता, जवाबदेही और विदेशी...
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उदयपुर सोलर वेधशाला - झील के मध्य सूर्य-अध्ययन
राजस्थान के उदयपुर में झील के बीच एक छोटे द्वीप पर स्थित उदयपुर सोलर वेधशाला (Udaipur Solar Observatory – USO) भारत के प्रमुख सूर्य-अनुसंधान केंद्रों में से एक है.
इसका निर्माण वर्ष 1976 में किया गया था, और इसे डॉ. अरविंद भटनागर ने कैलिफोर्निया की बिग बेयर लेक सोलर वेधशाला की भांति विकसित किया.
झील के बीच होने के कारण यहाँ भूमि की गर्मी से बनने वाली वायु उथल-पुथल कम होती है, जिससे सूर्य की छवि अधिक स्पष्ट मिलती है.
इस केंद्र में 50 सेमी मल्टी-एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप (MAST) और GONG जैसे उपकरणों के माध्यम से सूर्य के धब्बे, ज्वालाएँ और सौर गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है.
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राजस्थान के उदयपुर में झील के बीच एक छोटे द्वीप पर स्थित उदयपुर सोलर वेधशाला (Udaipur Solar Observatory – USO) भारत के प्रमुख सूर्य-अनुसंधान केंद्रों में से एक है.
इसका निर्माण वर्ष 1976 में किया गया था, और इसे डॉ. अरविंद भटनागर ने कैलिफोर्निया की बिग बेयर लेक सोलर वेधशाला की भांति विकसित किया.
झील के बीच होने के कारण यहाँ भूमि की गर्मी से बनने वाली वायु उथल-पुथल कम होती है, जिससे सूर्य की छवि अधिक स्पष्ट मिलती है.
इस केंद्र में 50 सेमी मल्टी-एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप (MAST) और GONG जैसे उपकरणों के माध्यम से सूर्य के धब्बे, ज्वालाएँ और सौर गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है.
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The Narrative
जनजातीय विषय - षड्यंत्र
> 2011 में अरुणाचल में क्या चल रहा था? कैसे खुलेआम सक्रिय थे कन्वर्ज़न नेटवर्क और क्यों रही सरकार खामोश? अब 2026 में अचानक क्या बदल गया—पूरी सच्चाई जानिए इस रिपोर्ट में!
https://bit.ly/3PHiuYI
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जनजातीय विषय - षड्यंत्र
> 2011 में अरुणाचल में क्या चल रहा था? कैसे खुलेआम सक्रिय थे कन्वर्ज़न नेटवर्क और क्यों रही सरकार खामोश? अब 2026 में अचानक क्या बदल गया—पूरी सच्चाई जानिए इस रिपोर्ट में!
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अरुणाचल का सच: 2011 में कैसे ‘कन्वर्ज़न नेटवर्क’ ने जकड़ी जड़ें और आज कैसे बदल रही है तस्वीर
अरुणाचल प्रदेश में 2011 के दौर में कन्वर्ज़न से जुड़ी गतिविधियों और प्रशासनिक निष्क्रियता ने गंभीर सामाजिक-सांस्कृतिक संकट पैदा किया। एक दशक बाद, 2026 में कानून, न्यायिक हस्तक्षेप और जनजातीय चेतना के चलते स्थिति बदलती दिख रही है।
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कम्युनिज्म - माओवाद
> जीवनभर हिंसा फैलाने वाला बोस अंत में धार्मिक ग्रंथों में डूबा रहा, परिवार ने शव लेने से किया इनकार और प्रशासन ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व।
https://shorturl.at/q9Mvk
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कम्युनिज्म - माओवाद
> जीवनभर हिंसा फैलाने वाला बोस अंत में धार्मिक ग्रंथों में डूबा रहा, परिवार ने शव लेने से किया इनकार और प्रशासन ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व।
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खूंखार नक्सली प्रशांत बोस का अंत, परिवार ने अंतिम संस्कार से किया इनकार, प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी
जीवनभर हिंसा फैलाने वाला बोस अंत में धार्मिक ग्रंथों में डूबा रहा, परिवार ने शव लेने से किया इनकार और प्रशासन ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व।
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कम्युनिज्म - माओवाद
> सर्च ऑपरेशन से लौटते जवानों पर घात लगाकर हमला, ताड़मेटला ने दिखाया माओवाद की कायर रणनीति और खून से सनी सच्चाई।
https://shorturl.at/uihoi
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कम्युनिज्म - माओवाद
> सर्च ऑपरेशन से लौटते जवानों पर घात लगाकर हमला, ताड़मेटला ने दिखाया माओवाद की कायर रणनीति और खून से सनी सच्चाई।
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ताड़मेटला नरसंहार: माओवाद के खिलाफ 76 वीरों का बलिदान, जिसे इतिहास कभी नहीं भूलेगा
सर्च ऑपरेशन से लौटते जवानों पर घात लगाकर हमला, ताड़मेटला ने दिखाया माओवाद की कायर रणनीति और खून से सनी सच्चाई।
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सतखंडा महल, दतिया
मध्यप्रदेश के ग्वालियर से लगे दतिया में अवस्थित है सतखंडा महल, जिसे बीर सिंहदेव महल और गोविंद महल भी कहा जाता है.
दतिया साम्राज्य के संस्थापक महाराज बीर सिंह देव द्वारा 17वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में निर्मित यह महल वर्तमान में वीरान स्थिति में है.
यह महल 7 तलों का है, जिसमें 2 तल भूमि के नीचे हैं, वहीं 5 तल ऊपर हैं, इसीलिए इसे सतखंडा महल कहा जाता है.
राजा बीर सिंह देव द्वारा निर्मित 52 महलों में सबसे चर्चित एवं भव्य यही महल रहा है, जिसे देखने वर्तमान समय में भी बड़ी संख्या में पर्यटक दतिया आते हैं.
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मध्यप्रदेश के ग्वालियर से लगे दतिया में अवस्थित है सतखंडा महल, जिसे बीर सिंहदेव महल और गोविंद महल भी कहा जाता है.
दतिया साम्राज्य के संस्थापक महाराज बीर सिंह देव द्वारा 17वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में निर्मित यह महल वर्तमान में वीरान स्थिति में है.
यह महल 7 तलों का है, जिसमें 2 तल भूमि के नीचे हैं, वहीं 5 तल ऊपर हैं, इसीलिए इसे सतखंडा महल कहा जाता है.
राजा बीर सिंह देव द्वारा निर्मित 52 महलों में सबसे चर्चित एवं भव्य यही महल रहा है, जिसे देखने वर्तमान समय में भी बड़ी संख्या में पर्यटक दतिया आते हैं.
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कम्युनिज़्म - माओवाद
> क्या माओवाद सिर्फ जंगलों तक सीमित था? शहरों में छिपे नेटवर्क की सच्चाई जानिए; कैसे विचार, संसाधन और रणनीति ने इस हिंसा को फैलाया। पढ़िए पूरा सच!
https://bit.ly/41DWsZw
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> क्या माओवाद सिर्फ जंगलों तक सीमित था? शहरों में छिपे नेटवर्क की सच्चाई जानिए; कैसे विचार, संसाधन और रणनीति ने इस हिंसा को फैलाया। पढ़िए पूरा सच!
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लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 3: जंगल से शहर तक का नेटवर्क
माओवादी हिंसा केवल जंगलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसका एक जटिल शहरी नेटवर्क भी सक्रिय था, जो इसे वैचारिक, संसाधनात्मक और संरचनात्मक समर्थन देता था। यह समझना आवश्यक है कि कैसे शहरों में विकसित यह नेटवर्क पूरे संघर्ष को व्यापक स्वरूप देता रहा।
🚨 बीजापुर बना नक्सलमुक्ति का मॉडल!
2 साल में 300 ऑपरेशन...नक्सल नेटवर्क की पूरी कमर तोड़ी
234 नक्सली ढेर हुए
1000+ कैडर ने किया सरेंडर
लेण्ड्रा-कोरचोली ऑपरेशन के बाद आया निर्णायक मोड़
लगातार ऑपरेशन से माओवादी संगठन हुआ कमजोर
बड़े कैडर खत्म, नेटवर्क बिखर चुका
बीजापुर में लाल आतंक ढहा… अब विकास का दौर तेज!
#BreakingNews #Bijapur #Bastar #NaxalFree #AntiNaxalOps #IndiaFightsBack #Chhattisgarh
2 साल में 300 ऑपरेशन...नक्सल नेटवर्क की पूरी कमर तोड़ी
234 नक्सली ढेर हुए
1000+ कैडर ने किया सरेंडर
लेण्ड्रा-कोरचोली ऑपरेशन के बाद आया निर्णायक मोड़
लगातार ऑपरेशन से माओवादी संगठन हुआ कमजोर
बड़े कैडर खत्म, नेटवर्क बिखर चुका
बीजापुर में लाल आतंक ढहा… अब विकास का दौर तेज!
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The Narrative
कम्युनिज्म - माओवाद
> कभी भय और हिंसा से संचालित नक्सली तंत्र अब लगभग खत्म हो चुका है, सुरक्षा अभियानों के साथ विकास कार्यों ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
https://shorturl.at/s4eNV
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कम्युनिज्म - माओवाद
> कभी भय और हिंसा से संचालित नक्सली तंत्र अब लगभग खत्म हो चुका है, सुरक्षा अभियानों के साथ विकास कार्यों ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
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नक्सलबाड़ी से दंडकारण्य तक फैले लाल आतंक का पतन, लोकतंत्र और विकास की ऐतिहासिक वापसी
कभी भय और हिंसा से संचालित नक्सली तंत्र अब लगभग खत्म हो चुका है, सुरक्षा अभियानों के साथ विकास कार्यों ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
Short Video Story by The Narrative
> नक्सलवाद: जन आंदोलन का मुखौटा | रेड कॉरिडोर का काला सच
📍 माओ का "पीपुल्स वॉर" मॉडल
📍 हिंसा से खौफ और नियंत्रण
📍 कमजोर इलाकों को बनाया आधार
YouTube Link - https://youtube.com/shorts/MEyb1Ide4P0
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नक्सलवाद: जन आंदोलन का मुखौटा | रेड कॉरिडोर का काला सच | Naxalism | The Narrative
क्या माओवादी हिंसा सच में जन आंदोलन थी या एक सोची समझी रणनीति? इस वीडियो में जानिए रेड कॉरिडोर की सच्चाई, विचारधारा, संगठन और हिंसा के पीछे की पूरी कहानी और ...
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कुमार भास्कर वर्मा सेतु - ब्रह्मपुत्र पर आधुनिक भारत का सेतुबंध 🌉
गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु पूर्वोत्तर भारत की आधारभूत संरचना का नया अध्याय है.
फरवरी, 2026 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया गया है.
यह सेतु गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी को जोड़ता है, जिससे पहले लगभग एक घंटे की दूरी अब केवल 7 से 10 मिनट में पूरी होती है.
यह पूर्वोत्तर भारत का पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड पुल है. इसकी मुख्य लंबाई लगभग 1.24 किलोमीटर है और यह 8.4 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग का हिस्सा है.
यह सेतु 7वीं शताब्दी के कामरूप नरेश कुमार भास्कर वर्मा के सम्मान में नामित है. यह पुल कामाख्या धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए नई सुविधा लेकर आया है.
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गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु पूर्वोत्तर भारत की आधारभूत संरचना का नया अध्याय है.
फरवरी, 2026 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया गया है.
यह सेतु गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी को जोड़ता है, जिससे पहले लगभग एक घंटे की दूरी अब केवल 7 से 10 मिनट में पूरी होती है.
यह पूर्वोत्तर भारत का पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड पुल है. इसकी मुख्य लंबाई लगभग 1.24 किलोमीटर है और यह 8.4 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग का हिस्सा है.
यह सेतु 7वीं शताब्दी के कामरूप नरेश कुमार भास्कर वर्मा के सम्मान में नामित है. यह पुल कामाख्या धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए नई सुविधा लेकर आया है.
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The Narrative
भारत - आंतरिक सुरक्षा
> UPA काल में देश के भीतर क्या चल रहा था? नक्सलवाद, आतंक और सुरक्षा की बड़ी चूकें! जानिए कैसे भारत अंदर से कमजोर हो रहा था.
https://bit.ly/4tlHjYL
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भारत - आंतरिक सुरक्षा
> UPA काल में देश के भीतर क्या चल रहा था? नक्सलवाद, आतंक और सुरक्षा की बड़ी चूकें! जानिए कैसे भारत अंदर से कमजोर हो रहा था.
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जब भीतर से कमजोर हो रहा था भारत: कांग्रेस दौर में आंतरिक सुरक्षा की सच्चाई
UPA शासनकाल के दौरान भारत की आंतरिक सुरक्षा किन चुनौतियों से घिरी थी, यह सवाल आज भी प्रासंगिक है। नक्सलवाद का विस्तार, आतंकवादी हमले और नीतिगत कमजोरियां उस दौर की बड़ी वास्तविकताएं थीं।