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इस चैनल में आप सभी को प्रश्न क्विज के माध्यम से दिये जायेंगे।
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New Foundation Batch


UKSSSC का नया Foundation Batch शुरू!


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👉 समय - सुबह 7:30 से 9:30

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शिवानी को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार (फिल्म कारा एक प्रथा में बेहतर अभिनय के लिए)
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UKSSSC परीक्षा कार्यक्रम (विज्ञापन व परीक्षा से सम्बंधित)
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UKSSSC TEST Batch !

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New Foundation Batch 1/सितंबर /(सोमवार) शुरू


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सातू-आठू उत्सव

परिचय

सातू-आठू उत्तराखंड (विशेषकर कुमाऊँ क्षेत्र) का लोक पर्व है।

प्रमुख विशेषताएँ

1. अनाज व व्रत से जुड़ा पर्व

इस दिन लोग सातू (भुने अनाज का आटा) का सेवन करते हैं।
महिलाएँ विशेष रूप से व्रत-उपवास करती हैं।


2. स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना

पर्व का उद्देश्य परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और अच्छी फसल की कामना करना है।


3. पूजा-पद्धति

महिलाएँ घर के आँगन या देवस्थान में पूजा करती हैं।
अनाज, विशेषकर जौ/गेहूँ का सातू अर्पित किया जाता है।

4. सामाजिक महत्व

पर्व को फसल और ऋतु परिवर्तन से भी जोड़ा जाता है।

यह लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है।

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प्रधानमंत्री जन धन योजना
कुमाऊँनी भाषा दिवस, या कुमाऊँनी भाषा दिवस, उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है। यह हर साल 1 सितंबर को उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया था। इस दिवस का उद्देश्य कुमाऊँनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है।

कुमाऊँनी भाषा का इतिहास और उत्पत्ति
कुमाऊँनी भाषा इंडो-आर्यन भाषा शाखा से ली गई है और यह संस्कृत, प्राकृत, तिब्बती, नेपाली, फारसी, अरबी और अंग्रेजी जैसी विभिन्न अन्य भाषाओं और संस्कृतियों से प्रभावित है।
इस भाषा की शब्दावली और व्याकरण विविध है जो इस क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक विविधता को दर्शाती है।
इस भाषा की एक मजबूत साहित्यिक और मौखिक परंपरा है जो कुमाऊंनी लोगों के मूल्यों, विश्वासों और रीति-रिवाजों को प्रदर्शित करती है।
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उत्तराखंड के इतिहास में काला दिन है 1 सितम्बर

👉 1994 के साल सितम्बर महीने की पहली सुबह थी। आज खटीमा में सरकार की गुंडागर्दी के विरोध में एक प्रदर्शन होना था। खटीमा में करीब दस हजार लोग एक जुलूस में शामिल थे। पूर्व सैनिक, छात्र, महिलायें और बच्चे सभी एक स्वर में नारेबाजी करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से जुलूस निकाल रहे थे। एक बार थाने के सामने से जुलूस निकालने के बाद दूसरी बार जुलूस थाने के सामने से निकल रहा था।

👉 समय 11 बजकर 17 या 18 मिनट हो चुका था। सूरज आसमान चढ़ने की कोशिश में था। पूरे जोश में नारेबाजी करते जुलूस का अगला हिस्सा तहसील तक ओर पिछला हिस्सा थाने से गुजर रहा था। अचानक जुलूस पर थाने की ओर से पत्थर बरसने लगे, अचानक हुए इस पथराव से जुलूस में शामिल लोग बिखरने लगे। इससे पहले की लोग कुछ समझ पाते गोलियों की आवाज आने लगी। सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर शुरु हुई गोलियों की भयावह आवाज 12 बजकर 48 मिनट तक आती रही। पुलिस बगैर किसी चेतावनी के रुक-रूककर गोली चलाती गयी।

👉 जुलूस में शामिल सीधे-सादे पहाड़ियों को उपद्रवी बताने के लिये पुलिस ने तहसील में लगे वकीलों के टेबल आग के हवाले कर दिये। खटीमा गोलीकांड में 8 लोग शहीद हुए और सैकड़ो घायल, पुलिस ने तहसील में खड़े ऐसे निर्दोषों पर भी गोली चला दी जो अपने काम से तहसील में आये थे। घटना के कई दिन बाद तक खटीमा हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा रहा और पुलिस जिसे मर्जी घरों से उठाती रही।

👉 घटना के 6 बरस बार हमें अपना उत्तराखंड मिला, आज जब राज्य को बने पूरे दो दशक बीत चुके हैं उस समय जैसी राज्य की स्थिति है उसकी कल्पना शायद ही किसी आन्दोलनकारी ने की हो। उत्तराखंड के इतिहास में आन्दोलन के दमन की यह घटना है।

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तीलू रौतेली पुरस्कार 2025