UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
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Business Statistics को समझना है तो, ये वीडियो आपको आपको देखनी ही होगी

ये video Statistics विषय की रीढ़ की हड्डी है साथियों

Mjpru B.com. first semester syllabus as per N.E.P. 2020: https://www.youtube.com/playlist?list=PLkOJqtgka0TKsjefNtb2VB12JBYRx4i5K

B.com. first semester previous year 2021-2022 exam papers: https://www.youtube.com/playlist?list=PLkOJqtgka0TJvP6YFAMJZ0NXUMRk1jjJ-

https://youtu.be/ruP_DRo0x1w
Business Statistics Syllabus

https://youtu.be/gKOYMK12qh0
Introduction of Statistics ( सांख्यिकी का परिचय)

https://youtu.be/_RrTgVCnxc4
What is data and it's types ( आंकड़ों और उसके प्रकार)

https://youtu.be/EEO9zJrCfPQ
Classification and tabulation of Data ( आंकड़ों का वर्गीकरण )

https://youtu.be/RqewSTXU22g
Series and it's types (श्रेणी और इसके प्रकार)

https://youtu.be/lQn0lqGcLZ4
Measures of Central Tendancy intro
( केंद्रीय प्रवृति के माप का परिचय)

https://youtu.be/T7NeFQ6ssUo
Calculation of Arithmetic mean (समांतर माध्य की गणना)

https://youtu.be/pP3zuzn_Gxo
Mean through Indirect and Step deviation method

https://youtu.be/WIhI6ubPByA
Calculation of mean in inclusive series

https://youtu.be/DQ6XclZrBrI
Calculation of Median in individual, discrete and Continuous series

https://youtu.be/e51leLooNao
Calculation of Mean , Median and mode in one single video

https://youtu.be/WslIwFcEPcU
Calculation of Quartile Deviation in a very easy way

https://youtu.be/y6dC0o39ICc
Calculation of Partion values or Quantiles

https://youtu.be/5URDM8eeQRQ
How to find missing frequency

https://youtu.be/5YBgBV7p-Vw
Calculation of mode by grouping method

https://youtu.be/dbwvyiWVY_c
Measures of Dispersion

https://youtu.be/dbwvyiWVY_c
Inter Quartile range and deviation

https://youtu.be/kqJAFsO_ON4
Mean Deviation introduction

https://youtu.be/4NOfSe9BuGY
Mean Deviation in individual series

https://youtu.be/ZNrFvf2RJUg
Calculation of Standard Deviation

https://youtu.be/lC9dUgtOdzY
Types of series Less than, more than inclusive and exclusive

https://youtu.be/NshVedk-Uro
Exam स्पेशल important Questions

https://youtu.be/UthS0_6ItgQ
Origin of business statistics

https://youtu.be/HbOFs_ifUOE
Importance of Business statistics

https://youtu.be/kVrlV9uIqlk
Functions of Statictician

https://youtu.be/68UVQnriojY
Fisher's ideal index number

https://youtu.be/0ClqTZ2l6es
Karl Pearson skewness

by Jitendra Sharma Sir

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BUSINESS STATISTICS: https://www.youtube.com/playlist?list=PLkOJqtgka0TJJSRt2AfdskaoZK3cuwI_G

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Up board commerce students apni तैयारी आज से ही शुरू करें
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Wonderful concept of Salts.
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KGS NEET:
आनुवंशिकता किसे कहते हैं? (What is Genetics)



आनुवंशिकता किसे कहते हैं?



प्रत्येक जाति के जीव दूसरे जाति के जीव से तथा एक ही जाति का एक जीव अपनी ही जाति के दूसरे जीव से भिन्न होता है। यह विभिन्न्ता किसी भी स्तर पर हो सकती है- जैसे- रूप, रंग, आकार, व्यवहार, आकारिकी, कार्यिकी। जीवों में इस विभिन्नता और एक ही जाति के जीवों तथा एक ही परिवार के सदस्यों में लक्षणों की समानता को अनेक आयामों पर समझा जा सकता है जैसे- सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणिक, भौगोलिक। परंतु समानताओं को समझने का सबसे प्रभावशाली आयाम होता है 'आनुवांशिक'। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लक्षणों की वंशागति और संतति का अपने जनक से समानता को आनुवांशिकता से आसानी से समझा जा सकता है और यही आनुवांशिकता अनेक रोगों की सूक्ष्म स्तर पर व्याख्या करता है।


आनुवंशिकी (Genetics)


जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत प्राणियों की आनुवंशिक भिन्नता, समानता, परिवर्धन, और विकास का अध्ययन किया जाता है। आनुवांशिकी (Genetics) कहलाता है।

आनुवांशिकी का महत्व लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में ही होता है, क्योंकि इन जीवों द्वारा उत्पन्न होने वाली संतति अपने माता एवं पिता दोनों के गुणों का समावेश होती है इस कारण इनमें कुछ लक्षण अपने पिता के समान कुछ लक्षण अपनी माता के समान और कुछ दोनों के सम्मिश्रित होते हैं जबकि अलैंगिक जनन करने वाला जीव आनुवांशिकी तौर पर शत प्रतिशत अपने जनक जीव के समान होता है, वातावरणीय और पोषणात्मक परिवर्तन के कारण इनकी बाह्य संरचना एवं विकास अपने जनक जीव से भिन्न हो सकती है, परंतु दोनों की आनुवांशिकी में सामान्य स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता।

आनुवांशिकी विज्ञान की एक बहुत ही बड़ी शाखा है। आनुवांशिकी को अस्तित्व में लाने का श्रेय जार्ज जॉन मेण्डल (Gregor Johann Mendel) को जाता है, इसलिए इन्हे आनुवांशिकी का जनक (Father of Genetics) कहा जाता है।

प्रारंभ में मेण्डल के सिद्धान्तों को महत्व नहीं दिया गया जिसका एक प्रमुख कारण था कि उनकी धारणाएँ बहुत अधिक गणितीय गणनाओं पर आधारित थीं। परंतु बाद में मेण्डल एवं उनके खोज को स्वीकार कर लिया गया।

मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मीठी मटर (Garden pea) (Pisum sativum) का चयन किया।


इस पौधे के चयन के पीछे निम्न कारण थे-

मटर के पौधे का जीवन चक्र छोटा होता है जिसके कारण इसकी संततियाँ तुलनात्मक रूप से कम समयान्तराल में उपलब्ध हो जाती थीं।मटर के विभिन्न पौधों के बाह्य संरचना में पर्याप्त अंतर होता है, जिससे इनका अध्ययन आसान था।इनके फूलों के विशिष्ट आकार के कारण इनका अपनी इच्छानुसार परागण करवाना आसान था।मटर के पौधे उनके प्रयोग क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध थे।

अपने प्रयोग के लिए मेण्डल ने मटर के पौधों के सभी गुणों को नहीं लिया बल्कि उसने कुल सात गुणों का चयन किया और इन्हीं सात गुणों के आधार पर अपना प्रयोग किया। उन्होंने मटर के बाह्य स्वरूप में आसानी से परिलक्षित होने वाले गुण लिये- जैसे- मटर के पौधे की लंबाई (लंबा या बौना), फूलों का रंग (नीला या सफेद), बीजों का आकार (गोल या झुरींदार), पौधे पर फल लगने का स्थान (अक्ष पर या शीर्ष पर) आदि।

मेण्डल ने एक लंबा पौधा एवं एक छोटा पौधा लिया और इन दोनों में cross कराया। प्राप्त संतति जिसे उसने F1 genration कहा में उसे सभी पौधे लंबे मिले। उसने फिर प्राप्त संतति का self cross कराया (स्वयं से निषेचन) जिससे प्राप्त संततियों को उसने F2 नाम दिया। इसमें से एक एक बौना पौधा भी प्राप्त हुआ। इस प्रयोग को निम्न रेखाचित्र द्वारा समझाया जा सकता है।






इस प्रकार मेण्डल को बाह्य लक्षणों के आधार पर तो F1 generation में कोई परिणाम नहीं मिला, पर F2 generation में उसे एक बौना पौधा मिला, जिससे ये स्पष्ट हो गया कि लैंगिक जनन में संतति पौधा अपने दोनों जनक पौधों से गुण ग्रहण करता है।

इस परिणाम के आधार पर मेण्डल ने अपना पहला नियम दिया-


(1) प्रभाविकता का नियम (Law of Dominance)


प्रभाविकता का नियम कहता है कि यदि किसी लक्षण के युगल जीन एक साथ एक ही जीव में उपस्थित हों तो उनमें से केवल एक ही प्रौढ़ जीव में दृष्टिगोचर होता है। यह लक्षण प्रभावी लक्षण (Dominant Character) कहलाता है तथा दूसरा लक्षण जो स्वयं को व्यक्त नहीं कर पाता उसे अप्रभावी लक्षण (Recessive character) कहते हैं।


(2) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)


यह नियम कहता है, कि प्रत्येक पादप मे किसी गुण के लिए दो जोड़ी जीन होते हैं, जिनमें से संतति पादप मात्र एक जीन प्राप्त करता है और दूसरा गुणसूत्र यह अपने दूसरे जनक से प्राप्त करता है, इस प्रकार किसी गुण के लिए उसके पास भी एक जोड़ी जीन हो जाते हैं।


इसके पश्चात मेण्डल ने अपने प्रयोग को वृहद् किया और उसने दो गुण एक साथ लिये। उसने पौधे की लंबाई और बीज के

✅ मस्तिष्क के कार्य
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➖ संवेदी प्रसंस्करण: मस्तिष्क पांच इंद्रियों (दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, स्वाद और गंध) से संवेदी जानकारी प्राप्त करता है और संसाधित करता है।

➖ गति नियंत्रण: मस्तिष्क स्वैच्छिक और अनैच्छिक गति का समन्वय और नियंत्रण करता है।

➖ भावना विनियमन: मस्तिष्क भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और अनुभवों को नियंत्रित करता है।

➖ सीखना और स्मृति: मस्तिष्क एन्कोडिंग, भंडारण और यादों को पुनः प्राप्त करने के लिए जिम्मेदार है।

➖ सोच और तर्क: मस्तिष्क जटिल मानसिक प्रक्रियाओं जैसे समस्या-समाधान, निर्णय लेने और अमूर्त सोच के लिए जिम्मेदार है।

➖ भाषा प्रसंस्करण: मस्तिष्क भाषा को संसाधित करता है और भाषण और संचार की अनुमति देता है।

➖ होमोस्टैसिस: मस्तिष्क एक स्थिर आंतरिक वातावरण बनाए रखने के लिए विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं, जैसे भूख, प्यास और तापमान नियंत्रण को नियंत्रित करता है।

➖ एंजियोस्पर्म
एंजियोस्पर्म शब्द ग्रीक से लिया गया है, जो "कंटेनर" में अनुवाद करता है। जैसा कि नाम से पता चलता है, एंजियोस्पर्म संवहनी पौधे हैं जो फल या परिपक्व अंडाशय में बीज धारण करते हैं। एंजियोस्पर्म फूल बनाता है जो प्रजनन अंगों और फलों को वहन करता है। ये पौधे स्थलीय आवास के लिए अधिक अनुकूल हैं और इनका वितरण बहुत व्यापक है, आज तक लगभग 250000 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।

➖ एंजियोस्पर्म उदाहरण
आम, सेब, केला, आड़ू, चेरी, संतरा, और नाशपाती सहित फलों के पेड़ अक्सर फल देने से पहले फूल दिखाते हैं, और परागण प्रक्रिया आम तौर पर मधुमक्खियों जैसे एजेंटों द्वारा की जाती है।
चावल, मक्का और गेहूं सहित अनाज भी एंजियोस्पर्म के उदाहरण हैं। इन पौधों में परागण की प्रक्रिया हवा द्वारा की जाती है। एंजियोस्पर्म के अन्य उदाहरणों में गुलाब, लिली, ब्रोकोली, केल, पेटुनिया, बैंगन, टमाटर, मिर्च और गन्ना शामिल हैं।


➖ जिम्नोस्पर्म
जिम्नोस्पर्म अन्य प्रकार के पौधे हैं जो बीजों को बिना कवर किए स्पोरोफिल पर सीधे धारण करते हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, जिम्नोस्पर्म किंगडम प्लांटी के संवहनी पौधे हैं, जो नग्न बीज धारण करते हैं। जिम्नोस्पर्म की बहुत कम प्रजातियाँ हैं; इन पौधों के कुछ उदाहरण सरू, गनेटम, पाइन, स्प्रूस, रेडवुड, जिन्कगो, साइकैड्स, जुनिपर, फ़िर और वेल्विश्चिया हैं।

प्रजातियाँ बहुत कम होने का मुख्य कारण बीजों के संरक्षण का अभाव है। छोड़े जाने पर बीज नंगे और असुरक्षित होते हैं। उन्हें जड़ जमाने के लिए जल्दी से जमीन में उतरने की जरूरत है, या वे जानवरों, मौसम की स्थिति या किसी अन्य कारक से क्षतिग्रस्त हो जाएंगे।

✅एंजाइम अवरोधक और प्रकार लघु नोट्स

🔹एंजाइम अवरोधक क्या है?
एंजाइम अवरोधक सब्सट्रेट पर एंजाइम की दर को कम करते हैं
यह प्रभाव स्थायी या अस्थायी हो सकता है
एंजाइम निषेध के प्रकार
1. प्रतिस्पर्धी निषेध
2. गैर-प्रतिस्पर्धी निषेध
3. एलोस्टेरिक निषेध

I) प्रतिस्पर्धी निषेध
अवरोधक एंजाइम की सक्रिय साइट से बंधते हैं और सब्सट्रेट के ब्लॉक बाइंडिंग
अवरोधकों का आकार सब्सट्रेट अणु के समान होता है
प्रतिस्पर्धात्मक निषेध आमतौर पर अस्थायी होता है
निषेध का स्तर सब्सट्रेट के सापेक्ष सांद्रता पर निर्भर करता है

II) गैर-प्रतिस्पर्धी निषेध
अवरोधक सब्सट्रेट को सक्रिय साइट पर बाध्य करने से नहीं रोकता है
सक्रिय साइट के अलावा किसी अन्य साइट के लिए अवरोधक बाध्यकारी
अवरोधक के बंधन से एंजाइम की सक्रिय साइट में एक रूपात्मक परिवर्तन होता है
➖ इस परिवर्तन के परिणामस्वरूप, सक्रिय साइट और सब्सट्रेट अब विशिष्टता साझा नहीं करते हैं, जिसका अर्थ है कि सब्सट्रेट बाध्य नहीं हो सकता
चूंकि अवरोधक सब्सट्रेट के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा में नहीं है, सब्सट्रेट के स्तर में वृद्धि अवरोधक के प्रभाव को कम नहीं कर सकती है


III) एलोस्टेरिक निषेध
एलोस्टेरिक का अर्थ है अन्य साइट
इन एंजाइमों में दो ग्राही स्थल होते हैं
एक साइट अन्य एंजाइमों की तरह सब्सट्रेट में फिट बैठती है
दूसरी साइट एक अवरोधक फिट बैठती है
प्रतिक्रिया के अंतिम उत्पाद का संचय प्रतिक्रिया के चरण को बाधित करने में सक्षम है

गाउस का नियम  (Gauss’s Theorem)

इस नियमानुसार, किसी काल्पनिक बंद सतह (Imaginary Closed Surface) में कुल विद्युत फ्लक्स (Electric Flux) की मात्रा उस बंद सतह में स्थित सभी आवेशों (Charge) के बीज गणितीय योग के बराबर होती है।

किसी बिंदु आवेश q के परित: सतह के अनुदेश विद्युत क्षेत्र (Electric Field) E के लंबवत घटक (Normal Component) का सरफेस समाकलन

(Surface Integral) निम्न होता है –

∮ E.dS = q/ε0

इस सूत्र से यह ज्ञात होता है कि, सतह से उत्पन्न विद्युत क्षेत्र (Electric Field) के फ्लक्स का नेट मान (NET Value) q/ε0 होता है जहां q सतह के अंदर बंद आवेश है।
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