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श्री राम जन्मभूमि मंदिर (अयोध्याजी, उत्तरप्रदेश)
सनातन धर्मावलंबियों के लिए 5 अगस्त की तिथि बेहद ऐतिहासिक है. इसी तिथि पर वर्ष 2020 में पावन अयोध्या नगरी में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन किया गया थ.
हिंदु गणना के अनुसार भूमि पूजन अभिजीत मुहूर्त में किया गया था, धर्म ग्रंथो में इसी मुहूर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्म का वर्णन मिलता है.
शताब्दियों के लंबे संघर्ष के उपरांत बने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को बेहद भव्य स्वरूप दिया गया है, जहां लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किया है.
मेरी संस्कृति….मेरा देश….मेरा अभिमान 🚩
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सनातन धर्मावलंबियों के लिए 5 अगस्त की तिथि बेहद ऐतिहासिक है. इसी तिथि पर वर्ष 2020 में पावन अयोध्या नगरी में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन किया गया थ.
हिंदु गणना के अनुसार भूमि पूजन अभिजीत मुहूर्त में किया गया था, धर्म ग्रंथो में इसी मुहूर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्म का वर्णन मिलता है.
शताब्दियों के लंबे संघर्ष के उपरांत बने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को बेहद भव्य स्वरूप दिया गया है, जहां लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किया है.
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The Narrative
भारत - षड्यंत्र
> क्या मिज़ोरम के चर्चों का विरोध धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की चिंता है, या विदेशी फंडिंग पर बढ़ती सरकारी निगरानी के खिलाफ प्रतिक्रिया? पढ़ें पूरी रिपोर्ट!
https://shorturl.at/taMiB
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मिज़ोरम के चर्चों का प्रस्तावित FCRA अमेंडमेंट बिल के खिलाफ विरोध: संवैधानिक अधिकार, संघीय चिंताएँ और राष्ट्रीय बहस
क्या मिज़ोरम के चर्चों का विरोध धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की चिंता है, या विदेशी फंडिंग पर बढ़ती सरकारी निगरानी के खिलाफ प्रतिक्रिया?
The Narrative Graphical Handbook
विश्वभर में प्रदर्शनों के माध्यम से लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से हटाने का प्रयास किया जा चुका है. सर्बिया से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक! क्या ऐसा ही प्रयास भारत में हो रहा है? तथ्यों और ग्राफिक्स के माध्यम से समझिए द नैरेटिव की विशेष रिपोर्ट में!
> The Colour Revolution Project in India
✒️ The Narrative
विश्वभर में प्रदर्शनों के माध्यम से लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से हटाने का प्रयास किया जा चुका है. सर्बिया से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक! क्या ऐसा ही प्रयास भारत में हो रहा है? तथ्यों और ग्राफिक्स के माध्यम से समझिए द नैरेटिव की विशेष रिपोर्ट में!
> The Colour Revolution Project in India
✒️ The Narrative
Video Story by The Narrative
> CJP : जंतर-मंतर में क्रांति, झारखंड में शांति ?
📍दिल्ली में आंदोलन!
📍झारखंड में खामोशी?
📍छात्रहित या चुनिंदा सक्रियता?
YouTube Link - https://youtu.be/5MUHOL0TLNU
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> CJP : जंतर-मंतर में क्रांति, झारखंड में शांति ?
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CJP : जंतर-मंतर में क्रांति, झारखंड में शांति ?
बीमारी के बावजूद जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन में सक्रियता नज़र आई, लेकिन रांची के छात्रों की पुकार पर प्रतिक्रिया केवल “कोशिश करेंगे” तक सीमित रह गई। क्या यह स्वास्थ्य संबंधी मजबूरी थी या अलग-अलग आंदोलन और सरकारों के प्रति चुनिंदा रवैया?
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उमानंद द्वीप - विश्व का सबसे छोटा नदी द्वीप
उत्तरपूर्व के प्रवेशद्वार गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना उमानंद द्वीप विश्व में किसी भी नदी पर बना सबसे छोटा द्वीप है. इस द्वीप का नाम उमानंद माँ पार्वती के उमा नाम से प्रेरित है.
पौराणिक इतिहास के अनुसार भगवान शिव ने इसी द्वीप में अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया था. इसी कारण इस द्वीप को भस्माचल भी कहा जाता है. कालिका पुराण में इसका उल्लेख मिलता है.
इस द्वीप में भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जो उमानंद मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. यह मंदिर वैष्णव एवं शैव मत के मिलन के रूप में भी प्रख्यात है.
उमानंद द्वीप में प्रतिवर्ष श्रावण मास उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं. इस द्वीप की प्राकृतिक सुंदरता एवं इसकी विशिष्ट भौगोलिकता को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं.
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उत्तरपूर्व के प्रवेशद्वार गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना उमानंद द्वीप विश्व में किसी भी नदी पर बना सबसे छोटा द्वीप है. इस द्वीप का नाम उमानंद माँ पार्वती के उमा नाम से प्रेरित है.
पौराणिक इतिहास के अनुसार भगवान शिव ने इसी द्वीप में अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया था. इसी कारण इस द्वीप को भस्माचल भी कहा जाता है. कालिका पुराण में इसका उल्लेख मिलता है.
इस द्वीप में भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जो उमानंद मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. यह मंदिर वैष्णव एवं शैव मत के मिलन के रूप में भी प्रख्यात है.
उमानंद द्वीप में प्रतिवर्ष श्रावण मास उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं. इस द्वीप की प्राकृतिक सुंदरता एवं इसकी विशिष्ट भौगोलिकता को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं.
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The Narrative
Narrative Exclusive - Positive Narrative
> Once gripped by Maoist threats and enforced shutdowns, Bastar is now witnessing the steady return of security, mobility and everyday life. Read the full story.
https://shorturl.at/fDV1a
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Shaheedi Saptah Fades as a New Bastar Emerges!
Once gripped by Maoist threats and enforced shutdowns, Bastar is now witnessing the steady return of security, mobility and everyday life.
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Bharat - Conspiracy
> How did missionary-led education and mass conversions transform Naga society, and what was lost as Christianity gradually replaced indigenous faith and customs?
https://tinyurl.com/bdw3hwjt
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The Christianisation of Nagaland
How did missionary-led education and mass conversions transform Naga society, and what was lost as Christianity gradually replaced indigenous faith and customs?
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श्रावण विशेष: शिव और नंदी 🚩
शिवालयों में शिवलिंग के सम्मुख विराजमान नंदी केवल उनका वाहन नहीं, बल्कि अटूट भक्ति, सेवा और पूर्ण समर्पण के शाश्वत प्रतीक हैं.
नंदी भगवान शिव के परम गण, द्वारपाल और प्रथम भक्त हैं. इसी कारण शिवदर्शन से पूर्व श्रद्धालु नंदी के दर्शन करते हैं और अनेक स्थानों पर उनकी प्रतिमा के समीप अपनी मनोकामना निवेदित करते हैं.
नंदी की सदैव शिव की ओर एकाग्र दृष्टि हमें सिखाती है कि जीवन में लक्ष्य, श्रद्धा और साधना कभी विचलित नहीं होनी चाहिए.
उनका धैर्य, मौन और निष्ठा भारतीय आध्यात्मिक चिंतन में अनुशासन और आत्मसंयम का आदर्श प्रस्तुत करते हैं.
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शिवालयों में शिवलिंग के सम्मुख विराजमान नंदी केवल उनका वाहन नहीं, बल्कि अटूट भक्ति, सेवा और पूर्ण समर्पण के शाश्वत प्रतीक हैं.
नंदी भगवान शिव के परम गण, द्वारपाल और प्रथम भक्त हैं. इसी कारण शिवदर्शन से पूर्व श्रद्धालु नंदी के दर्शन करते हैं और अनेक स्थानों पर उनकी प्रतिमा के समीप अपनी मनोकामना निवेदित करते हैं.
नंदी की सदैव शिव की ओर एकाग्र दृष्टि हमें सिखाती है कि जीवन में लक्ष्य, श्रद्धा और साधना कभी विचलित नहीं होनी चाहिए.
उनका धैर्य, मौन और निष्ठा भारतीय आध्यात्मिक चिंतन में अनुशासन और आत्मसंयम का आदर्श प्रस्तुत करते हैं.
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The Narrative
भारत - विचार
> 9 अगस्त को विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या इसकी अंतरराष्ट्रीय अवधारणा भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में लागू होती है? पढ़िए इस विषय जनजाति विषयों के जानकार एवं दिल्ली विवि के सहायक प्राध्यापक विवेकानंद नरताम क्या कह रहे हैं!
https://tinyurl.com/5cn3amxz
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क्या विश्व मूलनिवासी दिवस भारत के सन्दर्भ में मायने रखता है ?
हर वर्ष 9 अगस्त को विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या इसकी अंतरराष्ट्रीय अवधारणा भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में लागू होती है? इसी प्रश्न की पड़ताल भारतीय परिप्रेक्ष्य में।
The Narrative
Narrative Exclusive - Positive Narrative
> After decades of Maoist violence, Bastar is emerging as a model of security-led development. Read the full story.
https://shorturl.at/GsJwu
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> After decades of Maoist violence, Bastar is emerging as a model of security-led development. Read the full story.
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From Red Corridor to Growth Corridor : Bastar’s Historic Transformation Towards Bastar 2.0
After decades of Maoist violence, Bastar is emerging as a model of security-led development under CM Vishnu Deo Sai’s roadmap for a new growth corridor.
Video Story by The Narrative
> CJP के बाद ISI Plot : संयोग या कनेक्शन?
📍जंतर मंतर में फिर आतंकी साजिश?
📍ISI का जिहादी नेटवर्क!
📍देखिये पूरी वीडियो!
YouTube Link - https://youtu.be/IgAQ26vJN-o
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> CJP के बाद ISI Plot : संयोग या कनेक्शन?
📍जंतर मंतर में फिर आतंकी साजिश?
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CJP के बाद ISI Plot : संयोग या कनेक्शन? | The Narrative
पंजाब पुलिस के अनुसार, जंतर मंतर में आतंकी हमले की योजना को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस ने 9 जिहादियों को गिरफ्तार कर ISI समर्थित मॉड्यूल का पर्दाफाश किया।
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The Narrative के…
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हिमालय का दिव्य ब्रह्मकमल
हिमालय की दुर्गम ऊँचाइयों में खिलने वाला ब्रह्मकमल केवल एक दुर्लभ पुष्प नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का अनुपम प्रतीक है. यह उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी है.
समुद्र तल से लगभग 3,000 से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर खिलने वाला यह पुष्प,
कठोर हिमालयी परिस्थितियों में भी अपनी अद्भुत सुंदरता और जीवनशक्ति का परिचय देता है. इसकी दुर्लभता इसे और भी विशिष्ट बनाती है.
केदारनाथ, बद्रीनाथ, तुंगनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे पवित्र धामों में ब्रह्मकमल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. भारतीय परंपरा में यह पुष्प पवित्रता, तप, दिव्यता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना गया है.
ब्रह्मकमल हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी कारण इसे तोड़ना या क्षति पहुँचाना प्रतिबंधित है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का अनुभव कर सकें.
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समुद्र तल से लगभग 3,000 से 4,800 मीटर की ऊँचाई पर खिलने वाला यह पुष्प,
कठोर हिमालयी परिस्थितियों में भी अपनी अद्भुत सुंदरता और जीवनशक्ति का परिचय देता है. इसकी दुर्लभता इसे और भी विशिष्ट बनाती है.
केदारनाथ, बद्रीनाथ, तुंगनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे पवित्र धामों में ब्रह्मकमल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. भारतीय परंपरा में यह पुष्प पवित्रता, तप, दिव्यता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना गया है.
ब्रह्मकमल हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी कारण इसे तोड़ना या क्षति पहुँचाना प्रतिबंधित है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का अनुभव कर सकें.
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The Narrative
भारत - विचार
> 9 अगस्त को आखिर जनजातीय समाज क्या मना रहा है? ‘आदिवासी’, ‘मूलनिवासी’ और ‘जनजाति’ की बहस के पीछे का इतिहास क्या है? क्या यह विमर्श जनजाति समाज को भटका रहा है? पढ़िए पूरा लेख।
https://tinyurl.com/4e9j3fz6
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विश्व मूलनिवासी दिवस : बेमतलब की बहस में उलझी अवधारणाएं
9 अगस्त को विश्व मूलनिवासी दिवस मनाने की अवधारणा भारत के जनजातीय समाज के लिए कितनी प्रासंगिक है? क्या ‘आदिवासी’, ‘मूलनिवासी’ और ‘जनजाति’ जैसे शब्दों की बहस ने वास्तविक विकास के प्रश्नों को पीछे छोड़ दिया है?
The Narrative Graphical Document
9 अगस्त अर्थात विश्व मूलनिवासी दिवस पर भारत में विभिन्न प्रकार के आयोजन होते हैं और इसके केंद्र में रहता है जनजाति समाज. लेकिन यह समझना आवश्यक है कि मूलनिवासी दिवस के पीछे का नैरेटिव क्या है? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष रिपोर्ट में!
> मूलनिवासी दिवस का प्रपंच
✒️ The Narrative
9 अगस्त अर्थात विश्व मूलनिवासी दिवस पर भारत में विभिन्न प्रकार के आयोजन होते हैं और इसके केंद्र में रहता है जनजाति समाज. लेकिन यह समझना आवश्यक है कि मूलनिवासी दिवस के पीछे का नैरेटिव क्या है? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष रिपोर्ट में!
> मूलनिवासी दिवस का प्रपंच
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