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सही कथन का चयन करो-
1. पदार्था में स्थित फूड पार्क विश्व का सबसे बड़ा फूड पार्क है।
2. राज्य में केवल 1 फूड पार्क है।
3. इस फूड पार्क की स्थापना वर्ष 2011 में हुई
A. 1 सही, 2 व 3 गलत
B. 2 सही, 1 व 3 गलत
C. 3 सही 1 व 2 गलत
D. उपरोक्त सभी सही
1. पदार्था में स्थित फूड पार्क विश्व का सबसे बड़ा फूड पार्क है।
2. राज्य में केवल 1 फूड पार्क है।
3. इस फूड पार्क की स्थापना वर्ष 2011 में हुई
A. 1 सही, 2 व 3 गलत
B. 2 सही, 1 व 3 गलत
C. 3 सही 1 व 2 गलत
D. उपरोक्त सभी सही
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निम्न में सही कथन कौन-सा है
1. खुशी राम आर्य को उत्तराखण्ड के अंबेडकर कहते है।
2. शिल्पकार क्रांति के जनक हरि प्रसाद टम्टा को कहते है।
3. हरि प्रसाद टम्टा ने शिल्पकार सुधारिणी सभा का गठन किया।
A. कथन 1 सही, 2 व 3 गलत
B. कथन 2 सही, 1 व 3 गलत
C. कथन 3 सही 1 व 2 गलत
D. सभी सही है।
1. खुशी राम आर्य को उत्तराखण्ड के अंबेडकर कहते है।
2. शिल्पकार क्रांति के जनक हरि प्रसाद टम्टा को कहते है।
3. हरि प्रसाद टम्टा ने शिल्पकार सुधारिणी सभा का गठन किया।
A. कथन 1 सही, 2 व 3 गलत
B. कथन 2 सही, 1 व 3 गलत
C. कथन 3 सही 1 व 2 गलत
D. सभी सही है।
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सही कथन का चयन करो-
कथन 1. 'धुली पाथा' उत्तराखण्ड में नाप - तौल की प्रणाली है।
कथन 2. इसका प्रारंभ पंवार शासक प्रताप शाह द्वारा किया गया।
A. केवल 2
B. केवल 1
C. 1 व 2 दोनों
D. ना 1 ना 2
कथन 1. 'धुली पाथा' उत्तराखण्ड में नाप - तौल की प्रणाली है।
कथन 2. इसका प्रारंभ पंवार शासक प्रताप शाह द्वारा किया गया।
A. केवल 2
B. केवल 1
C. 1 व 2 दोनों
D. ना 1 ना 2
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Group - C Test Demo
Test Series
👉 हमसे जुड़कर अपनी तैयारी को और मजबूत करें।
👉 मध्यम - ऑफ-लाइन
👉 टेस्ट बैच - सुबह 9:30 से 11:30
कॉल या व्हाट्सएप नंबर- 8006604441/8006604442
Add. D.R.K TOWER 4TH FLOOR NEAR CANARA BANK DURGA CITY CENTRE HALDWANI NAINITAL
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SUCCESS INSTITUTE HALDWANI 📚📚📖🖌
Photo
जुगल किशोर पेटशाली (7 सितंबर 1947 – 22 अगस्त 2025)
👉 उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक साहित्यकार, नाट्यकर्मी, और लोकसंस्कृति के संरक्षक थे।
👉 उनका जन्म अल्मोड़ा जिले के चितई गाँव में हुआ था।
👉 उन्होंने कुमाऊँनी और हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर लोक संस्कृति, काव्य, और नाटकों के माध्यम से।
👉 संग्रहालय का प्रकार - लोक-संस्कृति संग्रहालय (चितई, अल्मोड़ा)
स्थापना वर्ष - 2003
प्रमुख संग्रह - लगभग 30 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र (जैसे ढोल, दमाऊं, भोंकर, डोंर, बिनाई, जोंया मुरली आदि)
👉 वर्तमान स्थिति संग्रहालय बंद, सामग्री को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र को सौंपा गया, आज "जुगल किशोर पेटसाली संग्रह" के नाम से संरक्षित
जुगल किशोर पेटशाली की प्रमुख पुस्तकें -
1. राजुला मालूशाही (महाकाव्य)
2. जय बाला गोरिया
3. कुमाऊं के संस्कार गीत
4. बखत (कुमाउनी कविता संग्रह)
5. उत्तरांचल के लोक वाद्य
6. कुमाउनी लोकगीत
7. पिंगला भृतहरि (महाकाव्य)
8. कुमाऊं के लोकगाथाएं
9. गोरी प्यारो लागो तेरो झनकारो (कुमाउनी होली गीत संग्रह)
10. भ्रमर गीत, (सम्पादित).
11. कुमाऊं की लोकगाथाओं पर आधारित ‘मेरे नाटक‘,
12. ‘जी रया जागि रया‘ (कुमाउनी कविता संग्रह),
13. ‘गंगनाथ-गीतावली‘ (सम्पादित)
14. ‘विभूति योग
15. ‘हे राम‘ (काव्य संग्रह)
👉 'जी रया जागि रया' पेटशाली की कुमाउनी कविताओं का संग्रह है।
इस संकलन में पहाड़ के परिवेश से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रचनाएं शामिल हैं।
👉 इनकी ‘विभूति योग‘ पुस्तिका में श्रीमद् भागवत, गीता के दशम अध्याय का हिन्दी व कुमाउनी में भावानुवाद दिया गया है।
👉 ‘गंगनाथ-गीतावली‘ जो साठ के दशक में अल्मोड़ा के वैद्य पीताम्बर पाण्डे ने लिखी थी उसकी भूमिका लेखन और संपादन पेटशाली ने किया है।
👉 वहीं ‘हे राम‘ में उन्होनें श्री राम के चरित्र को अभिनव तरीके से सुंदर काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया है।
👉 संस्कृति व इतिहास के अध्येता डॉ. योगेश धस्माना ने जुगल किशोर पेटशाली को पर्वतीय लोक के अद्भुत चितेरे की संज्ञा प्रदान की है।
SUCCESS INSTITUTE HALDWANI
👉 उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक साहित्यकार, नाट्यकर्मी, और लोकसंस्कृति के संरक्षक थे।
👉 उनका जन्म अल्मोड़ा जिले के चितई गाँव में हुआ था।
👉 उन्होंने कुमाऊँनी और हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर लोक संस्कृति, काव्य, और नाटकों के माध्यम से।
👉 संग्रहालय का प्रकार - लोक-संस्कृति संग्रहालय (चितई, अल्मोड़ा)
स्थापना वर्ष - 2003
प्रमुख संग्रह - लगभग 30 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र (जैसे ढोल, दमाऊं, भोंकर, डोंर, बिनाई, जोंया मुरली आदि)
👉 वर्तमान स्थिति संग्रहालय बंद, सामग्री को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र को सौंपा गया, आज "जुगल किशोर पेटसाली संग्रह" के नाम से संरक्षित
जुगल किशोर पेटशाली की प्रमुख पुस्तकें -
1. राजुला मालूशाही (महाकाव्य)
2. जय बाला गोरिया
3. कुमाऊं के संस्कार गीत
4. बखत (कुमाउनी कविता संग्रह)
5. उत्तरांचल के लोक वाद्य
6. कुमाउनी लोकगीत
7. पिंगला भृतहरि (महाकाव्य)
8. कुमाऊं के लोकगाथाएं
9. गोरी प्यारो लागो तेरो झनकारो (कुमाउनी होली गीत संग्रह)
10. भ्रमर गीत, (सम्पादित).
11. कुमाऊं की लोकगाथाओं पर आधारित ‘मेरे नाटक‘,
12. ‘जी रया जागि रया‘ (कुमाउनी कविता संग्रह),
13. ‘गंगनाथ-गीतावली‘ (सम्पादित)
14. ‘विभूति योग
15. ‘हे राम‘ (काव्य संग्रह)
👉 'जी रया जागि रया' पेटशाली की कुमाउनी कविताओं का संग्रह है।
इस संकलन में पहाड़ के परिवेश से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रचनाएं शामिल हैं।
👉 इनकी ‘विभूति योग‘ पुस्तिका में श्रीमद् भागवत, गीता के दशम अध्याय का हिन्दी व कुमाउनी में भावानुवाद दिया गया है।
👉 ‘गंगनाथ-गीतावली‘ जो साठ के दशक में अल्मोड़ा के वैद्य पीताम्बर पाण्डे ने लिखी थी उसकी भूमिका लेखन और संपादन पेटशाली ने किया है।
👉 वहीं ‘हे राम‘ में उन्होनें श्री राम के चरित्र को अभिनव तरीके से सुंदर काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया है।
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Group - C
New Foundation Batch
UKSSSC का नया Foundation Batch शुरू!
👉 💐PRINT OUT ALL SUBJECTS NOTES💐
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👉 समय - सुबह 7:30 से 9:30
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